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 मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ युद्ध का Phase-2, तेहरान पर मिसाइल अटैक; ईरान ने भी दिया जवाब

मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ युद्ध का Phase-2, तेहरान पर मिसाइल अटैक; ईरान ने भी दिया जवाब

 मिडिल ईस्ट में शुरू हुआ युद्ध का Phase-2, तेहरान पर मिसाइल अटैक; ईरान ने भी दिया जवाब



इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है। इजरायल ने घोषणा की है कि यह युद्ध अब 'नए चरण' में प्रवेश कर गया है, जिससे आगे और चौंकाने वाली घटन ...और पढ़ें






 इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने उस समय एक भयावह मोड़ ले लिया, जब इजरायली वायुसेना द्वारा ईरान की राजधानी तेहरान पर भीषण हमले किए गए। इजरायल की ओर से आधिकारिक तौर पर घोषणा की गई है कि यह युद्ध अब एक 'नए चरण' में प्रवेश कर गया है, जिसमें अमेरिका का भी साथ मिल रहा है।


दरअसल, शुक्रवार को इजरायल-अमेरिका द्वारा तेहराभर में हुए भारी हमले के बाद इजरायल ने घोषणा की है कि उसने ईरान के खिलाफ अमेरिका के साथ शुरू किए गए युद्ध के "नए चरण" में प्रवेश कर लिया है।
अभी और चौंकाने वाली घटनाएं होंगी...

लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने एक टेलीविजन बयान में कहा, "आगे और भी चौंकाने वाली घटनाएं होंगी, जिनका मैं खुलासा नहीं करना चाहता।"
अमेरिका ने भी कसी कमर

वहीं, ईरान पर कार्रवाई को लेकर अमेरिका भी पूरी तरह तैयार है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी घोषणा की कि "ईरान और तेहरान पर सैन्य शक्ति में भारी वृद्धि होने वाली है।"
तेहरान लंबे युद्ध के लिए तैयार है...

इधर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान लंबे समय तक चलने वाले युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार है और जल्द ही ऐसे उन्नत हथियार पेश करेगा, जिनका इस्तेमाल अभी तक संघर्ष में नहीं हुआ है।
एक बयान में, ब्रिगेडियर जनरल अली मोहम्मद नैनी ने चेतावनी दी कि ईरान के दुश्मनों को हमलों की अगली लहर में भीषण के लिए तैयार रहना चाहिए। ईरान की नई पहल और हथियार तैयार हैं।
 हवा में डगमगाया फिर छत से टकराकर क्रैश हुआ प्लेन, देखें वीडियो

हवा में डगमगाया फिर छत से टकराकर क्रैश हुआ प्लेन, देखें वीडियो

 हवा में डगमगाया फिर छत से टकराकर क्रैश हुआ प्लेन, देखें वीडियो



अमेरिका के एरिजोना के नॉर्थ फीनिक्स में एक कम्यूटर प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में प्लेन में सवार फ्लाइट इंस्ट्रक्टर और स्टूडेंट समेत तीन लोग घायल हो ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के एरिजोना में नॉर्थ फीनिक्स में एक कम्यूटर प्लेन क्रैश हो गया। ये प्लेन एक घर की छत से टकराने के बाद दूसरे घर के पिछले हिस्से में जा गिरा।

फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, प्लेन में मैकेनिकल खराबी आ गई थी और डियर वैली एयरपोर्ट पर लौटने की कोशिश करते समय क्रैश हो गया।
एरिजोना में कम्यूटर प्लेन क्रैश

प्लेन क्रैश वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक छोटा कम्यूटर प्लेन एरिजोना में क्रैश होता दिखाई दे रहा है। एक घर की खराब छत पर पाइपर PA-28 के हिस्से दिखे और छोटा, टूटा-फूटा एयरक्राफ्ट क्रैश होने के बाद पास के आंगन में पड़ा हुआ था।


कम्यूटर प्लेन पूल और घर के उस हिस्से के बीच फंसा हुआ था जहां एक बेबी नर्सरी है। इस हादसे में तीन लोग घायल हो गए, जिन्हें बाद में अस्पताल ले जाया गया।

ABC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेन में सवार दो लोग एक फ्लाइट इंस्ट्रक्टर और दूसरा स्टूडेंट, दोनों ही इस हादसे में घायल हो गए। ये प्लेन जिस घर पर गिरा, वहां रहने वाला एक शख्स भी घायल हो गया। तीनों घायलों को लोकल हॉस्पिटल ले जाया गया।
क्रैश के बाद आस-पड़ोस के लोगों को खाली कराना पड़ा, क्योंकि हैजमैट क्रू उस भयानक जगह पर फ्यूल से भरी गंदगी को साफ करने में लगे थे।
 मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सीरिया में फुस्स हुई ईरानी मिसाइल बनी बच्चों के लिए खेल का सामान

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सीरिया में फुस्स हुई ईरानी मिसाइल बनी बच्चों के लिए खेल का सामान

 मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सीरिया में फुस्स हुई ईरानी मिसाइल बनी बच्चों के लिए खेल का सामान



अमेरिका-इजरायल की कार्रवाई के बाद ईरान ने मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा दिया है। ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों से खाड़ी देशों पर हमले हुए, जिसमें पूर्वी सीरिया ...और पढ़ें








 अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने एक साथ कई खाड़ी देशों पर मिसाइलें दागनी शुरू कर दी, जिससे क्षेत्र में भारी तबाही मच गई।


समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, ईरान द्वारा मिसाइल और ड्रोन से खाड़ी देशों में किए गए हमले के दौरान एक प्रोजेक्टाइल पूर्वी सीरिया के कामिशली के बाहरी इलाके में एक खुले मैदान में गिरा। सीरिया के ग्रामीण क्षेत्रों में ईरानी मिसाइल के मलबे से बच्चों सहित कई लोग मामूली रूप से घायल हो गए।
मिसाइल के मलबे पर चढ़ता दिखा बच्चा

हैरानी की बात यह है कि लोग अपनी जान का परवाह किए बगैर उसके पास जा रहे हैं और खुद को खतरे में डाल रहे हैं। इस प्रोजेक्टाइल को एक लड़का बिना किसी डर भय के अपने हाथों से छूता और उस पर चढ़ता हुआ नजर आ रहा है और इस पर चढ़ भी रहा है। अगर किसी कारणवश यह फट जाए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।



4 मार्च, 2026 को सीरिया के कामिशली इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास गिरी ईरानी मिसाइल के पास बेफ्रिक होकर लोग खड़े होते नजर आए। लोग के अलावा वहां जानवर भी दिख रहे हैं।


मिडिल ईस्ट में क्यों है तनाव?

