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क्या सपने सिर्फ दिनभर की बातों का रीप्ले होते हैं? जानें हमारा ही दिमाग रात में क्यों खेलता है ये खेल

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क्या सपने सिर्फ दिनभर की बातों का रीप्ले होते हैं? जानें हमारा ही दिमाग रात में क्यों खेलता है ये खेल

हमारे सपने हमारे व्यक्तिगत गुणों और बाहरी अनुभवों का मिला-जुला मिश्रण होते हैं। ...और पढ़ें









 हमारे सपने काफी हद तक हमारी असल जिंदगी, विचारों और चिंताओं से जुड़े होते हैं। जिन विषयों पर हम दिन में सोचते हैं, वे अक्सर रात में सपनों में सामने आते हैं।

एक नए अध्ययन के अनुसार, सपनों की सामग्री रैंडम या अव्यवस्थित नहीं होती बल्कि यह व्यक्तिगत गुणों, जैसे कि मन की भटकने की प्रवृत्ति, सपनों में रुचि और नींद की गुणवत्ता, और बाहरी घटनाओं, जैसे कि कोविड-19 महामारी जैसे बड़े पैमाने पर सामाजिक अनुभवों के बीच एक कॉम्प्लेक्स इंटरैक्शन को दिखा सकती है।
3700 सपनों पर हुई इटली की रिसर्च

इटली के आइएमटी स्कूल फार एडवांस्ड स्टडीज लुका के शोधकर्ताओं ने 287 प्रतिभागियों से एकत्रित 3,700 से अधिक सपनों और जागृत अनुभवों की रिपोर्ट का विश्लेषण किया, जिनकी आयु 18 से 70 वर्ष के बीच थी। दो सप्ताह के दौरान प्रतिभागियों ने दैनिक अनुभवों को दर्ज किया, जबकि शोधकर्ताओं ने नींद के पैटर्न, संज्ञानात्मक क्षमताओं, व्यक्तिगत गुणों और मनोवैज्ञानिक विशेषताओं के बारे में जानकारी एकत्र की। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों द्वारा दैनिक जीवन और सपनों का वर्णन करने के लिए उपयोग किए गए शब्दों का विश्लेषण किया।




(Picture Courtesy: Freepik)
वास्तविकता को आकार देते हैं सपने

उन्होंने कहा कि सपने केवल हमारे वेकिंग एक्सपीरिएंस को रिप्रोड्यूस नहीं करते, बल्कि उन्हें फिर से रिइंटरप्रेट भी करते हैं। दैनिक दिनचर्या के तत्व, जैसे काम का वातावरण, स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग्स या शिक्षा, जैसे हैं, वैसे फिर से प्रकट नहीं होते बल्कि इन्हें जीवंत, समग्र परिदृश्यों में पुनर्गठित किया जाता है, जो अक्सर अलग-अलग संदर्भों को मिलाते हैं और अपरिचित परिदृश्यों में दृष्टिकोण को बदलते हैं। परिणाम बताते हैं कि सपने केवल वास्तविकता को नहीं दर्शाते, बल्कि इसे सक्रिय रूप से फिर से आकार देते हैं। यह अतीत के अनुभवों के टुकड़ों को कल्पित या प्रत्याशित अनुभवों के साथ एकीकृत करते हैं।


गतिशील प्रक्रिया हैं सपने

लेखकों ने लिखा कि जागृत रिपोर्टों की तुलना में सपने आत्म संदर्भित, विचार केंद्रित कथाओं से दृश्य स्थानिक विवरणों, कई पात्रों और अजीब घटनाओं से भरे संवेदनात्मक अनुभवों में बदल गए। उन्होंने कहा कि स्थिर गुण, जिसमें सपनों के प्रति दृष्टिकोण, मन की भटकने की प्रवृत्ति और व्यक्तिपरक नींद की गुणवत्ता शामिल हैं, ने सपनों की सामग्री को चयनात्मक रूप से प्रभावित किया।


आइएमटी स्कूल फार एडवांस्ड स्टडीज लुका में शोधकर्ता और मुख्य लेखक वेलेंटिना एल्से ने कहा, हमारे निष्कर्ष दिखाते हैं कि सपने केवल अतीत के अनुभवों का प्रतिबिंब नहीं हैं, बल्कि यह एक गतिशील प्रक्रिया है जो इस पर निर्भर करती है कि हम कौन हैं और हम क्या जीते हैं।
कोविड लाकडाउन के दौरान अध्ययन

