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जलूद सोलर प्लांट राष्ट्रीय उपलब्धि है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जलूद सोलर प्लांट राष्ट्रीय उपलब्धि है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जलूद सोलर प्लांट राष्ट्रीय उपलब्धि है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

खरगोन जिले के जलूद में 271 करोड़ की लागत से बने 60 मेगावाट के सोलर पॉवर प्लांट का हुआ लोकार्पण
बिजली उत्पादन में ग्रीन एनर्जी का बढ़ता प्रभाव
जन भागीदारी से निर्मित प्रथम संयंत्र का श्रेय मध्यप्रदेश को

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जलूद सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण मध्यप्रदेश के साथ देशभर के लिए महत्वपूर्ण है। यहां सूर्य के प्रकाश को बिजली के रूप में बदलकर इंदौर नगर निगम लाभान्वित हो रहा है। लगभग 60 मेगावॉट क्षमता की इस परियोजना में भारत सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग मिला है। ग्रीन बॉन्ड स्कीम के माध्यम से इस परियोजना में देश की जनता को भागीदार (पार्टनर) बनाया है। पीपीपी मोड में कार्य करने वाला यह अपनी तरह का देश का प्रथम संयंत्र है। इस तरह से इस राष्ट्रीय उपलब्धि का श्रेय मध्यप्रदेश को जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव खरगोन जिले में महेश्वर के निकट जलूद में 271 करोड़ की लागत से बने 60 मेगावाट सोलर पॉवर प्लांट का लोकार्पण कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संयंत्र का अवलोकन भी किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस परियोजना में कोई भी व्यक्ति एक-एक लाख के 10 बॉन्ड खरीद सकता है। एक लाख पर लगभग 8 प्रतिशत की बचत होगी, जिसका लाभ 20 साल तक मिलेगा। अगर जरूरत पड़े तो इस बॉन्ड को बेचा भी जा सकता है। इस प्रकार से राज्य सरकार ने घर बैठे लोगों को पैसे कमाने का अवसर दिया है। मध्यप्रदेश सबसे सस्ती बिजली देने वाला राज्य है। हमारी बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन चल रही है। जलूद सोलर पॉवर प्लांट का भूमि-पूजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2023 में किया था। लोकार्पण अवसर पर प्रदेश में हरित ऊर्जा पर जारी कार्यों पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जलूद सोलर पॉवर प्लांट से दोहरा लाभ मिलेगा। इंदौर नगर निगम को बिजली तो मिलेगी ही, साथ में कार्बन उत्सर्जन भी कमी आएगी। बिजली उत्पादन में ग्रीन एनर्जी का नवाचार सर्वोत्तम है। इस परियोजना की लागत 10 साल में निकल जाएगी, अगले 10 साल सिर्फ लाभ के होंगे। मध्यप्रदेश बदल रहा है। एक समय था, जब रात में बिजली कटौती होती थी, दिन में बिजली तो मिलती ही नहीं थी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग में आगे है मध्यप्रदेश, वाराणसी में भी वैदिक घड़ी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंग्रेजी काल गणना के 12 महीने भी भारतीय खगोल मापदंड के आधार पर बने हैं। हमारे खगोल वैज्ञानिकों ने आर्यभट्ट के दौर में बता दिया था कि सूर्य की परिक्रमा करने में सभी ग्रहों को अलग-अलग समय लगता है। शनि ग्रह का एक वर्ष साढे़ 29 साल में पूर्ण होता है। सभी ग्रहों और नक्षत्रों की गति के आधार पर वैदिक ज्ञान से पता चलता है कि सूर्य और चंद्र ग्रहण कब होगा। मध्यप्रदेश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से प्राचीन ज्ञान के आधार पर राज्य सरकार ने वैदिक घड़ी तैयार की है। पहले उज्जैन और उसके बाद काशी विश्वनाथ मंदिर में वैदिक घड़ी स्थापित की गई। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आज ही वाराणसी स्थित बाबा विश्वनाथ धाम में सम्राट विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अवलोकन किया है। मध्यप्रदेश सरकार के सहयोग से सभी द्वादश ज्योतिर्लिंग परिसरों में यह वैदिक घड़ी लगाई जा रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महेश्वर-मंडलेश्वर क्षेत्र ज्ञान-विज्ञान का केंद्र रहा है। महर्षि मंडन मिश्र के नाम से प्रसिद्ध इसी क्षेत्र में उनका शंकराचार्य से शास्रार्थ हुआ था, तब मंडन मिश्र ने अपनी पत्नी को न्यायाधीश की जिम्मेदारी सौंपी थी। यह घटना देश के इतिहास में नारी सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक माता अहिल्या बाई होल्कर ने कठिन दौर में भी देशभर के सनातनी मंदिरों को भव्यता के साथ विकसित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में गेहूं का उपार्जन कार्य व्यवस्थित रूप से हो रहा है। हमारी सरकार ने 2 साल में गेहूं का भाव 400 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक बढ़ाकर किसानों को लाभ दिया है।

