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 होली की मस्ती के बाद सता रहा है भांग का हैंगओवर? इन आसान तरीकों से मिलेगी राहत

होली की मस्ती के बाद सता रहा है भांग का हैंगओवर? इन आसान तरीकों से मिलेगी राहत

होली की मस्ती के बाद सता रहा है भांग का हैंगओवर? इन आसान तरीकों से मिलेगी राहत


भांग वाली ठंडाई होली पर कई लोग खूब पसंद करते हैं, लेकिन बाद में हैंगओवर के कारण काफी परेशान होना पड़ सकता है। ...और पढ़ें




भांग का हैंगओवर कैसे उतारें? (Picture Courtesy: Freepik)


शरीर को हाइड्रेटेड रखें और खूब पानी पिएं


एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर पौष्टिक खाना खाएं


पर्याप्त नींद लें और हल्की शारीरिक गतिविधि करें


 होली का त्योहार पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जा रहा है। रंगों के इस उत्सव में गुजिया, रसमलाई और नमकपारे जैसे पकवानों की मिठास घुली होती है, लेकिन होली का एक मुख्य आकर्षण भांग भी है।


अक्सर भांग के पत्तों और फूलों के पेस्ट को ठंडाई में मिलाकर इसे होली के अवसर पर पिया जाता है, लेकिन जैसे ही इसका असर कम होता है, अगली सुबह यह अपने साथ एक भारी हैंगओवर लेकर आता है। अगर आप भी भांग के खुमार से परेशान हैं, तो घबराएं नहीं। यहां कुछ असरदार तरीके दिए गए हैं, जो भांग का हैंगओवर उतारने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं।


भांग का हैंगओवर उतारना क्यों जरूरी है?

भांग के प्रभाव को शरीर से निकालना इसलिए जरूरी है, क्योंकि इसमें मौजूद तत्व शरीर में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। अगर सही समय पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे लगातार चक्कर आना और फोकस करने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा, ज्यादा भांग से जी मिचलाना, एसिडिटी और पेट की समस्याएं भी बढ़ सकती है। यह शरीर को डिहाइड्रेट कर देती है, जिससे सिरदर्द और थकान बनी रहती है। डिटॉक्स करने से आपका मूड बेहतर होता है और स्लीप साइकिल भी वापस पटरी पर आ जाता है।



हैंगओवर उतारने के लिए टिप्सखुद को हाइड्रेटेड रखें- भांग को शरीर से बाहर निकालने के लिए खूब पानी पिएं। इसके अलावा नारियल पानी, हर्बल टी या ताजे फलों का जूस पीना बहुत फायदेमंद होता है। यह शरीर को हाइड्रेट भी करता है
पौष्टिक खाना- शरीर को रिकवर करने के लिए एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाना खाएं। अपनी डाइट में बेरीज, पत्तेदार सब्जियां और नट्स शामिल करें। ये शरीर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करते हैं। खाना धीरे-धीरे चबाकर खाएं, ताकि पाचन बेहतर हो।
डिटॉक्स ड्रिंक्स पिएं- अपनी रिकवरी डाइट में अदरक, लहसुन, हल्दी और क्रूसिफेरस सब्जियों, जैसे- ब्रोकली को शामिल करें। ये लिवर को स्वस्थ रखते हैं और शरीर से गंदगी बाहर निकालने में मदद करते हैं।
हर्बल टी पिएं- डंडेलियन टी या कोई भी दूसरी हर्बल टी पाचन में सुधार करती है और नर्वस सिस्टम को शांत करती हैं। शरीर को अंदर से साफ करने का यह एक बेहतरीन तरीका है।
शारीरिक गतिविधि और भरपूर नींद- हल्की कसरत जैसे टहलना या योग करने से पसीना आता है, जिससे टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं। इसके साथ ही, शरीर की सेल्स की मरम्मत और हार्मोन बैलेंस के लिए भरपूर नींद लेना सबसे जरूरी है।
रिलैक्सिंग बाथ- एप्सम साल्ट या एसेंशियल ऑयल डालकर गुनगुने पानी से नहाएं। इससे शरीर को आराम मिलता है और त्वचा के पोर्स भी साफ होते हैं।
आंखों में जलन या स्किन पर खुजली? होली पर केमिकल वाले रंगों से बचने के लिए अपनाएं डॉक्टर के बताए टिप्स

