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 ट्रंप की मंत्री के ऑफिस में मिली शराब, सरकारी खर्चे पर जूनियर को स्ट्रिप क्लब भी लेकर गई; जांच के आदेश

ट्रंप की मंत्री के ऑफिस में मिली शराब, सरकारी खर्चे पर जूनियर को स्ट्रिप क्लब भी लेकर गई; जांच के आदेश

 ट्रंप की मंत्री के ऑफिस में मिली शराब, सरकारी खर्चे पर जूनियर को स्ट्रिप क्लब भी लेकर गई; जांच के आदेश




अमेरिका की श्रम मंत्री लोरी चावेज-डेरेमर एक बड़ी जांच के घेरे में हैं। उन पर ऑफिस में शराब रखने, आधिकारिक यात्रा पर अधिकारियों को स्ट्रिप क्लब ले जाने ...और पढ़ें






जांच में अफेयर की अफवाहों से लेकर ट्रैवल फ्रॉड तक की बातें सामने आ रही हैं। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)



मंत्री के ऑफिस में शराब का 'स्टैश' मिला।


आधिकारिक यात्रा पर अधिकारियों को स्ट्रिप क्लब ले गईं।


यात्रा धोखाधड़ी और अनुचित संबंधों की जांच जारी।


 अमेरिका की श्रम मंत्री लोरी चावेज-डेरेमर पर चल रही जांच में सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि उनके ऑफिस में शराब का 'स्टैश' रखा हुआ था और उन्होंने आधिकारिक यात्रा के दौरान अधिकारियों को स्ट्रिप क्लब ले जाकर बड़ा विवाद खड़ा किया। यह जांच अब और गहरा रही है। इस जांच में अफेयर की अफवाहों से लेकर ट्रैवल फ्रॉड तक की बातें सामने आ रही हैं।


इस जांच में पुष्टि हुई है कि मंत्री के एक अधिकारी से 'अनुचित' रिश्ते की अफवाहें महीनों पहले चर्चा में थीं, लेकिन उनके चीफ ऑफ स्टाफ जिहुन हान ने उन्हें खारिज कर दिया। अब हान और उनकी डिप्टी रेबेका राइट को सोमवार को छुट्टी पर भेज दिया गया है।


कम से कम एक दर्जन लोगों से पूछताछ

द न्यूयॉर्क पोस्ट ने सबसे पहले इस शिकायत का खुलासा किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि चावेज-डेरेमर ने हान और राइट से आधिकारिक यात्राओं का बहाना बनवाकर 'ट्रैवल फ्रॉड' किया। इसके साथ ही, ऑफिस में दिन के समय शराब पीने और स्टाफ पर दबाव डालने का आरोप भी था। अब तक कम से कम एक दर्जन लोगों से पूछताछ हो चुकी है।


वहीं पूछताछ में एक नया मामला भी सामने आया है। अप्रैल 2025 में ओरेगन की आधिकारिक यात्रा के दौरान चावेज-डेरेमर ने अपने अधिकारियों को पोर्टलैंड के बाहर एंजेल्स पीडीएक्स नाम के स्ट्रिप क्लब में ले गईं थीं।
अफेयर की अफवाहें या सच?

श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल अब सभी सबूतों की तलाश कर रहा है। इसमें चावेज-डेरेमर और उनके कथित प्रेमी के बीच वाशिंगटन डीसी अपार्टमेंट और लास वेगास होटल में कम से कम पांच मुलाकातों की वीडियो फुटेज शामिल है। वह अधिकारी अब प्रशासनिक छुट्टी पर है और टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हुआ।


श्रम विभाग के प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा, "विभाग आंतरिक या कर्मचारी मामलों पर टिप्पणी नहीं करेगा। सचिव विभाग के मिशन को पूरा करने और अमेरिकी श्रमिकों का समर्थन करने पर केंद्रित हैं।"
 'समय आ गया है, अब एक्शन लेना होगा...'; ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने दी चेतावनी

'समय आ गया है, अब एक्शन लेना होगा...'; ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने दी चेतावनी

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ट्रंप ने ग्रीनलैंड से रूसी खतरे को हटाने का एलान किया है, यह दावा करते हुए कि डेनमार्क 20 साल से नाटो की सलाह पर असफल रहा है। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर प ...और पढ़ें







अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप। फोटो - रायटर्स



ट्रंप ने ग्रीनलैंड से रूसी खतरे को खत्म करने का एलान किया


डेनमार्क की 20 साल की विफलता पर ट्रंप ने साधा निशाना


ग्रीनलैंड न देने पर यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकी दी


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वेनेजुएला के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की नजरें ग्रीनलैंड पर टिकी हैं। ट्रंप आए दिन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की धमकी देते हैं। अब उन्होंने ग्रीनलैंड से रूसी खतरे को हटाने का संकल्प ले लिया है।


ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि डेनमार्क काफी समय से रूस के खतरे को ग्रीनलैंड से दूर करने की कोशिश कर रहा है। अब समय आ गया है। इस कोशिश को सफल किया जाएगा।


ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने ट्रुथ पर लिखा, "नाटो पिछले 20 साल से डेनमार्क से कह रहा है कि उसे रूसी खतरे को दूर करना होगा। दुर्भाग्यवश डेनमार्क इस बारे में अब तक कुछ भी नहीं कर सका है। मगर, अब समय आ गया है। इसपर जरूर एक्शन लिया जाएगा।"


व्हाइट हाउस से लेकर डेनिश प्रेजिडेंसी, यूरोपियन यूनियन और डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने अभी तक ट्रंप के बयान पर चुप्पी साध रखी है। ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि उन्हें ग्रीनलैंड का मालिकाना हक चाहिए।



ग्रीनलैंड पर दी थी धमकी

डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने साफ किया है कि ये उपमहाद्वीप बेचने के लिए नहीं है और न ही ये कभी अमेरिका का हिस्सा बनेगा। शनिवार को ट्रंप ने यूरोपिय देशों को धमकी दी थी कि अगर ग्रीनलैंड नहीं दिया, तो ट्रंप सभ देशों पर टैरिफ लगा देंगे।


ग्रीनलैंड में रूस और चीन की मौजूदगी का हवाला देकर ट्रंप इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे हैं। ट्रंप का कहना है कि नाटो के सुरक्षा पैक्ट में ग्रीनलैंड भी शामिल है।
 स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत, 39 लोगों की मौत और 73 घायल

स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत, 39 लोगों की मौत और 73 घायल

 स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की भिड़ंत, 39 लोगों की मौत और 73 घायल



दक्षिणी स्पेन में रविवार को दो तेज रफ्तार ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसमें कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और 73 लोग घायल हो गए। यह घटना कॉर्ड ...और पढ़ें






स्पेन में दो ट्रेनों की भीषण टक्कर। फोटो - रायटर्स


दक्षिणी स्पेन में दो तेज रफ्तार ट्रेनों की टक्कर


हादसे में 39 लोगों की मौत, 73 लोग घायल


मैड्रिड-अंडालूसिया हाई-स्पीड सेवा बाधित हुई


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रविवार को दक्षिणी स्पेन में एक तेज रफ़्तार ट्रेन के पटरी से उतर जाने से कम से कम 39 लोग मारे गए और 73 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन उल्टी दिशा में ट्रैक पर चली गई और सामने से आ रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई।


स्पेन की रेल संस्था ADIF ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके बताया कि मलागा और मैड्रिड के बीच शाम की ट्रेन पटरी से उतर गई और मैड्रिड से हुएलवा (जो स्पेन का एक और दक्षिणी शहर है) जा रही दूसरी ट्रेन से टकरा गई।






स्पेन में दो ट्रेनों की भीषण टक्कर। फोटो - रायटर्स
कहां पर हुई यह घटना?