गौरतलब है कि अमेरिका-इजरायल द्वारा की गई कार्रवाई के बाद ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव पैदा कर दिया है। ईरान बदला लेने के लिए न सिर्फ इजरायल बल्कि आस-पास के सभी देशों पर हमले कर रहा है। पूरे मध्य पूर्व में मिसाइल हमलों और मलबे की चपेट में आने से नागरिक हताहत हो रहे हैं।
 तेहरान और बेरूत पर तबाही मचा रहा इजरायल, हिजबुल्लाह के गढ़ में रातभर दागी मिसाइल

तेहरान और बेरूत पर तबाही मचा रहा इजरायल, हिजबुल्लाह के गढ़ में रातभर दागी मिसाइल

 तेहरान और बेरूत पर तबाही मचा रहा इजरायल, हिजबुल्लाह के गढ़ में रातभर दागी मिसाइल



मिडिल ईस्ट में तनाव गहरा गया है। इजरायल ने तेहरान में विस्फोटक हमला किया और बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। ...और पढ़ें





 मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अपने विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। इजरायल-अमेरिका और ईरान कोई भी जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हट रहा है। कहीं मिसाइलें तो कहीं ड्रोन, ऐसा ही मंजर इन दिनों मिडिल ईस्ट में देखने को मिल रहा है।


वहीं, इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े पैमाने पर हमलों की चेतावनी देने की घोषण के कुछ घंटे बाद राजधानी तेहरान में विस्फोटक हमला किया। यह हमला एक व्यस्त खरीदारी वाली सड़क पर हुआ।
हिजबुल्लाह के ठिकानों को बनाया निशाना

इजरायल की सेना ने शुक्रवार को बताया कि उसने बेरूत में रात भर में हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हमले किए। इजरायली सेना ने बेरूत में कमांड केंद्रों और बहुमंजिला इमारतों के साथ-साथ हिजबुल्लाह के उन ड्रोनों को रखने वाले एक ठिकाने को निशाना बनाया, जिनका उद्देश्य इजरायल पर हमला करना था।
इजरायली रक्षा मंत्रालय के अनुसार, "इन कमांड सेंटरों का इस्तेमाल हिजबुल्लाह द्वारा आईडीएफ सैनिकों और इजरायल राज्य के खिलाफ कई आतंकवादी हमलों को अंजाम देने और आगे बढ़ाने के लिए किया जाना था।"
इजरायल ने 26 बार किए हमले

इजरायली रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसने अब तक लेबनान के बेरूत के दक्षिण में स्थित शिया मुस्लिम बहुल उपनगर दाहियेह पर 26 बार हमले किए हैं। इजरायल इस उपनगर को हिजबुल्लाह का गढ़ मानता है।

ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को लेकर रखी अपनी बात

गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि का खतरा मंडरा रहा है। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रंपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में बढ़ती गैस की कीमतों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता , जबकि युद्ध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर रहा है। अमेरिका ने भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है।


वहीं, ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का माजाक उड़ाते हुए एक मामलू व्यक्ति बताए। ट्रंप ने कहा, "हम ऐसा व्यक्ति चाहते हैं जो ईरान में सद्भाव और शांति लाए।"
 ईरान के हमले में यूएई-जॉर्डन को भारी नुकसान, US-मेड रडार सिस्टम तबाह; सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरें

ईरान के हमले में यूएई-जॉर्डन को भारी नुकसान, US-मेड रडार सिस्टम तबाह; सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरें

 ईरान के हमले में यूएई-जॉर्डन को भारी नुकसान, US-मेड रडार सिस्टम तबाह; सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरें




मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के साथ, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में अमेरिकी निर्मित रडार सिस्टम को निशाना बनाया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल ...और पढ़ें









डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में टेंशन लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान के हमले से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और जॉर्डन को भारी नुकसान हुआ है। ईरान ने इन देशों के रडार सिस्टम को तबाह कर दिया है, जो कि अमेरिका के बनाए हुए थे।


अरब पेनिनसुला के मिलिट्री बेस से मिली नई सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि ईरान, मिसाइलों और ड्रोन का पता लगाने वाले US-मेड रडार को खत्म करके एयर डिफेंस को कमजोर कर रहा है।
ईरान का रडार सिस्टम पर निशाना

सोमवार को ली गई एक सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि ईरान ने US-इजरायली हमलों के शुरुआती दिनों में जॉर्डन में एक अमेरिकन THAAD मिसाइल बैटरी के रडार सिस्टम पर हमला किया और उसे तबाह कर दिया।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड अरब अमीरात में दो जगहों पर ऐसे ही रडार सिस्टम वाली बिल्डिंग्स पर भी हमला हुआ, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि इक्विपमेंट डैमेज हुआ या नहीं।


क्यों जरूरी है रडार सिस्टम?

रडार हाई-एंड मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम के लिए एक जरूरी एलिमेंट है, जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइलों को उनके टारगेट की ओर उड़ते समय एंगेज करने और खत्म करने के लिए किया जाता है।

US आठ THAAD बैटरी ऑपरेट करता है, जबकि UAE दो और सऊदी अरब एक ऑपरेट करता है। यह एक जॉर्डन में मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर थी, जो ईरान से 500 मील से ज्यादा दूरी पर है।
 नेपाल में बालेन शाह की आंधी, RSP 86 सीटों पर आगे; सिंगल डिजिट में सिमटे भारत विरोधी ओली

नेपाल में बालेन शाह की आंधी, RSP 86 सीटों पर आगे; सिंगल डिजिट में सिमटे भारत विरोधी ओली

 नेपाल में बालेन शाह की आंधी, RSP 86 सीटों पर आगे; सिंगल डिजिट में सिमटे भारत विरोधी ओली



Nepal Election result 2026: नेपाल में आम चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों में रैपर से राजनेता बने बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र ...और पढ़ें






नेपाल में बालेन शाह की आंधी, RSP 62 सीटों पर आगे (फोटो- रॉयटर्स)


नेपाल चुनाव में वोटों की गिनती जारी है


बालेन शाह की पार्टी 86 सीटों पर आगे


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नेपाल में आम चुनाव के लिए वोटों की गिनती जारी है। नेपाल के चुनाव आयोग ने मतगणना शुरू होने के 24 घंटे के भीतर सीधे 165 सीटों (एफपीटीपी) के परिणाम जारी करने की बात कही है। साथ ही यह भी कहा है कि पहाड़ी क्षेत्रों में मतपेटियों को इकट्ठा करके मतगणना केंद्रों तक लाने में कम से कम एक दिन लग जाता है। इसिलए बाकी के चुनाव नतीजे बाद में घोषित किए जाएंगे।


05 मार्च गुरुवार को नेपाल में हुए चुनाव में योग्य मतदाताओं में से लगभग 60 प्रतिशत ने अपने वोट डाले थे। इस चुनाव में 65 पार्टियों के 3,400 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। नेपाल चुनाव में किस सीट पर कौन आगे चल रहा है और किसकी पार्टी सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। आइए जानते हैं...
बंपर जीत की ओर राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी

नेपाल में वोटों की गिनती जारी है। शुरुआती रुझानों में रैपर से राजनेता बने बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) 86 सीटों पर आगे चल रही है। दूसरे नंबर पर नेपाली कांग्रेस 9 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, केपी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल 3 और श्रम शक्ति पार्टी एक सीट पर बढ़त बनाए हुए है। मतगणना के बीच आरएसपी ने एक सीट पर जीत दर्ज कर ली है।

नेपाल चुनाव में बालेश शाह की राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। पार्टी 86 सीटों पर आगे चल रही है। अभी सिर्फ 112 सीटों का रुझान सामने आया है, जिनमें से 86 सीटों पर राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी आगे चल रही है।


झापा निर्वाचन क्षेत्र संख्या 5 में शुरुआती मतगणना के रुझान में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बालेन शाह आगे चल रहे हैं। कमल ग्रामीण नगरपालिका के बसबारी स्कूल मतदान केंद्र (ए और बी) और गौरादहा ग्रामीण नगरपालिका के मोती स्कूल मतदान केंद्र (ए और बी) में डाले गए 1,400 मतों में से बालेन शाह को 814 वोट मिले हैं। वहीं, सीपीएन-यूएमएल के उम्मीदवार और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली 384 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

शाह की पार्टी सबसे आगे

नेपाल चुनाव के लिए हो रही काउंटिंग के शुरुआती रुझानों में Gen-Z के हीरो बालेन शाह की राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी सबसे आगे चल रही है। राष्‍ट्रीय स्‍वतंत्र पार्टी 86 सीटों पर आगे चल रही है। वहीं, भारत विरोधी ओली और दूसरी पार्टियां दूर-दूर तक भी नजर नहीं आ रही हैं और बेहद पिछड़ती हुई नजर आ रही हैं।
'ईरान ने ट्रंप और बाइडन की हत्या के लिए मुझे हायर किया', पाकिस्तानी शख्स का सनसनीखेज खुलासा

'ईरान ने ट्रंप और बाइडन की हत्या के लिए मुझे हायर किया', पाकिस्तानी शख्स का सनसनीखेज खुलासा

 'ईरान ने ट्रंप और बाइडन की हत्या के लिए मुझे हायर किया', पाकिस्तानी शख्स का सनसनीखेज खुलासा


अमेरिकी अदालत में 47 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट पर ईरान के साथ मिलकर शीर्ष अमेरिकी राजनेताओं, जिनमें ट्रंप भी शामिल हैं, की हत्या की साजिश ...और पढ़ें






 मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी न्यायालय में एक 47 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट के खिलाफ सनसनीखेज मुकदमा शुरू हुआ है। आसिफ पर ईरान के साथ मिलकर अमेरिका में शीर्ष राजनेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। इसमें राष्ट्रपति ट्रंप का नाम भी शामिल है।


अभियोजन पक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट अप्रैल 2024 में अमेरिका पहुंचा और नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' की व्यवस्था करने की कोशिश की। इस दौरान आशिफ ने ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वह सुपारी किलर ढूंढने में सक्षम समझता था।
जिसे दी सुपारी वही बना मुखबिर

लेकिन वह व्यक्ति बाद में FBI का मुखबिर बन गया और पूरी बातचीत रिकॉर्ड की गई। अमेरिकी अदालत में बताया गया कि मर्चेंट ने 5,000 डॉलर एडवांस राशि के तौर पर दो लोगों को दिए, जिन्हें वह सुपारी किलर (पेशेवर हत्यारा) समझ रहे थे। लेकिन वे दोनों FBI के अंडरकवर एजेंट निकले।


आसिफ मर्चेंट जिन लोगों के हत्या की साजिश रच रहा था, उसमें वर्तमान राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प, तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन और पूर्व राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार और पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत निक्की हेली शामिल थीं। आसिफ ने अपनी गवाही में स्वीकार करते हुआ कहा वह ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहता था।

ईरानी लोगों से था डर

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, आसिफ मर्चेंट ने अमेरिकी कोर्ट में कहा- मैं यह काम इतनी स्वेच्छा से नहीं करना चाहता था। उसने दावा किया कि उसने तेहरान में रह रहे अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए मजबूरी में इस साजिश में हिस्सा लिया। क्योंकि मेरे पास इसके लिए कोई और चारा नहीं था।

ईरान के शीर्ष लीडर की हत्या का बदला लेने के लिए रची गई थी साजिश

अमेरिकी न्याय विभाग ने आसिफ मर्चेंट पर आरोप लगाया है कि उसने ट्रंप और अन्य राजनेताओं की हत्या की योजना के तहत अमेरिका के भीतर लोगों की भर्ती करने की कोशिश की। यह साजिश अमेरिका द्वारा ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए रची गई थी। ईरान में सैन्य और आर्थिक शक्ति के साथ-साथ एक मजबूत खुफिया नेटवर्क होने के कारण 'रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्ब्स' (IRGC) की वहां केंद्रीय भूमिका है।
 क्या नपुंसक थे खामेनेई के बेटे मोजतबा? रिपोर्ट में दावा- इलाज के लिए गए थे लंदन

क्या नपुंसक थे खामेनेई के बेटे मोजतबा? रिपोर्ट में दावा- इलाज के लिए गए थे लंदन

 क्या नपुंसक थे खामेनेई के बेटे मोजतबा? रिपोर्ट में दावा- इलाज के लिए गए थे लंदन



ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अतीत से जुड़े निजी स्वास्थ्य खुलासे सामने आए हैं। विकीलीक्स के राजनयिक दस्तावेजों के अनुसार, उन्हें अपनी शुर ...और पढ़ें





 ईरान के सुप्रीम लीडर खामनेई की मौत के बाद 88 सदस्यों वाली असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा होसैनी खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लिया है। मोजतबा खामेनेई के अतीत से जुड़े कुछ पुराने और विवादित राजनयिक खुलासे कारण चर्चा का विषय बने हुए हैं।


दरअसल, राजनयिक खुलासों से यह पता चला अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा को अपने शुरुआती वैवाहिक जीवन में कुछ व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याओं (नपुंसकता) का सामना करना पड़ा था, जिसके लिए उन्हें लंदन में इलाज कराना पड़ा था।
राजनयिक दस्तावेजों में हुआ खुलासा

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह बात विकीलीक्स द्वारा 2000 के दशक के अंत में प्रकाशित अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों से सामने आई है। मोजतबा खामेनेई को अपनी पत्नी के साथ गर्भधारण करने में कठिनाई होने के बाद लंदन के वेलिंगटन और क्रॉमवेल अस्पतालों में कई बार इलाज कराना पड़ा।

मोजतबा खामेनेई ने कम से कम चार बार क्लीनिक में भर्ती होने पड़ा था, जिसमें एक बार दो महीने का लंबा प्रवास भी शामिल है, जिसके बाद आखिरकार वह अपनी पत्नी को गर्भवती करने में कामयाब हुS।

