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 हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरता है होली का उत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरता है होली का उत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरता है होली का उत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतों , समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, कार्यकर्ताओं और मीडिया के साथियों के साथ खेली होली
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी को दीं मंगलकामनाएं
सभी ने हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर दीं बधाई
ब्रज, बरसाने और होली गीतों के साथ मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से सराबोर हुआ वातावरण

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में प्रदेशवासियों को उत्साह, उमंग और समरसता के पावन पर्व होली की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरे और समाज में सद्भाव-सकारात्मकता और एकता का रंग सदा चटक रहे यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से आत्मीयता और सौहार्द के साथ त्यौहार मनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होली पर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे नागरिकों के साथ होली की मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पधारे संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। वरिष्ठ और गणमान्य नागरिकों का अभिवादन किया तथा सभी आगंतुकों पर पुष्प वर्षा एवं गुलाल उड़ाकर मेजबान के रूप में सबका स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को गुलाल लगाया और पारम्परिक वाद्य यंत्रों के साथ उनके सुर में सुर भी मिलाया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मुख्यमंत्री निवास पधारे राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, वरिष्ठ सांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री शिवशेखर शुक्ला , प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव , सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क श्री मनीष सिंह, खाटू श्याम मंदिर भोपाल के प्रमुख प्रचारक पूज्य अनिल आनंद महाराज सहित कई जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, पत्रकार गण और वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगल कामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में उड़ते रंग गुलाल और पुष्प वर्षा के बीच, ब्रज-बरसाने के होली गीतों, पारंपरिक संगीत और मयूर नृत्य के साथ उल्लास और उमंग से सराबोर वातावरण में सभी ने शालीनता के साथ पर्व का आनंद लिया। मंच पर प्रस्तुति दे रहे कलाकारों ने रंग बरसे, होली के दिन दिल खिल जाते हैं, होली खेलें रघुवीरा, आज ब्रज में होली रे रसिया जैसे होली गीतों का सस्वर गायन कर सभी के उल्लास को दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री निवास में होली पर्व पर आयोजित मिलन समारोह में सभी को गुजिया, बालूशाही, ठंडाई सहित कई परंपरागत व्यंजन परोसे गए।

कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता

कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता

कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता

कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता

किसानों की खुशहाली को मिला बल, अंतर राशि से शिक्षा और आवास कार्य को सहारा

कृषक उन्नति योजना से सशक्त हो रहे अन्नदाता

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी प्रभावी नीतियों को अमल में लाया है, जिनसे अन्नदाताओं के जीवन में स्थायी और व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल किसानों की आय और आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति और मजबूती प्रदान की है। सुशासन की प्रतिबद्धता को साकार करते हुए कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले किसानों को अंतर राशि का एकमुश्त भुगतान किया गया है।
    मुख्यमंत्री श्री साय की मंशा के अनुरूप यह सुनिश्चित किया गया कि होली पर्व से पूर्व किसानों के खातों में राशि अंतरित की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ त्यौहार हर्षोल्लास और सम्मान के साथ मना सकें। शासन के इस संवेदनशील निर्णय से कोरबा जिले के किसानों में विशेष उत्साह का माहौल है।
    कोरबा जिले के ग्राम दादरखुर्द निवासी कृषक श्री शैलेन्द्र कुमार थवाईत ने इस वर्ष लगभग 32 क्विंटल धान का विक्रय किया, जिसके एवज में उन्हें 23 हजार 392 रुपये की अंतर राशि प्राप्त हुई। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय किसानों के हित में है और सही समय पर मिली राशि से उन्हें बड़ी राहत मिली है। वे इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा तथा उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने में करेंगे, जिससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि होगी।
    इसी प्रकार ग्राम कल्दामार के कृषक श्री जिमी राठिया ने कहा कि होली से पूर्व राशि प्राप्त होना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि प्राप्त धनराशि का उपयोग घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति तथा प्रधानमंत्री आवास के निर्माण कार्य में किया जाएगा। शासन द्वारा समयबद्ध भुगतान किए जाने को उन्होंने किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक बताया।