यह घटना स्पेन के कॉर्डोबा में एडम्यूज स्टेशन के पास शाम 5:40 बजे GMT (रात 11:10 बजे IST) हुई। ADIF ने बताया कि इर्यो 6189 मालागा-से-मैड्रिड ट्रेन एडम्यूज में पटरी से उतर गई और पास वाली पटरी पर चली गई। बगल वाली पटरी पर जो ट्रेन थी वह मैड्रिड से हुएल्वा जाने वाली ट्रेन थी और वह भी पटरी से उतर गई थी।




स्पेन में दो ट्रेनों की भीषण टक्कर। फोटो - रायटर्स
इन रूट्स पर सामान्य है सर्विस

इस घटना के बाद मैड्रिड और अंडालूसिया के बीच हाई-स्पीड सर्विस बाधित हो गई है। इस बीच, मैड्रिड, टोलेडो, स्यूदाद रियल और पुएर्टोल्लानो के बीच कमर्शियल सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। इर्यो एक इटैलियन-संचालित प्राइवेट रेल ऑपरेटर है। अंडालूसिया इमरजेंसी सर्विसेज ने सोशल मीडिया पर बताया कि सभी रेल ट्रैफिक रोक दिया गया है और इमरजेंसी सेवाएं मौके पर पहुंच रही हैं।




इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रेन के पटरी से उतरने की एक ऐसी ही घटना थाईलैंड में हुई थी, जिसमें एक क्रेन गिरने से ट्रेन पटरी से उतर गई। इस घटना में कम से कम 39 लोगों की मौत हो गई और 73 घायल हो गए।
इराक में फ्रांस के दूतावास का काला इतिहास, यहूदी परिवार के घर पर कब्जे का आरोप; 200 करोड़ का मुकदमा दर्ज

इराक में फ्रांस के दूतावास का काला इतिहास, यहूदी परिवार के घर पर कब्जे का आरोप; 200 करोड़ का मुकदमा दर्ज

 इराक में फ्रांस के दूतावास का काला इतिहास, यहूदी परिवार के घर पर कब्जे का आरोप; 200 करोड़ का मुकदमा दर्ज


इराक की राजधानी बगदाद में फ्रांस के दूतावास के तौर पर इस्तेमाल हो रही एक हवेली को लेकर यहूदी परिवार ने फ्रांस पर 22 मिलियन डॉलर का मुकदमा किया है। परि ...और पढ़ें






1965 में फ्रांस ने इसे किराए पर लिया और दूतावास बना लिया। (फोटो सोर्स- X)


फ्रांस पर यहूदी परिवार ने 22 मिलियन डॉलर का मुकदमा किया।


बगदाद में दूतावास वाली हवेली पर कब्जे का आरोप है।


परिवार का दावा, फ्रांस ने यहूदी-विरोधी नीतियों का फायदा उठाया।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इराक की राजधानी बगदाद में एक शानदार हवेली अब फ्रांस के दूतावास के तौर पर इस्तेमाल हो रही है। इस हवेली में कभी एक यहूदी परिवार रहता था। लेकिन दशकों से किराया न चुकाने के आरोप में यह परिवार फ्रांस पर 22 मिलियन डॉलर का मुकदमा कर रहा है।


परिवार का कहना है कि फ्रांस ने इराकी सरकार की यहूदी-विरोधी नीतियों से फायदा उठाया और अपना कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया। यह केस सोमवार को पेरिस की अदालत में सुनवाई होनी है। यह कहानी 60 साल पुरानी है। 1935 में एज्रा और खेदौरी लावी नाम के दो भाइयों ने तिगरिस नदी के किनारे यह घर बनवाया था।


'खून-पसीने से बनाया था घर'

1965 में फ्रांस ने इसे किराए पर लिया और दूतावास बना लिया। लेकिन परिवार का आरोप है कि फ्रांस ने इराकी सरकार से सस्ता सौदा करके उनके साथ धोखा किया। दावा है कि ये यहूदियों की संपत्ति छीनने वाले कानूनों के तहत हुई थी।


मेयर लावी एज्रा के बेटे हैं और 86 साल के हैं। वह बताते हैं कि उनके पिता ने घर बचाने के लिए फ्रांस को किराए पर दिया था। मेयर कहते हैं, "मेरे पिता बहुत दुखी थे। यह उनका घर था, जिसे उन्होंने खून-पसीने से बनाया था और छीन लिया गया था।"


परिवार के वकील का कहना हैं कि फ्रांस का विदेशी देश की यहूदी-विरोधी नियमों को मानना असंवैधानिक है और अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशनों का उल्लंघन करता है। फ्रांस का बचाव है कि सारी जिम्मेदारी इराक की है, लेकिन इससे वह खुद उन भेदभावपूर्ण कानूनों पर निर्भर दिख रहा है।

यहूदियों का पलायन

1941 से 1951 के बीच करीब 1,30,000 यहूदी इराक छोड़कर भागे या निकाले गए। ये लोग 2,600 साल पहले से वहां रह रहे थे। लावी परिवार उन 9,00,000 यहूदियों में से एक था जो 1948 में इजराइल बनने के बाद अरब और मुस्लिम देशों से निकाले गए।


परिवार के वकील इस केस को होलोकॉस्ट पीड़ितों के दावों से जोड़ते हैं, जहां फ्रांस ने नाजी काल में चुराई गई संपत्ति लौटाई है। "फ्रांस ने इराक की एंटीसेमिटिक नीतियों का साथ देकर गलत किया," वकील जीन-पियरे मिग्नार्ड और इमरान घेरमी कहते हैं। फ्रांस कहता है कि नुकसान इराकी फैसलों से हुआ है।


फ्रांस कहता है कि 1950 के दशक से इराक के यहूदियों की संपत्ति छीनने वाले कानूनों की वजह से उन्हें इराकी अथॉरिटी से डील करनी पड़ी। वे परिवार से और सबूत मांग रहे हैं। परिवार की नई पीढ़ियां, जैसे फिलिप खज्जम (एज्रा के पोते, 66 साल), घर की कहानियां सुनकर बड़ी हुईं।
 पाकिस्तान: सिरफिरे ने घरेलू विवाद में पूरे परिवार को गोलियों से भूना, पत्नी-बेटी समेत सात लोगों का मर्डर

पाकिस्तान: सिरफिरे ने घरेलू विवाद में पूरे परिवार को गोलियों से भूना, पत्नी-बेटी समेत सात लोगों का मर्डर

 पाकिस्तान: सिरफिरे ने घरेलू विवाद में पूरे परिवार को गोलियों से भूना, पत्नी-बेटी समेत सात लोगों का मर्डर



पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक युवक ने घरेलू विवाद के चलते अपने परिवार के सात सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतकों में उसकी पत्नी, दो ...और पढ़ें






 पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जहां घरेलू विवाद इतना बढ़ गया कि युवक ने अपने ही परिवार के लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाने लगा। इस गोलीबार में परिवार के सात लोगों की मौत हो गई।


पुलिस ने बताया कि सोमवार को पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक व्यक्ति ने घरेलू विवाद के चलते अपने घर के अंदर गोलीबारी की, जिसमें उसकी पत्नी और दो महीने की बेटी सहित सात लोगों की मौत हो गई। गोलीबारी के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।