मोजतबा खामेनेई के साथ यह समस्या दो अस्थायी विवाह के बाद आई, जो इस्लामी कानून के तहत अनुमत हैं ताकि पुरुष और महिलाएं धार्मिक रूप से अच्छे रहते हुए बिना किसी प्रतिबद्धता के यौन संबंध बना सकें।
बिट्रेन में हुआ था इलाज

दो अस्थायी विवाह के बाद मजलिस के पूर्व अध्यक्ष हदाद आदेल की बेटी से मोजतबा का विवाह हुआ। मोजतबा के फैमिली को उनसे जल्दी संतान की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें अपनी नपुंसकता के लिए चार बार ब्रिटेन जाना पड़ा। जहां इलाज के दौरान मोजतबा की नपुंसकता दूर हो गई और उनकी पत्नी गर्भवती हो गई। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उसके कितने बच्चे हुए।

कौन हैं मोजतबा खामेनेई

मोजतबा खामेनेई (56 वर्ष) एक मध्यम स्तर के शिया धर्मगुरु हैं और लंबे समय से पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका निभाते आए हैं। वे IRGC और बसिज मिलिशिया से गहरे जुड़े हुए माने जाते हैं।

हालांकि, इस नियुक्ति पर विवाद है क्योंकि ईरान की इस्लामी क्रांति की मूल भावना में वंशानुगत उत्तराधिकार को खारिज किया जाता है, और कई कट्टरपंथी भी इसे "राजशाही जैसा" मानकर विरोध कर सकते हैं।

मोजतबा की धार्मिक योग्यता (हुज्जतुल इस्लाम रैंक) को भी सर्वोच्च नेता के पद के लिए अपर्याप्त माना जा रहा है, लेकिन आईआरजीसी के समर्थन ने इसे मुमकिन बना दिया।
क्या गैरकानूनी है US-इजरायल का ईरान पर अटैक? खामेनेई की मौत पर उठे सवाल, जानिए युद्ध के नियम

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अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसमें सर्वोच्च नेता खामेनेई मारे गए। ट्रंप ने इसे ईरान के खतरे को खत्म करने के लिए जरूरी बताया, पर आलोचक ...और पढ़ें






अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे ईरान के खतरे को खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए जरूरी बताया है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमला किया है। 1,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले हुए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष अधिकारी मारे गए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसे ईरान के खतरे को खत्म करने और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए जरूरी बताया है, लेकिन आलोचक इसे अवैध कदम मान रहे हैं, इसके साथ ही कह रहे हैं कि किसी राष्ट्रपति की हद किसी दूसरे देश पर आक्रमण करने की नहीं है।


ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पहले हमला करने वाला था, इसलिए यह कार्रवाई अमेरिका, उसके विदेशी ठिकानों और सहयोगियों की रक्षा के लिए की गई। उन्होंने बिना सबूत के कहा कि ईरान एक महीने में परमाणु हथियार हासिल कर सकता था, जबकि कुछ महीने पहले उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह तबाह कर दिया है।
ट्रंप ने हमले के उद्देश्यों में बदलाव दिखाया है। कभी उन्होंने इसे इमिनेंट खतरे के खिलाफ बताया, तो कभी ईरान के शासन को बदलने या उसके लोगों को आजाद करने की बात की। कई दावे अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स से मेल नहीं खाते।
वॉर पावर्स रेजोल्यूशन क्या कहता है?

1973 का वॉर पावर्स रेजोल्यूशन (WPR) राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई पर अंकुश लगाता है। इसके अनुसार, राष्ट्रपति कांग्रेस की ओर से युद्ध घोषित करने, विशेष अनुमति देने या अमेरिकी धरती/सेना पर हमले के जवाब में ही सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं।


राष्ट्रपति को कांग्रेस को रिपोर्ट देनी पड़ती है, जो ट्रंप प्रशासन ने शुरू कर दी है। अगर बिना अनुमति के कार्रवाई हो तो 60 दिनों में सेना वापस बुलानी पड़ती है, जब तक कांग्रेस इसे बढ़ाए नहीं। कांग्रेस के दोनों पक्षों के सदस्य इस हफ्ते ऐसी कार्रवाई रोकने के लिए विधेयक लाने की योजना बना रहे हैं।

किसे युद्ध घोषित करने का अधिकार है?

अमेरिकी संविधान में कांग्रेस को युद्ध घोषित करने का अधिकार है, जबकि राष्ट्रपति सेना के कमांडर-इन-चीफ होते हैं और विदेश नीति संभालते हैं। कई राष्ट्रपतियों ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के छोटे-मोटे हमले किए हैं, जब वे राष्ट्रीय हित में लगे हों। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान पर यह बड़े पैमाने का हमला संविधान की सीमाओं को पार कर रहा है, क्योंकि यह युद्ध जैसा है। यह ट्रंप की सैन्य शक्ति की सीमा को परख रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, देशों को दूसरे देश पर बल प्रयोग या धमकी से बचना चाहिए। बल प्रयोग की इजाजत सिर्फ UN सुरक्षा परिषद की मंजूरी से या सशस्त्र हमले के जवाब में आत्मरक्षा में मिलती है। यहां न तो UNSC की मंजूरी है और न ही ईरान ने पहले हमला किया था।


प्री-एम्प्टिव सेल्फ-डिफेंस का कॉन्सेप्ट है जिसमें अगर कोई इमिनेंट और भारी हमला होने वाला हो तो कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन अमेरिका ने इसके ठोस सबूत नहीं दिए। अमेरिका के पास UNSC में वीटो पावर है, जिससे वह खुद को बचा सकता है। कई देश इसे अवैध मान रहे हैं।

खामेनेई की हत्या वैध थी या नहीं?

खामेनेई की मौत पर कानूनी बहस है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल ने असल हमला किया, जबकि अमेरिका ने खुफिया जानकारी और सपोर्ट दिया। 1981 में रोनाल्ड रीगन ने एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 12333 जारी किया था, जो अमेरिकी सरकार या उसके एजेंट्स द्वारा हत्या पर रोक लगाता है। खासकर शांति काल में नेता की हत्या को Assassination माना जाता है। लेकिन अगर सशस्त्र संघर्ष चल रहा हो तो नेता को मारना युद्ध का वैध हिस्सा हो सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मामला साफ नहीं है, क्योंकि हमला बिना युद्ध घोषणा के शुरू हुआ।
'बिना रहम के ईरान पर मिसाइलों की बारिश करता रहेगा अमेरिका', ट्रंप के सहयोगी का दावा

'बिना रहम के ईरान पर मिसाइलों की बारिश करता रहेगा अमेरिका', ट्रंप के सहयोगी का दावा

 'बिना रहम के ईरान पर मिसाइलों की बारिश करता रहेगा अमेरिका', ट्रंप के सहयोगी का दावा


अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के प्रमुख ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ईरान में बिना किसी संयम के ऑपरेशन चला रही है, जिससे आसमान पर पूर्ण वर्चस्व स् ...और पढ़ें






