झारखंड के कपल का हनीमून हुआ खराब, ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच दुबई में फंसे; अब 10 दिन बाद होगी वतन वापसी
रांची के नवदंपति अतुल उरांव और डॉ. कंचन बाड़ा खाड़ी क्षेत्र में युद्ध तनाव के कारण दुबई में फंस गए थे। कई उड़ानें रद्द होने के बाद, उन्हें 1.12 लाख रु ...और पढ़ें
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अतुल उरांव और उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा। फोटो जागरण
खाड़ी क्षेत्र में बढ़े युद्ध तनाव के बीच दुबई में फंसे रांची के नवदंपति के आखिरकार सुरक्षित स्वदेश लौटने का रास्ता साफ हो गया है। स्टील अथारिटी ऑफ इंडिया (सेल) रांची के अधिकारी अतुल उरांव और लातेहार निवासी उनकी पत्नी डॉ. कंचन बाड़ा मंगलवार सुबह करीब 9 बजे मुंबई से रांची एयरपोर्ट पहुंचेंगे। उनकी वापसी की खबर से परिवार और शुभचिंतकों में राहत और खुशी का माहौल है।
अतुल उरांव और डॉ. कंचन बाड़ा का विवाह 22 फरवरी को रांची में आदिवासी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के बाद हनीमून के लिए दोनों 27 फरवरी को दुबई गए थे।
उनकी वापसी 4 मार्च को तय थी, लेकिन इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में अचानक बढ़े युद्ध तनाव और अस्थिर हालात के कारण कई उड़ानें रद हो गईं। इसके चलते दोनों दुबई में ही फंस गए।
लगातार उड़ानें रद्द होने से नवदंपति को लगभग एक सप्ताह तक अनिश्चितता और चिंता के बीच इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्होंने सरकार से सुरक्षित वापसी में मदद की गुहार भी लगाई थी। कई बार टिकट बुक करने की कोशिश के बावजूद अंतिम समय में उड़ानें रद हो जाती थीं।
1.12 लाख रुपये खर्च करने पर मिला टिकट
अतुल उरांव ने बताया कि आखिरकार 8 मार्च को उन्हें स्वदेश लौटने का टिकट मिल सका, लेकिन इसके लिए उन्हें करीब 1.12 लाख रुपये खर्च करने पड़े। उन्होंने कहा कि लगातार उड़ानें रद होने के कारण हर दिन चिंता और असमंजस में बीत रहा था। भारत लौटने के बाद अब काफी राहत महसूस हो रही है।
नवदंपति के रिश्तेदार और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल अमिताभ पन्ना ने उनकी सुरक्षित वापसी पर संतोष जताते हुए कहा कि आपात परिस्थितियों में हवाई टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में सरकार और संबंधित एजेंसियों को हस्तक्षेप कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विदेशों में फंसे नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
करीब एक सप्ताह तक चिंता में डूबे परिजनों के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। नवदंपति की सुरक्षित वापसी की सूचना मिलते ही परिवार, मित्रों और परिचितों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। अब सभी को उनके सकुशल रांची पहुंचने का इंतजार है।
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समारोह में भगवान वीरभद्र जी के ध्वज और श्री महाकाल ध्वज के साथ ही शस्त्रों का विधि विधान पूर्वक पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ध्वज हाथ में लेकर मंदिर के कुंड परिसर तक गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह को निर्देश दिए कि उज्जैन में परंपरागत रूप से निकलने वाले चल समारोह (गेर) की परंपरा को आगे भी कायम रखने के लिए सवा-सवा लाख रुपए की राशि दी जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी पर गुलाब के फूल बरसाकर होली खेली।




सबसे बड़ी शक्ति है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश को मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम का भी विशेष स्नेह मिला है। यहाँ चित्रकूट में उन्होंने वनवास काल के 11 वर्ष बिताए। मध्यप्रदेश सरकार राम वन गमन वथ विकसित कर रही है। जहाँ-जहाँ भगवान श्रीराम के श्रीचरण पड़े हैं, उन्हें तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने करीला धाम में जानकी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। साथ ही मंदिर परिसर में ढोल बजाकर शंखनाद किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रद्धालुओं के साथ फूलों की होली भी खेली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्राम दीपनाखेड़ा से करीला धाम तक 10 किलोमीटर की सड़क स्वीकृत किये जाने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने करीला धाम तीर्थ के संपूर्ण विकास की कार्ययोजना बनाने के निर्देश कलेक्टर को दिए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन कर समूह की महिलाओं से संवाद भी किया।
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