आंखों में जलन या स्किन पर खुजली? होली पर केमिकल वाले रंगों से बचने के लिए अपनाएं डॉक्टर के बताए टिप्स

आंखों में जलन या स्किन पर खुजली? होली पर केमिकल वाले रंगों से बचने के लिए अपनाएं डॉक्टर के बताए टिप्स


आर्टिफिशियल रंगों से आंखों, कान, त्वचा और बालों को हो सकते हैं गंभीर नुकसान। ...और पढ़ें







खुशियों से भरे त्योहार पर केमिकल रंगों का हुड़दंग कहीं आपके चेहरे को लाल न कर दें। यही नहीं, रंगों के साथ मस्ती के दौरान आपकी छोटी-सी लापरवाही पार्टनर की हंसती खेलती जिंदगी में भंग न डाल दे।


वर्षों से होली के दिन केमिकल रंगों की मस्ती तमाम लोगों को इतनी भारी पड़ी कि उनमें स्किन इन्फेक्शन, आंखों में जलन, जीभ पर छाले और अन्य गंभीर बीमारियों ने अपनी चपेट में ले लिया। आइए जानें इस बारे में दैनिक जागरण के वरिष्ठ संवाददाता सुमित शिशोदिया व जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक दूबे के बीच बातचीत के अंश।
मौसम बदलने पर लोगों को तेज धूप से त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब: धूप में लंबा समय बिताने से त्वचा को काफी नुकसान होता है, जिसे फोटोएजिंग कहते हैं सूर्य की अल्ट्रा वाइलेट किरणों से महीन और चेहरे पर मोटी झुर्रियां पड़ जाती हैं, जहां तहां पिगमेंट बढ़ जाते हैं। धूप में त्वचा सनबर्न का शिकार हो जाती है। और स्किन कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हालांकि, इनमें से तीन बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, मेलेनोमा सबसे आम हैं। बचाव के लिए लंबे समय तक धूप में बिल्कुल न रहें। पूरी बाजू के कपड़े पहनकर रखें।





(AI Generated Image)
होली के दिन रंग से खेलने पर शरीर में खुजली और लाल चकत्ते हो जाते हैं, क्या और भी समस्या हो सकती है?

जवाब: होली भले ही रंगों से खेलने के लिए पर्व है, लेकिन तेज धूप में केमिकल वाले रंगों से त्योहार न मनाए। करना केमिकल रंग लगने से शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली, छोटे- छोटे दाने और अन्य परेशानी हो सकती है। शरीर पर लेंटिजिनीज होने से रंग पीला पड़ जाता है और त्वचा की सतह चमड़े जैसी खुरदरी हो जाती है।

कई लोग होली के दिन शरीर के अलग-अलग हिस्सों में ग्रीस भी लगा देते हैं। क्या बालों में ग्रीस लगने से दिक्कत भी हो सकती है?

जवाब: होली के दिन ग्रीस या वारनेस जैसी चीजें बालों के छिद्रों को बंद कर देते हैं। त्वचा में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है। बालों की ग्रोथ भी रूकने का खतरा रहता है। देखने में आता है कि केमिकल लगाने से आता है कि केमिकल लगाने से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं और इनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है, जो व्यक्ति की सुंदरता को और खराब करता है। बचाव के लिए बालों में नारियल का तेल लगा लें। साथ ही सिर को टोपी या किसी कपड़े से कवर कर रखें।

आंखों पर रंग लगाने से लालीपन, खुजली और अन्य समस्या होने लगती हैं। क्या तुरंत राहत के लिए कोई दवा भी डाल सकते हैं?

जवाब: आंखों में केमिकल कलर और ग्रीस लगाने से जलन, लालीपन व खुजली हो जाती है। कई बार आंखों से ज्यादा दबाव देकर रंग लगाने से दर्द भी हो जाता है। होली पर रंग लगाने से पहले चश्मा लगा लें। कुछ समय बाद आंखों को पानी से साफ करते रहिए। तुरंत राहत के लिए आई लुब्रिकेंट या टियर ड्राप की दो-दो बूंद दिन में तीन - चार बार डालें। आंखों में कोई भी दिक्कत होने पर सबसे पहले डाक्टर से परामर्श जरूर लें।

होली मनाने के बाद जिला अस्पताल के अंदर ओपीडी में मरीजों की संख्या में इजाफा होता है?

