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 'इंजन रूम खाली करो...', पहले चेतावनी और फिर गोलीबारी; ट्रंप ने कहा- नाकाबंदी तोड़ रहा था ईरानी जहाज

'इंजन रूम खाली करो...', पहले चेतावनी और फिर गोलीबारी; ट्रंप ने कहा- नाकाबंदी तोड़ रहा था ईरानी जहाज

'इंजन रूम खाली करो...', पहले चेतावनी और फिर गोलीबारी; ट्रंप ने कहा- नाकाबंदी तोड़ रहा था ईरानी जहाज


राष्ट्रपति ट्रंप ने ओमान की खाड़ी में एक ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को जब्त करने की घोषणा की। जहाज ने होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ...और पढ़ें





 राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोमवार को बताया कि ओमान की खाड़ी में एक ईरानी मालवाहक जहाज को रोका गया और बाद में उसे जब्त कर लिया गया। यह घटना तब हुई जब जहाज ने होर्मुज स्ट्रेट के पास अमेरिका द्वारा लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी को पार करने की कोशिश की।


राष्ट्रपति ने कहा कि एक गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस स्प्रुअन्स ने उस जहाज को रुकने की साफ चेतावनी दी थी लेकिन जब ईरानी क्रू ने बात नहीं मानी तो इंजन रूम में छेद करके रोक दिया गया।
अमेरिका की हिरासत में जहाज

अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार, ईरानी जहाज तौस्का लगभग 900 फीट लंबा था और उसका वजन लगभग एक विमानवाहक पोत जितना था। रोके जाने के बाद तौस्का अब अमेरिकी मरीन की हिरासत में है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “तौस्का पर यूएस ट्रेजरी के प्रतिबंध लगे हुए हैं, क्योंकि उसका पहले अवैध गतिविधियों का इतिहास रहा है। जहाज अब पूरी तरह हमारी हिरासत में है और हम देख रहे हैं कि उस पर क्या-क्या है!”
Marinetraffic.com के अनुसार, 'तौस्का' एक कंटेनर जहाज है जो ईरानी झंडे के तहत चल रहा था। छह घंटे पहले तक इसकी स्थिति अरब की खाड़ी में थी।
सीजफायर खत्म होने में बचा कुछ दिन का समय

ईरानी झंडे वाले जहाज को जब्त करने की ट्रंप की घोषणा ऐसे समय में आई है, जब दोनों देशों के बीच संघर्ष-विराम खत्म होने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। इस घटनाक्रम ने उन वार्ताओं के पहले से ही अनिश्चित भविष्य को और भी ज्यादा अनिश्चित बना दिया है, जो पाकिस्तान में होने की संभावना है।
 फिशिंग गैंग पर बड़ा एक्शन, FBI ने तोड़ा 'W3LL' नेटवर्क; हैक किया था हजारों लोगों का अकाउंट

फिशिंग गैंग पर बड़ा एक्शन, FBI ने तोड़ा 'W3LL' नेटवर्क; हैक किया था हजारों लोगों का अकाउंट

 फिशिंग गैंग पर बड़ा एक्शन, FBI ने तोड़ा 'W3LL' नेटवर्क; हैक किया था हजारों लोगों का अकाउंट


एफबीआई और इंडोनेशियाई पुलिस ने मिलकर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क 'W3LL' का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क फिशिंग के जरिए लोगों के अकाउंट ह ...और पढ़ें





 एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसे अमेरिका की जांच एजेंसी FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन) और इंडोनेशिया की पुलिस ने मिलकर तोड़ा है। यह नेटवर्क फिशिंग के जरिए लोगों के अकाउंट हैक करता था और करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देता था।


इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र 'W3LL' नाम का एक खास टूल था, जिसकी मदद से अपराधी नकली लॉगिन पेज बनाकर लोगों से उनके यूजरनेम और पासवर्ड हासिल कर लेते थे। एफबीआई के अधिकारियों ने बताया कि यह सिर्फ साधारण फिशिंग नहीं, बल्कि एक पूरा साइबर क्राइम प्लेटफॉर्म था, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में किया जा रहा था।
वेबसाइट जब्त, आरोपी हिरासत में

इस कार्रवाई के दौरान 'W3LL' से जुड़ी वेबसाइट को जब्त कर लिया गया और उस पर एफबीआई का नोटिस लगा दिया गया। इंडोनेशिया की पुलिस की मदद से इस टूल के मुख्य डेवलपर को हिरासत में लिया गया है, जिसे 'G.L.' के नाम से पहचाना गया है। इसके साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण डोमेन भी जब्त किए गए हैं, जिससे इसके कामकाज पर बड़ा असर पड़ा है।

यह टूल 'W3LL स्टोर' नाम के एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए बेचा जाता था। इसके जरिए हजारों लोगों के अकाउंट हैक किए गए। FBI के अनुसार, 2023 तक इस प्लेटफॉर्म पर 25000 से ज्यादा हैक किए गए अकाउंट मौजूद थे। वहीं 2023 और 2024 के बीच करीब 17000 और लोगों को निशाना बनाया गया। कुल मिलाकर, इस नेटवर्क के जरिए लगभग 20 मिलियन डॉलर की ठगी की गई या कोशिश की गई।

कैसे काम करता था नेटवर्क?

इस टूल को अपराधियों को करीब 500 डॉलर में बेचा जाता था। इसमें रेफरल के लिए 10 प्रतिशत कमीशन और अन्य साझेदारों के लिए मुनाफे का हिस्सा तय किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि इस टूल का डेवलपर खुद भी हैक किए गए अकाउंट्स को इकट्ठा कर बेचता था, जिससे इसका दायरा और बढ़ गया।


एफबीआई ने इस नेटवर्क को खत्म कर दिया है, लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यूरोप की साइबर सुरक्षा कंपनी सेकोइया ने बताया कि 'स्नीकी 2एफए' जैसे अन्य टूल भी मौजूद हैं, जो इसी तरह काम करते हैं। ये टूल टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए चलाए जाते हैं और नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को आसानी से धोखा देते हैं।
 यूरोप का मोस्ट वॉन्टेड गैंग लीडर दुबई में कैसे हुआ गिरफ्तार? सालों से था फरार

यूरोप का मोस्ट वॉन्टेड गैंग लीडर दुबई में कैसे हुआ गिरफ्तार? सालों से था फरार

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यूरोप के सबसे बड़े अपराधियों में से एक, गैंग लीडर डेनियल किनाहन को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है। कई सालों से फरार किनाहन, आयरलैंड और संयुक्त अरब अ ...और पढ़ें




डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कई सालों तक फरार रहने के बाद यूरोप के सबसे बड़े अपराधियों में गिने जाने वाले गैंग लीडर को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। डेनियल किनाहन को दुबई में एक संयुक्त अभियान के दौरान पकड़ा गया।