एल्से ने कहा, बड़े पैमाने पर डाटा को गणनात्मक विधियों के साथ मिलाकर हम सपनों की सामग्री में ऐसे पैटर्न खोजने में सक्षम हुए जो पहले पहचानना कठिन था। सपनों में परिवर्तन व्यक्तियों के बीच भी भिन्न पाए गए। उदाहरण के लिए, जो लोग मन की भटकने के प्रति अधिक प्रवृत्त होते हैं, वे अधिक खंडित और तेजी से बदलते सपनों की रिपोर्ट करते हैं।
हीटवेव में वर्कआउट करते समय रहें सावधान, तेज गर्मी में एक्सरसाइज करने का ये है सबसे सही समय और तरीका

हीटवेव में वर्कआउट करते समय रहें सावधान, तेज गर्मी में एक्सरसाइज करने का ये है सबसे सही समय और तरीका

हीटवेव में वर्कआउट करते समय रहें सावधान, तेज गर्मी में एक्सरसाइज करने का ये है सबसे सही समय और तरीका

तेज गर्मी में सेहत को नुकसान से बचाने के लिए वर्कआउट करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है। ...और पढ़ें






टाइट कपड़े और गलत समय का वर्कआउट पहुंचा सकता है अस्पताल! (Picture Courtesy: Freepik)

सुबह या शाम का समय वर्कआउट के लिए चुनें


पसीना निकलने पर शरीर को हाइड्रेटेड रखें


ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनकर एक्सरसाइज करें


लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में पारा 42 डिग्री को छू चुका है। ऐसे में तपती गर्मी और लू के थपेड़ों को बीच खुद को फिट बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। तेज गर्मी में अगर सावधानी न बरती जाए, तो वर्कआउट करना शरीर के लिए जितना फायदेमंद है, उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है।


गर्मी में एक्सरसाइज करते समय शरीर से पसीना ज्यादा निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप इस मौसम में भी अपनी फिटनेस रूटीन को बरकरार रखना चाहते हैं, तो आपको अपनी आदतों में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे। यहां कुछ जरूरी टिप्स दिए गए हैं जो गर्मी में सुरक्षित वर्कआउट करने में आपकी मदद करेंगे।

सही समय चुनें

कड़कती धूप में वर्कआउट करना आपके स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक एक्सरसाइज करने से बचें। गर्मी में एक्सरसाइज करने का सबसे अच्छा समय सुबह का वक्त है, जब वातावरण में थोड़ी ठंडक होती है। अगर सुबह समय नहीं मिल पाता, तो शाम को भी वर्कआउट कर सकते हैं।


हाइड्रेशन है सबसे जरूरी

गर्मी में पसीने के जरिए शरीर से जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। एक्सरसाइज शुरू करने से 20-30 मिनट पहले कम से कम 2 गिलास पानी पिएं। हर 15-20 मिनट में पानी की चुस्कियां लेते रहें। सादे पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी या ओआरएस का घोल लें, ताकि शरीर में सोडियम और पोटेशियम का संतुलन बना रहे।

पहनावे पर दें ध्यान

जिम के टाइट कपड़े गर्मी में परेशानी पैदा कर सकते हैं। हमेशा सूती या ड्राय-फिट फैब्रिक वाले ढीले कपड़े पहनें जो पसीने को सोख सकें और हवा का संचार होने दें। गहरे रंग के कपड़े गर्मी को सोखते हैं, इसलिए हल्के रंगों के कपड़े चुनें।

वार्म-अप और कूल-डाउन करें

गर्मी में मांसपेशियों पर तनाव जल्दी आता है। इसलिए सीधे हैवी वेट उठाने या तेज दौड़ने के बजाय 10 मिनट स्ट्रेचिंग और हल्का वार्म-अप करें। वर्कआउट खत्म करने के तुरंत बाद ठंडे पानी से न नहाएं। शरीर के तापमान को सामान्य होने दें, फिर रिलैक्स करें।