आरोपी की पहचान फारूक उर्फ फारूके के रूप में हुई है, जिसने कथित तौर पर घरेलू विवाद के बाद गोलीबारी की, इस दौरान उसने घर में मौजूद परिवार के सदस्यों पर गोलीबारी की। इस गोलीबारी में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

पारिवारिक दुश्मनी

मृतकों में आरोपी के दो भाई और उनकी पत्नियां, साथ ही आरोपी की अपनी पत्नी और उसकी दो महीने की बेटी शामिल हैं। घटना के पीछे का मकसद घरेलू कलह और लंबे समय से चली आ रही पारिवारिक दुश्मनी बताया जा रहा है। पुलिस ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं और घटना की जांच शुरू कर दी है।
 'पाकिस्तान आतंकी देश है, यहां की सेना ने 40 मस्जिदों को ध्वस्त किया;' बलूच नेता ने खोली पोल

'पाकिस्तान आतंकी देश है, यहां की सेना ने 40 मस्जिदों को ध्वस्त किया;' बलूच नेता ने खोली पोल

 'पाकिस्तान आतंकी देश है, यहां की सेना ने 40 मस्जिदों को ध्वस्त किया;' बलूच नेता ने खोली पोल



बलूच नेता मीर यार ने पाकिस्तान को 'आतंकी देश' बताते हुए पाकिस्तानी सेना पर बड़ा आरोप लगाया है। मीर यार ने कहा कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में 40 से ज्य ...और पढ़ें






बलूच नेता मीर यार ने खोली पाकिस्तान की पोल


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में मस्जिदों की प्रोफाइलिंग को लेकर भारत पर आरोप लगाना पाकिस्तान को महंगा पड़ गया है। क्योंकि, अब उसी के नेता ने पाकिस्तानी सेना पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का संगीन आरोप लगाया है।


दरअसल, पाकिस्तान द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की कोशिश पर बलूचिस्तान के कद्दावर नेता मीर यार ने पाक को 'आतंकी देश' करार देते हुए उसकी पोल खोल दी है। मीर यार ने कहा कि उसे भारत की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है।

बलूच की ये टिप्पणी कश्मीर भर में मस्जिदों, इमामों और समितियों की प्रोफाइलिंग करने के भारतीय सरकार के फैसले की पाकिस्तान की आलोचना के जवाब में आई है।
पाकिस्तान सेना ने ध्वस्त किए 40 मस्जिद

बलूच राष्ट्रवादी नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने बलूचिस्तान प्रांत में अब तक लगभग 40 मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया है। इसमें मस्जिदों पर सीधी बमबारी और पवित्र कुरान को जलाना जैसी घटनाएं शामिल हैं।

बलूचिस्तान भारत के साथ

मीर यार ने कहा कि बलूचिस्तान गणराज्य जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भारत के सैद्धांतिक रुख के साथ पूरी तरह खड़ा है। पाकिस्तान भारत, बलूचिस्तान, अफगानिस्तान और अन्य देशों को अल्पसंख्यक अधिकारों पर उपदेश नहीं दे सकता, जब उसकी सेना हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को दबाने और डराने के लिए धार्मिक और जिहादी चरमपंथियों का इस्तेमाल करती है।


मीर बलूच ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान की 'बाहरी ताकतों' ने बलूचिस्तान गणराज्य में लगभग 40 मस्जिदों को नष्ट कर दिया है, जिसमें मस्जिदों पर सीधे बमबारी करना, कुरान को जलाना और मस्जिदों के प्रमुख का अपहरण करना शामिल है।

पाकिस्तान सेना ने ध्वस्त की मस्जिद

मीर बलूच ने कहा कि पहला शिकार बलूचिस्तान गणराज्य के शासक की मस्जिद, कलात के खान की मस्जिद थी, जब हमारे पड़ोसी पाकिस्तान की हमलावर सेना ने अपने टैंक दौड़ाए और नागरिकों पर तोप और गोले दागे। कलात के खान की मस्जिद में आज भी मोर्टार के गोलों की आवाजें सुनाई देती हैं, जो पाकिस्तान की क्रूरता, कब्जे और गैर-इस्लामिक व्यवहार का सबूत है।

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार

मीर यार बलूच ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां हिंदू, सिख, ईसाई तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदाय लगातार उत्पीड़न और अत्याचार का शिकार होते हैं, जो दुनिया से छिपा नहीं है। ऐसे आतंकी राज्य को भारत, बलूचिस्तान या अफगानिस्तान को मानवाधिकारों पर कोई लेक्चर देने का नैतिक हक नहीं है।
 चीन में ईसाइयों को बनाया जा रहा निशाना, बाइबिल रखने पर सख्ती; किया जा रहा ये काम करने पर मजबूर

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चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में धार्मिक संगठनों को चीनी संस्कृति के अनुरूप ढालने का अभियान चल रहा है, जिसमें ईसाइयों को विशेष रूप से निशाना ...और पढ़ें






 नई दिल्ली। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व में चलाए जा रहे एक अभियान के तहत धार्मिक संगठनों को अपने सिद्धांतों, रीति-रिवाजों और नैतिकता को चीनी संस्कृति के अनुरूप ढालने के लिए बाध्य किया जा रहा है। सबसे ज्यादा निशाने पर ईसाई हैं।


श्रीलंका के प्रमुख मीडिया आउटलेट 'सीलोन वायर न्यूज' की एक रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि इस अभियान के परिणामस्वरूप कई चर्चों और क्रॉस को ध्वस्त कर दिया गया है, बाइबिल रखने पर सख्ती की जा रही है और सरकार द्वारा अधिकृत न की गई धार्मिक सामग्रियों पर प्रतिबंध या उन्हें जब्त कर लिया गया है।


रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट के अनुसार, “जब दुनिया बेहतर जीवन की उम्मीदों के साथ नए वर्ष (2026) में प्रवेश कर रही थी, तब चीन में ईसाइयों ने इसके विपरीत उदासी और पीड़ा के साथ नए साल की शुरुआत की। चेंगदू में एक प्रोटेस्टेंट चर्च के कई प्रमुख पादरियों को हिरासत में लिया गया और वेनझोउ में यायांग चर्च की इमारत को चीनी अधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया। चिनफिंग के सत्ता संभालने के बाद से दमनकारी प्रयासों के कारण पादरियों का उत्पीड़न, सामूहिक सभाओं पर प्रतिबंध और यहां तक कि ईसाई प्रतीकों को हटाना एवं चर्च की इमारतों को नष्ट करना जैसी घटनाएं हुई हैं।''

उठ रही तत्काल रिहाई की मांग

चेंगदू में हुई गिरफ्तारियों पर ह्यूमन राइट्स वाच के चीनी शोधकर्ता यालकुन उलुयोल ने चिंता जताई है और उन्हें तत्काल रिहा करने की मांग की है। कुछ सप्ताह पहले पुलिसकर्मियों ने यायांग टाउन में एक और प्रोटेस्टेंट चर्च पर छापा मारा और लगभग 100 सदस्यों को गिरफ्तार किया।


अमेरिका स्थित प्यू रिसर्च सेंटर का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि चिनफिंग के शासनकाल में बढ़ते प्रतिबंधों और धार्मिक दमन के कारण हाल के वर्षों में चीन में ईसाइयों की संख्या स्थिर हो गई है।
 ईरान में 3,090 मौतें, खामेनेई ने ट्रंप को बताया जिम्मेदार; कई भारतीय लौटे देश