यह कार्रवाई आयरलैंड और संयुक्त अरब अमीरात की एजेंसियों ने मिलकर की। दुबई पुलिस ने एक 'आयरिश फरार अपराधी' की गिरफ्तारी की पुष्टि की, हालांकि नाम नहीं बताया गया। बाद में आयरिश मीडिया ने उसकी पहचान डेनियल किनाहन के रूप में की। आयरलैंड की पुलिस ने बताया कि 40 से ज्यादा उम्र के एक व्यक्ति को अदालत के वारंट के आधार पर हिरासत में लिया गया है।

लंबे समय से चल रही थी तलाश

डेनियल किनाहन पर संगठित अपराध और ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े कई आरोप हैं। वह किनाहन कार्टेल का प्रमुख माना जाता है, जो यूरोप में ड्रग्स तस्करी का बड़ा नेटवर्क चलाता है। उसे आयरलैंड में एक लंबे समय से चल रहे गैंगवार के मामले में पेश किया जाएगा। इस संघर्ष में 2015 से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। किनाहन कई सालों से गिरफ्तारी से बचता रहा और लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा।

डेनियल किनाहन ने आयरलैंड तब छोड़ा था, जब डबलिन के एक होटल में बॉक्सिंग इवेंट के दौरान उस पर हमला हुआ था। इस हमले में उसके करीबी डेविड बर्न की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद वह पहले स्पेन और फिर संयुक्त अरब अमीरात चला गया, जहां से वह अपना नेटवर्क चलाता रहा। कई देशों की एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थीं और उसके खिलाफ सबूत जुटा रही थीं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कार्रवाई

साल 2022 में अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने किनाहन कार्टेल के नेताओं की गिरफ्तारी या उनके नेटवर्क को खत्म करने के लिए 50 लाख डॉलर का इनाम घोषित किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कार्टेल यूरोप में कोकीन सप्लाई के बड़े हिस्से को नियंत्रित करता है और इसे एक 'सुपर कार्टेल' का हिस्सा भी माना जाता है।
 सीजफायर उल्लंघन, ज्यादा डिमांड... ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे राउंड की बातचीत से क्यों किया इनकार?

सीजफायर उल्लंघन, ज्यादा डिमांड... ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे राउंड की बातचीत से क्यों किया इनकार?

 सीजफायर उल्लंघन, ज्यादा डिमांड... ईरान ने अमेरिका के साथ दूसरे राउंड की बातचीत से क्यों किया इनकार?



ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरान ने अमेरिका पर अत्यधिक मांगें रखने, रुख बदलने और विरोधाभ ...और पढ़ें





अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की बातचीत पर अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल इस वार्ता में शामिल होने की योजना नहीं बना रहा है। यह जानकारी ईरान की सरकारी मीडिया ने दी है।


ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने कहा कि इस्लामाबाद में दूसरे दौर की बातचीत को लेकर जो खबरें चल रही हैं, वे सही नहीं हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने वार्ताकारों को पाकिस्तान भेजने का आदेश दिया है, जबकि मिडिल ईस्ट में युद्धविराम 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है।

अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

ईरान ने अमेरिका पर अत्यधिक मांगें रखने का आरोप लगाया है। उसके मुताबिक, अमेरिका की अव्यावहारिक शर्तें, बार-बार रुख बदलना और विरोधाभासी बयानबाजी बातचीत में बाधा बन रही हैं।

ईरान ने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी युद्धविराम के समझौते का उल्लंघन है और इससे हालात और खराब हो रहे हैं। तेहरान का कहना है कि इन परिस्थितियों में सकारात्मक बातचीत की संभावना बहुत कम है।
'ब्लेम गेम' और बढ़ता तनाव

ईरान ने अमेरिका पर 'ब्लेम गेम' खेलने का भी आरोप लगाया है। उसने कहा कि अमेरिका जानबूझकर यह खबर फैला रहा है कि ईरान बातचीत में शामिल होगा, ताकि उस पर दबाव बनाया जा सके।


इस बीच, अमेरिकी नाकेबंदी और एक ईरानी जहाज पर कार्रवाई ने तनाव और बढ़ा दिया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इसका जवाब देगा। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक नाकेबंदी नहीं हटती, तब तक बातचीत संभव नहीं है।

ट्रंप का बयान

डोनल्ड ट्रंप ने ईरान पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी समझौते की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान को उचित और अच्छा प्रस्ताव दे रहा है और उम्मीद है कि ईरान इसे स्वीकार करेगा।
 जब US नेवी ने होर्मुज में ईरानी झंडे वाले जहाज पर चलाई गोली, कर लिया जब्त

जब US नेवी ने होर्मुज में ईरानी झंडे वाले जहाज पर चलाई गोली, कर लिया जब्त

 जब US नेवी ने होर्मुज में ईरानी झंडे वाले जहाज पर चलाई गोली, कर लिया जब्त



अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज 'टूस्का' को जब्त कर लिया। ...और पढ़ें






 अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी झंडे वाले एक मालवाहक जहाज को रोककर उस पर कब्जा कर लिया। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य के पास चल रही अमेरिकी नाकेबंदी के दौरान पहली बड़ी जब्ती मानी जा रही है।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि 'टूस्का' नाम के इस जहाज को चेतावनी देने के बावजूद नहीं रुकने पर जब्त किया गया। वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई को युद्धविराम का उल्लंघन बताते हुए इसे 'डकैती' करार दिया है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस घटना के बाद ईरान ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित अमेरिका के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता में शामिल होने से भी इनकार कर दिया है।

अमेरिका ने क्या कहा?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, मिसाइल से लैस युद्धपोत यूएसएस स्प्रुएंस ने उत्तरी अरब सागर में इस जहाज को रोका, जो ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहा था। अमेरिका का दावा है कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने आदेश नहीं माना।


करीब छह घंटे तक चेतावनी देने के बाद अमेरिकी युद्धपोत ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर गोलीबारी की, जिससे उसकी गति रुक गई। इसके बाद अमेरिकी मरीन कमांडो ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिका ने कहा कि यह जहाज पहले से ही प्रतिबंधों के दायरे में था और अब इसकी जांच की जा रही है कि इसमें क्या सामान मौजूद है।
होर्मुज पर बढ़ा संकट

इस घटना के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है। फिलहाल यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। ईरान ने पहले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में अचानक लगभग सभी आवाजाही रोक दी। इससे वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।


इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकता है। वहीं, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम और अन्य मांगों पर झुकने से साफ इनकार कर दिया है।
 कनाडा में पंजाबी टीवी होस्ट को 5.5 साल जेल की सजा, डफल बैग में कर रही थी ड्रग्स तस्करी

कनाडा में पंजाबी टीवी होस्ट को 5.5 साल जेल की सजा, डफल बैग में कर रही थी ड्रग्स तस्करी

 कनाडा में पंजाबी टीवी होस्ट को 5.5 साल जेल की सजा, डफल बैग में कर रही थी ड्रग्स तस्करी



कनाडा की पंजाबी रेडियो और टीवी होस्ट सुखविंदर कौर संघा को ड्रग्स तस्करी मामले में साढ़े पांच साल की जेल हुई है। 2021 में अमेरिका से मेथ की तस्करी करते ...और पढ़ें





