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 अमेरिकी लोगों से झूठ बोला जा रहा', ईरान युद्ध पर US का 25 अरब डॉलर हुआ खर्च; ट्रंप के मंत्री पर भड़के डेमोक्रेट्स

अमेरिकी लोगों से झूठ बोला जा रहा', ईरान युद्ध पर US का 25 अरब डॉलर हुआ खर्च; ट्रंप के मंत्री पर भड़के डेमोक्रेट्स

अमेरिकी लोगों से झूठ बोला जा रहा', ईरान युद्ध पर US का 25 अरब डॉलर हुआ खर्च; ट्रंप के मंत्री पर भड़के डेमोक्रेट्स


अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ईरान युद्ध पर कांग्रेस में कड़े सवालों का सामना करना पड़ा, जहां डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा बिना मंजू ...और पढ़ें








अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ईरान युद्ध को लेकर कांग्रेस में कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। ट्रंप सरकार द्वारा बिना कांग्रेस की मंजूरी के शुरू किए गए इस युद्ध पर डेमोक्रेट सांसदों ने तीखी आलोचना की।


पेंटागन के मुताबिक, इस युद्ध पर अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। इसी दौरान 2027 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव भी रखा गया। सुनवाई के दौरान डेमोक्रेट नेताओं ने युद्ध की बढ़ती लागत, हथियारों की कमी और एक स्कूल पर बमबारी में बच्चों की मौत जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए।


डेमोक्रेट्स का हमला

डेमोक्रेट सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार ने युद्ध के कारणों को लेकर जनता को गुमराह किया है। कैलिफोर्निया के सांसद जॉन गरामेंडी ने इसे बड़ी रणनीतिक गलती बताया। इस पर पीट हेगसेथ ने जवाब देते हुए कहा कि आलोचना राजनीतिक है और विपक्ष के बयान देश के लिए नुकसानदायक हैं। सुनवाई के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा और यह बैठक करीब छह घंटे तक चली।

एक सवाल के जवाब में हेगसेथ ने कहा कि 2025 में अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह कर दिए गए थे, लेकिन ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा नहीं छोड़ी है। इस पर सांसद एडम स्मिथ ने सवाल उठाया कि अगर ठिकाने नष्ट हो गए थे, तो फिर युद्ध की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि इस युद्ध से स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।
तेल संकट और बढ़ती कीमतें

ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने से तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे अमेरिका में भी असर पड़ा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी कर दी है और मध्य पूर्व में तीन विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। डेमोक्रेट्स ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतें आम लोगों की जेब पर असर डाल रही हैं।


सुनवाई में सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाने के फैसले पर भी सवाल उठे। पीट हेगसेथ ने कहा कि ये बदलाव नई नेतृत्व व्यवस्था और 'वॉरियर कल्चर' के लिए जरूरी हैं। कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी इन फैसलों पर चिंता जताई, जबकि कुछ ने उनका समर्थन किया।
युद्ध पर अब भी टकराव जारी

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के बदले प्रतिबंध हटाने की बात कही गई थी।
 अब तक 21 को फांसी और 4000 से ज्यादा गिरफ्तार... अमेरिका से युद्ध के बाद ईरान में बदतर हालात, UN ने जताई चिंता

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बाद ईरान में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने ...और पढ़ें





 संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में हालात और सख्त हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान कम से कम 21 लोगों को फांसी दी गई है और 4000 से ज्यादा लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है।


तुर्क के अनुसार, इनमें से 9 लोगों को जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में, 10 लोगों को विपक्षी संगठनों से संबंध के आरोप में और 2 लोगों को जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी गई। उन्होंने कहा कि युद्ध के असर के बीच ईरान में लोगों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।

UN ने जताई चिंता

वोल्कर तुर्क ने ईरानी सरकार से सभी फांसी पर रोक लगाने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बिना ठोस आधार के हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। तुर्क ने आरोप लगाया कि कई गिरफ्तार लोगों के साथ जबरन गायब करना, यातना देना और जबरन कबूलनामे करवाने जैसे मामले सामने आए हैं।

जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई थी, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा आंदोलन माना गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि युद्ध के दौरान भी सरकार ने विरोधियों पर कार्रवाई जारी रखी है। वहीं, ईरान ने पहले इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक बताया था।
अल्पसंख्यकों पर ज्यादा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। कई कैदियों को अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है, जिनमें मानवाधिकार वकील नसरीन सोतूदेह भी शामिल हैं। इसके अलावा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की तबीयत भी खराब बताई जा रही है।
जेलों में हिंसा के आरोप

तुर्क ने बताया कि चाबहार जेल में विरोध के दौरान सुरक्षा बलों ने कम से कम 5 लोगों को मार दिया और 21 को घायल कर दिया। एक अन्य जेल में दो कैदियों की हिरासत में मौत हो गई, जिनके साथ यातना के संकेत मिले हैं।
 अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 चोरी की गई प्राचीन वस्तुएं, कीमत 14 मिलियन डॉलर

अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 चोरी की गई प्राचीन वस्तुएं, कीमत 14 मिलियन डॉलर

 अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 चोरी की गई प्राचीन वस्तुएं, कीमत 14 मिलियन डॉलर


अमेरिका ने भारत को 14 मिलियन डॉलर मूल्य की 657 तस्करी की गई प्राचीन कलाकृतियां लौटाईं, जो सुभाष कपूर और नैन्सी वीनर के नेटवर्क से बरामद हुई थी। ...और पढ़ें




अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक समारोह में भारत से तस्करी किए गए कुल 657 पुरानी कलाकृतियों को वापस कर दिया गया। इनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 14 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।

मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस की ओर से इसे लौटाया गया। ये कलाकृतियां पुरानी चीजों के तस्कर सुभाष कपूर और दोषी तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की चल रही जांच के दौरान बरामद की गई थी।

वहीं, मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में, डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन एल ब्रैग जूनियर ने कहा कि, इन चीजों की वापसी से उन तस्करी नेटवर्क के विशाल पैमाने का पता चलता है, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाया था। उन्होंने आगे कहा कि चोरी की गई कलाकृतियों को बरामद करने और उन्हें वापस लाने के प्रयास जारी रहेंगे।
सबसे कीमती मूर्ति 2 मिलियन डॉलर की

लौटाई गई सबसे महत्वपूर्ण कलाकृतियों में से एक अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा है, जिसकी कीमत $2 मिलियन डॉलर है। यह मूर्ति, जो एक शेर-युक्त सिंहासन के ऊपर दोहरे-कमल के आधार पर बैठी है, पर एक शिलालेख है जो इसके शिल्पकार की पहचान छत्तीसगढ़ के वर्तमान रायपुर के पास स्थित सिपुर के द्रोणादित्य के रूप में करता है।
यह 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास खोजे गए खजाने का हिस्सा थी और बाद में 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में पहुंची। इसके बाद इसे चुरा लिया गया और 1982 तक अमेरिका में तस्करी करके पहुंचा दिया गया, जहां 2014 तक यह न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में पहुंच गई।

2025 में इन कलाकृतियां को जब्त किया गया था

मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस ने 2025 में इस कलाकृति को जब्त कर लिया। एक और महत्वपूर्ण वस्तु लाल बलुआ पत्थर से बनी बुद्ध की प्रतिमा है, जिसकी कीमत $7.5 मिलियन है। इस प्रतिमा में बुद्ध को अपना दाहिना हाथ अभय मुद्रा, या सुरक्षा के हावभाव में ऊपर उठाए हुए दिखाया गया है; इस प्रतिमा को थोड़ा नुकसान भी पहुंचा है।


जांचकर्ताओं ने पाया कि, इस कलाकृति की तस्करी सुभाष कपूर द्वारा न्यूयॉर्क में की गई थी और बाद में एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट द्वारा उनके एक भंडारण केंद्र से इसे जब्त कर लिया गया था। इसके अलावा, नाचते हुए गणेश की बलुआ पत्थर की एक मूर्ति भी लौटाई गई, जिसे 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से कपूर के सहयोगी रंजीत शांतू कंवर ने लूटा था।
15 साल बाद मिला मेहनत का फल

दोषी तस्कर वामन घिया ने बाद में इस मूर्ति को बेच दिया और न्यूयॉर्क की गैलरी मालिक डोरिस वीनर को भेज दिया। डोरिस वीनर की मृत्यु के बाद, उनकी बेटी नैन्सी वीनर ने कथित तौर पर 2012 में मालिकाना हक के झूठे दस्तावेज तैयार किए और न्यूयॉर्क के नीलामी घर क्रिस्टीज के माध्यम से गणेश की इस मूर्ति को बेच दिया। एक निजी संग्रहकर्ता, जिसने यह मूर्ति खरीदी थी, उन्होंने इस साल की शुरुआत में इसे लौटा दिया।


इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक एस. विजय कुमार ने कहा, “यह हमारे लिए सचमुच गर्व का क्षण है, क्योंकि हम अपने काम के नतीजे देख रहे हैं। जिस पर हमने डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय तक काम किया है, और अब वह रंग ला रहा है।”


उन्होंने आगे कहा, “भारत को HSI (होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स) का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिन्होंने इन लूटी गई कलाकृतियों का पता लगाने और उन्हें भारत को वापस दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

यह 15 साल की मेहनत का नतीजा है, जिसमें हमने भारतीय कला की तस्करी के बाजार को समझा और उसे खत्म किया। इस बाजार ने हमारे देवी-देवताओं की मूर्तियों को चुराया और सुभाष कपूर और वीनर्स जैसे डीलरों के ज़रिए उन्हें पश्चिमी देशों में पहुंचाया।


एक दशक से भी ज्यादा समय से, मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स, कपूर और उसके साथियों का पीछा कर रही हैं; इन पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से कलाकृतियों को लूटने और उनकी तस्करी करने का आरोप है।
1000 से अधिक कलाकृतियां अब भी गायब

कपूर के खिलाफ 2012 में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, और 2019 में न्यूयॉर्क में उस पर और उसके सात अन्य साथियों पर आरोप तय किए गए। कपूर, जिसे 2022 में भारत में तस्करी के अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, फिलहाल अमेरिका से प्रत्यर्पित किए जाने का इंतजार किया जा रहा है। सुभाष कपूर से जुड़े मामले तमिलनाडु में चल रहे हैं और ये पांच मामलों से संबंधित हैं, जिनमें 32 मूर्तियां शामिल हैं।


उसके पांच साथियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। एंटीक्विटीज़ ट्रैफिकिंग यूनिट ने अब तक 6,200 से ज्यादा सांस्कृतिक वस्तुएं बरामद की हैं, जिनकी कीमत 485 मिलियन डॉलर से ज्यादा है; साथ ही, उसने 5,900 से ज्यादा वस्तुएं 36 देशों को वापस लौटाई हैं। इसने सांस्कृतिक संपत्ति से जुड़े अपराधों में 18 लोगों को दोषी भी ठहराया है, जबकि सात अन्य लोगों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अभी चल रही है।


विजय कुमार ने आगे कहा, “अभी 1,000 से ज्यादा कलाकृतियां वापस लाई जानी बाकी हैं; हमें उम्मीद है कि भारत और HSI मिलकर इस दिशा में काम करेंगे, और साथ ही कपूर तथा वीनर से जुड़ी उन फाइलों (dossiers) को भी खंगालते रहेंगे, जिनमें लगभग 50 साल की लूट का ब्योरा दर्ज है।”
 दुश्मन को आ सकता है हार्ट अटैक', ईरान ने ट्रंप को दी खुली चुनौती; शांति प्रस्ताव ठुकराने पर फूटा गुस्सा

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 दुश्मन को आ सकता है हार्ट अटैक', ईरान ने ट्रंप को दी खुली चुनौती; शांति प्रस्ताव ठुकराने पर फूटा गुस्सा


ईरान ने अमेरिका और इजरायल को एक नए, 'हार्ट अटैक' देने वाले हथियार से युद्ध की धमकी दी है। ...और पढ़ें






 ईरान ने युद्ध में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक नए हथियार का इस्तेमाल करने की धमकी दी है। जानकारी के अनुसार, ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने एक न्यूज चैनल से कहा, "इस्लामिक गणराज्य बहुत जल्द दुश्मन की सेनाओं का सामना एक ऐसे हथियार से करेगा, जिससे वे बहुत ज्यादा डरते हैं।


वह हथियार उनके बिल्कुल बगल में ही है और मुझे उम्मीद है कि इससे उन्हें हार्ट अटैक नहीं आएगा।" उन्होंने आगे कहा, क्योंकि यह एक ऐसा हथियार है जिससे हार्ट अटैक भी आ सकता है। यह चेतावनी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकाबंदी हटाने की बात कही गई थी। हालांकि, यह एक ऐसी योजना थी जिससे तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली बातचीत भी टल जाती।
अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन पर हमले का दावा

उन्होंने ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति का भी मजाक उड़ाया। जिसमें होर्मुज के रास्ते ईरानी तेल व्यापार को रोककर आर्थिक दबाव के ज़रिए तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि दुश्मनों ने गलतफहमी पाल ली है कि, ईरान से अपनी मनचाही बात बहुत आसानी से मनवा लेंगे। जबकि उनकी यही सोच अब एक मजाक बनकर रह गई है।"

ईरान ने यह भी दावा किया कि उनकी सेनाओं ने अमेरिकी विमानवाहक पोत 'अब्राहम लिंकन' के खिलाफ कम से कम सात मिसाइल हमले किए हैं। उनके अनुसार, इन हमलों की वजह से अमेरिका कुछ समय के लिए उस विमानवाहक पोत से विमान उड़ाने या हवाई अभियान चलाने में असमर्थ हो गया था।
युद्ध में ईरान ने 100 सफल हमलों की कही बात

ईरानी नौसेना के कमांडर ने कहा कि, मध्य-पूर्व में संवेदनशील अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई में कम से कम 100 सफल हमले किए हैं। कमांडर के अनुसार, ईरान ने अरब सागर की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। अगर वे और करीब आए, तो हम बिना किसी देरी के जवाबी कार्रवाई करेंगे।


उन्होंने आगे कहा, नाकाबंदी के बावजूद, कुछ जहाज हमारे बंदरगाहों से रवाना हो चुके हैं, और कुछ अपनी मंजिल तक पहुंच भी गए हैं। उन्होंने अमेरिकी सेना की भी कड़ी आलोचना की, जिसे उन्होंने नाकाबंदी के हिस्से के तौर पर कुछ ईरानी जहाजों पर अवैध कब्जा बताया; उन्होंने इसे न सिर्फ समुद्री डकैती, बल्कि बंधक बनाना भी कहा।
अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव को ठुकराया

ट्रंप ने एक्सियोस को बताया है कि, वे ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं, जिसमें अमेरिकी नाकाबंदी हटाने के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही गई थी। यह एक ऐसी योजना थी, जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली चर्चा टल जाती।


इस हफ्ते अमेरिकी नेताओं के साथ साझा किए गए ईरान के इस प्रस्ताव में, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चर्चाओं को टालने की मांग की गई थी। ऐसा करने से वे मतभेद अनसुलझे ही रह जाते, जिनकी वजह से 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध छिड़ गया था।
 होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! ट्रंप ने शेयर किया नया नक्शा, छिड़ा विवाद

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का नाम बदलकर 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कर दिया, जिससे अमेरिका-ईरान विवाद और गहरा गया है। ...और पढ़ें






अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' के नाम से नया नक्शा साझा किया।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे ईरान अमेरिका युद्ध के बीच गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की एक तस्वीर शेयर की। इसमें, उन्होंने एक छोटा लेकिन बहुत ही असरदार बदलाव किया था। उन्होंने, इस तस्वीर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर स्ट्रेट ऑफ ट्रंप (Strait Of Trump) कर दिया है।
परमाणु हथियार भूल जाओ : ट्रंप

इसके साथ ही ट्रंप ने बुधवार को ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को शानदार रणनीति बताते हुए कहा कि, तेहरान को हार माननी ही पड़ेगी। जब तक कि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ देता, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता है। मालूम हो कि, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर इस समुद्री रास्ते को और भी खतरनाक बना दिया है।

हमारी सेनी सबसे शक्तिशाली, जारी रहेगी नाकाबंदी

ट्रंप ने आगे कहा कि, "नाकाबंदी से उनको पता चला कि हमारी नौसेना कितनी शक्तिशाली है। मैं आपको बता सकता हूं, कोई भी हमारे साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता है। हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, जिसका अधिकांश हिस्सा, मैंने अपने पहले कार्यकाल में बनाया और तब से हम इसे लगातार विकसित कर रहे हैं। यह दुनिया में कहीं भी सबसे शक्तिशाली है, कोई भी इसके आसपास भी नहीं है।"

कई रिपोर्टों में कहा गया है कि, नाकाबंदी से ईरान को भारी दिक्कत होने लगी है। वहीं, Axios की रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, यूएस के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बातचीत पर बने गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'छोटे लेकिन ताकतवर' हमले की एक योजना तैयार की है।


CENTCOM अपने हमलों में ईरान की बुनियादी संरचनाओं को निशाना बना सकता है। इन हमलों का मकसद बातचीत शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव बनाना है। ट्रंप का कहना है कि 'ब्लॉकेड, बॉम्बिंग से ज्यादा कारगर है और वह काइनेटिक एक्शन की मंजूरी दे सकते हैं। बता दें कि, इस घेराबंदी की वजह से ईरान के जहाजों का आवागमन नहीं हो पा रहा है।
 अमेरिका ने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर पर लगाए नए प्रतिबंध, 35 व्यक्तियों और संस्थाओं पर रोक