 इंदौर के इतिहास में लिखा जा रहा है एक नया अध्याय

जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि आज इंदौर के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश को ग्रीन एनर्जी का हब बनाने का संकल्प लिया है और इसी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव आगे बढ़ा रहे हैं। ग्रीन बॉन्ड से जुटाए फंड से जलूद में देश का पहला सोलर प्लांट बनकर तैयार हुआ है। इसके लिए इंदौर और महेश्वर की जनता को बधाई देता हूं। सांसद श्री शंकर लालवानी ने कहा कि भारत ग्रीन एनर्जी सेक्टर में काम करने वाला दुनिया का अग्रणी देश है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का कार्यक्रम में विधायक श्री राजकुमार मेव ने महेश्वर और इंदौर क्षेत्र को मिली विकास कार्यों की सौगातों के लिए आभार माना।

जनभागीदारी से बना देश का पहला सोलर प्लांट

महापौर इंदौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जलूद से ही नर्मदा मैया का जल 70 किलोमीटर दूर इंदौर तक पहुंचता है। जलूद में बुधवार को 300 करोड़ लागत के 60 मेगावाट क्षमता के सोलर पॉवर प्लांट का शुभारंभ हुआ है। यह ऐतिहासिक प्लांट केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई ग्रीन बॉन्ड व्यवस्था की मदद से बनकर तैयार हुआ है। इंदौर नगर निगम देश का पहला नगरीय निकाय है, जिसने ग्रीन बॉन्ड के माध्यम से फंड जुटाया है। इस सोलर प्लांट में देश के 28 राज्यों का योगदान मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस कार्य में आई सभी बाधाओं को बिना किसी देरी किए दूर किया और महेश्वर में जनभागीदारी से बने देश के पहले सोलर प्लांट का सपना साकार हो पाया है।

कार्यक्रम में राज्यसभा सदस्य श्री सुमेर सिंह सोलंकी, विधायकगण सुश्री ऊषा ठाकुर, श्री महेंद्र हार्डिया, विधायक श्री सचिन बिरला श्री रमेश मेंदोला, श्री गोलू शुक्ला, श्री मधु वर्मा के अलावा अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 

 लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर ने किया सनातन संस्कृति को गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर ने किया सनातन संस्कृति को गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर ने किया सनातन संस्कृति को गौरवान्वित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोकमाता अहिल्या बाई के स्थापित आदर्श मध्यप्रदेश सरकार की हैं प्रेरणा
मुख्यमंत्री महेश्वर में “गोदा से नर्मदा” जलयात्रा के समापन समारोह में हुए शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर ने आदर्श योद्धा, शक्तिशाली शासिका और पुण्यश्लोका के रूप में सनातन संस्कृति को गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि 300वीं जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र शासन द्वारा आयोजित की गई ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा के समापन पर उनकी कर्मभूमि महेश्वर में आज उत्साह का वातावरण है, जो अहिल्यादेवी के विरासत के महत्व को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की विरासत ऐसी है कि उन्हें समर्पित जलयात्रा जिसका शुभारंभ एक प्रदेश के मुख्यमंत्री और समापन दूसरे प्रदेश के मुख्यमंत्री करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य अपनी सांझा विरासत की कारण जुड़वां भाई की तरह है। उन्होंने ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा के सफल आयोजन की लिए महाराष्ट्र शासन का अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकमाता अहिल्यादेवी के आदर्श मध्यप्रदेश सरकार की प्रेरणा हैं। उन्होंने बताया कि 300वीं जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन ने गतवर्ष लोकमाता को समर्पित कैबिनेट बैठकों का आयोजन महेश्वर और इंदौर में किया था। लोकमाता की प्रेरणा से ही महेश्वर में दशहरा में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महेश्वर के अहिल्याघाट पर प्रतिदिन लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है जिसमें लोकमाता के गौरवशाली इतिहास प्रदर्शित होता है। मध्यप्रदेश सरकार महेश्वर में देवी अहिल्यालोक का निर्माण कर रही है जिसका भूमि-पूजन शीघ्र ही किया जाएगा। सरकार महेश्वर आवागमन की सुविधा के लिए फोरलेन हाइवे तैयार कर रही है। लोकमाता ने जिस प्रकार से देवस्थान, घाट और जनसुविधाओं का निर्माण किया, वैसे ही प्रदेश सरकार देवस्थलों के अंदर सुप्रबन्धन करने, धार्मिक नगरियों को हेली सेवा से जोड़ने जैसे सांस्कृतिक महत्त्व के कार्य कर रही है।

जल संसाधन मंत्री, महाराष्ट्र शासन डॉ. राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के जलप्रबंधन, लोक कल्याण और सुशासन के आदर्श आज भी प्रेरणास्त्रोत हैं। ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा लोकमाता की इसी जलप्रबंधन विरासत को साथ लेकर जनजागरुकता के उद्देश्य से निकाली गई थी। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान गोदावरी सहित महाराष्ट्र की 130 अन्य नदियों का जल और लोकमाता की जन्मस्थली चोंडी की पवित्र मिट्टी लेकर लोकमाता की कर्मस्थली महेश्वर पहुंची है। इस जलकलश और मिट्टीकलश का उपयोग कर रजवाड़ा परिसर में बेलपत्र का पौध रोपण किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जलयात्रा के समापन समारोह में शामिल होने पर आभार व्यक्त किया।

श्री चंद्रशेखर बावनकुले, राजस्व मंत्री, महाराष्ट्र शासन ने कहा कि गोदा से नर्मदा जलयात्रा का लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजन किया गया था जिसमें आध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक का अद्भुत संगम था। उन्होंने बताया कि युवा, किसान, स्वसहायता समूह, सभी ने साथ आकर जलयात्रा के दौरान जनभागीदारी से जनजागरुकता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस जलयात्रा के माध्यम से जलसंरक्षण को नई दिशा मिली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में जलक्रांति आ रही है, जो लोकमाता के आदर्शों का उत्सव है। कार्यक्रम के अंत में विपणन और राजशिष्टाचार मंत्री, महाराष्ट्र शासन श्री जयकुमार रावल ने आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्य विशिष्ट अतिथियों के साथ महेश्वर के ऐतिहासिक अहिल्याघाट पर विधि-विधान से मां भगवती नर्मदाष्टक महाआरती की। इस अवसर पर नमामि देवी नर्मदे की पवित्र गूंज और आकर्षक आतिशबाजी के बीच मुख्यमंत्री ने माँ नर्मदा से प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने छत्रपति शिवाजी महाराज और लोकमाता अहिल्यादेवी की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा के दौरान एकत्रित किए गए जलकलश और मिट्टीकलश मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपे गए।

कार्यक्रम में लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के वंशज श्रीमंत यशवंतराव होलकर, केंद्रीय महिला बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, सांसदद्वय श्री ज्ञानेश्वर पाटिल और श्री शंकर लालवानी, विधायक महेश्वर श्री राजकुमार मेव, विधायक बड़वाह श्री सचिन बिरला, विधायक खरगोन श्री बालकृष्ण पाटीदार, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनुबाई तंवर, सहित मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र शासन के अन्य जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