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ईरान में महंगाई विरोधी प्रदर्शनों में मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार 3,090 लोग मारे गए, जिनमें 2,885 प्रदर्शनकारी थे। सर्वोच्च नेता खामेनेई ने मौतों ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में 3,090 लोग मारे गए हैं। यह जानकारी शनिवार को मानवाधिकार संगठन ने दी है। बताया कि देश में आठ दिन बाधित रहने के बाद इंटरनेट सेवा क्षेत्रवार बहाल हो रही है, इससे वहां पर हुई मौतों और नुकसान का पता चल रहा है।


इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को अपराधी करार दिया है जो ईरान में विरोध प्रदर्शनों और उस दौरान हुई मौतों, नुकसान, बदनामी के लिए जिम्मेदार हैं।
ईरान में 3 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

अमेरिका की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से जुड़ी न्यूज एजेंसी एचआरएएनए के अनुसार उसे अपनी जांच में प्रदर्शनों के दौरान ईरान में कुल 3,090 लोगों की मौत का पता चला है। इनमें से 2,885 मृतक प्रदर्शनकारी हैं, बाकी के 205 सुरक्षाकर्मी और अन्य सरकारी कर्मचारी हैं। 10 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं लेकिन उनकी सही संख्या अभी सामने नहीं आई है। मृतकों की यह संख्या 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के दौरान मारे गए लोगों से भी ज्यादा है।

सरकार का क्या कहना है?

ईरान सरकार ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों के बीच सक्रिय हथियारबंद दंगाइयों ने हिंसा की, फायरिंग में लोगों को मारा और आगजनी की। ये लोग आमजन नहीं थे बल्कि इजरायल और अमेरिका के एजेंट थे। वे बहुत से नागरिकों, सुरक्षाकर्मियों की मौत और नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं।


दो हफ्ते के हिंसक प्रदर्शनों के बाद राजधानी तेहरान पिछले चार दिनों से शांत हैं और वहां पर जनजीवन पटरी पर लौटता दिखाई दे रहा है। वहां पर गुरुवार और शुक्रवार को कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ। राजधानी क्षेत्र की ड्रोन से निगरानी की जा रही है।

800 लोगों को फांसी देने की योजना थी : ट्रंप

प्रदर्शनकारियों को फांसी देने पर ईरान के खिलाफ बहुत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरानी नेताओं ने अब सामूहिक फांसी देने का निर्णय रद कर दिया है।


ट्रंप ने कहा, शुक्रवार को 800 से ज्यादा गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को समूह में फांसी देने की योजना थी लेकिन उस निर्णय को रद कर दिया गया। ट्रंप ने इसके लिए इंटरनेट मीडिया ईरानी नेतृत्व को धन्यवाद दिया है। जबकि ईरान ने सामूहिक फांसी देने के ऐसे किसी निर्णय या उसे रद करने से इन्कार किया है।

विरोध-प्रदर्शन से प्रभावित ईरान से लौटे कई भारतीय

ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच छात्रों सहित कई भारतीय स्वदेश लौटे। ये कमर्शियल उड़ानें शुक्रवार देर रात दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचीं। यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि इन कमर्शियल उड़ानों से कितने भारतीय आए हैं। एक यात्री अली नाकी से पूछा गया कि क्या उन्हें ईरान में किसी तरह की कठिनाई का सामना करना पड़ा।


उन्होंने जवाब दिया, ''हमें कोई समस्या नहीं हुई।''उन्होंने बताया, ''हम तेहरान से लौटे हैं। पहले हम इराक में थे, फिर ईरान गए। वहां आठ दिन रुकने के बाद हम भारत लौट आए हैं।''

मेडिकल कालेज में पढ़ रही एक युवती ने कहा, ''इंटरनेट काम नहीं कर रहा था। इसलिए हमें ठीक से पता नहीं था कि देश में क्या हो रहा है।'' छात्रा ने कहा कि जिस शहर में वह थी, वहां स्थिति ठीक थी।
 नए नेतृत्व का समय आग गया है...', ईरान में ट्रंप कर रहे तख्तापलट का इशारा, क्या अब खामेनेई राज हो जाएगा खत्म?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी दी है कि वह उनकी 37 साल की सत्ता को उखाड़ फेंकेंगे। ट्रंप ने कह ...और पढ़ें







अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई। फाइल फोटो


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को धमकी दी है। ट्रंप का दावा है कि वो खामेनेई की 37 साल की सत्ता को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। ट्रंप ने कहा कि अब ईरान में नए नेतृत्व का समय आ गया है।


ट्रंप ने शनिवार को कहा, "खामेनेई में अब तक का जो सबसे अच्छा फैसला लिया है, वो 800 से ज्यादा लोगों को फांसी न देने का था।"

ट्रंप का कहना है कि ईरान में हिंसा और दमन के बल पर सरकार चल रही है। खामेनेई ने ईरान को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। उनकी वजह से ईरान में हिंसा छिड़ी हुई है।
ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने कहा, "देश चलाने के लिए नेतृत्व का सारा ध्यान देश पर ही होना चाहिए, जैसे अमेरिका का होता है। ये नहीं होना चाहिए कि नियंत्रण हासिल करने के लिए हजारों लोगों को मार दिया जाए। नेतृत्व का अर्थ सम्मान से होता है, न कि डर और मौतों से।"


खामेनेई को 'बीमार व्यक्ति' की संज्ञा देते हुए ट्रंप कहते हैं कि उनके नेतृत्व में ईरान नरक से भी बदतर हो गया है। उससे बेकार जगह पूरी दुनिया में कहीं नहीं हैं।
खामेनेई ने साधा था निशाना

ट्रंप ने खामेनेई के बयान पर पलटवार किया है। खामेनेई ने कहा कि उन्होंने ईरान में साजिशों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने सभी मौतों के लिए ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है। खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को अपराधी करार दिया है जो ईरान में विरोध प्रदर्शनों और उस दौरान हुई मौतों, नुकसान, बदनामी के लिए जिम्मेदार हैं।

ईरान में 3 हजार से ज्यादा मौतें

अमेरिका की मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से जुड़ी न्यूज एजेंसी HRANA के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान ईरान में कुल 3,090 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 2,885 प्रदर्शनकारी हैं और 205 सुरक्षाकर्मी समेत अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।


10 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं लेकिन उनकी सही संख्या अभी सामने नहीं आई है। मृतकों की यह संख्या 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के दौरान मारे गए लोगों से भी ज्यादा है।
 ईरान में फंसे हैं 16 भारतीय नाविक, 1 महीने से लगा रहे मदद की गुहार; वापस लाने के लिए सरकार कर रही ये उपाय

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ईरान में पिछले महीने जब्त किए गए वाणिज्यिक जहाज एमटी वैलेंट रोर पर सवार 16 भारतीय नाविकों की रिहाई के लिए भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है। तेहरान स ...और पढ़ें







डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में पिछले महीने जब्त किए गए एक कमर्शियल जहाज पर सवार 16 भारतीय क्रू मेंबर्स की मदद के लिए भारत सरकार लगातार कोशिश कर रही है।

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को साफ किया कि वह ईरानी अधिकारियों पर दबाव बनाए रखेगा ताकि भारतियों को जल्द से जल्द कॉन्सुलर एक्सेस मिल सके।
ईरान में फंसे 16 भारतीय नाविकों की रिहाई के प्रयास जारी