    कृषकों ने उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ शासन के इस संवेदनशील और समयबद्ध निर्णय से किसानों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा की भावना बढ़ी है।  सरकार का यह प्रयास किसानों की समृद्धि ही प्रदेश की समग्र प्रगति का आधार है। 

 केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री पाटिल ने मध्यप्रदेश की जल संचय की पहल को सराहा

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री पाटिल ने मध्यप्रदेश की जल संचय की पहल को सराहा

 केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री पाटिल ने मध्यप्रदेश की जल संचय की पहल को सराहा


सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और प्रबंधन में मध्यप्रदेश कर रहा है श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल द्वारा की गई समीक्षा




मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। देश की कई महत्वपूर्ण नदियों के उद्गम स्थल होने के साथ ही प्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आहवान पर जल संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन के लिए देश में आरंभ हुआ जल संचय-जन भागीदारी अभियान सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहराण बन गया है। मध्यप्रदेश ने इस अभियान के प्रथम चरण में 2 लाख 79 हजार जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। द्वितीय चरण में भी मध्यप्रदेश में 64 हजार 395 कार्य प्रगति पर हैं और 72 हजार 647 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। इस प्रकार 1 लाख 37 हजार 42 संरचनाओं के साथ प्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गुरूवार को आयोजित संयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंस को मंत्रालय भोपाल से संबोधित कर रहे थे। जल संचय-जन भागीदारी की व्यापक समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टर्स शामिल हुए।

केन्द्रीय मंत्री श्री पाटिल ने अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन में देश के सम्मुख श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भूजल स्त्रोतों के दोहन के कारण गिरते हुए भूजल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह के प्रति हम पूर्णत: सजग है। इसलिए मध्यप्रदेश ने जल संचय-जन भागीदारी की राष्ट्रीय पहल को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आत्मसात करते हुए राज्य स्तर पर इसे व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से जिन नदियों का उद्गम है, उनके जल का स्त्रोत प्रदेश के वन हैं। यह नदियां अन्य राज्यों की कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस प्रकार प्रदेश की नदियों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान है। इस दृष्टि से राज्य में विद्यमान वनों के रखरखाव के लिए राज्य सरकार को केन्द्र की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की अपेक्षा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खेत-तालाबों और नए सरोवरों का निर्माण किया गया है। भू-जल संवर्धन के लिए कुओं का पुनर्भरण किया गया है। शहरी क्षेत्रों और वन क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित किया गया है। नदियां निर्मल और अविरल रहे, यह हमारी प्रतिबद्धता है और इसके लिए अभियान के अंतर्गत प्रमुख नदियों में गिरने वाले प्रदूषित नालों की पहचान कर उनके शोधन की याजना बनाई गई है। पाठशालाओं में जल के संबंध में विभिन्न गतिविधियों जैसे चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता, जल शपथ तथा रैलियों का आयोजन किया गया है। पानी के दक्षतापूर्ण उपयोग को भी अभियान के अंतर्गत प्रोत्साहित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक ग्राम और प्रत्येक शहर इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाए और जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए। केंद्र, राज्य सरकार और जनसहयोग से हम जल सुरक्षा के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे।

मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर : केन्द्रीय मंत्री श्री पाटिल

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश गुजरात को पानी दे रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश को भी पानी मिलेगा। इस परियोजना से 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और लाखों लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। राजस्थान के साथ भी पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने सकारात्मक सोच दिखाई है। मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने वाला राज्य है। केन्द्रीय मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जल संचय-जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। हमारी कोशिश है कि गांव का पानी गांव और खेत का पानी खेत में सिंचाई के लिए उपयोग हो। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देशवासियों से पेयजल की बर्बादी रोकने का भी आह्वान किया है। केंद्रीय मंत्री श्री पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बड़े वन क्षेत्र वाला राज्य है। वर्षा जल को संचित करने के प्रयासों से राज्य में सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता में और वृद्धि की जा सकती है।