शरीर के संकेतों को पहचानें

वर्कआउट के जुनून में अक्सर हम शरीर की चेतावनी को अनदेखा कर देते हैं। अगर आपको चक्कर आना, तेज सिरदर्द, जी मिचलाना, उल्टी, मांसपेशियों में तेज ऐंठन या धड़कन का असामान्य रूप से तेज होने जैसा महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर से संपर्क करें।
सावधान! प्रेग्नेंसी में मलेरिया बन सकता है प्रीमैच्योर डिलीवरी की वजह, ऐसे करें अपना बचाव

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प्रेग्नेंसी में मलेरिया मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, क्योंकि इस दौरान शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। ...और पढ़ें





प्रेग्नेंसी में मलेरिया का खतरा: डॉक्टर ने बताया गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है ज्यादा सावधानी 

गर्भावस्था में मलेरिया से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है


प्रीमैच्योर डिलीवरी, कम वजन, मिसकैरेज का खतरा बढ़ता है


मच्छरों से बचाव और समय पर इलाज है बेहद जरूरी


 नई दिल्ली। गर्भ में एक नए जीवन को संजोना एक बेहद खास और संवेदनशील अनुभव होता है। इस दौरान एक मां अपने होने वाले बच्चे को हर बाहरी खतरे से सुरक्षित रखने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार हमारी नजरों से बच निकलने वाला एक छोटा-सा मच्छर इस सुरक्षा चक्र के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता है?


आकाश हेल्थकेयर की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (डायरेक्टर और हेड), डॉ. मधुलिका सिन्हा बताती हैं कि प्रेग्नेंसी में मलेरिया को कभी भी एक सामान्य बुखार समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। आखिर इस नाजुक समय में मलेरिया इतना घातक क्यों हो जाता है? आइए इसे आसानी से समझते हैं।

(Image Source: AI-Generated)
शरीर की घटती ताकत और मलेरिया का बढ़ता खतरा

प्रेग्नेंसी के दौरान एक महिला के शरीर में प्राकृतिक रूप से बीमारियों से लड़ने की क्षमता थोड़ी कमजोर पड़ जाती है। यही कारण है कि आम दिनों के मुकाबले गर्भावस्था में मलेरिया का संक्रमण शरीर पर ज्यादा तेजी से हावी हो सकता है और उनके लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।


गर्भ में पल रहे बच्चे पर क्या होता है असर?

यह बीमारी केवल होने वाली मां के स्वास्थ्य को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि इसका सीधा और बुरा असर अजन्मे बच्चे के विकास पर भी पड़ता है। डॉ. सिन्हा के मुताबिक, मलेरिया के कारण गर्भावस्था में कई तरह की गंभीर परेशानियां खड़ी हो सकती हैं:
समय पूरा होने से पहले ही बच्चे का जन्म हो जाना (प्रीमैच्योर डिलीवरी)
पैदा होने वाले शिशु का वजन सामान्य से बहुत कम होना।
कुछ गंभीर मामलों में मिसकैरेज हो जाने का खतरा।
इन संकेतों को पहचानें और तुरंत लें एक्शन

गर्भवती महिलाओं को अपने शरीर में नजर आने वाले लक्षणों को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर शरीर में ये परेशानियां महसूस हों, तो तुरंत अपने डॉक्टर के पास जाएं:
अचानक तेज बुखार आना।
ठंड लगना या कंपकंपी महसूस होना।
पूरे शरीर में दर्द रहना।
मच्छरों को दूर रखने के जरूरी उपाय

इस खतरनाक बीमारी से बचने का सबसे कारगर तरीका मच्छरों को खुद से दूर रखना है। इसके लिए अपनी दिनचर्या में कुछ आसान कदम शामिल किए जा सकते हैं:
सोते समय नियमित रूप से मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
घर के अंदर और बाहर के हिस्सों में पूरी साफ-सफाई रखें।
अपने घर के आस-पास गमलों, कूलरों या गड्डों में पानी इकट्ठा न होने दें, क्योंकि रुके हुए पानी में ही मच्छर पनपते हैं।
सही समय पर इलाज है सबसे जरूरी