अमेरिका ने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर पर लगाए नए प्रतिबंध, 35 व्यक्तियों और संस्थाओं पर रोक

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अमेरिकी सरकार ने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर में प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के लिए 35 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ...और पढ़ें





 अमेरिकी सरकार ने मंगलवार को तेहरान पर दबाव बढ़ा दिया। उसने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर में भूमिका निभाने के लिए 35 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए।

साथ ही, उन बैंकों के खिलाफ भी प्रतिबंध की धमकी दी जो चीनी 'टीपाट' रिफाइनरियों के साथ कारोबार करते हैं। सरकार का कहना है कि ये रिफाइनरियां होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट गुजारने के लिए शुल्क चुकाती हैं। चीन ने कहा है कि वह अवैध एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है।
35 व्यक्तियों और संस्थाओं पर रोक

ट्रेजरी विभाग के ऑफिस आफ फारेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने बताया कि इन नामित व्यक्तियों और फर्मों ने प्रतिबंधों से बचने और अरबों डालर के बराबर की धनराशि के लेन-देन में मदद की थी।

साथ ही ओएफएसी ने चेतावनी दी कि वे ऐसी किसी भी फर्म के साथ कारोबार न करें जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरानी सरकार या 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' को भुगतान करती हो। ऐसा करने पर उन बैंकों को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

विभाग ने विशेष रूप से चीनी 'टीपाट' रिफाइनरियों को निशाने पर लिया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि वे ईरानी तेल के आयात और रिफाइ¨नग में अहम भूमिका निभाती हैं।

चीनी 'टीपाट' रिफाइनरियां छोटी, स्वतंत्र और निजी स्वामित्व वाली तेल रिफाइनरियां हैं, जो मुख्य रूप से शैंडोंग प्रांत में स्थित हैं और चीन की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक-चौथाई हिस्सा हैं। इनमें से कुछ रिफाइनरियों ने अमेरिकी वित्तीय प्रणाली का उपयोग करके डालर-आधारित लेन-देन किए थे और अमेरिकी सामान खरीदे थे।
 ईरान के प्रस्ताव से नाराज हुए ट्रंप, परमाणु मुद्दे पर अटकी अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता, कब खुलेगा होर्मुज?

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अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता परमाणु मुद्दे पर अटक गई है। ट्रंप ने ईरान के होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है ...और पढ़ें





अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की होने वाली शांति वार्ता परमाणु मुद्दे पर अटक गई है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को जो नया प्रस्ताव भेजा है, उस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नाखुशी जताई है और कहा है कि ईरान पतन के कगार पर है।


नए प्रस्ताव में अमेरिकी नाकेबंदी हटाने, युद्ध खत्म करने और परमाणु मुद्दे पर अलग से वार्ता की बात कही गई है। जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी साफ कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार पाने से रोकना मुख्य मुद्दा है। भावी समझौते में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाना चाहिए।


ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर की चर्चा

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, सोमवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने अपने सुरक्षा सलाहकारों के साथ ईरान के नए प्रस्ताव पर विचार विमर्श किया। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने सलाहकारों से कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान के नए प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं।



वार्ताओं के बारे में जानकारी रखने वाले अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव में अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी खत्म करने की बात है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सवालों को टाल दिया गया है। ईरान लंबे समय से अमेरिका के उन प्रस्तावों को ठुकराता आ रहा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और संवर्धित यूरेनियम सौंपे जाने की मांग है।


हालांकि यह साफ नहीं है कि ट्रंप प्रस्ताव से क्यों संतुष्ट नहीं है, लेकिन उन्होंने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि प्रस्ताव को स्वीकार करने से ऐसा प्रतीत हो सकता है कि ट्रंप को जीत से वंचित किया जा रहा है।
ईरान ने होर्मुज खोलने की अमेरिका से की गुजारिश

रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान पतन के कगार पर है। उन्होंने अमेरिका से होर्मुज स्ट्रेट को खोलने में मदद करने का अनुरोध किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'ईरान ने अभी-अभी हमें सूचित किया है कि वे पतन के कगार पर हैं। वे चाहते हैं कि हम जल्द से जल्द होर्मुज स्ट्रेट को खोल दें, क्योंकि वे अपनी नेतृत्व स्थिति का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं, जिसके बारे में मेरा मानना है कि वे ऐसा करने में समक्ष होंगे।'


इससे पहले सोमवार को व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने कहा कि अमेरिका अपनी सीमाओं को लेकर स्पष्ट है। वह उस युद्ध को समाप्त करने की कोशिश कर रहा है, जिसे उसने फरवरी में इजरायल के साथ मिलकर शुरू किया था।


एपी के अनुसार, अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने कहा कि ईरान का होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने संबंधी प्रस्ताव स्वीकार नहीं है। उन्होंने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जो भी समझौता हो, वह उन्हें किसी भी समय परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने से पूरी तरह रोके।'


होर्मुज स्ट्रेट 28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद से तकरीबन बंद है। वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है।
वार्ता पर अनिश्चितता के बीच रूस पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री

अमेरिका के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस पहुंचे हैं। उन्होंने मंगलवार को कहा कि क्षेत्र में भारी अस्थिरता के बावजूद रूस और ईरान के बीच सहयोग बढ़ रहा है।


अराघची ने कहा, 'हमारे संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे में हम एकजुटता के लिए आभारी हैं और कूटनीति में रूस के समर्थन का स्वागत करते हैं।' उनका यह बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद आया है।
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चरम पर अफगान-पाकिस्तान तनाव: तालिबान ने PAK पर लगाया आम नागरिकों पर हमले का आरोप, 4 की मौत; 70 घायल

 चरम पर अफगान-पाकिस्तान तनाव: तालिबान ने PAK पर लगाया आम नागरिकों पर हमले का आरोप, 4 की मौत; 70 घायल




अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर पूर्वी इलाकों में नागरिक क्षेत्रों पर गोलाबारी का आरोप लगाया है, जिसमें 4 लोगों की मौत और 70 घायल हुए हैं। यह घटना दोनों द ...और पढ़ें





अफगानिस्तान ने सोमवार को पड़ोसी देश पाकिस्तान पर पूर्वी इलाके में नागरिक क्षेत्रों पर गोलाबारी करने का आरोप लगाया है। अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और करीब 70 लोग घायल हो गए।


संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन ने भी पुष्टि की है कि पूर्वी शहर असदाबाद में एक यूनिवर्सिटी पर हमला हुआ है, हालांकि उसने यूनिवर्सिटी का नाम या हमले के जिम्मेदार का जिक्र नहीं किया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि फरवरी के अंत से पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कम से कम नौ प्रांतों में कई जगहों पर हमले किए हैं।
छात्रों सहित कई लोग घायल

तालिबान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत के मुताबिक, सोमवार की गोलाबारी में घायल होने वालों में 30 छात्र भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सभी पीड़ित आम नागरिक हैं।

वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान सरकार ने कहा कि यूनिवर्सिटी पर हमला करने का आरोप पूरी तरह झूठ है। पाकिस्तानी सेना ने इस बारे में किसी भी सवाल का जवाब देने से भी इनकार कर दिया।

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दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव

पाकिस्तान ने तालिबान सरकार पर तहरीक-ए-तालिबान नामक आतंकी संगठन को शरण देने का आरोप लगाया है, जिसने पिछले वर्षों में पाकिस्तान में कई हमले किए हैं। हालांकि, तालिबान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन कई पड़ोसी देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन इस बात से सहमत हैं कि ऐसे समूह मौजूद हैं।


असदाबाद स्थित कुनार यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बताया कि अचानक हुए धमाकों से क्लासरूम और हॉस्टल में अफरा-तफरी मच गई। छात्र अहमद सुहैल रहमानी ने कहा कि यूनिवर्सिटी उम्मीद और भविष्य की जगह है, लेकिन अब लोग वहां से भागने की कोशिश कर रहे हैं।


वहीं छात्र साजिद इकबाल साफी ने बताया कि किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलों के डर से कई लोगों ने रात खेतों में बिताई और अब कोई अपने घर लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है।
और गहराया मानवीय संकट

फरवरी से जारी इस संघर्ष के बीच पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में कई सैन्य ठिकानों के साथ-साथ व्यवसाय, मस्जिदों और स्कूलों को भी निशाना बनाया है, जिससे सैकड़ों नागरिकों की मौत हुई है। 16 मार्च को काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए हमले में करीब 240 मरीजों की मौत हो गई थी, जैसा कि संयुक्त राष्ट्र ने बताया।


अफगानिस्तान पहले से ही गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा है। अमेरिका की मदद में कटौती और करीब 30 लाख अफगान नागरिकों की वापसी के कारण हालात और खराब हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस साल देश की करीब आधी आबादी यानी लगभग 2.2 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ेगी।
 अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में अब साथ रख सकेंगे सिर्फ 2 पावर बैंक, सीट पॉकेट में ही रखने की अनुमति

अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में अब साथ रख सकेंगे सिर्फ 2 पावर बैंक, सीट पॉकेट में ही रखने की अनुमति

 अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट में अब साथ रख सकेंगे सिर्फ 2 पावर बैंक, सीट पॉकेट में ही रखने की अनुमति


अमेरिकन एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए पोर्टेबल पावर बैंक ले जाने के नियमों को अपडेट किया है, जिसके तहत अब केवल दो पावर बैंक ले जाने की अनुमति होगी। ...और पढ़ें





अमेरिकन एयरलाइंस अपने पोर्टेबल पावर बैंक के नियमों को अपडेट करने वाली पहली नई एयरलाइन बनने जा रही है। इससे यात्रियों को ज्यादा से ज्यादा दो डिवाइस रखने की ही अनुमति होगी। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार से यात्रियों को अपने ट्रैवल डिवाइस का इस्तेमाल करते समय उसे अपनी नजरों के सामने रखना होगा।


अमेरिकन एयरलाइंस के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम जानते हैं कि हमारे ग्राहक अपनी पूरी यात्रा के दौरान अपने डिवाइस को चार्ज रखने के लिए पोर्टेबल पावर बैंक पर निर्भर रहते हैं।

विमान में सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ यह पक्का करने के लिए कि हमारे ग्राहक यात्रा के दौरान भी अपने डिवाइस चार्ज कर सकें, अमेरिकन एयरलाइंस ने ग्राहकों के लिए यह जरूरी कर दिया है कि वे उड़ान के दौरान इन डिवाइस को आसानी से पहुंच में रखें।”




कंपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं कोई डिवाइस

नई नीति के तहत यात्रियों को सिर्फ दो लिथियम पावर बैंक ले जाने की अनुमति होगी, जिनकी क्षमता 100 वॉट घंटे या उससे कम होनी चाहिए। ग्राहक अपने डिवाइस को ऊपर बने कंपार्टमेंट में नहीं रख सकते हैं और उन्हें उड़ान के दौरान उन्हें रिचार्ज करने की भी मनाही होगी।



अभी यात्रियों को 100 वॉट-घंटे या उससे कम क्षमता वाली चार अतिरिक्त लिथियम आयन बैटरी ले जाने की अनुमति है। अगर बैटरी की क्षमता 100 से 160 वॉट के बीच है, तो यात्री ज्यादा से ज्यादा दो बैटरी अपने साथ विमान में ले जा सकते हैं।


पिछले सितंबर में, फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारियों ने एयरलाइंस को लिथियम बैटरी से जुड़े जोखिमों के बारे में एक सुरक्षा चेतावनी जारी की थी।
कई घटनाओं के बाद लिया गया निर्णय

पिछले साल, FAA ने कम से कम 50 ऐसे मामलों की रिपोर्ट की थी जिनमें धुआं, आग या अत्यधिक गर्मी की घटनाएं शामिल थी, जिनके कारण उड़ानों को बीच में ही दूसरी जगह उतारना पड़ा और यहां तक कि यात्रियों को चोटें भी आई।


इसी के चलते, एयरलाइंस ने अपनी नीतियों को अपडेट करना शुरू कर दिया है और अब Southwest एयरलाइंस ने हर यात्री पर एक चार्जर का नियम लागू कर दिया है। यह नीति 20 अप्रैल से लागू हो गई है।

इस बीच, जापान में भी हवाई यात्रियों के लिए प्रति व्यक्ति चार्जर की संख्या अधिकतम दो तक सीमित कर दी गई है, और उन्हें अपनी डिवाइस रीचार्ज करने के लिए विमान के अंदर मौजूद पावर आउटलेट का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया गया है। यह जानकारी एनएचके न्यूज ने दी है।
 ड्रग्स की दुनिया का 'गब्बर सिंह', US ने रखा था 50 करोड़ रुपये का इनाम... मेक्सिको का कुख्यात अपराधी गिरफ्तार

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मेक्सिको सेना ने ड्रग्स किंगपिन ऑडियास फ्लोरेस सिल्वा 'एल जार्डिनेरो' को गिरफ्तार किया है, जो जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल का प्रमुख सदस्य था। अमेरिका ...और पढ़ें




 मेक्सिको में ड्रग्स की दुनिया के कुख्यात गैंग जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल के बड़े सरगना ऑडियास फ्लोरेस सिल्वा को सेना ने गिरफ्तार कर लिया है। वह 'एल जार्डिनेरो' यानी 'माली' के नाम से जाना जाता था और गैंग के प्रमुख एल मेंचो का करीबी माना जाता था।


उसकी गिरफ्तारी के बाद मेक्सिको के कई इलाकों में हिंसा की छिटपुट घटनाएं भी सामने आई हैं। अमेरिका ने फ्लोरेस सिल्वा पर करीब 5 मिलियन डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपये) का इनाम घोषित किया हुआ था।
एल मेंचो का माना जाता था वारिस

फ्लोरेस सिल्वा कार्टेल का रीजनल कमांडर था और उसे एल मेंचो का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि सुरक्षा बलों ने उसे किसी बड़े ठिकाने पर नहीं, बल्कि सड़क किनारे एक नाले में छिपा हुआ पाया। एल मेंचो की मौत के बाद माना जा रहा था कि वही कार्टेल की कमान संभालेगा, लेकिन उसकी गिरफ्तारी से गैंग को बड़ा झटका लगा है।
जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल दुनिया के सबसे खतरनाक ड्रग्स गैंग में गिना जाता है। अमेरिकी एजेंसियों के अनुसार, यह कार्टेल अमेरिका समेत 100 से ज्यादा देशों में ड्रग्स का कारोबार करता है। मेक्सिको के 32 में से 21 राज्यों में इसका नेटवर्क फैला हुआ है, जो इसे सबसे ताकतवर गिरोह बनाता है।

कौन है फ्लोरेस सिल्वा?

ऑडियास फ्लोरेस सिल्वा की उम्र करीब 31 साल है और वह मिचोआकान राज्य का रहने वाला है। कम उम्र में ही उसने ड्रग्स के कारोबार में कदम रखा और अफीम की खेती से शुरुआत की। वह पहले अमेरिका में गिरफ्तार हो चुका है और जेल की सजा काट चुका है।


फ्लोरेस सिल्वा सिर्फ ड्रग्स तस्करी ही नहीं, बल्कि जबरन वसूली, तेल चोरी और अपहरण जैसे अपराधों में भी शामिल था। उसे कार्टेल का सिक्योरिटी चीफ भी माना जाता था और वह कई राज्यों में नेटवर्क संभालता था। उसने नायरित इलाके को अपना गढ़ बना लिया था और फेंटानिल बनाने के लिए आने वाले केमिकल्स पर कब्जा कर रखा था।
कैसे मिला 'माली' नाम

फ्लोरेस सिल्वा को 'एल जार्डिनेरो' नाम उसकी शुरुआत की वजह से मिला। शुरुआती दिनों में वह अफीम और मारिजुआना की खेती करवाता था, इसी कारण उसे 'माली' कहा जाने लगा। एल मेंचो की मौत के बाद उसे गैंग की विरासत संभालने वाला माना जा रहा था।


अमेरिका 2021 से ही उसे पकड़ने की कोशिश कर रहा था और मेक्सिको पर दबाव बना रहा था। अमेरिकी सरकार ने उसे खतरनाक ड्रग तस्कर घोषित कर उसकी संपत्तियां भी जब्त कर ली थीं। उस पर कोलंबिया से अमेरिका तक ड्रग्स तस्करी के कई मामले दर्ज हैं।
गिरफ्तारी के बाद बढ़ा तनाव

दो महीने पहले एल मेंचो की मौत के बाद पूरे मेक्सिको में हिंसा भड़क गई थी। अब फ्लोरेस सिल्वा की गिरफ्तारी के बाद भी नायरित राज्य में आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, उसकी गिरफ्तारी के दौरान किसी के घायल होने की खबर नहीं है और इसे सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
'ब्रिटिश न होते, तो आप फ्रेंच बोल रहे होते', किंग चार्ल्स ने स्टेट डिनर में ट्रंप पर कसा तंज

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व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के दौरान किंग चार्ल्स III और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजाकिया बातचीत हुई। किंग चार्ल्स ने ट्रंप की पुरानी टिप्पणियों पर चुटकी ल ...और पढ़ें






व्हाइट हाउस में स्टेट डिनर के दौरान किंग चार्ल्स और डोनल्ड ट्रंप(फोटो: रॉयटर्स)


 मंगलवार को व्हाइट हाउस में आयोजित स्टेट डिनर के दौरान ब्रिटेन के किंग चार्ल्स III ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की चुटकुलों और दोस्ताना माहौल ने सबका ध्यान खींचा।


भोज के दौरान टोस्ट देते हुए किंग चार्ल्स ने ट्रंप की पुरानी टिप्पणियों का जिक्र किया, जिसमें ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका की मदद न होने पर जर्मन बोलने की बात कही थी।

किंग ने मुस्कुराते हुए कहा कि मिस्टर प्रेसिडेंट, आपने हाल ही में टिप्पणी की थी कि अगर अमेरिका न होता तो यूरोपीय देश जर्मन बोल रहे होते। क्या मैं यह कहने की हिम्मत कर सकता हूं कि अगर हम ब्रिटिश न होते, तो आप लोग फ्रेंच बोल रहे होते?