दूतावास के अनुसार, एमटी वैलेंट रोर नाम के इस जहाज को 14 दिसंबर को हिरासत में लिया गया था। इसकी जानकारी मिलते ही, बंदर अब्बास में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने फौरन कदम उठाया।


दूतावास ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'बंदर अब्बास में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने तुरंत ईरान सरकार को पत्र लिखकर क्रू को कॉन्सुलर एक्सेस देने की मांग की।'

इसके बाद, यह अनुरोध कई बार दोहराया गया। राजनयिक पत्रों के अलावा, बंदर अब्बास और तेहरान में व्यक्तिगत बैठके की गई, जिसमें राजदूत स्तर की चर्चाएं भी शामिल रहीं।

दूतावास का मानना है कि यह मुद्दा ईरान की न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत आएगा, लेकिन भारतीय पक्ष इस प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दे रहा है।
UAE से भी संपर्क करने की कोशिश

दूतावास ने ईरानी अधिकारियों से अनुरोध किया है कि भारतीय क्रू मेंबर्स को भारत में अपने परिवारों से संपर्क करने की अनुमति दी जाए। साथ ही, जहाज की मालिक कंपनी, जो संयुक्त अरब अमीरात में स्थित है, से भी 15 दिसंबर को संपर्क साधा गया।


दूतावास ने कंपनी के ईरान स्थित एजेंटों से बात की ताकि जहाज को आवश्यक खाद्य सामग्री, पानी और ईंधन उपलब्ध कराया जा सके। इसके अलावा, ईरानी अदालतों में भारतीय क्रू मेंबर्स के लिए कानूनी सहायता का इंतजाम किया जा रहा है।


दूतावास ने बताया, 'जहाज से खाने और पानी का स्टॉक कम होने की जानकारी मिलने पर, मिशन ने जनवरी की शुरुआत में ईरानी नौसेना से दखल देकर खाने और पानी की इमरजेंसी सप्लाई का इंतजाम करवाया।'

दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास भी जहाज की मालिक कंपनी पर दबाव बना रहा है ताकि कानूनी मदद मिल सके।
 क्या होती है 'विक्टोरियन बीमारी'? जिससे संक्रमित हुए Amazon के कई कर्मचारी; सांसदों ने उठाई ये मांग

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यूनाइटेड किंगडम के कोवेंट्री स्थित अमेजन के फुलफिलमेंट सेंटर में ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के 10 मामले सामने आए हैं। जीएमबी यूनियन ने संक्रमण रोकने के लिए ...और पढ़ें







कोवेंट्री अमेजन वेयरहाउस में 10 टीबी मामले सामने आए। (फोटो -रायटर्स)


 यूनाइटेड किंगडम के कोवेंट्री शहर में स्थित अमेजन के फुलफिलमेंट सेंटर में ट्यूबरकुलोसिस (टीबी) के मामलों की पुष्टि हुई है।

यह बैक्टीरियल संक्रमण, जिसे अक्सर 'विक्टोरियन बीमारी' के नाम से जाना जाता है, ने कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जीएमबी यूनियन ने अमेजन के इस वेयरहाउस में टीबी के कई मामलों की पुष्टि की है, जहां करीब 3,000 कर्मचारी काम करते हैं। यूनियन ने साइट को फौरन बंद करने की मांग की है ताकि संक्रमण को रोका जा सके।

अमेजन ने क्या कहा?

अमेजन ने माना है कि सितंबर में टीबी के 10 मामले सामने आए थे। कंपनी का कहना है कि ये मामले 2025 में पहचाने गए थे। अमेजन के वेयरहाउस के एक प्रवक्ता ने बताया कि तब से कोई नया मामला नहीं मिला है।


उन्होंने कहा, 'पूरी सावधानी बरतते हुए स्क्रीनिंग प्रोग्राम के दौरान साइट सामान्य रूप से चलाई जा रही है। बेस्ट प्रैक्टिस सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार, हमने तुरंत NHS और UK हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी (UKHSA) के दिशानिर्देशों का पालन किया है, साथ ही सभी संभावित प्रभावित कर्मचारियों को स्थिति के बारे में बताया है।'


अमेजन फिलहाल एनएचएस और यूकेएचएसए के साथ मिलकर एक व्यापक स्क्रीनिंग प्रोग्राम चला रही है, जिसमें संभावित प्रभावित कर्मचारियों की जांच शामिल है।

कंपनी ने इन मामलों को नॉन-कॉन्टैजियस करार दिया है। कंपनी ने जोर दिया है कि वे स्वास्थ्य अधिकारियों के मार्गदर्शन का सख्ती से पालन कर रही है।
वेयरहाउस बंद करने की उठी मांग

यूकेएचएसए वेस्ट मिडलैंड्स के डॉ। रोजर गजराज ने अनुसार वेयरहाउस में प्रभावित कर्मचारियों के संपर्क में आए लोगों को जांच की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुल जोखिम कम है और टीबी का एंटीबायोटिक्स से पूरा इलाज संभव है।


एनएचएस की दिशानिर्देशों के अनुसार, टीबी के लक्षणों में निरंतर खांसी, थकान, तेज बुखार, भूख की कमी और वजन घटना शामिल हैं। लेटेंट टीबी में लक्षण नहीं दिखते, लेकिन यह बाद में सक्रिय हो सकता है।

यूकेएचएसए के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में ब्रिटेन में टीबी के मामलों में 136% की वृद्धि हुई, जिसमें लगभग 5,500 लोग प्रभावित पाए गए।
स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ मिलकर हो रही स्क्रीनिंग

दूसरी ओर, जीएमबी यूनियन ने वेयरहाउस को अस्थायी रूप से बंद करने और सभी 3,000 कर्मचारियों को पूरी सैलरी के साथ घर भेजने की मांग की है, जब तक संक्रमण पूरी तरह से कंट्रोल नहीं किया जा सके।


कोवेंट्री साउथ की सांसद जारा सुल्ताना ने अमेजन के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि कई पुष्ट मामलों के बावजूद साइट को बंद न करना बहुत गलत है।

सुल्ताना ने आरोप लगाया कि कंपनी कर्मचारियों को इस्तेमाल की वस्तु की तरह देख रही है। उन्होंने कहा, टसाइट पर कई कन्फर्म केस होने के कारण, वेयरहाउस को तुरंत बंद कर देना चाहिए और कर्मचारियों को पूरी सैलरी देकर घर भेज देना चाहिए।'
 'मैं अपने सारे अवॉर्ड दे दूंगा...', अमेरिकी कॉमेडियन ने उड़ाया ट्रंप का मजाक, व्हाइट हाउस ने दी प्रतिक्रिया

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मिनियापोलिस में हत्या के बाद अमेरिकी कॉमेडियन जिमी किमेल ने डोनाल्ड ट्रंप का मजाक उड़ाया। किमेल ने कहा कि अगर ट्रंप मिनियापोलिस से ICE एजेंट्स को हटात ...और पढ़ें





अमेरिका के मिनियापोलिस में महिला की हत्या के बाद से हंगामा मचा हुआ है। इसी बीच अमेरिका लेट नाइट होस्ट और कॉमेडियन जिमी किमेल ने ट्रंप का मजाक उड़ाया है। जिमी का कहना है कि ट्रंप को अवॉर्ड काफी पसंद है। ऐसे में अगर ट्रंप मिनियापोलिस से अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम एनफोर्समेंट (ICE) के एजेंट्स को हटा लेते हैं, तो वो ट्रंप को अपने अवॉर्ड दे देंगे।


जिमी किमेल ने गुरुवार की रात को एक लाइव शो किया था। इस दौरान उन्होंने ट्रंप के सामने ढेर सारे खिताबों की पेशकश की। इस लिस्ट में 1999 के डेटाइम एमी अवॉर्ड से लेकर क्लियो अवॉर्ड, बेबी अवॉर्ड, राइटर्स गिल्ड अवॉर्ड और 2015 में मिला सोल ट्रेन अवॉर्ड व्हाइट पर्सन ऑफ द ईयर का नाम शामिल था।





जिमी किमेल ने क्या कहा?