ईरान पर अमेरिकी सेना बरसा रही 'मौत और विनाश' (फोटो- रॉयटर्स)

HIGHLIGHTS

अमेरिकी सेना ईरान में 'बिना संयम' ऑपरेशन चला रही है


ईरान ने अमेरिका पर 'मानवता के खिलाफ अपराध' का आरोप लगाया


 मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिका और ईरान में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन प्रमुख ने बुधवार को घोषणा की कि अमेरिकी सेना ईरान में "बिना किसी संयम" के ऑपरेशन चला रही है और आसमान पर पूर्ण वर्चस्व स्थापित कर "मौत और विनाश" बरसा रही है।


एक तरफ जहां व्हाइट हाउस अमरिकी सैनिकों के इस अभियान को रणनीतिक सफलता बता रहा है, तो वहीं दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका पर आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए इसे 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया है।
बिना किसी दया के कर रहें कार्रवाई

बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान में सैकड़ों नागरिकों की मौत सहित हताहतों की संख्या बढ़ने के साथ ही अमेरिकी सेना युद्ध के नियमों में ढील दे रही है और बिना किसी खास संयम (दया) के कार्रवाई कर रही है। हम उन्हें तब मुक्के मार रहे हैं, जब वे गिरे हुए हैं, और यही सही तरीका है।


ईरान के ऊपर अमेरिकी जेट

हेगसेथ ने कहा, "ईरानी नेता हर मिनट, हर दिन केवल अमेरिकी और इजरायली हवाई शक्ति को ही देख रहे हैं, जब तक कि हम यह तय नहीं कर लेते कि यह सब खत्म हो गया है, और ईरान इसके बारे में कुछ भी नहीं कर पाएगा। ईरान के ऊपर अमेरिकी जेट विमान आसमान को नियंत्रित कर रहे हैं, लक्ष्य चुन रहे हैं और दिन भर आसमान से मौत और विनाश बरसा रहे हैं।"

ईरान ने लगाया ये आरोप

वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने एक्स पर लिखा, "हेगसेठ की टिप्पणियां युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों की स्वीकारोक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। केवल नाजी मानसिकता वाला व्यक्ति ही अपने आका की इच्छाओं को पूरा करने के लिए ठंडे खून से किसी दूसरे राष्ट्र पर मौत और विनाश का कहर बरपा सकता है।
 भारत के मेहमान पर हमला हुआ, अमेरिका को भारी कीमत चुकानी होगी'; Iris Dena पर अटैक के बाद ईरान की चेतावनी

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ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में उसके युद्धपोत आईआरआईएस डेना को बिना चेतावनी के टॉरपीडो से डुबो दिया, जिसमें 87 नाविक मार ...और पढ़ें






 ईरान ने कहा है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत को बिना चेतावनी के टॉरपीडो से डुबो दिया है। इससे 87 नाविक मारे गए। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे 'समुद्र में क्रूरता' बताया है और कहा कि अमेरिका इसकी भारी कीमत चुकाएगा।


गौरतलब है कि युद्धपोत आईआरआईएस डेना कुछ हफ्ते पहले भारत में हुए नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने गया था और वापस लौट रहा था। अरागची ने एक्स पर लिखा, "अमेरिका ने ईरान की सीमाओं से 2,000 मील दूर अंतरराष्ट्रीय जल में यह क्रूरता की। फ्रिगेट डेना भारत की नौसेना का गेस्ट था, जिसमें लगभग 130 नाविक सवार थे। इसे बिना किसी चेतावनी के टॉरपीडो से मारा गया।"
कब हुआ हमला?

ये हमला श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ। इसके बाद श्रीलंका की नौसेना ने डिस्ट्रेस कॉल मिलने पर बचाव अभियान चलाया। 32 नाविकों को बचाया गया है, जबकि 87 शव बरामद हुए। कुछ रिपोर्टों में 61 लापता बताए गए हैं। कुल मिलाकर जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे।

अमेरिकी रक्षा मंत्री का बयान

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में ब्रिफिंग में कहा, "एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया, जो सोच रहा था कि अंतरराष्ट्रीय जल में वह सुरक्षित है। टॉरपीडो से यह 'शांत मौत' हुई।" उन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका द्वारा दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से डुबोने का पहला मामला बताया है।


पेंटागन ने हमले का वीडियो जारी किया, जिसमें टॉरपीडो लगने से जहाज का पिछला हिस्सा उड़ गया, जहाज पानी से ऊपर उठा और स्टर्न से डूबना शुरू हो गया। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका युद्ध जीतने के लिए लड़ रहा है।
 'हमने कोई मिसाइल नहीं दागी', NATO के एक्शन के बाद ईरान की सफाई

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ईरान और तुर्किए के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। तुर्किए ने दावा किया कि नाटो ने पूर्वी भूमध्य सागर में ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को नष्ट कर ...और पढ़ें





ईरान और तुर्किए के बीच जारी कूटनीतिक तनाव उस वक्त चरम पर पहुंच गया, जब तुर्किए के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि नाटो की रक्षा प्रणालियों ने ईरान से दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को पूर्वी भूमध्य सागर के ऊपर नष्ट कर दिया है।


एक ओर तुर्किए ने इस कार्रवाई को संप्रभुता के खिलाफ एक शत्रुतापूर्ण कार्रवाई बताते हुए ईरान को चेतवानी दी, वहीं ईरान के सशस्त्र बलों ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने तुर्किए की ओर कोई मिसाइल नहीं दागी है।
नाटो ने किया नष्ट

दरअसल, बुधवार को तुर्किए रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ईरान से दागा गया एक बैलिस्टिक गोला-बारूद, जिसे इराकी और सीरियाई हवाई क्षेत्र से गुजरते हुए तुर्की हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ते हुए देखा गया था, उसे पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात नाटो की वायु और मिसाइल रक्षा संपत्तियों द्वारा समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया।"
हालांकि, तुर्किये ने यह भी कहा कि यह स्पष्ट नहीं था कि मिसाइल का निशाना कहां था। इसमें कहा गया है कि कोई हताहत या घायल नहीं हुआ है, और यह भी कहा गया है कि अंकारा अपने खिलाफ किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है, इसके साथ ही संबंधित पक्षों को संघर्ष को बढ़ाने से बचने की चेतावनी दी गई है।

तुर्किए के राष्ट्रपति की चेतावनी

तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश अपने नाटो सहयोगियों के साथ परामर्श करके सभी आवश्यक सावधानियां बरत रहा है और इस तरह की घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी जारी कर रहा है।

शांति और सुकून से रहना चाहते हैं तो...