लोकमाता देवी अहिल्या बाई होल्कर के 300वीं जयंती वर्ष के अवसर पर जल प्रबंधन और जल संरक्षण का व्यापक संदेश देने के उद्देश्य से गोदावरी और कृष्णा घाटी सिंचाई विकास निगम, जल संसाधन विभाग, महाराष्ट्र शासन द्वारा ‘गोदा से नर्मदा’ जलयात्रा का आयोजन किया गया था। इस यात्रा का शुभारंभ गोदावरी तट पर मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने त्रब्यंकेशर और उप मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे ने लोकमाता की जन्मस्थली चोंडी से दिनांक 25 अप्रैल, 2026 को किया था। यात्रा महाराष्ट्र के 5 जिलों एवं मध्यप्रदेश के 3 जिलों से भ्रमण करते हुए 130 नदियों का जल और चोंडी की पवित्र मिट्टी लेकर नर्मदा तट पर स्थित अहिल्याघाट पर समाप्त हुई। यात्रा में लगभग 1000 जल यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं वारकरी समुदाय ने भाग लिया और जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता और लोकमाता देवी अहिल्या बाई के जलप्रबंधन से जुड़े कार्यों को जन-जन तक पहुंचाया।

 मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 मसाला फसलों के उत्पादन में हम अव्वल, उद्यानिकी फसलों के रकबे का करें विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों की आय वृद्धि का बड़ा जरिया हैं उद्यानिकी फसलें
मध्यप्रदेश फूल-सब्जी की पैदावार में देश में तीसरे और फलोत्पादन में है चौथे स्थान पर
फूलों की खेती के लिए उज्जैन में खुलेगा सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं एवं फील्ड गतिविधियों की समीक्षा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उद्यानिकी फसलें छोटी जगह से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम है। प्रदेश के अधिकाधिक किसानों को इससे जोड़ा जाये। किसानों को सीज़नल और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए प्राकृतिक खाद का उपयोग कर जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उद्यानिकी फसलों के माध्यम से किसानों की वास्तविक आय बढ़ाई जाए। किसानों की आय वृद्धि और उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिये योजनाबद्ध तरीके से उद्यानिकी फसलों और इनके जोत रकबे का साल-दर-साल विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी उद्यानिकी एवं मसाला फसलों की अंतर्राष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए बाजार तलाशें, उद्यानिकी उत्पादों की भरपूर ब्रांडिग करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की खेती भी बहुतायत में की जाती है। इनकी बड़ी संभावनाएँ है। औषधि निर्माण के लिए जरूरी इन फसलों की इन्टरनेशनल मार्केट में मांग अनुसार आपूर्ति के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार की जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में हर साल नये-नये आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल खोले जा रहे हैं। इनमें देशी/आयुर्वेदिक दवाईयों की आपूर्ति में प्रदेश की औषधीय फसलों एवं उप-उत्पादों का भरपूर उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि मसाला फसलों के उत्पादन में हम पूरे देश में पहले स्थान पर है। यह उपलब्धि हमें इस क्षेत्र में और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मंत्रालय में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं और गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में विभागीय संचालित योजनाओं की प्रगति और हितग्राहियों को लाभ प्रदाय पर गहन चर्चा की गई।

बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ - 2028 के मद्देनजर उज्जैन में फूलों की खेती को प्रोत्साहन एवं विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। सेंटर स्थापना के लिए उज्जैन शहर के पास एक गांव में 19 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर समुचित समन्वय भी किया जा रहा है।

दुनिया में मिलेगी मप्र की उद्यानिकी फसलों को पहचान

बैठक में बताया गया गया कि वर्ष 2030 तक उद्यानिकी क्षेत्र का रकबा 30 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। बागवानी फसलों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिएप्रदेश में हॉर्टिकल्चर प्रमोशन एजेंसी की स्थापना करने की कार्रवाई जारी है।

मध्यप्रदेश के उद्यानिकी उत्पादों को दुनिया में पहचाना जाएगा। इसके लिए जी आई टैग दिलवाने की प्रक्रिया जारी है। विशेष रूप से जबलपुरी मटर, गुना का कुंभराज धनिया, बुरहानपुर का केला, रतलाम का रियावन लहसुन, खरगोन की मिर्च, इंदौर का मालवी आलू, बरमन भटा, छतरपुर का पान जैसे उद्यानिकी उत्पादों को जल्दी ही विशिष्ट भौगोलिक पहचान मिल जाएगी।

मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का उत्पादन एवं देश में स्थान

क्रं

उद्यानिकी फसल/उत्पादन का नाम

देश में कुल उत्पादन

मप्र में कुल उत्पादऩ

देश में स्थान

1.