जिमी किमेल ने लाइव शो में कहा, "अगर कोई और अच्छा राष्ट्रपति होता, तो वो हालात को काबू में करने और शांति स्थापित करने की कोशिश करता। मगर, ट्रंप ऐसे बिल्कुल नहीं हैं। वो जहां जाते हैं, वहां का पारा हाई हो जाता है।"


किमेल ने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा, "कुछ राष्ट्रपति ऐसे भी होते हैं, तो नोबेल प्राइज का मेडल खींच लाते हैं।" बता दें कि इजरायल ने ट्रंप को अपने देश का सर्वोच्च पुरस्कार देने का एलान करते हुए पीस प्राइज मेडल दिया था। किमेल ने ट्रंप की तस्वीर दिखाते हुए कहा, "कभी खुद कोई पुरस्कार न जीतने वाले व्यक्ति को क्या आपने इतना खुश कभी देखा है?"

व्हाइट हाउस ने दी प्रतिक्रिया

जिमी किमेल के इस बयान पर व्हाइट हाउस ने भी नाराजगी जाहिर की है। व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायटरेक्टर स्टीवन चेउंग ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर किया है। उनके अनुसार, "जिमी को ये अवॉर्ड अपने पास ही रखने चाहिए। जब रेटिंग्स न आने के कारण उन्हें नौकरी से निकाला जाएगा, तो वो अपने अवॉर्ड्स को गिरवी रख सकते हैं।"
 ग्रीनलैंड पर कब्जे के मुद्दे पर ट्रंप की पार्टी में ही दो फाड़, इन रिपब्लिकन सांसदों ने उठाई आवाज

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राष्ट्रपति ट्रंप के ग्रीनलैंड खरीदने के प्रस्ताव पर उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में ही मतभेद उभर आए हैं। डेमोक्रेट्स के साथ-साथ कई रिपब्लिकन सांसद भी ग ...और पढ़ें







अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को नहीं मिल रहा उनके ही सांसदों का साथ। (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रणनीतिक महत्व के आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने के लिए एक तरफ राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप धमकी पर धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी के नेता उनके फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं।


डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ रिपब्लिकन सांसदों ने ग्रीनलैंड की स्वायत्तता के पक्ष में झंडा बुलंद कर दिया है। अमेरिका की सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी में दोफाड़ होना ट्रंप के लिए एक बार फिर शर्मिंदगी का सबब बन गया है। नौबत ये आ गई कि डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टियों का 11 सदस्यी दल ग्रीनलैंड पहुंच गया है, जहां वह डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से मिलकर उन्हें अमेरिकी संसद के समर्थन के प्रति आश्वस्त करेगा।


कौन-कौन से रिपब्लिकन सीनेटर शामिल?

इस दल में थॉम टिलिस और लीजा मुर्कोवस्की, जैसे रिपब्लिकन सीनेटर शामिल हैं। ट्रंप का दावा है कि रणनीतिक महत्व होने से अमेरिका को सुरक्षा पहलुओं से ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है। वहीं, आर्कटिक द्वीप पर खनिजों की भी खान मौजूद है, जिससे उन्होंने इसे कब्जे में लेने के लिए बल प्रयोग से भी इन्कार नहीं किया।


वहीं, डेनमार्क के आग्रह पर यूरोपीय देशों ने छोटी संख्या में सैन्य बल भी भेज दिए हैं। डेमोक्रेस सीनेटर क्रिस कून्स के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल डेनमार्क के प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसन और ग्रीनलैंड में उनके समकक्ष जेंस फ्रेडरिक नील्सन से मुलाकात करेगा।


'सहयोगियों के करीब रहने की जरूरत'

कून्स ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता बढ़ने के इस दौर में हमें अपने सहयोगियों के और करीब रहने की जरूरत है, न कि उन्हें दूर धकेलने की जरूरत है। न्यू-हैंपशायर के सीनेटर जीन शाहीन, जो विदेश संबंध समिति में भी शामिल हैं, का कहना है कि अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने की सुगबुगाहट से नाटो की छवि को धक्का पहुंचा है और इससे अमेरिका के रूस और चीन के हाथों में खेलने का संदेश गया है।


डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन और ग्रीनलैंड के विदेश मंत्री विवियन मोट्सफेल्ट ने अमेरिका में ग्रीनलैंड के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए वहां के सांसदों से मुलाकात करने का फैसला किया है। बता दें कि रायटर और इप्सोस के एक सर्वेक्षण में केवल 17 प्रतिशत अमेरिकी नागरिकों ने ही ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे का समर्थन किया है।
 अब ट्रंप ने ईरान को कहा थैंक्यू, क्या हत्या की धमकी के बाद बदले US राष्ट्रपति के सुर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार का आभार व्यक्त किया है। ईरान में प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार 800 से अधिक लोगों की फांसी रद करने के बाद ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान की सरकार को धन्यवाद कहा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर पोस्ट के जरिए ईरानी सरकार का आभार जाहिर किया, क्योंकि ईरान में हो रहे प्रदर्शन के बीच सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की फांसी रद्द कर दी गई।


ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'मैं इस बात का बहुत सम्मान करता हूं कि ईरान के नेतृत्व ने कल होने वाली सभी निर्धारित फांसी (800 से अधिक) को रद कर दिया है। धन्यवाद!'
अमेरिका-ईरान के बीच सुधरे हालात

ईरान में लंबे समय से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इन प्रदर्शनों में हो रही हिंसा दुनिया के सामने एक डरावनी तस्वीर रखी। ईरानी सरकार ने इन प्रदर्शनों को रोकने के लिए हजारों लोगों को गिरफ्तार किया।


अमेरिका इस मामले में ईरानी सरकार के खिलाफ और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़ा था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में ईरान की सरकार पर हमला करने की धमकी तक दी थी। लेकिन अब ईरानी सरकार के 800 हिरासत में लिए लोगों की फांसी रद कर दी है, जिसके चलते ईरानी सरकार पर अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वभाव भी बदला है।


ईरान में आर्थिकी स्थिति के खराब होने की वजह से हालात लगातर बिगड़े। लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने उतरे। ईरानी सरकार ने भी माना कि इन प्रदर्शनों में 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। वहीं 10,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया।
 भारत की सीमा से लगे से लगे इन चार देशों का पासपोर्ट सबसे कमजोर, देखें ताजा रैंकिंग

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हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग जारी हो गई है। इसमें भारत 80वें स्थान पर है, जो पिछले साल से पांच पायदान ऊपर है। रिपोर्ट में एशिया के 9 देश सबस ...और पढ़ें






डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स हर साल पासपोर्ट रैंकिंग जारी करता है। इस रैंकिंग से ये पता चलता है कि किस देश का पासपोर्ट आपको दुनियाभर में घूमने की कितनी आजादी देता है। इस रैंकिंग से यह भी पता चलता है कि आप कितने देशों की यात्रा बिना वीजा के कर सकते हैं।


हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की रैंकिंग इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) के आंकड़ों पर आधारित है। 2026 की रैंकिंग भी जारी कर दी गई है, जो फिर एक बार मजबूत और कमजोर पासपोर्ट के बारे में जानकारी देती है।
दुनिया का सबसे कमजोर पासपोर्ट

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग में सबसे कमजोर पासपोर्ट की टॉप 10 लिस्ट में एशिया के ही 9 देशों के नाम शामिल हैं। इस लिस्ट में शामिल केवल सोमालिया ऐसा देश है, जो अफ्रीका का सबसे पूर्वी देश है। सबसे कमजोर पासपोर्ट वाले देशों के बारे में जानते हैं। इस लिस्ट में चार ऐसे देशों के नाम शामिल हैं, जिनकी सीमा भारत से लगती है- बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान और अफगानिस्तान।य़

उत्तर कोरिया
फिलिस्तीनी क्षेत्र
बांग्लादेश
नेपाल
सोमालिया
पाकिस्तान
यमन
इराक
सीरिया
अफगानिस्तान
किस नंबर पर भारत?
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 की रैंकिंग में भारत का पासपोर्ट 80वें नंबर पर है। भारतीय पासपोर्ट रखने वाले लोग 55 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल जा सकते हैं। 2025 में भारत इस लिस्ट में 85वें नंबर पर था। भारत ने पिछले साल की तुलना में पांच नंबर की बढ़त हासिल की है। लेकिन देखा जाए तो भारत ग्लोबल औसत से अभी भी काफी नीचे है और बेहतर अर्थव्यवस्था वाले देशों से काफी पीछे है।

कमजोर पासपोर्ट होने से नुकसानज्यादातर इंटरनेशनल ट्रिप्स के लिए पहले से वीजा के लिए आवेदन करना होता है, क्योंकि बिना वीजा के अचानक या कम समय में यात्रा करना मुश्किल हो जाता है।
लंबी यात्राओं के लिए के वीजा अपॉइंटमेंट, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है, जिससे लोगों को इसके लिए प्लानिंग कई महीनों पहले से करनी पड़ती है।
एप्लीकेशन फी, दूतावास या वाणिज्य दूतावास की यात्रा और अतिरिक्त पेपर वर्क से यात्रा की कुल लागत में काफी इजाफा हो जाता है।
 वेनेजुएला के बाद मेक्सिको पर हमला करेगा अमेरिका? मिलिट्री ऑरेशन्स से पहले एयरलाइंस के लिए एडवाइजरी जारी

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अमेरिकी विमानन अधिकारियों ने मेक्सिको और मध्य अमेरिका के हवाई क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण एयरलाइंस के लिए चेतावनी जारी की है। यह एडवाइजरी वेन ...और पढ़ें






अमेरिका ने एयरलाइंस के लिए जारी की एडवाइजरी


 अमेरिका में फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारियों ने शुक्रवार, 16 जनवरी को एयरलाइंस के लिए चेतावनी जारी की है। अधिकारियों ने मेक्सिको और मध्य अमेरिका के हवाई क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। ये एडवाइजरी अगले 60 दिनों के लिए जारी की गई है।


अमेरिका ने ये चेतावनी ऐसे समय में जारी की है, जब 3 जनवरी को अमेरिकी विशेष बलों ने वेनेजुएला पर हमला करके इस देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में गिरफ्तार कर लिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप वेनेजुएला पर हमले के बाद मेक्सिको में मादक पदार्थों के गिरोहों पर हमला करने की धमकी दे चुके हैं। अमेरिका काफी समय से इन गिरोहों पर जमीनी हमला करने की योजना बना रहा है।
अमेरिका ने जारी की एडवाइजरी

फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के एक प्रवक्ता ने बताया, 'एफएए ने मेक्सिको, मध्य अमेरिका, पनामा, बोगोटा, गुआयाकिल और माजातलान के निर्दिष्ट समुद्री उड़ान क्षेत्रों और पूर्वी प्रशांत महासागर के हवाई क्षेत्र के लिए विमान चालकों को उड़ान संबंधी एडवाइजरी जारी की है।'


मेक्सिको पर हमला करेगा अमेरिका?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप यह भी संकेत दे चुके हैं कि वह मेक्सिको में ड्रग कार्टेल पर जमीनी हमले करने की योजना बना रहे हैं, जो अमेरिका के पड़ोसी और प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर के खिलाफ एक उकसाने वाली सैन्य कार्रवाई होगी।


ट्रंप ने पिछले हफ्ते फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा, 'अब हम कार्टेलों के खिलाफ जमीनी कार्रवाई शुरू करने जा रहे हैं। मेक्सिको पर कार्टेलों का राज है।'
 ईरान के एयरस्पेस में घुसने की कोशिश न करे', अमेरिका की वॉर्निंग के बीच यूरोपीय यूनियन ने जारी की एडवाइजरी

ईरान के एयरस्पेस में घुसने की कोशिश न करे', अमेरिका की वॉर्निंग के बीच यूरोपीय यूनियन ने जारी की एडवाइजरी

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यूरोपीय यूनियन ने एयरलाइंस को ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है। अमेरिका की धमकियों और ईरान के हाई अलर्ट पर होने के कारण यह कदम उठाया गया है। ...और पढ़ें







ईरान में मंडरा रहा खतरा, यूरोपीय यूनियन ने जारी की एडवाइजरी

HIGHLIGHTS

यूरोपीय यूनियन ने ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी।


अमेरिका की धमकियों के कारण ईरान हाई अलर्ट पर है।


गलत पहचान से विमान दुर्घटना का जोखिम बढ़ गया।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक तंगी की वजह से लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों ने हिंसात्मक रूप ले लिया है। ऐसे में यूरोपीय यूनियन ने ईरान के एयरस्पेस से बचने की एडवाइजरी जारी की है।


यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी ने शुक्रवार, 16 जनवरी को एयरलाइंस को ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह दी है, क्योंकि अमेरिका की तरफ से लगातार मिल रही हमलों की धमकियों के चलते इस्लामी गणराज्य ईरान सतर्क हो गया है।


ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह

मौजूदा स्थिति और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना को देखते हुए ईरानी वायु रक्षा बलों को हाई लेवल सिक्योरिटी के लिए तैनात किया गया है। इससे एयरक्राफ्ट की गलत पहचान होने पर परेशानी हो सकती है।


यूरोपीय यूनियन की इस एडवाइजरी का मतलब है कि ईरान के एयरस्पेस से गुजरने पर सुरक्षा एजेंसियों के चूक होने की स्थिति में किसी और विमान को गिराया जा सकता है। इसलिए एडवाइजरी जारी की गई है कि जितना हो सके ईरान के एयरस्पेस में जाने से बचा जाए।



नॉर्वे स्थित गैर-सरकारी संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स की जारी की रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान में हुए प्रदर्शनों में कम से कम 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 10,000 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं।
 वर्ल्ड बैंक अध्यक्ष अजय बंगा कौन हैं? जिन पर ट्रंप ने जताया भरोसा, गाजा पीस बोर्ड में दी बड़ी जिम्मेदारी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति और अस्थायी शासन की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय 'शांति बोर्ड' के गठन की घोषणा की है। इस बोर् ...और पढ़ें






भारतीय मूल के अजय बंगा पर बढ़ा ट्रंप का भरोसा (फोटो- सोशल मीडिया)


 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति और अस्थायी शासन की निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय 'पीस बोर्ड' के गठन की घोषणा की है। सबसे खास बात यह है कि इस बोर्ड में भारतीय मूल के अजय बंगा को भी शामिल किया गया है। अमेरिका द्वारा जारी इस बोर्ड की अध्यक्षता खुद ट्रंप करेंगे।


भारतीय मूल के अजय बंगा दिग्गज बैंकर और विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष हैं। अजय बंगा अपनी कुशल वित्तीय रणनीति और वैश्विक नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं, अब वह गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासनिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


कौन हैं अजय बंगा?