यह टिप्पणी सुनकर उपस्थित लोग हंस पड़े। किंग उत्तरी अमेरिका में ब्रिटिश और फ्रेंच औपनिवेशिक इतिहास की ओर इशारा कर रहे थे।
व्हाइट हाउस के रीडेवलपमेंट पर चुटकी

जनवरी में दावोस शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका की मदद के बिना यूरोपीय देश जर्मन और थोड़ी-बहुत जापानी भाषा बोल रहे होते। किंग चार्ल्स ने इसी बयान का मजाकिया जवाब दिया।


किंग चार्ल्स ने ट्रंप द्वारा व्हाइट हाउस के ईस्ट विंग में किए गए बदलावों पर भी मजाक किया। ट्रंप ने इस विंग को तोड़कर 400 मिलियन डॉलर की लागत से एक बड़ा बॉलरूम बनवाया है।

किंग ने कहा कि मुझे अफसोस है कि हम ब्रिटिशों ने भी 1814 में व्हाइट हाउस के रियल एस्टेट रीडेवलपमेंट की एक कोशिश की थी। वे 1814 की उस घटना का जिक्र कर रहे थे, जब ब्रिटिश सैनिकों ने व्हाइट हाउस में आग लगा दी थी।


उन्होंने आगे चुटकी ली कि यह भोज बोस्टन टी पार्टी से कहीं बेहतर है। 1773 में हुई बोस्टन टी पार्टी में अमेरिकी उपनिवेशवादियों ने ब्रिटिश चाय से भरे जहाजों को समुद्र में फेंक दिया था।
ट्रंप ने की किंग चार्ल्स की तारीफ

ट्रंप ब्रिटिश शाही परिवार के बड़े प्रशंसक हैं और जिनकी मां स्कॉटलैंड की थीं, ट्रंप ने किंग चार्ल्स की तारीफ की। उन्होंने कहा कि किंग ने कांग्रेस में शानदार भाषण दिया और यहां तक कि डेमोक्रेट्स को भी खड़े होने पर मजबूर कर दिया कि ऐसा मैं आज तक नहीं कर पाया।


किंग चार्ल्स ने ट्रंप को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लॉन्च हुई ब्रिटिश पनडुब्बी HMS Trump की मूल घंटी यादगार तोहफा के रूप में भेंट किया। किंग ने कहा कि यह हमारे दोनों देशों के साझा इतिहास और उज्ज्वल भविष्य की गवाही देगी। और अगर कभी आपको हमसे संपर्क करने की जरूरत पड़े, तो बस हमें घंटी बजा देना।


यह तोहफा ईरान युद्ध को लेकर हालिया तनाव के बावजूद ब्रिटेन और अमेरिका के बीच विशेष संबंधों को मजबूत करने की कूटनीतिक कोशिश का हिस्सा था। ईरान मुद्दे पर मतभेदों के बावजूद, दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी और हास्य का माहौल रहा। यह दौरा अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
 हिंदू और सिखों की सुरक्षा सबसे पहले: अमेरिका में मंदिरों और गुरुद्वारों के लिए बनाया जा रहा नया कानून

हिंदू और सिखों की सुरक्षा सबसे पहले: अमेरिका में मंदिरों और गुरुद्वारों के लिए बनाया जा रहा नया कानून

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अमेरिकी संसद में मंदिरों और गुरुद्वारों सहित अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए एक द्विदलीय विधेयक पेश किया गया है। ...और पढ़ें





अमेरिकी संसद में मंदिरों-गुरुद्वारों की सुरक्षा को लेकर विधेयक (फोटो-रॉयटर्स)

 अमेरिका की संसद में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को लेकर एक विधेयक लाया गया है, जिसका उद्देश्य मंदिरों और गुरुद्वारों समेत अन्य पूजा स्थलों की सुरक्षा करना है।

द्विदलीय विधेयक में इन पूजा स्थलों के आसपास 100 फीट का बफर जोन बनाने का प्रस्ताव है और ऐसे क्षेत्रों के भीतर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या धमकी को संघीय अपराध मानने के प्रविधान भी हैं।
मंदिरों-गुरुद्वारों की सुरक्षा को लेकर विधेयक

न्यूयॉर्क से डेमोक्रेटिक सांसद टाम सुओजी और ओहायो से रिपब्लिकन सांसद मैक्स मिलर ने पूजा स्थलों और धार्मिक प्रतिष्ठानों में व्यवधान से सुरक्षा (एसएसीआरईडी) अधिनियम से जुड़ा विधेयक पेश किया है।

इस विधेयक का उद्देश्य किसी भी पूजा स्थल के 100 फीट के दायरे में धार्मिक पूजा के अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे लोगों को जानबूझकर डराना, बाधा डालना या परेशान करने को संघीय अपराध बनाना है, चाहे ऐसा उन्हें धमकाकर, उनका रास्ता रोककर या उत्पीड़न या डराने के उद्देश्य से उनके आठ फीट के दायरे में पहुंचकर ही क्यों न किया गया हो।


सांसद सुओजी ने कहा, 'किसी को भी परेशान या डराया-धमकाया जाना नहीं चाहिए। खासतौर पर जब वे अपने पूजा स्थल की ओर जा रहे हों। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस भय को लक्षित तरीके से दूर करें, जिससे हमारे मतदाताओं की रक्षा हो सके और साथ ही शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के प्रथम संशोधन अधिकार का भी संतुलन बना रहे।'

सांसद मिलर ने कहा, 'हर अमेरिकी को बिना किसी भय, धमकी या उत्पीड़न के अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है।' जबकि हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन में नीति और कार्यक्रम निदेशक समीर कालरा ने कहा, 'हिंदू अमेरिकी समुदाय इस विधेयक का स्वागत करता है और अपने पूजा स्थलों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानता है।'

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने किया समर्थन

एसएसीआरईडी विधेयक को एंटी-डिफेमेशन लीग, अमेरिकन ज्यूइश कमेटी, यूनियन ऑफ आर्थोडाक्स, ज्यूइश कांग्रेस आफ अमेरिका, हदासाह, इस्लामिक सोसाइटी आफ नार्थ अमेरिका का समर्थन प्राप्त है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन, ज्यूइश फेडरेशन ऑफ नार्थ अमेरिका, यूजेए-फेडरेशन आफ न्यूयॉर्क, होलोकास्ट मेमोरियल एंड टालरेंस सेंटर आफ नासाउ काउंटी, अगुदथ इजरायल ऑफ अमेरिका और यूनाइटेड सिख ने भी इसका समर्थन किया है।
 हिल्टन गोलीकांड के बाद खुलेआम नहीं घूम सकेंगे ट्रंप, एलेन पर चलेगा हत्या के प्रयास का मुकदमा

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वॉशिंगटन के हिल्टन होटल में व्हाइट हाउस करेस्पोंडेंट डिनर के दौरान हुई गोलीबारी के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा की व्यापक समीक्षा की जाएगी। संदिग्ध ...और पढ़ें




ट्रंप पर हमला करने वाले एलेन पर चलेगा हत्या के प्रयास का मुकदमा।


वाशिंगटन हिल्टन में व्हाइट हाउस डिनर के दौरान गोलीबारी।


राष्ट्रपति ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा होगी।


संदिग्ध कोल टामस एलेन पर हत्या के प्रयास का मुकदमा।


 नई दिल्ली। वॉशिंगटन के एक होटल में शनिवार रात व्हाइट हाउस करेस्पोंडेंट डिनर के दौरान हुई गोलीबारी की घटना ने सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।


व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स इस सप्ताह कानून-प्रवर्तन एजेंसियों और होमलैंड सिक्योरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर मौजूदा सुरक्षा प्रोटोकाल की पड़ताल करेंगी। इसी बीच, मामले के संदिग्ध कोल टामस एलेन को सोमवार को वॉशिंगटन की संघीय अदालत में पेश किया गया। उस पर राष्ट्रपति की हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमे चलेंगे।


सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

बता दें कि यह घटना पिछले दो साल में ट्रंप की सुरक्षा में तीसरी बड़ी चूक मानी जा रही है। ऐसे समय में जब ट्रंप के सामने गर्मियों में कई बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम हैं, यह मामला सुरक्षा एजेंसियों, खासकर सीक्रेट सर्विस, के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।


