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 अमेरिकी लोगों से झूठ बोला जा रहा', ईरान युद्ध पर US का 25 अरब डॉलर हुआ खर्च; ट्रंप के मंत्री पर भड़के डेमोक्रेट्स

अमेरिकी लोगों से झूठ बोला जा रहा', ईरान युद्ध पर US का 25 अरब डॉलर हुआ खर्च; ट्रंप के मंत्री पर भड़के डेमोक्रेट्स

अमेरिकी लोगों से झूठ बोला जा रहा', ईरान युद्ध पर US का 25 अरब डॉलर हुआ खर्च; ट्रंप के मंत्री पर भड़के डेमोक्रेट्स


अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ईरान युद्ध पर कांग्रेस में कड़े सवालों का सामना करना पड़ा, जहां डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा बिना मंजू ...और पढ़ें








अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को ईरान युद्ध को लेकर कांग्रेस में कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। ट्रंप सरकार द्वारा बिना कांग्रेस की मंजूरी के शुरू किए गए इस युद्ध पर डेमोक्रेट सांसदों ने तीखी आलोचना की।


पेंटागन के मुताबिक, इस युद्ध पर अब तक करीब 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। इसी दौरान 2027 के लिए रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने का प्रस्ताव भी रखा गया। सुनवाई के दौरान डेमोक्रेट नेताओं ने युद्ध की बढ़ती लागत, हथियारों की कमी और एक स्कूल पर बमबारी में बच्चों की मौत जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए।


डेमोक्रेट्स का हमला

डेमोक्रेट सांसदों ने आरोप लगाया कि सरकार ने युद्ध के कारणों को लेकर जनता को गुमराह किया है। कैलिफोर्निया के सांसद जॉन गरामेंडी ने इसे बड़ी रणनीतिक गलती बताया। इस पर पीट हेगसेथ ने जवाब देते हुए कहा कि आलोचना राजनीतिक है और विपक्ष के बयान देश के लिए नुकसानदायक हैं। सुनवाई के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण रहा और यह बैठक करीब छह घंटे तक चली।

एक सवाल के जवाब में हेगसेथ ने कहा कि 2025 में अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकाने तबाह कर दिए गए थे, लेकिन ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षा नहीं छोड़ी है। इस पर सांसद एडम स्मिथ ने सवाल उठाया कि अगर ठिकाने नष्ट हो गए थे, तो फिर युद्ध की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि इस युद्ध से स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।
तेल संकट और बढ़ती कीमतें

ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने से तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे अमेरिका में भी असर पड़ा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी कर दी है और मध्य पूर्व में तीन विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। डेमोक्रेट्स ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतें आम लोगों की जेब पर असर डाल रही हैं।


सुनवाई में सेना के कई बड़े अधिकारियों को हटाने के फैसले पर भी सवाल उठे। पीट हेगसेथ ने कहा कि ये बदलाव नई नेतृत्व व्यवस्था और 'वॉरियर कल्चर' के लिए जरूरी हैं। कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी इन फैसलों पर चिंता जताई, जबकि कुछ ने उनका समर्थन किया।
युद्ध पर अब भी टकराव जारी

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के बदले प्रतिबंध हटाने की बात कही गई थी।
 अब तक 21 को फांसी और 4000 से ज्यादा गिरफ्तार... अमेरिका से युद्ध के बाद ईरान में बदतर हालात, UN ने जताई चिंता

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बाद ईरान में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने ...और पढ़ें





 संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में हालात और सख्त हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान कम से कम 21 लोगों को फांसी दी गई है और 4000 से ज्यादा लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है।


तुर्क के अनुसार, इनमें से 9 लोगों को जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में, 10 लोगों को विपक्षी संगठनों से संबंध के आरोप में और 2 लोगों को जासूसी के आरोप में मौत की सजा दी गई। उन्होंने कहा कि युद्ध के असर के बीच ईरान में लोगों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।

UN ने जताई चिंता

वोल्कर तुर्क ने ईरानी सरकार से सभी फांसी पर रोक लगाने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को बिना ठोस आधार के हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। तुर्क ने आरोप लगाया कि कई गिरफ्तार लोगों के साथ जबरन गायब करना, यातना देना और जबरन कबूलनामे करवाने जैसे मामले सामने आए हैं।

जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत हुई थी, जो 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे बड़ा आंदोलन माना गया। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि युद्ध के दौरान भी सरकार ने विरोधियों पर कार्रवाई जारी रखी है। वहीं, ईरान ने पहले इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक बताया था।
अल्पसंख्यकों पर ज्यादा खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। कई कैदियों को अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है, जिनमें मानवाधिकार वकील नसरीन सोतूदेह भी शामिल हैं। इसके अलावा नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी की तबीयत भी खराब बताई जा रही है।
जेलों में हिंसा के आरोप

तुर्क ने बताया कि चाबहार जेल में विरोध के दौरान सुरक्षा बलों ने कम से कम 5 लोगों को मार दिया और 21 को घायल कर दिया। एक अन्य जेल में दो कैदियों की हिरासत में मौत हो गई, जिनके साथ यातना के संकेत मिले हैं।
 अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 चोरी की गई प्राचीन वस्तुएं, कीमत 14 मिलियन डॉलर

अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 चोरी की गई प्राचीन वस्तुएं, कीमत 14 मिलियन डॉलर

 अमेरिका ने भारत को लौटाईं 657 चोरी की गई प्राचीन वस्तुएं, कीमत 14 मिलियन डॉलर


अमेरिका ने भारत को 14 मिलियन डॉलर मूल्य की 657 तस्करी की गई प्राचीन कलाकृतियां लौटाईं, जो सुभाष कपूर और नैन्सी वीनर के नेटवर्क से बरामद हुई थी। ...और पढ़ें




अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित एक समारोह में भारत से तस्करी किए गए कुल 657 पुरानी कलाकृतियों को वापस कर दिया गया। इनकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 14 मिलियन डॉलर बताई जा रही है।

मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस की ओर से इसे लौटाया गया। ये कलाकृतियां पुरानी चीजों के तस्कर सुभाष कपूर और दोषी तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की चल रही जांच के दौरान बरामद की गई थी।

वहीं, मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में, डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी एल्विन एल ब्रैग जूनियर ने कहा कि, इन चीजों की वापसी से उन तस्करी नेटवर्क के विशाल पैमाने का पता चलता है, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाया था। उन्होंने आगे कहा कि चोरी की गई कलाकृतियों को बरामद करने और उन्हें वापस लाने के प्रयास जारी रहेंगे।
सबसे कीमती मूर्ति 2 मिलियन डॉलर की

लौटाई गई सबसे महत्वपूर्ण कलाकृतियों में से एक अवलोकितेश्वर की कांस्य प्रतिमा है, जिसकी कीमत $2 मिलियन डॉलर है। यह मूर्ति, जो एक शेर-युक्त सिंहासन के ऊपर दोहरे-कमल के आधार पर बैठी है, पर एक शिलालेख है जो इसके शिल्पकार की पहचान छत्तीसगढ़ के वर्तमान रायपुर के पास स्थित सिपुर के द्रोणादित्य के रूप में करता है।
यह 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास खोजे गए खजाने का हिस्सा थी और बाद में 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में पहुंची। इसके बाद इसे चुरा लिया गया और 1982 तक अमेरिका में तस्करी करके पहुंचा दिया गया, जहां 2014 तक यह न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में पहुंच गई।

2025 में इन कलाकृतियां को जब्त किया गया था

मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के ऑफिस ने 2025 में इस कलाकृति को जब्त कर लिया। एक और महत्वपूर्ण वस्तु लाल बलुआ पत्थर से बनी बुद्ध की प्रतिमा है, जिसकी कीमत $7.5 मिलियन है। इस प्रतिमा में बुद्ध को अपना दाहिना हाथ अभय मुद्रा, या सुरक्षा के हावभाव में ऊपर उठाए हुए दिखाया गया है; इस प्रतिमा को थोड़ा नुकसान भी पहुंचा है।