 कनाडा में पिछले 10 साल से पंजाबी रेडियो और टीवी होस्ट के रूप में काम कर रही 47 वर्षीय सुखविंदर कौर संघा को ड्रग्स तस्करी के मामले में 5.5 साल की सजा सुनाई गई है। वह 2021 में अमेरिका से मेथ की तस्करी करते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई थीं। अदालत का यह फैसला तब आया जब उन्होंने अपने अपराध को स्वीकार कर लिया।


पुलिस के मुताबिक, तस्करी की जा रही ड्रग्स की कीमत 1 मिलियन से 10 मिलियन डॉलर के बीच आंकी गई थी। वहीं, उनके वकील ने दावा किया कि संघा ने यह अपराध मजबूरी में किया था, क्योंकि किसी ने उनके बेटे को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी थी और उनसे 1.5 लाख डॉलर की मांग की गई थी। अभियोजन पक्ष ने 10 से 12 साल की सजा की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दो साल की नजरबंदी और तीन साल की प्रोबेशन की मांग की थी।

2021 में ऐसे पकड़ी गईं

18 अक्टूबर 2021 को संघा फ्लोरिडा नंबर प्लेट वाली किराए की कार से अमेरिका-कनाडा बॉर्डर पार कर रही थीं। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि वह वाशिंगटन में अपनी मौसी के अंतिम संस्कार में गई थीं।

जब अधिकारियों ने कार की जांच के लिए उन्हें रोकने को कहा, तो उन्होंने गाड़ी भगा दी। इसके बाद एक अन्य अधिकारी ने पीछा किया और उन्हें रोकने में सफल रहा। जांच में कार से ड्रग्स से भरे बैग, दो आईफोन और एक डिलीट किया हुआ आईपैड बरामद हुआ। बताया गया कि उसी साल अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में उन्होंने अमेरिका की तीन और यात्राएं की थीं, हालांकि उन यात्राओं में ड्रग्स लाने की पुष्टि नहीं हो सकी।

कौन हैं सुखविंदर कौर संघा?

सुखविंदर कौर संघा का जन्म प्रिंस जॉर्ज में हुआ था। उन्होंने फार्मेसी टेक्नीशियन की ट्रेनिंग ली थी और कुछ समय इस क्षेत्र में काम भी किया। बाद में वह पंजाबी भाषा की प्रोड्यूसर और होस्ट बन गईं और 10 साल तक इस क्षेत्र में सक्रिय रहीं।


उन्होंने कई राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों और मशहूर हस्तियों के इंटरव्यू किए थे। वह समाज में सक्रिय थीं और युवाओं में अपराध और ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाती थीं। संघा तीन बच्चों की मां हैं और अपनी 78 वर्षीय बीमार मां की देखभाल भी करती हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि अगर ऐसे मामलों में सख्त सजा नहीं दी गई, तो गैंग इसी तरह लोगों को इस्तेमाल करते रहेंगे।
 होर्मुज में अमेरिका दोहराने जा रहा गैलीपोली जैसी रणनीतिक भूल, इतिहास दे रहा चेतावनी

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अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ रहा है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान ने इसे बंद किया, जिसके जवाब में अमेर ...और पढ़ें





होर्मुज संकट पर बढ़ता तनाव गैलीपोली से मिल रहे कड़े सबक (फाइल फोटो)

 अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है। युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच ईरान ने इस रणनीतिक मार्ग को अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए बंद कर दिया था, जबकि तटस्थ और समर्थक देशों के जहाजों को सीमित आवाजाही की अनुमति दी गई।


इसके जवाब में अमेरिका ने आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए होर्मुज के बाहर नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है। विशेषज्ञ इस स्थिति की तुलना प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1915 के गैलीपोली अभियान से कर रहे हैं, जहां समुद्री मार्ग पर नियंत्रण की कोशिश मित्र देशों के लिए भारी विफलता साबित हुई थी।

तुर्किये की सेना की तैयारी

उस समय ब्रिटेन और फ्रांस ने ओटोमन (तुर्की) के नियंत्रण वाले डार्डानेल्स जलडमरूमध्य को खोलने के लिए मुख्यत: नौसेना पर आधारित अभियान शुरू किया था, जिसे विंस्टन चर्चिल की रणनीति माना जाता है।मित्र राष्ट्रों ने तुर्की की सैन्य क्षमता को कम आंकते हुए पुराने युद्धपोतों के सहारे अभियान चलाया। लेकिन संकरे जलमार्ग में प्रवेश करते ही ये जहाज तटीय तोपखाने और समुद्री बारूदी सुरंगों के आसान लक्ष्य बन गए।

तुर्किये सेना ने पहले से ही मजबूत रक्षा तैयार कर रखी थी, जिसके चलते एंग्लो-फ्रेंच बेड़े को भारी नुकसान उठाना पड़ा और अभियान विफल हो गया। बाद में थल सेना उतारने के बावजूद आठ महीनों तक चले संघर्ष में करीब 4.83 लाख सैनिक मारे गए, लेकिन अंतत: मित्र देशों को पीछे हटना पड़ा।


गैलीपोली अभियान से कई महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं, जो आज के होर्मुज संकट में प्रासंगिक नजर आते हैं। पहला, किसी भी रणनीतिक निर्णय में केवल प्रभावशाली नेतृत्व पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक और ठोस आकलन जरूरी होता है। दूसरा, विरोधी पक्ष को कमजोर आंकना भारी पड़ सकता है- 1915 में 'गनबोट डिप्लोमेसी' विफल रही थी और आज भी इसके सफल होने की संभावना संदिग्ध है।

क्या है 'मिशन क्रीप'?

तीसरा, 'मिशन क्रीप' का खतरा- जब प्रारंभिक रणनीति असफल होती है तो बड़े देश अपने सैन्य प्रयासों को सीमित करने के बजाय बढ़ा देते हैं, जिससे संघर्ष और जटिल हो जाता है। चौथा, युद्ध में भारी मानवीय और आर्थिक नुकसान की अनदेखी अक्सर घातक साबित होती है।


विश्लेषकों के अनुसार, यदि होर्मुज में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और नागरिक जीवन पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में इतिहास के सबकों को नजरअंदाज करना महंगा साबित हो सकता है।
 रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे के बंदरगाहों और ऊर्जा संयंत्रों को बनाया निशाना, अंधेरे में जीने को मजबूर लाखों लोग

रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे के बंदरगाहों और ऊर्जा संयंत्रों को बनाया निशाना, अंधेरे में जीने को मजबूर लाखों लोग

 रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे के बंदरगाहों और ऊर्जा संयंत्रों को बनाया निशाना, अंधेरे में जीने को मजबूर लाखों लोग



रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे के बंदरगाहों और ऊर्जा संयंत्रों पर हमला किया। रूसी हमलों से ओडेसा में बंदरगाह का बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ, जिससे एक न ...और पढ़ें






रूस-यूक्रेन ने एक-दूसरे के बंदरगाहों और ऊर्जा संयंत्रों को बनाया निशाना(प्रतीकात्मक फाइल तस्वीर)


रूसी हमलों से ओडेसा बंदरगाह और ऊर्जा संयंत्रों को भारी नुकसान


उत्तरी यूक्रेन में 3.8 लाख उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति बाधित


यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों और वायसोटस्क बंदरगाह पर हमला किया


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन ने एक दूसरे के बंदरगाह और ऊर्जा संयंत्र को निशाना बनाया। रूसी हमलों ने शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात यूक्रेन के दक्षिणी ओडेसा क्षेत्र में बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और देश के उत्तरी भाग में 380,000 उपभोक्ताओं की बिजली गुल कर दी। अधिकारियों ने बताया कि एक नागरिक की मौत हो गई और 26 अन्य घायल हो गए।


ओडेसा के क्षेत्रीय गवर्नर ओलेह किपर ने बताया कि ड्रोन हमलों में कृषि गोदामों, डिपो और प्रशासनिक भवनों को नुकसान पहुंचा। रूसी सेना ने यूक्रेन के उत्तरी चेर्निहिव क्षेत्र में एक ऊर्जा संयंत्र को भी निशाना बनाया। रूस ने रात भर में 219 लंबी दूरी के ड्रोन दागे।

यूक्रेन का रूस की तेल सुविधाओं पर हमला

वहीं, यूक्रेनी ड्रोनों ने रात भर के दौरान रूस की तेल सुविधाओं पर हमला किया, जिनमें समारा क्षेत्र की दो रिफाइनरियां और बाल्टिक सागर का एक बंदरगाह शामिल है, जो पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। वायसोटस्क बंदरगाह पर लगी आग बुझा दी गई है।

यूक्रेन के ड्रोन बलों के कमांडर राबर्ट ब्रोवडी ने बंदरगाह पर हमले की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि सेना ने समारा के नोवोकुइबिशेव्स्क और सिजरान शहरों में स्थित रिफाइनरियों पर भी हमला किया। ब्रोवडी ने प्रतिबंधित रूसी तेल को खरीदने की अनुमति देने वाली छूट को नवीनीकृत करने के अमेरिकी निर्णय की आलोचना की। साथ ही व्यंग्यपूर्वक लहजे में लिखा, ''रूसी तेल को फिर से महान बनाओ।''
 हज यात्रा शुरू, भारतीय जायरीनों का पहला जत्था सऊदी अरब पहुंचा; दूतावास ने दी शुभकामनाएं

हज यात्रा शुरू, भारतीय जायरीनों का पहला जत्था सऊदी अरब पहुंचा; दूतावास ने दी शुभकामनाएं

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वार्षिक हज यात्रा के लिए भारतीय जायरीनों का पहला जत्था सऊदी अरब के मदीना हवाई अड्डे पर पहुंचा। भारतीय दूतावास ने बताया कि राजदूत डॉ. सुहेल एजाज खान और ...और पढ़ें






हज के लिए भारतीय जायरीनों का पहला जत्था सऊदी अरब पहुंचा (फाइल फोटो)


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वार्षिक हज यात्रा के लिए भारतीय जायरीनों का पहला जत्था शनिवार को सऊदी अरब पहुंचा। यह जानकारी सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास ने दी।

इस जत्थे का मदीना हवाई अड्डे पर राजदूत डा. सुहेल एजाज खान और महावाणिज्यदूत फहद सूरी, हज मंत्रालय के उप मंत्रियों अब्दुलअजीज ए. वज्जान और अन्य ने स्वागत किया।दूतावास ने कहा कि खान ने मदीना हवाई अड्डे पर सुविधाओं का निरीक्षण किया और हज यात्रियों की सहायता कर रहे भारतीय समुदाय के स्वयंसेवकों से मुलाकात की।

दूतावास ने दी शुभकामनाएं

दूतावास ने सभी भारतीय हज यात्रियों को ''सुचारू, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हज अनुभव'' की शुभकामनाएं दीं। इससे पहले शुक्रवार को खान ने जायरीनों के लिए हज क्लीनिक में की गई तैयारियों की समीक्षा की थी। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस वर्ष हज के लिए कुल 1,75,025 जायरीनों के सऊदी अरब जाने की उम्मीद है।
 यूक्रेन की राजधानी कीव में बड़ा हमला, गोलीबारी में 5 लोगों की मौत; मारा गया आरोपी

यूक्रेन की राजधानी कीव में बड़ा हमला, गोलीबारी में 5 लोगों की मौत; मारा गया आरोपी

 यूक्रेन की राजधानी कीव में बड़ा हमला, गोलीबारी में 5 लोगों की मौत; मारा गया आरोपी


यूक्रेन की राजधानी कीव में एक सुपरमार्केट में हुए हमले में 5 लोगों की मौत हो गई और 10 घायल हो गए। एक बंदूकधारी ने गोलीबारी कर कुछ लोगों को बंधक बना लि ...और पढ़ें





 यूक्रेन की राजधानी कीव में शनिवार को एक बड़ा हमला हुआ, जहां एक बंदूकधारी ने सुपरमार्केट में घुसकर गोलीबारी की। इस घटना में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए।


हमलावर ने कुछ लोगों को बंधक भी बना लिया था, जिसे बाद में सुरक्षा बलों ने मार गिराया। राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि इस हमले में 5 लोगों की मौत हुई है और करीब 10 लोग घायल होकर अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है।

बंधकों को सुरक्षित निकाला गया

हमले के दौरान आरोपी ने सुपरमार्केट में कई लोगों को बंधक बना लिया था। बाद में सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 4 बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को के अनुसार, हमलावर पहले एक रिहायशी इलाके में गोलीबारी करता हुआ सुपरमार्केट में घुसा था, जहां लगातार फायरिंग की आवाजें सुनी गईं।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्पेशल फोर्स की टीम को मौके पर भेजा गया। यह कार्रवाई शहर के दक्षिणी हिस्से होलोसीवस्की जिले में हुई। पुलिस ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान हमलावर को मार गिराया गया। हालांकि, उसने यह हमला क्यों किया, इसका कारण अभी साफ नहीं हो पाया है।

जांच है जारी

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि इस घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी। उन्होंने तेजी से जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
पाकिस्तान में ड्यूटी पर तैनात पोलियो कार्यकर्ता की हत्या, पेशावर के उर्मर गांव में चल रहा था अभियान

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर में एक पोलियो कार्यकर्ता शोएब अली की अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना उर्मर गांव म ...और पढ़ें





 पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर के बाहरी इलाके में अज्ञात बंदूकधारियों ने पोलियो कार्यकर्ता की हत्या कर दी। पुलिस ने शनिवार को बताया कि यह हमला शुक्रवार को पेशावर के उपनगर उर्मर गांव में चल रहे पोलियो उन्मूलन अभियान के दौरान किया गया।

फरार हुए हमलावर

पुलिस ने बताया कि हमले में मारे गए पोलियो कार्यकर्ता की पहचान शोएब अली के रूप में हुई है। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमलावर हमले को अंजाम देकर फरार हो गए।

इस घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई है। अभी तक किसी भी समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इससे पहले बुधवार को, संदिग्ध आतंकियों ने बन्नू जिले में तीन पोलियो कार्यकर्ताओं का अपहरण कर लिया था।
 'ईरान ने थोड़ी होशियारी दिखाई'; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर बोले ट्रंप