रायटर के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बैठक में बड़े आयोजनों के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा इंतजामों और प्रक्रियाओं की विस्तार से समीक्षा होगी। हालांकि, गोलीबारी की घटना के बावजूद ट्रंप और व्हाइट हाउस ने सीक्रेट सर्विस के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।

ट्रंप की बढ़ाई जाएगी सुरक्षा

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ट्रंप के सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा और कड़ी की जा सकती है। उनके भाषण स्थलों पर बुलेटप्रूफ ग्लास लगाने और प्रवेश बिंदुओं पर और सख्त जांच जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, इससे कार्यक्रमों में आने वालों को लंबी कतारों और ज्यादा इंतजार का सामना करना पड़ सकता है।

नीले जंपसूट में कोर्ट लाया गया हमलावर

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, गोलीबारी के संदिग्ध एलेन को नीले जंपसूट में अदालत में पेश किया गया। जज ने बताया कि उस पर राष्ट्रपति की हत्या के प्रयास, अवैध हथियार के इस्तेमाल और एक सीक्रेट सर्विस एजेंट पर जानलेवा हमले जैसे आरोप लगाए गए हैं।


एलेन ने आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन इतना कहा कि वह सभी सवालों का ईमानदारी से जवाब देगा। उसने यह भी बताया कि उसके पास कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स की डिग्री है।

जांच में यह भी सामने आया है कि एलेन ने कैलिफोर्निया से शिकागो होते हुए वा¨शगटन तक ट्रेन से सफर किया। उसने कार्यक्रम से एक दिन पहले उसी वा¨शगटन हिल्टन होटल में कमरा लिया और मौके का इंतजार करता रहा। रिकार्ड के मुताबिक, वह एक शिक्षित ट्यूटर और शौकिया वीडियो गेम डेवलपर रहा है।

ट्रंप बोले- मैं न दुष्कर्मी, न बाल यौन शोषक

एएनआई के अनुसार, संदिग्ध हमलावर एलेन के मेनिफेस्टो पर ट्रंप ने प्रतिक्रिया में कहा कि वह दुष्कर्मी नहीं हैं। न ही उन्होंने किसी बच्चे का यौन शोषण किया है। सीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने मेनिफेस्टो से जुड़े एक सवाल पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।


उन्होंने कहा कि मुझे पता था कि मीडिया मुझसे ये सवाल जरूर पूछेगा। इसलिए मैं भी जवाब देने को तैयार था। मुझे इस चीज से जोड़ा गया है, जिसका मुझसे कोई लेना-देना नहीं है।
पहले से सख्त सुरक्षा, फिर भी चूक

एपी के अनुसार, जिस वॉशिंगटन हिल्टन होटल में यह कार्यक्रम आयोजित था, वहां पहले से ही सीक्रेट सर्विस के निर्देशों के तहत कड़े सुरक्षा इंतजाम लागू थे। होटल प्रबंधन के अनुसार, सुरक्षा की जिम्मेदारी सीक्रेट सर्विस के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर निभाई जा रही थी। इसके बावजूद हमलावर सुरक्षा घेरे को भेदते हुए भीतर तक पहुंच गया और गोलीबारी कर दी।
 लेबनान में फिर टूटा युद्धविराम, इस बार इजरायल ने सीरिया सीमा के पास की बमबारी

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युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने लेबनान के पूर्वी भाग पर हमला किया, जिसमें सीरिया सीमा के पास बेका घाटी में हिजबुल्ला के ठिकानों को निशाना बनाया गया। ...और पढ़ें





इजरायल ने लेबनान पर फिर किया हमला। (फाइल फोटो)


इजरायल ने लेबनान के पूर्वी भाग पर हमला किया।


सीरिया सीमा के पास बेका घाटी में बमबारी हुई।


लेबनान राष्ट्रपति ने अशांति के लिए हिजबुल्ला को जिम्मेदार ठहराया।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। युद्धविराम के बावजूद सोमवार को इजरायल ने लेबनान के पूर्वी भाग पर हमला किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की पहल पर 16 अप्रैल को लागू हुए युद्धविराम से इजरायली सेना और हिजबुल्ला लड़ाकों के बीच लड़ाई रुक गई थी। लेकिन पिछले युद्धविरामों की तरह इस बार भी लड़ाई पर रोक चंद रोज ही बनी रह सकी।


हिजबुल्ला के प्रभाव वाले दक्षिणी लेबनान से इतर इजरायल का ताजा हमला पूर्वी भाग की बेका घाटी में हुआ है। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने कहा है कि यह बेका घाटी में हिजबुल्ला के ढांचे पर हमले की शुरुआत है।


इजरायल ने कई जगहों पर की बमबारी

सूत्रों के अनुसार इस हमले में सीरिया सीमा के नजदीक स्थित नबी चिट शहर को निशाना बनाया गया है और वहां पर कई स्थानों पर बमबारी की गई है। इस बमबारी में किसी की जान जाने की खबर नहीं है।


विदित हो कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई किलोमीटर घुसकर वहां की जमीन की पट्टी पर कब्जा कर लिया है और वहीं से हमले कर रही है। जवाब में हिजबुल्ला लेबनान की पट्टी पर मौजूद इजरायली सैनिकों और उत्तरी इजरायल पर ड्रोन और राकेट से हमले कर रहा है। ताजा हमले से हिजबुल्ला के ड्रोन हमले में इजरायल का एक टैंक निशाना बना है।

अशांति के लिए हिजबुल्ला के ठहराया जिम्मेदार

युद्धविराम टूटने के बाद लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने सरकार के रुख का बचाव किया है। कहा है कि वह देश में शांति के पक्ष में हैं। उन्होंने अशांति के लिए नाम न लेते हुए हिजबुल्ला को जिम्मेदार ठहराया है।
 तुरंत नौकरी से निकाल दो', जिमी किमेल ने मेलानिया पर किया 'गर्भवती विधवा' वाला मजाक तो बोले ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिमी किमेल को मेलानिया ट्रंप पर किए गए 'गर्भवती विधवा' वाले मजाक के लिए एबीसी से तुरंत निकालने की मांग की है। ...और पढ़ें






डोनल्ड ट्रंप ने की किमेल को नौकरी से निकालने की मांग।


ट्रंप ने जिमी किमेल को नौकरी से निकालने की मांग की।


किमेल ने मेलानिया पर 'गर्भवती विधवा' का मजाक किया था।


मेलानिया ने किमेल को कायर बताया, कार्रवाई की अपील।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एबीसी से जिमी किमेल को तुरंत नौकरी से निकालने की मांग की है। इसकी वजह वह मजाक है जो लेट-नाइट होस्ट ने पिछले हफ्ते फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के बारे में किया था, जिसमें उन्होंने मेलानिया को एक "गर्भवती विधवा" बताया था।


गुरुवार को एक मोनोलॉग स्किट के दौरान की गई यह टिप्पणी शनिवार को व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर में हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कियाष “वाह, जिमी किमेल अपने खराब टेलीविजन रेटिंग्स से साबित करते हैं कि वे बिल्कुल भी मजेदार नहीं हैं। उन्होंने अपने शो में एक ऐसा बयान दिया जो सचमुच चौंकाने वाला है। उन्होंने फर्स्ट लेडी मेलानिया और हमारे बेटे बैरन का एक नकली वीडियो दिखाया, जैसे कि वे सचमुच उनके स्टूडियो में बैठे हों और उन्हें बोलते हुए सुन रहे हों जो कि वे नहीं थे और न ही कभी होंगे।"

ट्रंप ने कहा, "फिर उन्होंने कहा, हमारी फर्स्ट लेडी मेलानिया यहां हैं। मेलानिया को देखिए कितनी खूबसूरत हैं। श्रीमती ट्रंप आपके चेहरे पर एक ऐसी चमक है जैसी किसी गर्भवती विधवा के चेहरे पर होती है।”

उन्होंने आगे कहा, "आम तौर पर मैं उनकी किसी भी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, लेकिन यह मामला तो सारी हदें पार कर गया है। डिज्नी और एबीसी को जिमी किमेल को तुरंत नौकरी से निकाल देना चाहिए। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आप सभी का धन्यवाद! राष्ट्रपति डोनल्ड जे ट्रंप।"


मेलानिया ने किमेल को कहा कायर

इससे पहले सोमवार को फर्स्ट लेडी ने किमेल की कड़ी आलोचना करते हुए नेटवर्क से उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की अपील की। साथ ही उन्हें कायर बताया। हालांकि एबीसी ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
 'ये मुझे पसंद नहीं आया, परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र ही नहीं'; ईरान के प्रस्ताव से ट्रंप नाखुश

'ये मुझे पसंद नहीं आया, परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र ही नहीं'; ईरान के प्रस्ताव से ट्रंप नाखुश

 'ये मुझे पसंद नहीं आया, परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र ही नहीं'; ईरान के प्रस्ताव से ट्रंप नाखुश



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के एक प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, क्योंकि इसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं था। ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान के संघर्ष खत्म करने के ताजा प्रस्ताव से कथित तौर पर असंतुष्ट हैं, क्योंकि इसमें तेहरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं है। इस बात की जानकारी न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दी है।


रॉयटर्स ने बताया कि इस प्रस्ताव की समीक्षा सोमवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक के दौरान की गई, जहां एक अधिकारी ने बताया कि ट्रंप को यह प्रस्ताव पसंद नहीं आया।
ईरान क्या प्रस्ताव दिया था?