जांचकर्ताओं ने पाया कि, इस कलाकृति की तस्करी सुभाष कपूर द्वारा न्यूयॉर्क में की गई थी और बाद में एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट द्वारा उनके एक भंडारण केंद्र से इसे जब्त कर लिया गया था। इसके अलावा, नाचते हुए गणेश की बलुआ पत्थर की एक मूर्ति भी लौटाई गई, जिसे 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से कपूर के सहयोगी रंजीत शांतू कंवर ने लूटा था।
15 साल बाद मिला मेहनत का फल

दोषी तस्कर वामन घिया ने बाद में इस मूर्ति को बेच दिया और न्यूयॉर्क की गैलरी मालिक डोरिस वीनर को भेज दिया। डोरिस वीनर की मृत्यु के बाद, उनकी बेटी नैन्सी वीनर ने कथित तौर पर 2012 में मालिकाना हक के झूठे दस्तावेज तैयार किए और न्यूयॉर्क के नीलामी घर क्रिस्टीज के माध्यम से गणेश की इस मूर्ति को बेच दिया। एक निजी संग्रहकर्ता, जिसने यह मूर्ति खरीदी थी, उन्होंने इस साल की शुरुआत में इसे लौटा दिया।


इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के सह-संस्थापक एस. विजय कुमार ने कहा, “यह हमारे लिए सचमुच गर्व का क्षण है, क्योंकि हम अपने काम के नतीजे देख रहे हैं। जिस पर हमने डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय तक काम किया है, और अब वह रंग ला रहा है।”


उन्होंने आगे कहा, “भारत को HSI (होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स) का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जिन्होंने इन लूटी गई कलाकृतियों का पता लगाने और उन्हें भारत को वापस दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

यह 15 साल की मेहनत का नतीजा है, जिसमें हमने भारतीय कला की तस्करी के बाजार को समझा और उसे खत्म किया। इस बाजार ने हमारे देवी-देवताओं की मूर्तियों को चुराया और सुभाष कपूर और वीनर्स जैसे डीलरों के ज़रिए उन्हें पश्चिमी देशों में पहुंचाया।


एक दशक से भी ज्यादा समय से, मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी की एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन्स, कपूर और उसके साथियों का पीछा कर रही हैं; इन पर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया से कलाकृतियों को लूटने और उनकी तस्करी करने का आरोप है।
1000 से अधिक कलाकृतियां अब भी गायब

कपूर के खिलाफ 2012 में गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, और 2019 में न्यूयॉर्क में उस पर और उसके सात अन्य साथियों पर आरोप तय किए गए। कपूर, जिसे 2022 में भारत में तस्करी के अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, फिलहाल अमेरिका से प्रत्यर्पित किए जाने का इंतजार किया जा रहा है। सुभाष कपूर से जुड़े मामले तमिलनाडु में चल रहे हैं और ये पांच मामलों से संबंधित हैं, जिनमें 32 मूर्तियां शामिल हैं।


उसके पांच साथियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। एंटीक्विटीज़ ट्रैफिकिंग यूनिट ने अब तक 6,200 से ज्यादा सांस्कृतिक वस्तुएं बरामद की हैं, जिनकी कीमत 485 मिलियन डॉलर से ज्यादा है; साथ ही, उसने 5,900 से ज्यादा वस्तुएं 36 देशों को वापस लौटाई हैं। इसने सांस्कृतिक संपत्ति से जुड़े अपराधों में 18 लोगों को दोषी भी ठहराया है, जबकि सात अन्य लोगों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अभी चल रही है।


विजय कुमार ने आगे कहा, “अभी 1,000 से ज्यादा कलाकृतियां वापस लाई जानी बाकी हैं; हमें उम्मीद है कि भारत और HSI मिलकर इस दिशा में काम करेंगे, और साथ ही कपूर तथा वीनर से जुड़ी उन फाइलों (dossiers) को भी खंगालते रहेंगे, जिनमें लगभग 50 साल की लूट का ब्योरा दर्ज है।”
 दुश्मन को आ सकता है हार्ट अटैक', ईरान ने ट्रंप को दी खुली चुनौती; शांति प्रस्ताव ठुकराने पर फूटा गुस्सा

दुश्मन को आ सकता है हार्ट अटैक', ईरान ने ट्रंप को दी खुली चुनौती; शांति प्रस्ताव ठुकराने पर फूटा गुस्सा