'ईरान ने थोड़ी होशियारी दिखाई'; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर बोले ट्रंप

 'ईरान ने थोड़ी होशियारी दिखाई'; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की धमकी पर बोले ट्रंप



अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका को ब्लैकमेल न करने की चेतावनी दी है। ईरान ने फिर से इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद क ...और पढ़ें






अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप(फोटो: रॉयटर्स)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य को लेकर अपने बदलते रुख से अमेरिका को ब्लैकमेल न करे। यह चेतावनी तब आई जब तेहरान ने एक बार फिर इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद करने की घोषणा कर दी।


ओवल ऑफिस से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि हम उनसे बात कर रहे हैं। उन्होंने फिर से जलडमरूमध्य बंद करने की बात की। जैसा कि वे सालों से करते आ रहे हैं, लेकिन वे हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकते। ट्रंप ने ईरान के साथ किसी समझौते को लेकर आशावादी रुख भी दिखाया। उन्होंने कहा कि ईरान थोड़े चालाक बन रहे हैं, जैसा कि वे पिछले 47 सालों से करते आ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, “बातचीत वास्तव में बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है। हम देखेंगे, लेकिन आज दिन के अंत तक हमें कुछ जानकारी मिल सकती है।”
नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा ईरान

इस बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने बयान जारी कर कहा कि देश अमेरिका से प्राप्त नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। साथ ही उसने चेतावनी दी कि उसके वार्ताकार वाशिंगटन के साथ कोई समझौता या रियायत नहीं करेंगे।

परिषद ने कहा, “हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना के कमांडर की मध्यस्थता में तेहरान में अमेरिका द्वारा नए प्रस्ताव पेश किए गए हैं, जिनकी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान वर्तमान में समीक्षा कर रहा है और अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। ईरान का वार्ता प्रतिनिधिमंडल जरा सा भी समझौता, पीछे हटना या नरमी नहीं बरतेगा और ईरानी राष्ट्र के हितों की पूरी ताकत से रक्षा करेगा।”

ईरान ने फिर बंद किया हॉर्मुज

ईरान की सैन्य कमान ने बयान में कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखकर अपना वादा तोड़ा है।

बयान में कहा गया, “जब तक अमेरिका ईरान आने वाले सभी जहाजों के लिए आवाजाही की स्वतंत्रता बहाल नहीं करता, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सख्ती से नियंत्रित रहेगी।”
नियंत्रण पहले जैसा बहाल

शनिवार सुबह ईरानी सरकारी टीवी ने सैन्य केंद्रीय कमान का हवाला देते हुए बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण अपनी पिछली स्थिति में लौट आया है और यह सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन एवं नियंत्रण में है। ईरान ने इसके लिए अमेरिका की जारी नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया।


ट्रंप ने कहा कि शुक्रवार को जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के ईरान के फैसले के बावजूद अमेरिकी नाकेबंदी तब तक पूरी तरह जारी रहेगी, जब तक तेहरान वाशिंगटन के साथ परमाणु कार्यक्रम सहित कोई व्यापक समझौता नहीं कर लेता।
 'आपने ही क्लिरेंस दिया था...', होर्मुज में गोलीबारी के दौरान भारतीय जहाज ने ईरान को भेजा था ऑडियो संदेश

'आपने ही क्लिरेंस दिया था...', होर्मुज में गोलीबारी के दौरान भारतीय जहाज ने ईरान को भेजा था ऑडियो संदेश

 'आपने ही क्लिरेंस दिया था...', होर्मुज में गोलीबारी के दौरान भारतीय जहाज ने ईरान को भेजा था ऑडियो संदेश



होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी गनबोट्स द्वारा भारतीय झंडे वाले टैंकरों पर गोलीबारी की गई। 'सनमार हेराल्ड' से एक संकट संदेश सामने आया है, जिसमें चालक दल ...और पढ़ें






 कल ईरानी गनबोट्स द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय झंडे वाले दे टैंकर वापस लौट गए। यह जलमार्ग, जिससे दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और गैस गुजरता है, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच भ्रम का केंद्र बना हुआ है।


सूत्रों ने बताया कि इस घटना में किसी के घायल होने खबर नहीं है और गोलीबारी में जहाजों को कई नुकसान नहीं पहुंचा है।

टैंकरों में से एक से संकट संदेश अब सामने आया है, जिसमें गोलीबारी के दौरान मची अफरा-तफरी कैद है। कच्चे तेल के टैंकर 'सरमार हेराल्ड' पर सवार एक क्रू को ईरानी नौसेना से संपर्क की कोशिश करते हुए सुना जा सकता है। यह लगभग 30 सेकेंड का ऑडियो 'टैंकर ट्रैकर' नामक एक समुद्री खुफिया फर्म से साझा किया है, जो जहाजों की आवाजाही पर नजर रखती है।

ऑडियो में सुना जा सकता है, "सेपाह नेवी। सेपाह नेवी। यह मोटर टैंकर सनमार हैराल्ड है। आपने मुझे आगे बढ़ने की मंजूरी दी थी। आपकी लिस्ट में मेरा नाम दूसरे नंबर पर है। आप अभी गोलीबारी कर रहे हैं, कृपया मुझे वापस लौटने दें।"

जहाज जलडमरूमध्य के ग्रीन एरिया में था- NBC

रिकॉर्ड फुटेज का हवाला देते हुए, अमेरिकी प्रसारक NBC ने भी बताया कि वह जहाज जलडमरूमध्य के ग्रीन एरिया में था। पूरब की ओर जाते समय टैंकर ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम बंद कर दिया था, लेकिन पूर्वी छोर पर पहुंचकर उसे फिर से चालू कर दिया गया। गोलीबारी की चपेट में आने वाले दूसरे जहाज की पहचान 'जग अर्णव' के रूप में हुई है।
विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत के किया तलब

इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को तलब किया और गोलीबारी की घटना पर भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश सचिव ने व्यापारिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को भारत द्वारा दिए जाने वाले महत्व के रेखांकित किया और याद दिलाया कि ईारन ने पहले ही भारत आने वाले कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने में मदद की थी।


विदेश मंत्रालय ने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए, विदेश सचिव राजदूत से आग्रह किया कि वे भारत के विचार से ईरानी अधिकारियों के अवगत कराएं और जलडमरूमध्य से होकर भारत आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द फिर से शुरू करें। राजदूत ने इन विचारों को ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया है।
 रूस से अब और तेल खरीद पाएगा भारत, अमेरिका ने प्रतिबंधों में छूट फिर से बढ़ाई

रूस से अब और तेल खरीद पाएगा भारत, अमेरिका ने प्रतिबंधों में छूट फिर से बढ़ाई

रूस से अब और तेल खरीद पाएगा भारत, अमेरिका ने प्रतिबंधों में छूट फिर से बढ़ाई

ट्रंप प्रशासन ने समुद्र के रास्ते रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की छूट फिर से बहाल कर दी है, जो लगभग एक महीने के लिए वैध है। यह निर्णय वैश्विक ...और पढ़ें




 ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को एक छूट को फिर से लागू किया, जिससे देशों को समुद्र में रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति मिल गई। यह छूट लगभग एक महीने के लिए है। इससे दो दिन पहले ही प्रशासन ने छूट देने से इनकार कर दिया था।


ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार देर रात अपनी वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया। इसके तहत, देशों को शुक्रवार तक जहाजों पर लादे गए रूसी तेल को 16 मई तक खरीदने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि वह इस फैसले से प्रभावित नहीं होगा और रूस से कच्चा तेल और एलपीजी खरीदना जारी रखेगा।

ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से लेन-देन शामिल नहीं

यह लाइसेंस वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के प्रशासन के प्रयासों का एक हिस्सा है। ये कीमतें ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान काफी बढ़ गई थीं। इस लाइसेंस में ईरान, क्यूबा और उत्तर कोरिया से जुड़े लेन-देन शामिल नहीं हैं।


इससे पहले बुधवार को ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन रूसी तेल के लिए मिली छूट और ईरानी तेल के लिए मिली एक और छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा, जिनकी समय सीमा रविवार को खत्म होने वाली है।


बेसेंट ने पिछले महीने कहा था कि ईरानी छूट की वजह से लगभग 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच पाया और युद्ध के दौरान ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव को कम करने में मदद मिली।
रूस ने क्या कहा था?

रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने कहा था कि पहली छूट से 10 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल उपलब्ध हो जाएगा, जो लगभग एक दिन के वैश्विक उत्पादन के बराबर है। हालांकि प्रतिबंधों में मिली इस राहत से दुनिया भर में तेल की आपूर्ति में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन इससे पेट्रोलियम की कीमतों में उछाल को रोका नहीं जा सका है।
 क्या है यूरेनियम डस्ट, जिसे अमेरिका ईरान से हटाना चाहता है?

क्या है यूरेनियम डस्ट, जिसे अमेरिका ईरान से हटाना चाहता है?

 क्या है यूरेनियम डस्ट, जिसे अमेरिका ईरान से हटाना चाहता है?



डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान यूरेनियम डस्ट अमेरिका को सौंपने को तैयार है। यूरेनियम डस्ट 60% संवर्धित यूरेनियम होता है, जो परमाणु ईंधन का मुख्य ...और पढ़ें






ईरान से यूरेनियम डस्ट हटाना चाहता है अमेरिका। (फाइल फोटो)

 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अपना यूरेनियम डस्ट यानि परमाणु अवशेष अमेरिका को सौंपने के लिए तैयार है। आइये जानते हैं क्या है यूरेनियम डस्ट, इसे कब सौंफ्ना पड़ता है और इसे कैसे रखा जाता है।

क्या है यूरेनियम डस्ट

यूरेनियम डस्ट आमतौर पर 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम को कहते हैं। प्राकृतिक यूरेनियम को ट्रीट करके इसे तैयार किया जाता है। प्राकृतिक यूरेनियम में करीब 99 प्रतिशत यू-238 और करीब 0.7 प्रतिशत यू-235 होता है। जब इसे संवर्धित किया जाता है तो इसमें यू-235 की मात्रा बढ़ाई जाती है। आइएई के अनुसार, यूरेनियम परमाणु ईंधन का मुख्य स्रोत है। ये रेडियोधर्मी तत्व है इसलिए इसे ईरान द्वारा सौंपने की बात हो रही है। इस यूरेनियम को किसी तीसरे देश को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में देना होता है।


ईरान के पास हैं 400 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम

जून में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू करने से पहले माना जाता था कि ईरान के पास 400 किलोग्राम से अधिक 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम है। करीब 200 किलोग्राम 20 प्रतिशत विखंडनीय पदार्थ था, जिसे आसानी से 90 प्रतिशत हथियार-ग्रेड यूरेनियम में परिवर्तित किया जा सकता है। वहीं ईरान का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन का उस का उद्देश्य बिजली उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा है, न कि परमाणु हथियार।


हमले में नष्ट नहीं हुआ यूरेनियम

ऐसा माना जाता है कि ईरान के यूरेनियम भंडार का अधिकांश हिस्सा एक पहाड़ी के मलबे के नीचे दबा हुआ है। इसे अमेरिकी हमले में नष्ट कर दिया गया था, जिसके बारे में दावा किया गया था कि इसने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नष्ट कर दिया था।




हालांकि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रासी के अनुसार, ईरान की परमाणु साम्ग्री मुख्य रूप से उन तीन स्थलों में दो पर रखी है, जिन पर अमेरिका ने हमला किया था। इस्फहान में परमाणु परिसर में एक भूमिगत सुरंग और नतांज में एक स्टोर में। दावा किया गया है कि ईरानियों के पास यूरेनियम संवर्धन के लिए सेंट्रीफ्यूज हैं और एक नया भूमिगत संवर्धन स्थल स्थापित करने की क्षमता भी है।

ऐसे रखा जाता है संवर्धित यूरेनियम

इस संवर्धित यूरेनियम को सामान्य तौर पर धातु, आक्साइड पाउडर, या यूएफ 6 गैस जैसे रूपों में रखा जाता है। संवर्धन के बाद इसे अक्सर ठोस आक्साइड या सील किए गए कंटेनरों में सुरक्षित रखा जाता है। इसे सीलबंद परिसर में आइएईए जैसी संस्था की निगरानी में रखा जाता है। इसमें विकिरण का खतरा काफी अधिक होता है, इसलिए इसे साधारण धातु या पाउडर की तरह नहीं रखा जा सकता।



पहले भी दूसरे देशों को यूरेनियम सौंप चुका है ईरान

ईरान ने अपने परमाणु समझौतों की शर्तों को पूरा करने के लिए कई बार अपने यूरेनियम भंडार, जिसमें यूरेनियम डस्ट या येलोकेक और संवर्धित यूरेनियम शामिल हैं, उन्हें रूस और ओमान जैसे देशों को सौंपा है।

पाबंदी की वजह से दूसरे देशों को सौंपना पड़ा था यूरेनियम

2015 के परमाणु समझौते के तहत ईरान पर यह पाबंदी थी कि वह एक निश्चित सीमा से अधिक संवर्धित यूरेनियम अपने पास नहीं रख सकता। इस सीमा को बनाए रखने के लिए ईरान ने अपना कई टन कम संवर्धित यूरेनियम रूस को भेजा था। इसके बदले में रूस ने ईरान को प्राकृतिक यूरेनियम दिया, जिसका उपयोग ईरान अपने असैन्य परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों के लिए कर सकता था।
 सीजफायर के बीच ट्रंप ने ईरान को फिर दी धमकी, कहा- हम बमबारी कर देंगे

सीजफायर के बीच ट्रंप ने ईरान को फिर दी धमकी, कहा- हम बमबारी कर देंगे

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर धमकी दी है कि बुधवार तक दीर्घकालिक समझौता न होने पर सीजफायर आगे नहीं बढ़ेगा। उन्होंने सैन्य कार्रवाई औ ...और पढ़ें






 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान को फिर से धमकी देते हुए कहा कि सीजफायर को अब और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। डील फेल होने पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।

ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ सीजफायर तब तक आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, जब तक बुधवार तक कोई दीर्घकालिक समझौता नहीं हो जाता। उन्होंने चेतावनी दी कि दबाव बनाने वाले उपाय अभी भी विचाराधीन रहेंगे। इननमें ईरानी बंदरगाहों पर लगातार नाकेबंदी और फिर से बमबारी की संभावना शामिल है।

'हमें फिर से बम गिराने पड़ेंगे'

'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, "हो सकता है कि मैं इसे आगे न बढ़ाऊं, लेकिन नाकेबंदी जारी रहेगी। तो आपके पास एक नाकेबंदी है और दुर्भाग्य से हमें फिर से बम गिराना शुरू करना पड़ेगा।"


ईरान ने भी दी ट्रंप को चेतावनी

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने डोनल्ड ट्रंप को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखता है, तो तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर देगा।

यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान के कुछ ही समय बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह नाकेबंदी "पूरी ताकत" के साथ जारी रहेगी। इससे पहले ईरान ने कहा था कि संघर्ष-विराम की बाकी अवधि के लिए होर्मुज सभी कमर्शियल जहाजों के लिए "पूरी तरह से खुला" है।
 होर्मुज खुलने के बाद ट्रंप ने चिनफिंग से क्यों कहा- खुश तो बहुत होंगे आप?

होर्मुज खुलने के बाद ट्रंप ने चिनफिंग से क्यों कहा- खुश तो बहुत होंगे आप?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से "बहुत खुश" हैं। ट्रंप ने चीन में शी से अपनी आगामी मुल ...और पढ़ें







 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति को लेकर "बहुत खुश" थे और वह चीन में होने वाली अपनी मुलाकात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।


ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "राष्ट्रपति शी बहुत खुश हैं कि होर्मुज स्ट्रेट खुला हुआ है या तेजी से खुल रहा है।" उन्होंने आगे कहा, "चीन में हमारी मुलाकात बहुत खास होगी और संभवतः ऐतिहासिक भी। मैं राष्ट्रपति शी के साथ होने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं, बहुत कुछ हासिल होगा!"

ट्रंप ने क्या संकेत दिया?

यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल-ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो गई है। यह संकट 28 फरवरी को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए।

फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह से संघर्ष विराम लागू है, फिर भी इस मार्ग से आवाजाही सीमित बनी हुई है। यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने पर चीन की सकारात्मक प्रतिक्रिया का संकेत दिया है।


ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए कहा, "चीन बहुत खुश है कि मैं होर्मुज स्ट्रेट को स्थायी रूप से खोल रहा हूं। मैं यह उनके लिए भी कर रहा हूं और दुनिया के लिए भी। ऐसी स्थिति फिर कभी नहीं आएगी। उन्होंने ईरान को हथियार न भेजने पर सहमति जताई है।"

'ईरान को हथियार नहीं दे रहा चीन'

उन्होंने ईरान को हथियारों की आपूर्ति के मुद्दे पर शी के साथ सीधे संवाद का भी जिक्र किया और कहा कि चीनी नेता ने ऐसी किसी भी संलिप्तता से इनकार किया है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया, "मैंने उन्हें एक पत्र लिखकर ऐसा न करने का आग्रह किया था और उन्होंने मुझे जवाब में एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने मूल रूप से यही कहा कि वे ऐसा नहीं कर रहे हैं।"
 क्या फिर बंद होगा होर्मुज स्ट्रेट? अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से वापस लौटे 21 जहाज, ईरान ने दी वॉर्निंग

क्या फिर बंद होगा होर्मुज स्ट्रेट? अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से वापस लौटे 21 जहाज, ईरान ने दी वॉर्निंग

 क्या फिर बंद होगा होर्मुज स्ट्रेट? अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से वापस लौटे 21 जहाज, ईरान ने दी वॉर्निंग




ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नई शर्तें तय की हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी से अनुमति अनिवार्य होगी, नागरिक जहा ...और पढ़ें






 अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की डेडलाइन जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनातनी फिर से बढ़ने लगी है। फिलहाल होर्मुज खुलने की घोषणा के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट को पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों के लिए कुछ शर्तें तय की हैं।


एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया है कि सभी तरह के आवागमन के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी से अनुमति लेना जरूरी है। नागरिक जहाजों को केवल ईरान द्वारा तय किए गए रास्ते से गुजरने की अनुमति है, जबकि सैन्य जहाजों के वहां से गुजरने पर अभी भी रोक है। अगर इजाजत नहीं ली जाती है तो इसे फिर से बंद कर दिया जाएगा।
ईरान की 'नई व्यवस्था'

आईआरजीसी नेवी ने इन शर्तों को एक 'नई व्यवस्था' बताया और कहा कि यह सीजफायर समझौते की शर्तों अनरूप है। हालांकि, इस बयान में उन विवरणों का जिक्र है जिन्हें अराघची ने तब स्पष्ट नहीं किया था, जब उन्होंने यह घोषणा की थी कि संघर्ष-विराम के दौरान सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह से खुला है।

अराघची ने क्या कहा था?

उन्होंने कहा था, "लेबनान में संघर्ष-विराम के अनुरूप होर्मुज स्ट्रेट से सभी वाणिज्यिक जहाजों के गुजरने का मार्ग, संघर्ष-विराम की शेष अवधि के लिए पूरी तरह से खुला घोषित किया जाता है। यह उस समन्वित मार्ग पर होगा जिसकी घोषणा इस्लामिक गणराज्य ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन द्वारा पहले ही की जा चुकी है।"


इससे पहले, ईरान के कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने अराघची की घोषणा का विरोध किया था। तस्नीम ने उनकी पोस्ट की आलोचना करते हुए उसे "त्रुटिपूर्ण और अधूरा" बताया और चेतावनी दी कि इस पोस्ट ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के संबंध में अनावश्यक अस्पष्टता पैदा कर दी है।

ट्रंप ने भी की पुष्टि

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि भी की कि होर्मुज स्ट्रेट "पूरी तरह से खुला" है। ट्रंप ने लिखा, "ईरान ने अभी-अभी घोषणा की है कि ईरान का जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है और पूरी तरह से आवाजाही के लिए तैयार है। धन्यवाद!"
इस्लामाबाद में फिर आमने-सामने होंगे अमेरिका-ईरान, तनाव घटाने को ‘पीस टॉक्स 2.0’ सोमवार को संभव

इस्लामाबाद में फिर आमने-सामने होंगे अमेरिका-ईरान, तनाव घटाने को ‘पीस टॉक्स 2.0’ सोमवार को संभव

 इस्लामाबाद में फिर आमने-सामने होंगे अमेरिका-ईरान, तनाव घटाने को ‘पीस टॉक्स 2.0’ सोमवार को संभव



पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अगला दौर सोमवार को इस्लामाबाद में हो सकता है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल रविवार ...और पढ़ें







एएनआई, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच वार्ता का अगला दौर सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित हो सकता है।


रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडल रविवार को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
पाकिस्तान की सराहना