ईरान ने सुझाव दिया है कि अगर अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा लेता है और दुश्मनी खत्म करने पर राजी हो जाता है तो वह होर्मुज स्ट्रेट पर लगी अपनी पाबंदियां हटा लेगा। हालांकि, उसने अपनी परमाणु गतिविधियों पर चर्चा को टालने की बात कही है।

प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने की संभावना बेहद कम

यह प्रस्ताव, जो कथित तौर पर पाकिस्तान के जरिए भेजा गया था, उसके स्वीकार किए जाने की संभावना कम ही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जोर देकर कहा है कि किसी भी समझौते में यह शर्त जरूर होनी चाहिए कि ईरान परमाणु हथियार न बना पाए।


फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में रूबियो ने कहा कि अमेरिका ऐसी किसी भी कोशिश को खारिज कर देगा जिससे एक ऐसी व्यवस्था को सामान्य बनाने की कोशिश की जाए, जिसमें ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक तक पहुंच को नियंत्रित करे।


रूबियो ने कहा, "अगर होर्मुज को खोलने से उनका मतलब यह है कि 'हां, स्ट्रेट तब तक खुला है जब तक आप ईरान के साथ तालमेल बिठाते हैं। हमारी इजाजत लेते हैं, वरना हम आपको उड़ा देंगे और आपको हमें पैसे देने होंगे।' तो यह स्ट्रेट को खोलना नहीं है। यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है।"
 होर्मुज की नाकाबंदी का पूरा हक', UN में रूस ने फिर किया ईरान का सपोर्ट; अमेरिका को कहा- समुद्री लुटेरा

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मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान का जोरदार बचाव किया, होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सीम ...और पढ़ें





रूस ने UNSC में ईरान का जोरदार बचाव किया


होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के अधिकार का समर्थन किया


पुतिन ने ईरानी विदेश मंत्री से मिलकर समर्थन जताया


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच सोमवार को रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में ईरान का जोरदार बचाव किया। होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही को सीमित करने के ईरान के अधिकार का बचाव करते हुए रूसी राजदूत वसीली नेबेंजिया ने पश्चिमी देशों पर पाखंड और समुद्री डकैती का आरोप लगाया।


इसके साथ ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ मुलाकात कर अपने पूर्ण समर्थन की बात कही। मालूम हो कि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस्लामाबाद की अपनी संक्षिप्त यात्रा के बाद रूस पहुंचे थे। वहां, सोमवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जिन्होंने अपनी संप्रभुता के लिए बहादुरी और वीरता से लड़ने को लेकर ईरानियों की सराहना की।


पुतिन ने शांति वार्ता में मदद के लिए बढ़ाया हाथ

पुतिन ने यह भी कहा कि मॉस्को पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति लाने में मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' की रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को पहुंचने से पहले अराघची ने ओमान और पाकिस्तान के नेतृत्व से बातचीत की। ईरानी विदेश मंत्री ने सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन से मुलाकात की और ईरान को समर्थन देने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।







पुतिन ने अराघची के साथ अपनी मुलाकात के दौरान कहा, ''रूस पश्चिम एशिया में जल्द से जल्द शांति सुनिश्चित करने के लिए अपनी ओर से हर संभव प्रयास करने को तैयार है।'' इस मुलाकात में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी मौजूद थे। पुतिन ने बताया कि उन्हें पिछले सप्ताह ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का संदेश मिला था। उन्होंने इस संदेश के लिए अराघची को उनकी ओर से आभार व्यक्त करने और खामेनेई के अच्छे स्वास्थ्य और सकुशल होने के लिए शुभकामनाएं देने को कहा।

ईरान के पास रूस जैसा दोस्त : अराघची

अराघची ने कहा, "अमेरिका से युद्ध के दौरान दुनिया ने ईरान की ताकत देखी। ईरानी अवाम ने अपने साहस से अमेरिकी आक्रमण का सफलतापूर्वक सामना किया। उन्होंने आगे कहा, इस मुलाकात से यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान के पास रूस जैसा दोस्त और सहयोगी हैं और उन्होंने सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की ओर से रूसी नेतृत्व को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

रूसी विदेश मंत्री ने भी जारी किया बयान

रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने कहा, राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई वार्ता सफल रही। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बाद में कहा कि, रूस दोनों पक्षों को स्वीकार्य किसी भी प्रकार की मध्यस्थता सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार है।


वहीं, ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी 'इरना' के अनुसार, ''पहले दौर में कुछ प्रगति होने के बावजूद, अमेरिका ने गलत तरीकों के कारण वार्ता को सफल नहीं होने दिया। बता दें कि, अराघची सोमवार को सेंट पीटर्सबर्ग के पुलकोवो हवाई अड्डे पर पहुंचे थे, जहां रूसी अधिकारियों और रूस में ईरान के राजदूत काजिम जलाली ने उनका स्वागत किया।
 इंडोनेशिया: जकार्ता में दो ट्रेनों की भिड़ंत, 14 लोगों की मौत और 84 घायल

इंडोनेशिया: जकार्ता में दो ट्रेनों की भिड़ंत, 14 लोगों की मौत और 84 घायल

 इंडोनेशिया: जकार्ता में दो ट्रेनों की भिड़ंत, 14 लोगों की मौत और 84 घायल



इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के पास दो ट्रेनों की भीषण टक्कर में 14 यात्रियों की मौत हो गई है। ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के बाहर दो ट्रेनों की टक्कर हो गई, जिसमें 14 यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। हादसे में 84 अन्य घायल भी हुए हैं।

सरकारी रेल कंपनी KAI के प्रवक्ता फ्रानोटो विबोवो ने घटनास्थल पर Kompas TV को बताया, 'अस्पताल के रिकॉर्ड से पता चलता है कि 14 पीड़ितों की मौत हो गई है।'

फ्रानोटो विबोवो ने आगे कहा कि सेना, दमकल विभाग और राष्ट्रीय खोज और बचाव एजेंसी की मदद से मलबे से पीड़ितों को निकालने का काम अभी भी जारी है।





इंडोनेशिया में ट्रेनों के बीच भीषण टक्कर

समाचार एजेंसी एएफपी ने कई स्थानीय मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया कि यह टक्कर बेकासी तिमुर स्टेशन के पास हुई, जो जकार्ता से लगभग 25 किलोमीटर (15 मील) दूर है।

फ्रानोटो ने बताया, 'जहां तक पीड़ितों की बात है, हमने उन्हें जल्द से जल्द पास के अस्पतालों में पहुंचाने की पूरी कोशिश की है। हम अभी भी डेटा और सबूत इकट्ठा करने की प्रक्रिया में हैं। दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जानकारी बाद में संबंधित अधिकारियों द्वारा दी जाएगी।'

कैसे हुआ हादसा?

Antara की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेकासी तिमुर स्टेशन पर एक कम्यूटर लाइन ट्रेन और एक लंबी दूरी की डीजल ट्रेन के बीच हुई टक्कर में कई यात्री घायल हो गए।

कम्यूटर लाइन ट्रेन ट्रैक 1 पर रुकी हुई थी और पूरब की ओर सिकांग जा रही थी। कुछ ही देर बाद, पश्चिम दिशा से आ रही एक लंबी दूरी की ट्रेन उसी ट्रैक पर आ गई और कम्यूटर लाइन ट्रेन से सामने से टकरा गई।

स्थानीय मीडिया ने घटनास्थल पर मौजूद एक यात्री के हवाले से घटना की जानकारी दी। यात्री ने बताया, 'कम्यूटर लाइन ट्रेन का पिछला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। अधिकारियों ने हमें तुरंत बाहर निकाल लिया।'
 ईरान के हमलों के बीच UAE ने मांगी थी मदद, इजरायल के आयरन डोम ने बचाया; अबू धाबी के सुरक्षा अधिकारी का दावा

ईरान के हमलों के बीच UAE ने मांगी थी मदद, इजरायल के आयरन डोम ने बचाया; अबू धाबी के सुरक्षा अधिकारी का दावा

ईरान के हमलों के बीच UAE ने मांगी थी मदद, इजरायल के आयरन डोम ने बचाया; अबू धाबी के सुरक्षा अधिकारी का दावा

ईरान के हमलों के दौरान इजरायल ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को अपना मशहूर आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम और सैनिक भेजे थे, जिससे UAE को ईरानी मिसाइलों और ड् ...और पढ़ें





हमले को रोकते हुए इजरायल का आयरन डोम।

 ईरान अमेरिका युद्ध के बीच जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर भी हमले होने लगे, तो उन दिनों इजरायल ने अपना मशहूर आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को भेजा था।