डॉक्टर का मानना है कि इस बीमारी से डरने के बजाय सतर्क रहने की जरूरत है। अगर सही समय पर इन लक्षणों की पहचान करके तुरंत डॉक्टरी जांच और इलाज शुरू करवा लिया जाए, तो मां और उनके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
शरीर को अंदर से 'AC' जैसा ठंडा रखेगा कच्चा प्याज, लू से बचने के लिए ये है खाने का सही तरीका

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शरीर को अंदर से 'AC' जैसा ठंडा रखेगा कच्चा प्याज, लू से बचने के लिए ये है खाने का सही तरीका

गर्मी के मौसम में रोज एक कच्चा प्याज खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद है। इससे लू लगने का खतरा कम होता है। ...और पढ़ें





लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पारा बढ़ने के साथ ही हीटवेव यानी लू की समस्या बढ़ने लगती है। ऐसे में शरीर को ठंडा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं लू से बचने का रामबाण इलाज आपकी रसोई में ही छिपा है। हम बात कर रहे हैं कच्चे प्याज की।


जी हां, आयुर्वेद और दादी-नानी के नुस्खों में कच्चा प्याज गर्मियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना गया है। आइए डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें गर्मी के मौसम में कच्चा प्याज खाना कैसे आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।

लू से बचाव

कच्चे प्याज का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करता है। प्याज में मौजूद तत्व शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में इसे सलाद के रूप में खाने से शरीर भीतर से ठंडा रहता है।





(Picture Courtesy: Freepik)
पाचन तंत्र के लिए रामबाण

गर्मियों में अक्सर पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है, जिससे अपच, गैस और भूख न लगने जैसी समस्याएं होती हैं। प्याज में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को साफ रखने में मदद करता है। साथ ही, प्याज में ऐसे एंजाइम्स भी होते हैं, जो खाने को पचाने में मदद करते हैं।

हाइड्रेशन और ठंडक

प्याज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। गर्मियों में जब पसीने के जरिए शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं, तब कच्चा प्याज शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। यह एक नेचुरल कूलिंग एजेंट की तरह काम करता है।

इम्युनिटी में बढ़ोतरी

प्याज में विटामिन-सी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। गर्मियों में इन्फेक्शन का खतरा काफी रहता है। प्याज में मौजूद क्वेरसेटिन नाम का फ्लेवोनोइड शरीर के सेल्स को नुकसान से बचाता है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है, ताकि आप मौसमी बीमारियों से लड़ सकें।

प्याज को खाने का सही तरीका

प्याज का पूरा फायदा पाने के लिए कोशिश करें कि आप इसे कच्चा खाएं। इसे सलाद में या रायते में मिलाकर खा सकते हैं। अगर आपको प्याज का स्वाद तेज लगता है, तो आप इसे 10-15 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख दें। इससे प्याज की गंध और तीखापन कम हो जाते हैं।
हड्डियों की मजबूती ही नहीं, पेट की हर तकलीफ का भी 'सुपरहीरो' है विटामिन-D; डॉक्टर का बड़ा खुलासा

हड्डियों की मजबूती ही नहीं, पेट की हर तकलीफ का भी 'सुपरहीरो' है विटामिन-D; डॉक्टर का बड़ा खुलासा

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। ...और पढ़ें






लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और क्रोहन डिजीज जैसी समस्याएं, आज के खराब लाइफस्टाइल में काफी आम हो गई हैं। इन बीमारियों के कारण लोगों को अक्सर पेट में तेज दर्द, दस्त, सूजन और पाचन से जुड़ी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


हालांकि, हाल ही में हुए शोध एक बहुत ही पॉजिटिव खबर लेकर आए हैं और वह यह है कि एक खास विटामिन आपकी इन सभी तकलीफों को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। आइए, PSRI अस्पताल, दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. नृपेन सैकिया से डिटेल में जानते हैं इस बारे में।




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सिर्फ हड्डियों के लिए नहीं, इम्युनिटी का भी रक्षक

हम सभी आमतौर पर यही मानते हैं कि 'विटामिन D' का काम सिर्फ हमारी हड्डियों को मजबूत बनाना है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ हड्डियों तक ही सीमित नहीं है।