बैठक के दौरान खंडवा (पूर्व निमाड़), राजगढ़ और इंदौर जिलों के जिला कलेक्टरों ने विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें जल संचय जनभागीदारी 2.0 के क्रियान्वयन की जिला स्तरीय प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। प्रस्तुतियों में भूजल पुनर्भरण, नदी पुनर्जीवन तथा जल संरक्षण गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उल्लेखनीय है कि अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया था। विशेष रूप से खंडवा (पूर्व निमाड़) जिला देशभर के जिलों में प्रथम स्थान पर रहा, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्रालय भोपाल में बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, श्री संजय दुबे, प्रमुख सचिव श्री पी. नरहरि सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
 प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन

 प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना

बिजली बिल से मिली राहत


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर आमजनों को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से  मुंगेली जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
         नगर पंचायत सरगॉव की जमुना पाण्डे ने अपने आवास पर 02 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। सोलर संयंत्र के चालू होते ही उनका घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है। जमुना पाण्डे ने बताया कि सोलर पैनल स्थापना होने से बिजली बिल से राहत मिली है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरल प्रक्रिया और सब्सिडी सुविधा ने उन्हें सोलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रेरित किया। 02 किलोवाट सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद न केवल उनके घर के बिजली बिल में कमी आई है, बल्कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस योजना को आम आदमी के लिए राहत और भविष्य के लिए निवेश बताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करें, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में सहभागी बनें। 
          उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापना पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट क्षमता पर 45 हजार रुपये, 02 किलोवाट पर 90 हजार रुपये तथा 03 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम पर 01 लाख 08 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यह प्रावधान सोलर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बना रहा है। आमजनों को योजना के लिए प्रोत्साहित करने शासन के निर्देशानुसार बैंकों द्वारा कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे आमजनों को योजना का लाभ लेना आसान हो गया है।

 जल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 जल गंगा संवर्धन अभियान विकास का आधार और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

अभियान में ग्राम स्तर तक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक
जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण के‍विरूद्ध की जाए कार्यवाही
नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से किया जाए विकसित
सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना व्यक्तिगत और सामाजिक दायित्व हो
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के संबंध में दिए निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल गंगा संवर्धन अभियान केवल पर्यावरण नहीं, विकास का आधार भी है। यह भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने का भी एक प्रयास है। अभियान अंतर्गत संचालित हर गतिविधि में राज्य से ग्राम स्तर तक जनभागीदारी को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। भू-जल स्त्रोतों के दोहन से गिरते भू-जल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह का प्रभाव सभी पर पड़ रहा है। इस स्थिति में सुधार के लिए भी सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। प्रदेश में पिछले जल गंगा संवर्धन अभियान के सुखद परिणाम प्राप्त हुए हैं। वर्ष-2026 के अभियान में भी हमें जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए अभियान को प्रभावी और परिणामूलक बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में गुरूवार को आयोजित बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, श्री अशोक बर्णवाल, श्री संजय दुबे, श्री नीरज मंडलोई, श्रीमती दीपाली रस्तोगी, श्री शिवशेखर शुक्ला एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। समस्त जिला कलेक्टर्स वर्चुअली शामिल हुए। बैठक में वर्ष 2025 के जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष-2026 की कार्ययोजना पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरचनाओं के जलग्रहण क्षेत्र पर अतिक्रमण के‍विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसी गतिविधियों पर सतत् रूप से निगरानी रखने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश से निकलने वाली नदियों के उद्गम स्थलों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा और उनके आस-पास सघन पौधरोपण किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में व्यक्तिगत पहल तथा सामुदायिक सहभागिता से प्याऊ लगाने की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने प्लास्टिक की बोतल के उपयोग को हतोत्साहित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सार्वजनिक स्थलों पर सुगमता से स्वच्छ शीतल पेयजल उपलब्ध कराने को सामाजिक दायित्व के रूप में समाज में स्थापित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जिन जिलों में बेहतर नवाचार हुए हैं, वे अपने यह प्रयास अन्य जिलों से साझा करें तथा जिले परस्पर इस तरह के नवाचारों का आदान-प्रदान करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रभारी मंत्री जिला स्तर पर जल गंगा संवर्धन अभियान को नेतृत्व प्रदान करें। सांसद, विधायक, पंचायत, नगरीय‍निकाय के सभी प्रतिनिधि सक्रियता से अभियान में सहभागिता करें। मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं और सीएसआर संगठनों को भी जनसहभागिता संबंधी गतिविधियों में जोड़ा जाए। जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में कार्यों के क्रियान्वयन की प्रभावी मॉनीटरिंग सुनिश्चित करें। अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग नोडल और नगरीय प्रशासन एवं विकास सह नोडल विभाग होगा। राजस्व, जल संसाधन, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नर्मदा घाटी विकास, वन, जन अभियान परिषद, उद्योग एवं एमएसएमई, पर्यावरण, संस्कृत, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग सहभागिता करेंगे। बैठक में अभियान के अंतर्गत वर्ष-2025 की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया।