इस बात का खुलासा अमेरिकी न्यूज चैनल एक्सियोस ने किया है। इस मामले की जानकारी रखने वाले इजरायली और अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इस जानकारी को बताया।

उनकी रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ आयरन डोम ही नहीं, यरुशलम ने इस एयर डिफेंस सिस्टम को चलाने के लिए सैनिक भी भेजे थे। यह सिस्टम छोटी दूरी के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन को रोकने के लिए मशहूर है। दरअसल, अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध के दौरान ईरान ने आस-पास के देशों में भी हमले करने शुरू कर दिए थे।


इसमें ईरान लगातार UAE के इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर रहा था। इस बीच UAE ने अपने सहयोगियों से मदद मांगी थी। हालांकि, ज्यादातर हमलों को रोक दिया गया था, लेकिन कुछ हमले आम नागरिकों और सेना के ठिकानों पर हुए थे, जिसके बाद UAE के नेतृत्व ने मदद मांगी।

UAE के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू से मांगी मदद

इजरायल के अधिकारियों ने एक्सियोस को बताया कि, UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के साथ फोन पर बातचीत के बाद, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इजरायली रक्षा बलों (IDF) को आयरन डोम बैटरी और इंटरसेप्टर के साथ-साथ IDF के कई दर्जन अधिकारियों को भेजने का आदेश दिया।

यह कदम अबू धाबी के लिए फायदेमंद साबित हुआ, जो ईरानी हमलों का मुख्य निशाना बन गया था। UAE ने इस एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करके दर्जनों ईरानी मिसाइलों को रोका। अबू धाबी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान ने UAE पर 550 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों, और 2,200 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया था।

ईरान के हमलों ने UAE की आंखें खोली

रिपोर्ट के अनुसार, संकट के समय आयरन डोम की आपूर्ति ने UAE और इजरायल के रिश्तों को और गहरा कर दिया है। मालूम हो कि, यह पहली बार है जब इजरायल ने यह तकनीक किसी दूसरे देश को भेजी है।


अब अमेरिका और इजरायल के अलावा UAE ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसने आयरन डोम बैटरी का इस्तेमाल किया है। दोनों देशों के अधिकारियों ने बताया कि, ईरान के साथ युद्ध के दौरान UAE और इजरायल एक-दूसरे के साथ लगातार तालमेल बनाए हुए थे।


अरब गल्फ स्टेट्स इंस्टीट्यूट (AGSI) के लिए लिखे एक लेख में, UAE के पूर्व सुरक्षा अधिकारी तारेक अल-ओतैबा ने इजरायल की तारीफ करते हुए कहा, "इस देश ने अबू धाबी को असली मदद देने के लिए आगे बढ़कर कदम उठाया है। UAE उस मुश्किल घड़ी में इजरायल की ओर से की गई मदद को नहीं भूलेगा।"


एक दूसरे अधिकारी ने भी अन्य देशों, जिनमें US, UK, फ्रांस, इटली और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। उनकी तारीफ की, जिन्होंने ईरान के लगातार हमलों के दौरान अबू धाबी को अपना बचाव करने में मदद की। अधिकारी ने आगे कहा, "यह सचमुच आंखें खोलने वाला पल था। यह देखने के लिए कि हमारे असली दोस्त कौन हैं।"

ट्रंप ने एक बार फिर दी चेतावनी

इसके अलावा मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच, ट्रंप की चेतावनी का जवाब ईरान ने दिया है। उनका कहना है कि, अगर अमेरिका ने उनके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करेगा।


ईरान के उपराष्ट्रपति ने यह चेतावनी दी है। बता दें कि, यह चेतावनी उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की उन टिप्पणियों के बाद दी है, जिनमें उन्होंने तेहरान के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बढ़ाने की बात कही थी।

सघाब ने रविवार को X पर लिखा, "अगर किसी नाकाबंदी के कारण हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर का कोई भी हिस्सा। जिसमें तेल के कुएं भी शामिल हैं, क्षतिग्रस्त होता है, तो हम गारंटी देते हैं कि हमलावर का समर्थन करने वाले देशों के उसी तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर को उससे चार गुना ज़्यादा नुकसान पहुंचाया जाएगा।" उन्होंने आगे कहा, "हमारा हिसाब-किताब अलग है; एक तेल का कुआं, चार तेल के कुंओं के बराबर है।"


यह बयान ट्रंप के उस इंटरव्यू के बाद आया, जो उन्होंने Fox News को दिया था। उस इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि ईरान पर लगातार दबाव बनाए रखने से, तेल को स्टोरेज या टैंकरों तक पहुंचाने की उसकी क्षमता बाधित हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर इस तरह की पाबंदियां जारी रहीं, तो ईरान की पाइपलाइनें लगभग तीन दिनों के भीतर एक बेहद नाज़ुक स्थिति में पहुंच सकती हैं।
 नॉर्थ डकोटा की विधायक लिज कॉनमी की विमान दुर्घटना में मौत, पायलट की भी गई जान; मिनियापोलिस में हुआ हादसा

नॉर्थ डकोटा की विधायक लिज कॉनमी की विमान दुर्घटना में मौत, पायलट की भी गई जान; मिनियापोलिस में हुआ हादसा

 नॉर्थ डकोटा की विधायक लिज कॉनमी की विमान दुर्घटना में मौत, पायलट की भी गई जान; मिनियापोलिस में हुआ हादसा


अमेरिका के मिनियापोलिस में एक छोटे विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से नॉर्थ डकोटा की राज्य प्रतिनिधि लिज कॉनमी और पायलट जो कैस की मौत हो गई। ...और पढ़ें





विमान दुर्घटना में नॉर्थ डकोटा की लेजिस्लेटर लिज कॉनमी की मौत(फोटो: सोशल मीडिया)


मिनियापोलिस में विमान दुर्घटना में दो लोगों की मौत


नॉर्थ डकोटा की विधायक लिज कॉनमी की मौत


क्रिस्टल एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही हुआ हादसा


 अमेरिका के मिनियापोलिस में शनिवार को टेकऑफ के तुरंत बाद छोटे विमान के जमीन से टकराने के बाद आग लगने से उत्तर डकोटा की राज्य प्रतिनिधि लिज कॉनमी और पायलट जो कैस की मौत हो गई। दोनों ही विमान में सवार थे।


यह हादसा मिनेसोटा के ब्रुकलिन पार्क में हुआ, जहां विमान क्रिस्टल एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद नीचे गिर गया और आग की चपेट में आ गया। 58 वर्षीय की लिज कॉनमी फार्गो की रहने वाली थीं। वे चार बच्चों की मां थीं और 2023 से राज्य प्रतिनिधि के रूप में सेवा दे रही थीं। वे दूसरा कार्यकाल हासिल करने की तैयारी में थीं।
अभी तक दुर्घटना का कारण पता नहीं चल सका है। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने पुष्टि की है कि विमान में दो लोग सवार थे। नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) इस दुर्घटना की जांच कर रहा है।
कैसे हुई घटना?

विमान बीच एफ33ए मॉडल का था, जिसमें सिर्फ दो लोग सवार थे। दुर्घटना दोपहर से ठीक पहले हुई। उत्तर डकोटा के गवर्नर केली आर्मस्ट्रांग ने कहा कि खेरस्ती और मैं इस दुखद नुकसान से बहुत दुखी हैं। हम उनकी परिवार, दोस्तों और साथी विधायकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।

उत्तर डकोटा डेमोक्रेटिक-नॉनपार्टिसन लीग पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे पूरी तरह टूट चुके हैं और दिल टूट गया है। पार्टी ने लिज कॉनमी की मौत को राज्य के लिए गहरा नुकसान बताया।

पार्टी ने उन्हें पूर्व किसान और मिनेसोटा स्टेट यूनिवर्सिटी की शिक्षिका के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि विधायक के रूप में उन्होंने सार्वजनिक शिक्षा, पर्यावरण और पारदर्शिता के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाई। यह पार्टी राष्ट्रीय डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़ी हुई है।

दुर्घटना स्थल पर पड़ोसियों ने क्या कहा?

दुर्घटना के दौरान विमान जमीन से टकराते ही आग की लपटों समा जाता है। यह घटना आवासीय इलाके में हुई। एक स्थानीय निवासी एश्ले कैप ने बताया कि मैं घर में अपने बेडरूम में थी और मेरी बेटी किचन टेबल पर अनाज खा रही थी। अचानक बहुत जोरदार धमाका हुआ।


दूसरी पड़ोसी किम क्लार्क ने कहा कि वहां बहुत बड़ी आग लग गई थी। लोग 911 पर फोन करने लगे। कुछ लोग यह देखने के लिए पास गए कि कोई जिंदा है या नहीं, लेकिन फिर चिंगारियां निकलने लगीं और आग और तेज हो गई।