मसाला फसलें

129.52 लाख मी. टन

57.72 लाख मी. टन

पहला

2.

पुष्प उत्पादन

32.26 लाख मी. टन

4.88 लाख मी. टन

तीसरा

3.

सब्जी उत्पादन

2177.96 लाख मी. टन

259.52 लाख मी. टन

तीसरा

4.

फल उत्पादन

1176.48 लाख मी. टन

102.44 लाख मी. टन

चौथा

मध्यप्रदेश में हो रही मखाना की खेती, इस साल और बढ़ाएंगे रकबा

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मखाना की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। मखाना क्षेत्र विस्तार योजना के तहत प्रदेश के 14 जिलों यथा नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना एवं सतना में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मखाना उत्पादन का रकबा इस वर्ष बढ़ाकर 85.00 हैक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार द्वारा मखाना उत्पादन की कुल परियोजना लागत (एक इकाई) पर 40 प्रतिशत तक की अनुदान सहायता दी जाती है।

जून में भोपाल में होगा आम महोत्सव

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इसी वर्ष जून माह में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगौन में मिर्च महोत्सव, सितम्बर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव, नवम्बर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव मनाया जाएगा। साथ ही दिसंबर में ग्वालियर में मधुमक्खी पालन व्यवसाय के प्रोत्साहन एवं जागरूकता के लिए एक कार्यशाला/सेमिनार भी आयोजित की जाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को संतरा महोत्सव भी आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम महोत्सव के दौरान प्रदेश के सभी 10 संभागों में आम के 10 बाग लगाने के प्रयास किए जाएं। केला महोत्सव में केले के तने से रेशे बनाने वाले उद्यमियों/उद्योगपतियों को जोड़ा जाये। सब्जी महोत्सव के दौरान नागरिकों को अपने घरों में किचन गार्डन लगाने के लिए जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जाए।

40 नर्सरियां हो रहीं हाईटेक

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में प्रेसराईज इरीगेशन वाले जिलों में 15 हज़ार हैक्टेयर रकबे में सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र का विस्तार भी किया जा रहा है। दो स्मार्ट बीज फार्म का विकास, सागर में झिला फार्म एवं देवास में कन्नौद फार्म विकसित किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग के अधीन 40 नर्सरियों का उन्नयन कर इन्हें पूरी तरह से हाईटेक किया जा रहा है। धार जिले के बदनावर के समीप रूपाखेड़ा गांव में युवाओं द्वारा फूलों की खेती की जा रही है। यह गांव मध्यप्रदेश में स्विट्जरलैंड के किसी गांव की तरह फूलों की खेती में विशेष पहचान बना रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां उद्यानिकी फसलों के लिए बेहद अनुकूल हैं, इसका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्रवार विशेष फसलों की पहचान कर किसानों को उनकी खेती के लिए प्रोत्साहित करें। उद्यानिकी फसलों के रकबे में तेजी से वृद्धि के लिए किसानों को जोड़कर एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जाए। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि एवं उद्यानिकी से सम्बद्ध विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित किया जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी क्षेत्र में ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाए जाएं। पारम्परिक खेती के साथ-साथ किसानों को फल, फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों से जोड़ना जरूरी है, जो उन्हें त्वरित और अधिक नकद आय प्रदान कर सकें। खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए किसानों को जोड़कर सभी उपाय किये जायें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाकर इन्हें और प्रभावी बनायें। योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार की योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न होने पाए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य योजनाओं का धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यानिकी फसलों एवं इनके उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास से किसानों की आय भी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दिशा में छोटे-छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना ही हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। राज्य सरकार कृषि को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण से हम किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की ओर बढ़ेंगे। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को विभागीय अनुदान योजनाओं की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक खेती-बाड़ी के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।

बैठक में सामाजिक न्याय, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, मुख्यमंत्री के सचिव श्री आलोक कुमार सिंह, संचालक उद्यानिकी तथा अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।

 मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दे रहा है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दे रहा है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को दे रहा है नई ऊर्जा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

लोधी समाज वीरता और‍ किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक
राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में फूंका क्रांति का बिगुल
राजा हिरदेशाह लोधी की कर्मस्थली हीरापुर को तीर्थ स्थल के रूप में करेंगे विकसित
राजा हिरदेशाह के संघर्ष और शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा
राज्य सरकार कराएगी राजा हिरदेशाह पर शोध
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि कार्यक्रम को किया संबोधित
मंत्री श्री पटेल और पूज्य दादा गुरु ने भी किए विचार व्यक्त
जंबूरी मैदान पर हुआ भव्य कार्यक्रम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। आज राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर शौर्य यात्रा के माध्यम से हम, भूले-बिसरे उन नायकों को समाज के सामने ला रहे हैं, जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ सबसे पहले संगठित विद्रोह किया। राजा हिरदेशाह को नर्मदा टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। वे 1842 की क्रांति के महानायक थे, जिनकी शौर्य गाथा आज भी बुंदेला, लोधी और जनजातीय समाज के नाटकों, लोक गीतों और लाखों-लाख हृदय में जीवित है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राज्य शासन राजा हिरदेशाह के संघर्ष और देश की आजादी में उनके योगदान पर शोध कराएगी। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ पुन: खुलने चाहिए। राजा हिरदेशाह के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा। नर्मदा के किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के महानायक राजा हिरदेशाह लोधी की स्मृति में जंबूरी मैदान पर हुए ऐतिहासिक आयोजन और शौर्य यात्रा को संबोधित किया। कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद श्री फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी तथा राजा हिरदेशाह लोधी और गोंड राजा नरवर शाह के वंशज उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के नायक नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राजा हिरदेशाह पर शोध और उनके संघर्ष को पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा के लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा अभिवादन किया गया।

राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में कर रही है निरंतर गतिविधियां संचालित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोधी समाज वीरता और‍किसान योद्धा परंपरा का प्रतीक है। अंग्रेजों की बढ़ती दखलअंदाजी, करों के भारी बोझ और किसानों के शोषण ने राजा हिरदेशाह को विद्रोह के लिए प्रेरित किया। राजा हिरदेशाह की कहानी केवल युद्ध की नहीं, बल्कि एकता, साहस और देशभक्ति की गाथा है। आज के युवाओं के लिए उनका स्पष्ट संदेश है कि अत्याचार के खिलाफ खड़े होना, हर भारतीय का कर्तव्य है। राज्य सरकार प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों के सम्मान में निरंतर गतिविधियां संचालित कर रही है। रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। राज्य सरकार द्वारा सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्यौहार धूमधाम से मनाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है। महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है। इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं। सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं।

समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि यह कार्यक्रम अपने पुरखों के बलिदान को स्मरण करने का है। आज सामाजिक जीवन में शिक्षित होने के साथ संस्कारित बनने का संकल्प भी लेना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की आजादी के गुमनाम नायकों को याद करने का आह्वान किया था। आज सवाल यह नहीं है कि 1857 की क्रांति बड़ी थी या 1842 की। राजा हिरदेशाह के द्वारा 1842 में आरंभ की गई बुंदेली क्रांति से 1942 भारत छोड़ो आंदोलन तक का कालखंड भारत के ऐतिहासिक आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण 100 वर्ष हैं। राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। आज राजा मेहरबान सिंह को भी याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी कोई लड़ाई नहीं हारी। यह आयोजन ऐसे वीरों के बलिदान को याद करने के लिए है। उनके परिवारों का सम्मान करने का दिन है। लोधी समाज सामर्थ्यवान हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया, प्रश्न यह है कि वो पिछड़े कैसे हो गए। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है। आज हम सभी राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान को नमन कर रहे हैं।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका था। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। राज्य सरकार सभी शहीदों के बलिदान को नमन कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान और उनके कार्यों को पाठ्यक्रम में शामिल कराने का अनुरोध किया।

नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था

पूज्य दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है। शौर्य दिवस के अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। राजा हिरदेशाह ने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।

युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करना आवश्यक

लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज के गौरव राजा हिरदेशाह ने ब्रिटिश शासन के कानूनों का विरोध करते हुए 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया। इस संघर्ष में उनके करीब 12 भाई बलिदान हुए। उनकी पूरी संपत्ति राजसात कर ली गई थी। लोधी एक किसान और योद्धाओं का समाज है। श्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज ने नशे के खिलाफ मुहिम शुरू की है। उन्होंने युवाओं को इस मुहिम में सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नि:स्वार्थ भाव से किया गया कार्य सदैव स्थायी और सभी के लिए हितकर रहता है।

राजा हिरदेशाह और गोंड राजा नरवर शाह के वंशज हुए कार्यक्रम में शामिल

शौर्य दिवस कार्यक्रम में विधायक श्री प्रीतम लोधी, श्री नीरज लोधी, श्री रामसिया भारती, श्री राजकुमार कर्राहे, एटा सदर (उत्तरप्रदेश) के विधायक लोधी विपिन वर्मा 'डेविड' और राजा हिरदेशाह लोधी के वंशज श्री कौशलेंद्र सिंह, गोंड राजा नरवर शाह के वंशज श्री राजकुमार शाह सहित अखिल भारतीय लोधा-लोधी लोध महासभा, राजा हिरदेशाह लोधी शोध संस्थान भोपाल, अखिल भारतीय राजगोंड महासभा, आलोक संघ और समस्त लोधी समाज संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम में लोधी समाज के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।

 मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास योजनाओं के लिये 26 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास योजनाओं के लिये 26 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास योजनाओं के लिये 26 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति

लोक निर्माण के कार्यों के लिए 26311 करोड़ और चिकित्सा शिक्षा, आंगनवाड़ी एवं सिंचाई योजना के लिए 490 करोड़ रूपये की स्वीकृति
लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 155 करोड़ 82 लाख रूपये की मिली स्वीकृति
पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी छात्रगृह योजना में संशोधन,छात्रवृत्ति 1550 से बढ़कर हुई 10 हजार प्रतिमाह, अब प्रतिवर्ष 100 नए विद्यार्थी होंगे लाभांवित
38,901 आँगनवाड़ी भवनों में विद्युतीकरण के लिए 80 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति
गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में पी.जी. सीट वृद्धि योजना अंतर्गत 79 करोड़ 16 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति
श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के लिए 174 करोड़ 80 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए 26 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लोक निर्माण विभाग की आगामी 5 वर्षों (2026-2031) की विभिन्न निर्माण व नवीनीकरण परियोजनाओं के लिए 26,311 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सामाजिक न्याय और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए मंत्रि-परिषद ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिये छात्रवृत्ति राशि में ऐतिहासिक वृद्धि कर इसे 1,550 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था के लिए लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और प्रदेश की 38,901 आंगनवाड़ियों के विद्युतीकरण के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। चिकित्सा क्षेत्र में विस्तार के लिए भोपाल और रीवा के चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृतियां भी दी गईं, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और अधोसंरचना को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नई ऊंचाई प्रदान करेंगी। मंत्रि-परिषद की बैठक वन्दे मातरम गान से प्रारंभ हुई।

लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 155 करोड़ 82 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा शाजापुर जिले की लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना लागत राशि 155 करोड़ 82 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से शाजापुर जिले की शाजापुर तहसील के 17 एवं उज्जैन जिले की तराना तहसील के 7 ग्राम इस तरह कुल 24 ग्रामों के लिए 9 हजार 200 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना अंतर्गत लखुंदर नदी पर शाजापुर जिले में मक्सी के समीप पूर्व से ही निर्मित जलाशय से 24.37 मीट्रिक घन. मीटर जल का उद्वहन कर सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जाऐगी।

लोक निर्माण विभाग के निर्माण और विभिन्न विकास कार्यों के लिए 26 हजार 311 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मार्गों के नवीनीकरण, कार्यालयों की स्थापना और मरम्मत, आवासों के अनुरक्षण सहित भू-अर्जन के लिए मुआवजा संबंधी विभिन्न योजनाओं की सोलहवें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए लगभग 26 हजार 311 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