19 मार्च से प्रारंभ होगा राज्य स्तरीय अभियान

बैठक में बताया गया कि जल गंगा संवर्धन अभियान वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च से एक साथ आरंभ किया जाएगा। प्रदेश के सभी जिलों में विक्रम संवत् और पर्यावरण, जलीय संरचनाओं के संरक्षण व संवर्धन पर गतिविधियां संचालित होंगी। अभियान के अंतर्गत 23 से 24 मई तक भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन का आयोजन होगा, 25 से 26 मई तक शिप्रा परिक्रमा यात्रा, 26 मई को गंगा दशहरा के अवसर पर शिप्रा तट उज्जैन में महादेव नदी कथा, 30 मई से 7 जून तक भारत भवन भोपाल में सदानीरा समागम होगा। इसमें प्रदेश की कृषि भूमि के सैटेलाइट मैपिंग का लोकार्पण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत कार्य प्रस्तावित किये गये।

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वाटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 170 करोड़ रूपए लागत के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। वर्ष 2025 में आरंभ 2500 करोड़ रूपए की लागत के 86 हजार 360 खेत-तालाब और 553 अमृत सरोवरों के कार्यों को पूर्ण किया जाएगा। विभाग जल जीवन मिशन की सिंगल विलेज स्कीम के कार्य क्षेत्रों में भू-जल संवर्धन के कार्य और प्राचीन परम्परागत जल संग्रहण संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य भी करेगा।

  • अभियान के अंतर्गत मां नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना तथा एक बगिया माँ के नाम परियोजना के अंतर्गत गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

  • बेतवा, क्षिप्रा और गंभीर नदियों की पुर्नउत्थान की योजना तैयार होगी।

  • नगरीय विकास विभाग नगरीय‍निकायों में 120 जल संग्रहण संरचनाओं का संवर्धन और 50 हरित क्षेत्रों का विकास करेगा। युवाओं की भागीदारी के लिए उन्हें अमृत मित्र बनाकर 'माय भारत पोर्टल' पर पंजीयन किया जाएगा। अभियान में 4 हजार 130 रेनवॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित करने का लक्ष्य है। नदियों में मिलने वाले 20 नालों की शोधन प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया जाएगा।

  • नगरीय‍निकायों द्वारा नदी, तालाब, बावड़ी का संवर्धन, नालों की सफाई, बड़े पैमाने पर पौधरोपण भी किया जाएगा। वातावरण निर्माण के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं, जागरूकता रैली और शालाओं में आईईसी गतिविधियां संचालित होंगी।

  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के भूजल स्त्रोतों के रिचार्ज, पेयजल स्त्रोतों के आस-पास साफ-सफाई और रख-रखाव के लिए गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

  • वन विभाग द्वारा अविरल निर्मल नर्मदा अंतर्गत भूजल संवर्धन के कार्य तथा वर्षा ऋतु में 28 लाख पौधों के रोपण की योजना है।

  • वन्य जीवों को पानी की उपलब्धता के लिए 25 करोड़ 10 लाख रूपए की लागत से 400 से अधिक जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण और 189 तालाबों का गहरीकरण किया जाएगा।

  • महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ी केन्द्रों में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग स्थापित करने, जल संरक्षण के ग्राम स्तर पर अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने और आंगनवाड़ी केन्द्रों को जल एवं पोषण मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित कर समुदाय को प्रेरित करने जैसी गतिविधियां संचालित करेगा। प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र में रेनवॉटर हार्वेस्टिंग के लिए 16 हजार रूपए और पोषण वाटिका के लिए 10 हजार रूपए स्वीकृत हैं।