तुर्किए के राष्ट्रपति ने कहा, "यदि हम एक राष्ट्र के रूप में शांति और सुकून से रहना चाहते हैं तो हमें अपनी निवारक क्षमताओं को लगातार बढ़ाना होगा। इन कठिन समयों में हम अपनी सीमाओं और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा के संबंध में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।"

ईरान ने किया इनकार

हालांकि, तुर्किए द्वारा जारी बयान के बाद ईरान के सशस्त्र बलों की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के सशस्त्र बलों ने तुर्किए क्षेत्र की ओर किसी भी मिसाइल को दागने से इनकार किया है और इस बात पर जोर दिया है कि ईरान तुर्की की संप्रभुता का सम्मान करता है।
US-इजरायल के हमलों के खिलाफ ईरान का एक्शन, 16वीं बार किया अटैक

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ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने दोहराया कि ईरान अपनी रक्षा के लिए दृढ़ है और यूएस-इजरायल के हमलों का सामना करेगा। ...और पढ़ें





 ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक बार फिर से दोहराया कि तेहरान अपनी रक्षा करने और यूएस-इजरायल का हमले का सामना करने के लिए पक्का इरादा रखता है। इस बात की जानकारी राज्य प्रसारक प्रेस टीवी के हवाले से दी गई।


इससे पहले अराघची ने एक्स पर पोस्ट किया था कि, “हमारे पास अपने पूरब और पश्चिम में यूएस मिलिट्री की हार की स्टडी करने के लिए दो दशक का समय था। हमने उसी हिसाब से सबक शामिल किए हैं। हमारी राजधानी में बमबारी का हमारी युद्ध करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है। हमारा डीसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस हमें यह तय करने में मदद करता है कि युद्ध कब और कैसे खत्म होगा।”


'सेल्फ डिफेंस हमारा अधिकार'

ईरानी सरकार ने यह भी कहा, “हमने कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया और न ही किसी पड़ोसी देश पर हमला किया है। हालांकि, यूनाइटेड नेशंस चार्टर के तहत सेल्फ-डिफेंस हमारा अंदरूनी अधिकार है। ईरान का जवाब पूरी तरह से उन ठिकानों पर है जहां से हमारे इलाके के खिलाफ कार्रवाई की गई है।”

16वीं बार हमला

इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत 16वीं बार हमले को अंजाम देने की घोषणा की, जिसमें ईरान के खिलाफ पिछले हमलों के बदले में इस इलाके में यूएस और इजरायली सेनाओं को निशाना बनाया गया।
 'गंभीर चिंता का विषय', ईरानी न्यूक्लियर बम प्रोग्राम को लेकर IAEA चीफ ने कही बड़ी बात

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IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने ट्रंप के ईरान के परमाणु हथियार बनाने के दावों को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु बम बनाने का कोई सबूत न ...और पढ़ें






इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी। (फाइल फोटो)


IAEA ने ईरान के परमाणु हथियार बनाने के सबूत नहीं पाए।


हथियार-ग्रेड यूरेनियम स्टॉक और पहुंच की कमी चिंताजनक।


ईरान के सहयोग बिना कार्यक्रम शांतिपूर्ण नहीं माना जा सकता।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने ट्रंप प्रशासन के उन दावों को चुनौती दी कि ईरान सक्रिय रूप से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान का न्यूक्लियर-ग्रेड यूरेनियम का स्टॉक एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।


एक्स पर एक पोस्ट में ग्रॉसी ने कहा, “ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर अपनी रिपोर्ट में मैं बहुत साफ हूं। हालाकि ईरान के न्यूक्लियर बम बनाने का कोई सबूत नहीं मिला है, लेकिन उसके पास हथियार जैसे एनरिच्ड यूरेनियम का बड़ा स्टॉक है और मेरे इंस्पेक्टरों को पूरी पहुंच देने से मना करना गंभीर चिंता की बात है। जब तक ईरान बाकी सेफगार्ड के मुद्दों को हल करने में पूरी तरह से सहयोग नहीं करता, एजेंसी यह भरोसा नहीं दे सकती कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।”


'न्यूक्लियर हथियार के नहीं मिले सबूत'

इससे पहले सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में ग्रॉसी ने विस्तार से बताया कि IAEA को ईरान में किसी सिस्टमैटिक न्यूक्लियर वेपन प्रोग्राम का कोई संकेत नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि लगभग मिलिट्री-ग्रेड यूरेनियम का जमा होना और ट्रांसपेरेंसी की कमी चिंता की बात है, लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान का तुरंत न्यूक्लियर वेपन बनाने का कोई प्लान है।


'एजेंसी तथ्यों का करती है आंकलन'

ग्रॉसी ने आगे कहा, “हमारे पास चिंता के कई कारण हैं, लेकिन कल या परसों कोई बम नहीं था। यूएस या इजरायल जैसे देश इन गतिविधियों को सीधे न्यूक्लियर हथियार बनाने के मकसद से देख सकते हैं, लेकिन IAEA इरादों को नहीं आंकता - यह तथ्यों का आकलन करता है।”


IAEA चीफ की यह बात ऐसे समय में आई है जब यूएस प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका का ईरान पर हमला जरूरी था। उन्होंने ईरान सरकार को “पागल लोग” बताया, जो अगर बम तक पहुंच पाते तो उसका इस्तेमाल करते।
 'नहीं दे सकते सपोर्ट', अमेरिकियों को मिडिल ईस्ट से बाहर निकालने में US को करना पड़ रहा स्ट्रगल

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी नेताओं पर सैन्य हमलों की पुष्टि की, जिसके बाद इजरायल ने भी एक ईरानी कंपाउंड पर हमला किया। ...और पढ़ें





मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव से अमेरिकियों को निकालने में परेशानी।

 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि हाल ही में मिलिट्री हमलों में ईरानी नेताओं के एक और ग्रुप को निशाना बनाया गया है। इजरायल ने ईरान के अगले सुप्रीम लीडर को चुनने वाली बॉडी से जुड़े एक कंपाउंड पर हमला किया। हालांकि, ईरानी स्टेट मीडिया ने बताया कि हमले से पहले बिल्डिंग को खाली करा लिया गया था।


बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बाद यूएस ने तीन देशों में अपनी एम्बेसी बंद कर दी हैं, मिडिल ईस्ट में अपने डिप्लोमैटिक स्टाफ को कम कर दिया है और अमेरिकी नागरिकों से इस इलाके को छोड़ने की अपील की है।
1500 लोगों ने मांगी मदद

यूएई ने पड़ोसी देशों के साथ सेफ एयर कॉरिडोर खोलने की घोषणा की है ताकि फंसे हुए नागरिकों को निकालने में आसानी हो, क्योंकि देश फंसे हुए नागरिकों को दूसरी जगह भेजने का काम कर रहे हैं। यूएस उन अमेरिकियों की मदद कर रहा है जो इस इलाके से निकलना चाहते हैं। इनमें 1,500 से ज्यादा लोग शामिल हैं जिन्होंने मदद मांगी है।