स्वीकृति अनुसार मुख्यालय कार्यालय स्थापना, मण्डल कार्यालय स्थापना, अनुरक्षण, मरम्मत-संधारण और संभागीय कार्यालय स्थापना संबंधी योजनाओं के लिए 6,180 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

इसके साथ ही केन्द्रीय सड़क अधोसंरचना निधि संबंधी योजनाओं के लिए 6 हजार 925 करोड़ रूपये, एफ-टाईप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवास एवं गैर आवासीय भवनों का अनुरक्षण का कार्य संबंधी योजना के लिए 1 हजार 680 करोड़ रूपये और भू-अर्जन के लिए मुआवजा संबंधी योजना के लिए 6 हजार 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है।

इसके अलावा भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान और डिक्रीधन के भुगतान के लिए 25 करोड़ 50 लाख रूपये और मुख्य जिला मार्गों, जिला मार्ग तथा अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण संबंधी योजना के लिए 5 हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

पिछड़ा वर्ग विद्यार्थी छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन की स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार अब हर साल कुल 100 नए विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिसमें 50 सीटें स्नातक और 50 सीटें स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए तय की गई हैं। इसके साथ ही, जो विद्यार्थी पहले से इस योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें उनके कोर्स की अवधि पूरी होने तक सहायता मिलती रहेगी।

छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली 1,550 रूपये की राशि को अब बढ़ाकर सीधे 10 हजार रूपये प्रति माह कर दी है। योजना का लाभ लेने के लिए यह जरूरी है कि विद्यार्थी पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो और उसके अभिभावकों की वार्षिक आय सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई आय सीमा के भीतर हो।

गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में पी.जी. सीट वृद्धि योजना अंतर्गत 79 करोड़ 16 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा शिक्षा के विस्तार तथा दूरस्थ अंचलों में तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पी.जी. सीट वृद्धि योजना के अंतर्गत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल के लिए रेडियोथैरिपी विभाग की ओ.पी.डी, लीनियक मशीन बंकर, बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट और कैथलैब का निर्माण कार्य के लिए 14 करोड़ 8 लाख रूपये की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान करने के साथ 79 करोड़ 16 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल विस्तार के लिए 174 करोड़ 80 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के अंतर्गत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के तहत निर्माण कार्य के लिए 164 करोड़ 49 लाख रूपये के स्थान पर 174 करोड़ 80 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

38,901 आँगनवाड़ी भवनों में विद्युतीकरण के लिए 80 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत विद्युतविहीन आँगनवाड़ी भवनों में विद्युत व्यवस्था अन्तर्गत 38 हजार 901 ऑगनवाड़ी भवनों में बाहय विद्युतीकरण संबंधी योजना की 16 वें वित्त आयोग की निर्धारित अवधि (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) की स्वीकृति एवं निरंतरता के लिए 80 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

स्वीकृति अनुसार प्रदेश में संचालित कुल 97,882 आँगनवाड़ी केन्द्रों में से विद्युत व्यवस्थाविहीन 38,901 विभागीय आँगनवाड़ी भवनों में विदयुत व्यवस्था करवाई जाएगी। आंगनवाड़ी भवनों में बाहय विदयुतीकरण होने पर ट्यूबलाईट/बल्ब, पंखा, कूलर, स्मार्ट टी.वी.,वॉटर प्यूरीफायर इत्यादि के समुचित उपयोग होगा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की समस्त विभागीय योजनाओं का बेहतर तरीके से संचालन होगा। विभागीय योजनाओं की गतिशीलता बढ़ेगी। आँगनवाड़ी केन्द्र के बच्चें सुविधाजनक वातावरण में शालापूर्व शिक्षा व अन्य सेवायें ले सकेंगे।

वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक कुल 38,814 विभागीय आँगनवाड़ी भवनों, धरती आबा योजना अंतर्गत शेष संभावित 69 आँगनवाड़ी भवन एवं जिला खनिज फंड से निर्मित 18 आँगनवाड़ी भवनों सहित अनुमानत 38,901 आँगनवाड़ी भवनों में बाहय विदयुतीकरण का लक्ष्य है।