 दुश्मन को आ सकता है हार्ट अटैक', ईरान ने ट्रंप को दी खुली चुनौती; शांति प्रस्ताव ठुकराने पर फूटा गुस्सा


ईरान ने अमेरिका और इजरायल को एक नए, 'हार्ट अटैक' देने वाले हथियार से युद्ध की धमकी दी है। ...और पढ़ें






 ईरान ने युद्ध में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ एक नए हथियार का इस्तेमाल करने की धमकी दी है। जानकारी के अनुसार, ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने एक न्यूज चैनल से कहा, "इस्लामिक गणराज्य बहुत जल्द दुश्मन की सेनाओं का सामना एक ऐसे हथियार से करेगा, जिससे वे बहुत ज्यादा डरते हैं।


वह हथियार उनके बिल्कुल बगल में ही है और मुझे उम्मीद है कि इससे उन्हें हार्ट अटैक नहीं आएगा।" उन्होंने आगे कहा, क्योंकि यह एक ऐसा हथियार है जिससे हार्ट अटैक भी आ सकता है। यह चेतावनी तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बदले अमेरिका द्वारा लगाई गई नाकाबंदी हटाने की बात कही गई थी। हालांकि, यह एक ऐसी योजना थी जिससे तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली बातचीत भी टल जाती।
अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन पर हमले का दावा

उन्होंने ट्रंप प्रशासन की उस रणनीति का भी मजाक उड़ाया। जिसमें होर्मुज के रास्ते ईरानी तेल व्यापार को रोककर आर्थिक दबाव के ज़रिए तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि दुश्मनों ने गलतफहमी पाल ली है कि, ईरान से अपनी मनचाही बात बहुत आसानी से मनवा लेंगे। जबकि उनकी यही सोच अब एक मजाक बनकर रह गई है।"

ईरान ने यह भी दावा किया कि उनकी सेनाओं ने अमेरिकी विमानवाहक पोत 'अब्राहम लिंकन' के खिलाफ कम से कम सात मिसाइल हमले किए हैं। उनके अनुसार, इन हमलों की वजह से अमेरिका कुछ समय के लिए उस विमानवाहक पोत से विमान उड़ाने या हवाई अभियान चलाने में असमर्थ हो गया था।
युद्ध में ईरान ने 100 सफल हमलों की कही बात

ईरानी नौसेना के कमांडर ने कहा कि, मध्य-पूर्व में संवेदनशील अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई में कम से कम 100 सफल हमले किए हैं। कमांडर के अनुसार, ईरान ने अरब सागर की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। अगर वे और करीब आए, तो हम बिना किसी देरी के जवाबी कार्रवाई करेंगे।


उन्होंने आगे कहा, नाकाबंदी के बावजूद, कुछ जहाज हमारे बंदरगाहों से रवाना हो चुके हैं, और कुछ अपनी मंजिल तक पहुंच भी गए हैं। उन्होंने अमेरिकी सेना की भी कड़ी आलोचना की, जिसे उन्होंने नाकाबंदी के हिस्से के तौर पर कुछ ईरानी जहाजों पर अवैध कब्जा बताया; उन्होंने इसे न सिर्फ समुद्री डकैती, बल्कि बंधक बनाना भी कहा।
अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव को ठुकराया

ट्रंप ने एक्सियोस को बताया है कि, वे ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा रहे हैं, जिसमें अमेरिकी नाकाबंदी हटाने के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की बात कही गई थी। यह एक ऐसी योजना थी, जिससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर होने वाली चर्चा टल जाती।


इस हफ्ते अमेरिकी नेताओं के साथ साझा किए गए ईरान के इस प्रस्ताव में, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चर्चाओं को टालने की मांग की गई थी। ऐसा करने से वे मतभेद अनसुलझे ही रह जाते, जिनकी वजह से 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध छिड़ गया था।
 होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! ट्रंप ने शेयर किया नया नक्शा, छिड़ा विवाद

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का नाम बदलकर 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कर दिया, जिससे अमेरिका-ईरान विवाद और गहरा गया है। ...और पढ़ें






अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' के नाम से नया नक्शा साझा किया।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे ईरान अमेरिका युद्ध के बीच गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की एक तस्वीर शेयर की। इसमें, उन्होंने एक छोटा लेकिन बहुत ही असरदार बदलाव किया था। उन्होंने, इस तस्वीर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर स्ट्रेट ऑफ ट्रंप (Strait Of Trump) कर दिया है।
परमाणु हथियार भूल जाओ : ट्रंप

इसके साथ ही ट्रंप ने बुधवार को ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को शानदार रणनीति बताते हुए कहा कि, तेहरान को हार माननी ही पड़ेगी। जब तक कि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ देता, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता है। मालूम हो कि, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर इस समुद्री रास्ते को और भी खतरनाक बना दिया है।

हमारी सेनी सबसे शक्तिशाली, जारी रहेगी नाकाबंदी

ट्रंप ने आगे कहा कि, "नाकाबंदी से उनको पता चला कि हमारी नौसेना कितनी शक्तिशाली है। मैं आपको बता सकता हूं, कोई भी हमारे साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता है। हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, जिसका अधिकांश हिस्सा, मैंने अपने पहले कार्यकाल में बनाया और तब से हम इसे लगातार विकसित कर रहे हैं। यह दुनिया में कहीं भी सबसे शक्तिशाली है, कोई भी इसके आसपास भी नहीं है।"

कई रिपोर्टों में कहा गया है कि, नाकाबंदी से ईरान को भारी दिक्कत होने लगी है। वहीं, Axios की रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, यूएस के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बातचीत पर बने गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'छोटे लेकिन ताकतवर' हमले की एक योजना तैयार की है।


CENTCOM अपने हमलों में ईरान की बुनियादी संरचनाओं को निशाना बना सकता है। इन हमलों का मकसद बातचीत शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव बनाना है। ट्रंप का कहना है कि 'ब्लॉकेड, बॉम्बिंग से ज्यादा कारगर है और वह काइनेटिक एक्शन की मंजूरी दे सकते हैं। बता दें कि, इस घेराबंदी की वजह से ईरान के जहाजों का आवागमन नहीं हो पा रहा है।
 अमेरिका ने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर पर लगाए नए प्रतिबंध, 35 व्यक्तियों और संस्थाओं पर रोक

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अमेरिकी सरकार ने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर में प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के लिए 35 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। ...और पढ़ें





 अमेरिकी सरकार ने मंगलवार को तेहरान पर दबाव बढ़ा दिया। उसने ईरान के 'शैडो बैंकिंग' सेक्टर में भूमिका निभाने के लिए 35 संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए।

साथ ही, उन बैंकों के खिलाफ भी प्रतिबंध की धमकी दी जो चीनी 'टीपाट' रिफाइनरियों के साथ कारोबार करते हैं। सरकार का कहना है कि ये रिफाइनरियां होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपमेंट गुजारने के लिए शुल्क चुकाती हैं। चीन ने कहा है कि वह अवैध एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है।
35 व्यक्तियों और संस्थाओं पर रोक

ट्रेजरी विभाग के ऑफिस आफ फारेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने बताया कि इन नामित व्यक्तियों और फर्मों ने प्रतिबंधों से बचने और अरबों डालर के बराबर की धनराशि के लेन-देन में मदद की थी।

साथ ही ओएफएसी ने चेतावनी दी कि वे ऐसी किसी भी फर्म के साथ कारोबार न करें जो जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरानी सरकार या 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' को भुगतान करती हो। ऐसा करने पर उन बैंकों को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

विभाग ने विशेष रूप से चीनी 'टीपाट' रिफाइनरियों को निशाने पर लिया। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि वे ईरानी तेल के आयात और रिफाइ¨नग में अहम भूमिका निभाती हैं।

चीनी 'टीपाट' रिफाइनरियां छोटी, स्वतंत्र और निजी स्वामित्व वाली तेल रिफाइनरियां हैं, जो मुख्य रूप से शैंडोंग प्रांत में स्थित हैं और चीन की कुल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग एक-चौथाई हिस्सा हैं। इनमें से कुछ रिफाइनरियों ने अमेरिकी वित्तीय प्रणाली का उपयोग करके डालर-आधारित लेन-देन किए थे और अमेरिकी सामान खरीदे थे।