अमेरिकियों के पास कम विकल्प

इजरायल में अमेरिकियों के पास खास तौर पर कम ऑप्शन हैं। इजरायल में यूएस एम्बेसडर माइक हकाबी ने चेतावनी दी है कि एम्बेसी जमीन पर इवैक्युएशन सपोर्ट नहीं दे सकती। प्रेसिडेंट ट्रंप ने माना कि हमलों से पहले मिडिल ईस्ट में अमेरिकियों के लिए कोई फॉर्मल इवैक्युएशन प्लान नहीं था, जिससे चल रहे मिलिट्री ऑपरेशन के बीच नागरिकों को ले जाने में आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियों पर रोशनी पड़ी।

बदलते हालात इस इलाके में बढ़ती अस्थिरता और यूएस, इजरायल और ईरान के बीच दुश्मनी बढ़ने से विदेशी नागरिकों के सामने आने वाले खतरों को दिखाते हैं।
 मिडिल-ईस्ट में नई हलचल की आहट, क्या कुर्द बलों को हथियार देगी CIA? ईरान पर दबाव बनाने का बड़ा प्लान

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मिडिल-ईस्ट में तनाव के बीच, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ईरान के भीतर अस्थिरता बढ़ाने के लिए कुर्द बलों को हथियार देने पर विचार कर रही है। ट्रंप प्रशासन ...और पढ़ें






कुर्द बलों को ईरान में हथियार देने पर विचार कर रहा है अमेरिका। (AI Generated Image)


CIA ईरान में कुर्द बलों को हथियार देने पर विचार कर रही है।


योजना का उद्देश्य ईरान के भीतर अस्थिरता बढ़ाना है।


यह कदम क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को जटिल बना सकता है।


 मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक नई रणनीतिक हलचल सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ईरान के भीतर अस्थिरता बढ़ाने के उद्देश्य से कुर्द बलों को हथियार उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।


इस योजना को लेकर ट्रंप प्रशासन ने इराक के कुर्द नेताओं और ईरानी विपक्षी समूहों से सक्रिय बातचीत की है।

हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह कदम ईरान के पश्चिमी इलाकों में दबाव बढ़ाने और तेहरान की सैन्य ताकत को कई मोर्चों पर उलझाने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।


ईरान के पश्चिमी मोर्चे पर बढ़ सकता है दबाव

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत कुर्द सशस्त्र समूह ईरानी सुरक्षा बलों को सीमावर्ती क्षेत्रों में उलझाए रख सकते हैं। इससे बड़े शहरों से सुरक्षा बलों की तैनाती कम हो सकती है और नागरिक विरोध प्रदर्शनों को गति मिलने की संभावना बन सकती है।

एक वरिष्ठ ईरानी कुर्द अधिकारी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी ईरान में जमीनी स्तर पर कार्रवाई देखने को मिल सकती है। उनका दावा है कि उन्हें अमेरिका और इजरायल से समर्थन मिलने की उम्मीद है।


दूसरी ओर, ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने हाल ही में कुर्द ठिकानों पर दर्जनों ड्रोन से हमले करने का दावा किया है। इससे साफ है कि तेहरान इस संभावित मोर्चे को लेकर सतर्क है।

इराकी कुर्दिस्तान की भूमिका अहम

यदि अमेरिकी योजना आगे बढ़ती है तो इसके लिए इराक के कुर्द प्रशासन की सहमति जरूरी होगी। हथियारों की आपूर्ति और अभियानों के लिए इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र को आधार बनाने पर विचार किया जा रहा है।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक प्रस्ताव यह भी है कि कुर्द समूह उत्तरी ईरान में किसी सीमित इलाके पर कब्जा कर ‘बफर जोन’ बना सकते हैं। हालांकि यह विकल्प बेहद संवेदनशील माना जा रहा है और इससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो सकते हैं।

कुर्द राजनीति की अंदरूनी चुनौतियां

कुर्द समुदाय दुनिया के सबसे बड़े जातीय समूहों में से एक है, जिनका अपना स्वतंत्र राष्ट्र नहीं है। लगभग 2.5 से 3 करोड़ कुर्द तुर्किये, इराक, ईरान, सीरिया और आर्मेनिया के हिस्सों में फैले हुए हैं।


हालांकि ईरानी कुर्द सशस्त्र गुटों के पास हजारों लड़ाके मौजूद बताए जाते हैं, लेकिन उनके बीच वैचारिक मतभेद और आपसी प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। यही कारण है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी कुछ अधिकारी इस संभावित सहयोग को लेकर सतर्क हैं।

क्या बदलेगा क्षेत्रीय समीकरण?

अगर यह योजना अमल में आती है तो ईरान के लिए यह एक अतिरिक्त सैन्य और राजनीतिक चुनौती बन सकती है। इससे पहले भी क्षेत्रीय शक्तियों के बीच प्रॉक्सी रणनीतियों ने हालात को और जटिल बनाया है।


फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देगा या नहीं। लेकिन इतना तय है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में नई भू-राजनीतिक हलचल को जन्म दे सकता है।
 ईरान के मशहद में दफनाया जाएगा खामेनेई का शव, ईरानी मीडिया का दावा

ईरान के मशहद में दफनाया जाएगा खामेनेई का शव, ईरानी मीडिया का दावा

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ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका-इजरायल के साझा हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में दफनाया जाएगा। मश ...और पढ़ें






 अमेरिका-इजरायल के साझा हमले में शनिवार को मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को पवित्र शहर मशहद में दफनाया जाएगा। इस बात का दावा ईरानी मीडिया ने किया है।

वह मूल रूप से ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद के रहने वाले थे, जहां उनके पिता इमाम रजा की दरगाह में दफन हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अपने टेलीग्राम अकाउंट पर बताया कि दफनाने से पहले तेहरान में एक बड़ा विदाई समारोह होगा। हालांकि, दफनाने की तारीख की घोषणा नहीं की गई।

क्यों खास है मशहद?

दफनाने के लिए मशहद को चुनना बहुत बड़ा सिंबॉलिक है। मारे गए लीडर का जन्मस्थान होने के अलावा यह आठवें शिया इमाम की मजार का घर भी है, जो इसे न सिर्फ देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक बनाता है, बल्कि ईरान की आस्था का केंद्र बनाता है।
ईरान में सबसे लंबे समय तक सर्वोच्च पद पर रहने वाले नेता

खामेनेई ईरान के सर्वोच्च पद सबसे लंबे समय तक रहने वाले नेता थे और 1979 की क्रांति के बाद से इस पद पर रहने वाले दूसरे व्यक्ति थे। सबसे बड़े नेता के तौर पर मिलिट्री, इकॉनमी और स्कूल सिस्टम समेत सभी बड़े राष्ट्रीय मुद्दों पर आखिरी फैसला उनका ही होता था।


वह सेंट्रल तेहरान में एक लीडरशिप कंपाउंड को टारगेट करके किए गए अमेरिका और इजरायली जॉइंट एयरस्ट्राइक के दौरान मारे गए। वाशिंगटन और येरुशलम से शुरुआती रिपोर्ट के बाद, ईरानी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने 1 मार्च, 2026 को उसकी मौत की पुष्टि की।
 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कर लिया पूरा कब्जा', यूएस-इजरायल से बढ़ते तनाव के बीच ईरान का दावा