जवाब: पिछले पांच-छह वर्षों के आंकड़े देखे तो होली पर अधिकांश लोग लापरवाही का शिकार होते हैं। विभिन्न रंग लगाने से शरीर में लोगों को एलर्जिक रिएक्शन हो जाता है। त्वचा इंफेक्शन होने के बाद मरीज जिला अस्पताल की ओपीडी में परामर्श लेने आते हैं।

होली का सुरक्षित त्योहार मनाने के लिए लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब: यदि आपको केमिकल या पक्के रंगों से खेलने का शौक है तो कोशिश करें कि इस बार पक्के रंग न लगाएं। बचाव के लिए सबसे पहले बाड़ी पर सनस्क्रीन लगाएं। मोइस्चराइजर का उपयोग करें, ताकि त्वचा पर धूप की पैरा बैंगनी किरणें का असर न पड़े। साथ ही सभी का त्योहार सुरक्षित तरीके से मन सके । मोइस्चराइजर का प्रयोग दिन में कम से कम दो-तीन बार करें।
हार्ट अटैक के खतरे को कम करते हैं ये खास फूड्स, नेचुरली बढ़ाते हैं आपका गुड कोलेस्ट्रॉल

हार्ट अटैक के खतरे को कम करते हैं ये खास फूड्स, नेचुरली बढ़ाते हैं आपका गुड कोलेस्ट्रॉल

हार्ट अटैक के खतरे को कम करते हैं ये खास फूड्स, नेचुरली बढ़ाते हैं आपका गुड कोलेस्ट्रॉल


फैटी फिश, अलसी, एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल और नट्स गुड, कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करते हैं। गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने से दिल की बीमारियों ...और पढ़ें






डाइट में शामिल करें ये चीजें, आसानी से बढ़ाएं गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर (Picture Credit- AI Generated)

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हार्ट हेल्थ के लिए कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहद जरूरी है, खासकर गुड कोलेस्ट्रॉल कहे जाने वाले एचडीएल का स्तर ज्यादा होना और बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का कम होना।

सामान्यतौर पर पुरुषों में जहां एचडीएल 40 से ऊपर होना चाहिए, वहीं महिलाओं में 50 से ऊपर। आइए, जानते हैं एचडीएल को बढ़ाने के लिए किस तरह के हेल्दी फैट्स और डाइट की जरूरत होती है।
ये फैट्स हैं जरूरी मोनोसैचुरेटेड फैट्स: इसे प्लांट बेस्ड चीजों से ले सकते हैं।
पॉलीसैचुरेटेड फैट्स: इसका मुख्य स्रोत ऑयली फिश और कई प्रकार की प्लांट बेस्ड चीजें होती हैं।
ओमेगा-3 फैटी एसिड्स: यह एचडीएल को बढ़ाने के साथ-साथ ट्राइग्लिसराइड को भी कम करता है, जो कि हार्ट के लिए एक और खतरा माना जाता है।
डाइट में शामिल करें ये चीजेंफैटी फिश: कुछ खास प्रकार की मछलियों में भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 पाया जाता है। लेकिन ये फिश एचडीएल को बढ़ाने में भी मदद करती हैं। इसे हफ्ते में कम से कम दो बार जरूर लें। सैल्मन, हिल्सा, बांगड़ा और एंकोवी कुछ ऐसी मछलियां हैं, जिनमें ओमेगा-3 ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, लेकिन मरक्यूरी का खतरा कम होता है।
अलसी के बीज: इन छोटे-छोटे बीजों में ओमेगा-3 की भरपूर मात्रा के साथ-साथ सॉल्यूबल फाइर्ब्स भी होता है, जोकि बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इससे खून में एचडीएल और एलडीएल का एक हेल्दी बैलेंस बना रहता है।
नट्स: हेल्दी फैट्स के अच्छे स्रोत माने जाने वाले नट्स सीधे तौर पर एचडीएल को तो नहीं बढ़ाते, लेकिन रिचर्स बताती है कि इससे एचडीएल बेहतर काम करता है। यानी यह लिवर से बैड कोलेस्ट्रॉल को ज्यादा प्रभावी तरीके से बाहर निकालता है और उसका स्तर कम होने लगता है। अखरोट, बादाम और पिस्ता सबसे बेहतर नट्स माने जाते हैं।
एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल: यह कई रूपों में आपके हार्ट को फायदा पहुंचाता है। जैसे एचडीएल के स्तर को बढ़ाना और एलडीएल को कम करना। यदि आप कुकिंग में इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे तो आप सलाद के ऊपर ड्रेसिंग के तौर पर ले सकते हैं।
सतरंगी फलों का टोकरा: वैसे तो गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने के लिए हर रंग के फल और सब्जियों को खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन सेब, बेरीज जैसे फाइबर युक्त फल ज्यादा फायदेमंद होते हैं। इसे आप शाम के स्नैक के तौर पर ले सकते हैं। इसके साथ ही हर रंग की शिमला मिर्च, शकरकंद, ग्रेपफ्रूट भी एचडीएल को बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं।
जरूरी नहीं कि सीने में दर्द ही हो! हार्ट अटैक के इन 5 लक्षणों को गैस या थकान समझने की भूल न करें