अजय बंगा एक भारतीय-अमेरिकी बिजनेस एक्जीक्यूटिव हैं, इन्हें वित्त, बैंकिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। अजय बंगा विश्व बैंक समूह के 14वें अध्यक्ष हैं। उन्हें फरवरी 2023 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा विश्व बैंक का नेतृत्व करने के लिए नामित किया गया था। अजय बंगा ने 2 जून 2023 को विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला।


विश्व बैंक समूह की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, अजय बंगा ने कार्यभार संभालने के बाद से विश्व बैंक के विकास में एक तेज, अधिक कुशल और अधिक प्रभावशाली भागीदार में बदलने का प्रयास किया है।

उनके नेतृत्व में विश्व बैंक ने अपनी ऋण देने की क्षमता बढ़ाने, संचालन को सुव्यवस्थित करने और व्यावहारिक, विस्तार योग्य और प्रभावशाली विकास समाधानों पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से व्यापक सुधार शुरू किए हैं।
महाराष्ट्र में हुआ था जन्म

इन्वेस्टोपीडिया के अनुसार, अजय बंगा का जन्म 10 नवंबर, 1959 को महाराष्ट्र के एक छोटे से शहर खड़की में एक सिख परिवार में हुआ था। अजय के पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे। अजय ने 1981 में दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक (ऑनर्स) की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान से प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम पूरा किया।


मास्टरकार्ड के अध्यक्ष

विश्व बैंक समूह में शामिल होने से पहले वह जनरल अटलांटिक में उपाध्यक्ष और उससे पहले मास्टरकार्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। अजय बंगा ने समान और टिकाऊ आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मास्टरकार्ड सेंटर फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ की स्थापना भी की।


अजय बंगा 2020 से 2022 तक अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्य मंडल के अध्यक्ष रहे हैं। वह अमेरिकन रेड क्रॉस, क्राफ्ट फूड्स और डॉव इंक सहित कई संगठनों के बोर्ड में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे साइबर रेडीनेस इंस्टीट्यूट के सह-संस्थापक भी हैं।


उनके योगदान को नेशनल ही नहीं इंटरनेशल लेवल पर मान्यता मिली है। इसमें 2022 में सिंगापुर पब्लिक सर्विस स्टार, 2016 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया पद्म श्री, 2012 में फॉरेन पॉलिसी एसोसिएशन मेडल और एलिस आइलैंड मेडल ऑफ ऑनर जैसे सम्मान शामिल हैं।
 पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये करने वाले हैं रक्षा समझौता, अभी तक नहीं बनी अंतिम सहमति

पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये करने वाले हैं रक्षा समझौता, अभी तक नहीं बनी अंतिम सहमति

 पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये करने वाले हैं रक्षा समझौता, अभी तक नहीं बनी अंतिम सहमति


पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये लगभग एक साल की बातचीत के बाद एक रक्षा समझौते का मसौदा तैयार कर रहे हैं। पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री रजा हयात हरर ...और पढ़ें






पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये करने वाले हैं रक्षा समझौता (फाइल फोटो)


 पाकिस्तान के रक्षा उत्पादन मंत्री ने बताया कि लगभग एक साल की बातचीत के बाद पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक रक्षा समझौते का मसौदा तैयार कर लिया है। रजा हयात हरराज ने कहा कि तीनों देशों के बीच संभावित समझौता पिछले साल घोषित सऊदी-पाकिस्तान द्विपक्षीय समझौते से अलग है।


समझौते को पूरा करने के लिए तीनों देशों के बीच अंतिम सहमति आवश्यक है। हरराज ने कहा, "पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये त्रिपक्षीय समझौता पहले से ही प्रक्रियाधीन है।'' समझौते का मसौदा हमारे पास पहले से ही मौजूद है। यह मसौदा सऊदी अरब और तुर्किये के पास भी है। तीनों इस पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। यह समझौता पिछले 10 महीनों से मौजूद है।''


तुर्किये ने क्या कहा?

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि बातचीत हुई थी, लेकिन किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए थे। हमारे पास एक प्रस्ताव है। सभी क्षेत्रीय देशों को 'सुरक्षा के मुद्दे' पर सहयोग के लिए एक मंच बनाने के लिए एकजुट होना चाहिए। क्षेत्रीय मुद्दों का समाधान तभी हो सकता है जब संबंधित देश एक-दूसरे पर भरोसा करें।


फिदान ने पाकिस्तान या सऊदी अरब का नाम लिए बिना कहा, ''फिलहाल, बैठकें और बातचीत चल रही हैं, लेकिन हमने किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। हमारे राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन का दृष्टिकोण एक ऐसे समावेशी मंच का है जो व्यापक और बड़ा सहयोग और स्थिरता पैदा करे।''
 सऊदी अरब और UAE में जारी तनाव के बीच यमन के PM ने दिया इस्तीफा, कौन बना नया प्रधानमंत्री?

सऊदी अरब और UAE में जारी तनाव के बीच यमन के PM ने दिया इस्तीफा, कौन बना नया प्रधानमंत्री?

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सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ते तनाव के कारण यमन के प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक ने सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल को अपना इस्त ...और पढ़ें






 यमन एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिल रही है। यमन के पीएम सलेम बिन ब्रिक ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्रिक का इस्तीफा सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने स्वीकार कर लिया है।


दरअसल, यमन में जारी राजनीतिक और सुरक्षा तनाव के बीच सलेम ने औपचारिक रूप से अपने पद से इस्तीफा सौंपा, जिसे मंजूर कर लिया गया। यही नहीं सलेम के इस्तीफे के बाद नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति भी हो गई। विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को यमन का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है।



जिंदानी करेंगे मंत्रिमंडल का गठन

गुरुवार को राज्य समाचार एजेंसी सबा कके अनुसार, सलेम के इस्तीफे के बाद जिंदानी को अगले मंत्रिमंडल के गठन के लिए नामित किया गया। इस इस्तीफे के पीछे की वजह हाल के महीनों में यमन सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ता तनाव बताया रहा है।

UAE ने किया था कब्जा

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित अलगाववादी समूह, दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद ने दिसंबर में दक्षिणी और पूर्वी यमन के कई क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया और सऊदी अरब सीमा के निकट तक पहुंच गया। इसे सऊदी अरब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता था। हालांकि, बाद में सऊदी समर्थित लड़ाकों ने काफी हद तक इन क्षेत्रों से कब्जों को हटवाया।


तनाव के पीछे की वजह

गौरतलब है कि भू-राजनीति से लेकर तेल उत्पादन तक के कई अन्य मुद्दों पर तीखे मतभेद भी दोनों खाड़ी शक्तियों के बीच तनाव का कारण रहे हैं। सऊदी अरब और यूएई ने इससे पहले यमन के गृहयुद्ध में ईरान समर्थित हौथियों से लड़ने वाले गठबंधन में एक साथ काम किया था। इस दौरान बहुत खतरनाक मानवीय संकट उत्पन्न हुआ था।