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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण का दावा किया है, चेतावनी दी है कि जहाजों को मिसाइलों का सामना करना प ...और पढ़ें





 ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ऐलान किया है कि अब होर्मुज स्ट्रेट पर उसका कंट्रोल है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज वहां से गुजरने की कोशिश करेगा तो उसे मिसाइलों या ड्रोन से नुकसान हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट तेल और गैस शिपमेंट के लिए एक अहम ग्लोबल रूट है।


इससे पहले, आईआरजीसी ने कहा था कि उसने गदर-380 और तलाईह मिसाइलों का इस्तेमाल करके हिंद महासागर में एक यूएस डिस्ट्रॉयर पर हमला किया था। गदर एक मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है जिसकी रेंज 2,000 किलोमीटर तक है। इसे सटीक हमले और तेजी से डिप्लॉयमेंट के लिए डिजाइन किया गया है।


तलाईह मिसाइल की कितनी है क्षमता?

तलाईह एक स्ट्रेटेजिक क्रूज मिसाइल है जो 1,000 किलोमीटर तक के टारगेट तक पहुंच सकती है और उड़ान के बीच में अपने टारगेट को एडजस्ट कर सकती है, जिससे इसका स्ट्रेटेजिक असर बढ़ जाता है।


टैंकर से ईंधन भरते समय विध्वंसक जहाज पर किया हमला

बयान के अनुसार, आईआरसीसी ने दावा किया कि जब विध्वंसक जहाज पर हमला हुआ, तब वह एक अमेरिकी टैंकर से ईंधन भर रहा था। दोनों जहाजों में बड़े पैमाने पर आग लग गई। यह हमला एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसका कोडनेम True Promise 4 है। इसे IRGC ने ईरान पर यूएस और इजरायली हमलों के बदले में शुरू किया था।


आईआरजीसी ने कहा कि उसने कब्जे वाले इलाकों में कई सेंसिटिव और स्ट्रेटेजिक जगहों के साथ-साथ वेस्ट एशिया इलाके में अमेरिकी एसेट्स को भी निशाना बनाया था, जिसमें कतर, यूनाइटेड अरब अमीरात और कुवैत की जगहें शामिल हैं।
 मिसाइल अटैक के बीच दुबई मॉल में घूमते नजर आए क्राउन प्रिंस और UAE के राष्ट्रपति, Video वायरल

मिसाइल अटैक के बीच दुबई मॉल में घूमते नजर आए क्राउन प्रिंस और UAE के राष्ट्रपति, Video वायरल

 मिसाइल अटैक के बीच दुबई मॉल में घूमते नजर आए क्राउन प्रिंस और UAE के राष्ट्रपति, Video वायरल



दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 2 मार्च को दुबई मॉल में देखे गए। गल्फ में बढ़ते तनाव ...और पढ़ें






 यूनाइटेड अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम सोमवार, 2 मार्च को दुबई मॉल में घूमते नजर आए।

ईरान के हमलों के बाद क्राउन प्रिंस का ये वीडियो सामने आया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि उसने ईरान के दर्जनों ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया।
दुबई में हमलों के बीच मॉल में घूमने गए क्राउन प्रिंस

गल्फ में बढ़ते तनाव के बावजूद, क्राउन प्रिंस दुबई मॉल में घूमने गए। ईरान की तरफ से हमले के बाद भी मॉल में लोगों और टूरिस्ट की भीड़ लगी रही।


सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में क्राउन प्रिंस एक छोटी लड़की को अपनी ओर बुलाते हुए दिखे। उन्होंने उस लड़की के परिवार से भी बातचीत की।

यूएई के राष्ट्रपति और दुबई के क्राउन प्रिंस ने सीनियर अधिकारियों और साथी शेखों के साथ मॉल के एक रेस्टोरेंट में खाना भी खाया।


UAE में तनाव कम करने की कोशिश

यूएई के अखबार द नेशनल ने कहा, 'नेताओं की पब्लिक अपीयरेंस ने इस इलाके में बढ़ते तनाव के समय देश की सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी में कॉन्फिडेंस दिखाया।'

क्राउन प्रिंस के इस वीडियो से लोगों में डर के माहौल को कम करने की कोशिश समझा जा सकता है।

ईरान का दुबई पर हमला

इजरायल और ईरान की लड़ाई का खामियाजा यूएई को भी उठाना पड़ रहा है। ईरान खाड़ी देशों में लगातार ड्रोन और मिसाइल से हमले कर रहा है। ईरान ने दुबई में ऑस्ट्रेलियाई बेस अल मिन्हाद पर भी हमला किया।


ऑस्ट्रेलिया ने भी हमले को लेकर बयान जारी किया। ईरान ने दुबई के पास मौजूद ऑस्ट्रेलियाई सैन्य अड्डे पर हमला किया। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने बताया कि ईरानी सेना ने अल मिन्हाद वायु सेना पर हमला किया, लेकिन सभी सैनिक सुरक्षित हैं।
 इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरान के गेराश में भूकंप के झटके

इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरान के गेराश में भूकंप के झटके

 इजरायल-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरान के गेराश में भूकंप के झटके




दक्षिणी ईरान के गेराश में 3 मार्च 2026 को 4.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिसकी गहराई 10 किलोमीटर थी। यूएस-इजरायल संघर्ष के बीच कुछ लोगों ने इसे परमाणु परीक ...और पढ़ें





 यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने बताया कि इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे युद्ध के बीच, मंगलवार को दक्षिणी ईरान के गेराश शहर में 4.3 मैग्नीट्यूड का भूकंप आया।

यूएसजीएस ने कहा कि भूकंप जमीन से 10 किलोमीटर नीचे आया और झटकों से लोगों में घबराहट फैल गई। हालांकि, इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए कुछ लोगों ने अंदाजा लगाया कि क्या ईरान ने न्यूक्लियर टेस्ट किया है? हालांकि, ऐसे दावों का समर्थन करने वाली कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भूकंप का समय

ये भूकंप 3 मार्च, 2026 को लोकल टाइम (UTC+05:30) के हिसाब से दोपहर 12:24 बजे ईरान के गेराश से 52 किमी. उत्तर-पश्चिम में आया। इसका सेंटर लैटीट्यूड 28.036°N और लॉन्गीट्यूड 53.789°E पर था और भूकंप धरती की सतह से 10 किमी. नीचे आया।
सीस्मोलॉजिस्ट बताते हैं कि ईरान के एक्टिव फॉल्ट जोन में इतने बड़े झटके आम हैं और कुदरती भूकंपों से होने वाले सीस्मिक पैटर्न जमीन के नीचे न्यूक्लियर धमाकों से होने वाले पैटर्न से बहुत अलग होते हैं।