जरूरी नहीं कि सीने में दर्द ही हो! हार्ट अटैक के इन 5 लक्षणों को गैस या थकान समझने की भूल न करें

जरूरी नहीं कि सीने में दर्द ही हो! हार्ट अटैक के इन 5 लक्षणों को गैस या थकान समझने की भूल न करें



सीने में दर्द के अलावा हार्ट अटैक के और भी संकेत होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ...और पढ़ें






लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हार्ट अटैक का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहली तस्वीर एक ऐसे व्यक्ति की आती है जो अचानक अपने सीने को पकड़कर जमीन पर गिर पड़ता है। फिल्मों और विज्ञापनों में हार्ट अटैक के इसी क्लासिक लक्षण को बार-बार दिखाया जाता है, लेकिन असल में इसके लक्षण इतने साफ नहीं होते।


हार्ट अटैक के कई मरीजों में सीने में दर्द होता ही नहीं है, बल्कि दूसरे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इन लक्षणों को पहचानना जान बचाने के लिए बेहद जरूरी हैं। आइए जानें हार्ट अटैक के लक्षण, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
सांस लेने में तकलीफ

अगर आपको बिना किसी भारी काम के या आराम करते समय भी सांस फूलने की समस्या हो रही है, तो यह दिल की बीमारी का संकेत हो सकता है। जब दिल शरीर के बाकी हिस्सों में ब्लड पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है, जिससे सांस लेने में परेशानी होती है।




(AI Geneated Image)
शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द और बेचैनी

हार्ट अटैक का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। यह दर्द अक्सर कंधों, गर्दन, जबड़े, पीठ या हाथों में महसूस हो सकता है। कई बार लोग जबड़े के दर्द को दांत का दर्द समझ लेते हैं, जबकि वह हार्ट अटैक का संकेत होता है।

ज्यादा थकान और कमजोरी

अगर आप पिछले कुछ दिनों से बिना किसी कारण के बहुत ज्यादा थकान महसूस कर रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। खासकर महिलाओं में, हार्ट अटैक से पहले हफ्तों तक बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो सकती है। यह थकान इतनी ज्यादा होती है कि रोजमर्रा के छोटे काम करना भी दूभर हो जाता है।

ठंडा पसीना आना और चक्कर

बिना गर्मी या किसी मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आना एक गंभीर चेतावनी है। अगर इसके साथ आपको चक्कर आ रहे हैं या ऐसा लग रहा है कि आप बेहोश होने वाले हैं, तो यह दिल तक ब्लड सर्कुलेशन में कमी का संकेत हो सकता है।

पेट में गड़बड़ी और जी मचलना

हार्ट अटैक के लक्षणों को अक्सर एसिडिटी या अपच समझ लिया जाता है। पेट के ऊपरी हिस्से में दबाव महसूस होना, जी मिचलाना या उल्टी होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। अगर आपको बार-बार ऐसी समस्या हो रही है जो एंटासिड लेने से ठीक नहीं हो रही, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