इस बीच शहबाज शरीफ से शेख तमीम बिन हमद अल थानी और रजब तैयब एर्दोगन ने मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्र में शांति बहाली और कूटनीतिक समाधान को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। नेताओं ने इस दिशा में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना भी की।
बैठक अंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम के इतर हुई, जहां वैश्विक नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श किया।

उधर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान में ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ से मुलाकात की। इस दौरान अमेरिका-ईरान वार्ता को पुनर्जीवित करने के प्रयासों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह मुलाकात संभावित वार्ता के लिए जमीन तैयार करने की दिशा में अहम कदम है।
गौरतलब है कि 11-12 अप्रैल को आयोजित “इस्लामाबाद पीस टॉक्स” अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय आमने-सामने की बातचीत का पहला प्रयास था, हालांकि यह निष्कर्षहीन रहा। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच इस तरह की सीधी वार्ता बेहद दुर्लभ रही है।

इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन का युद्धविराम

इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच 10 दिन के युद्धविराम की घोषणा की है। यह कदम क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


ट्रंप ने बताया कि उन्होंने जोसेफ औन और बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद दोनों पक्ष अस्थायी युद्धविराम पर सहमत हुए।

पश्चिम एशिया में जारी उथल-पुथल के बीच इन कूटनीतिक प्रयासों को क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस्लामाबाद में होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी है, जिससे किसी ठोस नतीजे की उम्मीद जताई जा रही है।
 इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम, राष्ट्रपति ट्रंप ने किया एलान

इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम, राष्ट्रपति ट्रंप ने किया एलान

 इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिनों का युद्धविराम, राष्ट्रपति ट्रंप ने किया एलान


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम की घोषणा की है, जो गुरुवार शाम से प्रभावी होगा। उन्होंने नेतन्याहू ...और पढ़ें







नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयासों ने रफ्तार पकड़ ली है, हालांकि जमीनी हालात अब भी जटिल बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार देर रात इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का एलान किया।


ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि युद्धविराम शाम पांच बजे ईटी (भारतीय समयानुसार तड़के 3.30 बजे) से लागू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने इस पर सहमति जताई है।

इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम

हिजबुल्ला ने कहा है कि इजरायल के रवैये पर निर्भर करेगा कि युद्धविराम टिकेगा या नहीं। वहीं, पाकिस्तान और ईरान ने भी कहा है कि अमेरिका से शांति वार्ता से पहले लेबनान में शांति जरूरी है। उधर, अमेरिका-ईरान के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता की तैयारियां तेज हो गई हैं। हालांकि, परमाणु संवर्धन पर अब भी पेच फंसा हुआ है।

तेहरान पहुंचे पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने गुरुवार को वरिष्ठ ईरानी नेताओं से मुलाकात की। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान से वार्ता की तारीख तय नहीं हुई है। इस बीच, पीएम नरेन्द्र मोदी ने होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा और आवाजाही के मुद्दे पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों से चर्चा की। वहीं, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकाबंदी को लेकर सख्त चेतावनी दी है।



होर्मुज खोलने की अपील

अमेरिकी जनरल डैन केन ने कहा कि जो भी जहाज नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश करेगा, उस पर हमला किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर फायरिंग भी की जाएगी। इसमें जहाज को रोकना, उस पर चढ़ना और कब्जा करना शामिल है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान के सैन्य नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा, 'हम आपको देख रहे हैं।' अब तक 14 तेल टैंकर अमेरिकी नौसेना की चेतावनी के बाद होर्मुज वापस जा चुके हैं।


चीन ने भी ईरान से होर्मुज जलमार्ग को खोलने की अपील की है। ट्रंप ने नेतन्याहू-औन को व्हाइट हाउस बुलाया एपी के अनुसार, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बातचीत में साफ कर दिया था कि जब तक हिजबुल्ला से संघर्ष विराम नहीं होता, तब तक इजरायल से किसी तरह की बातचीत का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा था कि दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले और तबाही चल रही है, ऐसे में इजरायल से बातचीत अनुचित है। रूबियो ने भी औन से कहा कि वह स्थिति को समझ रहे हैं।



ट्रंप ने किया एलान

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा करते हुए ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी प्रशासन ने स्थायी शांति स्थापित करने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री रूबियो और ज्वाइंट चीफ्स आफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन को इजरायल और लेबनान के साथ समन्वय का जिम्मा सौंपा है।


ट्रंप ने दावा किया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं को व्हाइट हाउस आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल और लेबनान को 1983 के बाद पहली सार्थक द्विपक्षीय वार्ता के लिए बुलाएंगे। उन्होंने दावा किया कि दोनों पक्ष शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं और यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है। ट्रंप ने ये भी लिखा कि वह अब तक 10 युद्ध रुकवा चुके हैं।


रायटर के अनुसार, के वरिष्ठ सांसद हसन फद्लल्ला ने कहा कि लेबनान में ईरानी राजदूत ने एक हफ्ते के युद्धविराम के बारे में जानकारी दी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या हिजबुल्ला इस युद्धविराम का सम्मान करेगा, तो फद्लल्ला ने कहा कि इससे जुड़ी हर चीज इजरायल की प्रतिबद्धता से जुड़ी हुई है।


उन्होंने इस युद्धविराम के लिए ईरानी कूटनीतिक प्रयासों को श्रेय दिया। वहीं, लेबनान के पीएम नवाफ सलाम ने युद्धविराम का स्वागत किया है। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में अमेरिका, फ्रांस, सऊदी अरब, मिस्त्र, कतर और जार्डन को इस प्रयास के लिए आभार जताया।



युद्ध में अब तक कितना नुकसान?

इस संघर्ष में अब तक 2,196 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 12 लाख से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं। उधर, गुरुवार को इजरायली सेना ने लेबनान की लिटानी नदी पर स्थित उस आखिरी पुल को भी ध्वस्त कर दिया, जो दक्षिणी लेबनान को देश से जोड़ता था। दावा किया कि हिजबुल्ला के 70 आतंकी ठिकानों को एक मिनट के अंदर ध्वस्त कर दिया गया। हिजबुल्ला ने 24 घंटे में 39 सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया।


इजरायली सेना ने दावा किया है कि युद्धविराम के दौरान वह दक्षिणी लेबनान से सैनिकों को पीछे नहीं हटाएगी। चीन ने ईरान से की अपील प्रेट्र के अनुसार, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से होर्मुज जलमार्ग में आवागमन फिर से शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस अहम समुद्री रास्ते का खुला रखना सभी देशों के हित में है।


हालांकि, वांग यी ने कहा कि एक तरफ होर्मुज में ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ इस रास्ते से जहाजों के सुरक्षित और स्वतंत्र आवागमन की भी गारंटी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन संघर्ष विराम बनाए रखने और बातचीत फिर से शुरू करने का समर्थन करता है।


पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरान के खातम अल-अनबिया हेडक्वार्टर के कमांडर अली अब्दोल्लाही से मुलाकात की और युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर चर्चा की। बैठक के दौरान मुनीर ने संघर्ष समाप्त करने के लिए उठाए गए कदमों और तेहरान में हुई अपनी बातचीत का ब्योरा साझा किया।