क्या करें अगर ये लक्षण महसूस हों?तुरंत मदद मांगें- खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश न करें। एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद लें।
शांत रहें- घबराहट दिल पर दबाव बढ़ा सकती है। लंबी और गहरी सांसें लेने की कोशिश करें।
क्या आपको भी है दोपहर में सोने की आदत? डॉक्टर बता रहे हैं इसे 'साइलेंट किलर'

क्या आपको भी है दोपहर में सोने की आदत? डॉक्टर बता रहे हैं इसे 'साइलेंट किलर'

क्या आपको भी है दोपहर में सोने की आदत? डॉक्टर बता रहे हैं इसे 'साइलेंट किलर'



डॉ. अदितिज धमीजा ने बताया कि गलत समय ली गई दोपहर की झपकी दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है। ...और पढ़ें





दोपहर में सोने वाले हो जाएं अलर्ट (Image Source: AI-Generated)


गलत झपकी से दिल की बीमारी और डायबिटीज का जोखिम


गलत समय और ज्यादा देर तक सोना शरीर के लिए जहर है


डॉक्टर का कहन है कि सिर्फ 10 से 30 मिनट की ही झपकी लें


लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दोपहर के समय एक छोटी-सी झपकी लेना हममें से कई लोगों को बहुत पसंद होता है। दिनभर की थकान के बीच यह कुछ पल का सुकून जरूर देता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डॉक्टर के अनुसार, दोपहर की नींद आपके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है?


हार्वर्ड की एक स्टडी ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि दोपहर में सोने की आदत दिल की बीमारियों, डायबिटीज और यहां तक कि समय से पहले मौत के खतरे को बढ़ा सकती है। आइए, डॉ. अदितिज धमीजा से डिटेल में जानते हैं इसके बारे में।
सोने से पहले जान लें ये 2 नियम

असल में, दोपहर की नींद अपने आप में बुरी नहीं है। खतरा तब पैदा होता है जब आप 'गलत समय' पर या 'गलत अवधि' के लिए सोते हैं। शरीर के लिए गलत समय या गलत तरीके से ली गई झपकी किसी जहर तरह काम करती है और आपकी सेहत को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचाती है।

घबराइए मत। डॉक्टर के मुताबिक, इसी हार्वर्ड स्टडी में यह भी बताया गया है कि आप खुद को इस खतरे से कैसे बचा सकते हैं। अगर आप दोपहर में सोना ही चाहते हैं और बीमारियों से भी बचना चाहते हैं, तो आपको बस इन दो आसान नियमों का पालन करना होगा:
सही अवधि: आपकी झपकी सिर्फ 10 से 30 मिनट के बीच की होनी चाहिए। इससे ज्यादा लंबी नींद आपके लिए नुकसानदायक हो सकती है।
सही समय: दोपहर की यह छोटी सी झपकी लेने का सबसे सुरक्षित समय सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच का है। दोपहर 2 बजे के बाद भूलकर भी न सोएं।

सबसे जरूरी बात यह है कि आपको अपनी नींद का मुख्य हिस्सा रात में ही पूरा करना चाहिए। अगर आप रात में बिना किसी परेशानी के सुकून भरी नींद चाहते हैं, तो दोपहर में ज्यादा देर तक सोने से बचें।
सावधान! बार-बार खाने की आदत समय से पहले कर रही है आपको बूढ़ा, शरीर बन जाता है बीमारियों का घर

सावधान! बार-बार खाने की आदत समय से पहले कर रही है आपको बूढ़ा, शरीर बन जाता है बीमारियों का घर

सावधान! बार-बार खाने की आदत समय से पहले कर रही है आपको बूढ़ा, शरीर बन जाता है बीमारियों का घर


आजकल भारतीयों में बार-बार स्नैकिंग की आदत बढ़ गई है, जिससे स्वास्थ्य और उम्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यह मेटाबॉलिज्म को बाधित करता है, इंसुलिन ...और पढ़ें







बार-बार खाने से मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र प्रभावित होता है


बार-बार स्नैकिंग इंसुलिन असंतुलन, चर्बी जमा होने का कारण बनती है


यह आदत समय से पहले बुढ़ापा और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाती है


 आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम नाश्ते, दोपहर और रात के खाने के बीच भी अक्सर कुछ न कुछ खाते रहते हैं। पैकेट बंद चिप्स हों या बिस्किट, भारतीयों में स्नैकिंग का चलन तेजी से बढ़ा है।


ज्यादातर भारतीय दिन में कम से कम दो बार स्नैक्स खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मामूली लगने वाली यह आदत आपकी सेहत और उम्र पर भारी पड़ रही है? आइए डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कैसे।
मेटाबॉलिज्म के लिए रोलरकोस्टर है बार-बार खाना

अक्सर लोग मानते हैं कि थोड़ा-थोड़ा खाने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। जब हम बार-बार खाते हैं, खासकर चिप्स और बिस्किट, तो हमारे शरीर को मेटाबॉलिक रेस्ट यानी पाचन तंत्र को आराम नहीं मिल पाता। इसके कारण शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-
इंसुलिन का असंतुलन- आप चाहे छोटा-सा बिस्कुट ही क्यों न खाएं, हर बार शरीर में इंसुलिन का रिस्पॉन्स ट्रिगर होता है।
फैट स्टोरेज- बार-बार खाने से शरीर को फैट बर्न करने का समय नहीं मिलता, जिससे चर्बी जमा होने लगती है। यही कारण है कि ज्यादा स्नैकिंग करने वालों में पॉट बेली यानी पेट के पास चर्बी जमा होने की समस्या ज्यादा देखी जाती है।
पाचन समस्याएं- पाचन तंत्र को आराम न मिलने के कारण एसिडिटी, ब्लोटिंग और मेटाबॉलिक फटीग जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।

(AI Generated Image)
हम इतना ज्यादा क्यों खा लेते हैं?

ज्यादा खाने से होने वाले नुकसानों के बारे में लगभग हर कोई जानता है, लेकिन फिर भी हम बार-बार खाने से खुद को रोक क्यों नहीं पाते? कई बार तो हमें भूख भी नहीं लगी होती, लेकिन हम फिर भी खा लेते हैं। इसके पीछे क्या वजह है?
तनाव और बोरियत- कई लोग तनाव या बोरियत मिटाने के लिए खाते हैं। इसे स्ट्रेस ईटिंग कहा जाता है, जिसमें अक्सर लोग हाई-कैलोरी और अनहेल्दी फैट वाली चीजें चुनते हैं।
प्रोटीन की कमी- भारतीय खाने में अक्सर फाइबर और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। जब खाने में जरूरी पोषक तत्व नहीं होते, तो पेट जल्दी खाली महसूस होता है और बार-बार खाने की इच्छा होती है।
आसान उपलब्धता- फूड डिलीवरी ऐप्स और बाजार में मिलने वाले सस्ते, पैकेट बंद स्नैक्स ने इस आदत को बढ़ावा दिया है।
सेहत पर गंभीर प्रभाव और समय से पहले बुढ़ापा

लगातार स्नैकिंग न केवल वजन बढ़ाती है, बल्कि यह हमारे शरीर को भीतर से भी नुकसान पहुंचाती है-

समस्या प्रभाव
बीमारियों का खतरा इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां
जीन पर असर बार-बार खाने से शरीर के लॉन्गेविटी जींस ब्लॉक हो जाते हैं, जो डीएनए की मरम्मत और सूजन कम करने का काम करते हैं।
उम्र बढ़ना यह शरीर की ऑटोफैगी यानी सेल्स की सफाई की प्रक्रिया को रोकता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

कैसे बदलें यह आदत?

अपनी मेटाबॉलिक सेहत को वापस पटरी पर लाने के लिए कुछ आसान बदलाव किए जा सकते हैं, जैसे-हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट- अपने खाने में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं, ताकि आपको लंबे समय तक भूख न लगे।
फास्टिंग- रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच 12 से 14 घंटे का अंतर रखने की कोशिश करें। इससे शरीर को फैट बर्न करने और रिकवरी का समय मिलता है।
जागरुकता- खाने से पहले खुद से पूछें कि क्या आपको वाकई भूख लगी है या आप सिर्फ तनाव या बोरियत के कारण खा रहे हैं।