मेडिकल साइंस के अनुसार, यह विटामिन हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में भी बेहद जरूरी है। आंतों से जुड़ी कई गंभीर बीमारियां 'ऑटोइम्यून' होती हैं- यानी एक ऐसी स्थिति जहां शरीर का अपना ही सुरक्षा तंत्र गलती से अपनी स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगता है।


ऐसी स्थिति में विटामिन-डी शरीर की सूजन को कम करने और इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया को सही दिशा में नियंत्रित करने में बड़ी मदद करता है।
"लीकी गट" से बचाव और आंतों की मजबूती

इसके अलावा, आंतों को सुरक्षित रखने में भी विटामिन D का काम किसी मजबूत दीवार की तरह होता है। यह हमारी आंतों की परत (को ताकत देता है। अगर किसी कारणवश आंतों की यह दीवार कमजोर हो जाए, तो "लीकी गट" नाम की खतरनाक समस्या पैदा हो सकती है।


इस स्थिति में हानिकारक टॉक्सिन्स और खतरनाक बैक्टीरिया आसानी से शरीर के अंदर प्रवेश कर जाते हैं। शरीर में विटामिन D की सही मात्रा इस परत को मजबूत बनाए रखती है और ऐसे जोखिमों को काफी हद तक टाल देती है।




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विटामिन-डी की कमी से बढ़ सकती है IBD की तकलीफ

कई मेडिकल स्टडीज में भी इस बात की पुष्टि हुई है कि जिन लोगों में विटामिन D की कमी पाई जाती है, उनमें IBD जैसी आंतों की बीमारियों के लक्षण कहीं ज्यादा गंभीर और तकलीफदेह होते हैं।


डॉक्टरों ने पाया है कि ऐसे मरीजों को जब विटामिन-डी के सप्लीमेंट दिए जाते हैं, तो उनके लक्षणों में काफी हद तक सुधार देखने को मिलता है। हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि सिर्फ विटामिन-डी ही इन बीमारियों का इकलौता इलाज नहीं है, बल्कि यह आपके संपूर्ण इलाज और रिकवरी की प्रक्रिया को बेहतर बनाने का एक बहुत ही शानदार तरीका है।
अक्सर आंखों में दर्द लेकर जागते हैं आप? जानिए डॉक्टर ने किन 5 कारणों को बताया जिम्मेदार

अक्सर आंखों में दर्द लेकर जागते हैं आप? जानिए डॉक्टर ने किन 5 कारणों को बताया जिम्मेदार

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सुबह आंखों में दर्द और भारीपन कई लोगों को परेशान करता है। ...और पढ़ें





क्या आप भी सुबह आंखों में दर्द के साथ उठते हैं? (Image Source: AI-Generated)


सुबह आंखों में दर्द के 5 मुख्य कारण जानें


ड्राई आई, नींद की कमी, एलर्जी प्रमुख वजहें


इन्फेक्शन, गलत चश्मा भी दर्द का कारण

 नई दिल्ली। सुबह की शुरुआत अगर ताजगी की बजाय आंखों में भारीपन, चुभन या दर्द के साथ हो, तो पूरा दिन परेशानी में बीतता है। हम में से कई लोग इसे एक मामूली थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह किसी सीरियस आई प्रॉब्लम का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।


ग्वालियर स्थित रतन ज्योति नेत्रालय के संस्थापक, निदेशक और सर्जन डॉ. पुरेन्द्र भसीन के अनुसार, सुबह आंखों में दर्द के पीछे मुख्य रूप से 5 कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सही इलाज के लिए इन कारणों को समझना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं।



(Image Source: AI-Generated)
ड्राई आई

रात में सोते समय हमारी आंखें बंद रहती हैं, जिसके कारण प्राकृतिक आंसुओं का बनना कम हो जाता है। जिन लोगों की आंखों में पहले से ही नमी की कमी होती है, उन्हें सुबह उठने पर जलन और दर्द महसूस होता है। खासकर जो लोग बहुत ज्यादा स्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं, उनमें यह समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है।



यह वीडियो भी देखें


नींद की कमी

अगर आप पर्याप्त और गहरी नींद नहीं ले रहे हैं, तो आपके शरीर के साथ-साथ आपकी आंखों को भी पूरा आराम नहीं मिल पाता। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप पर आंखें गड़ाए रखने की आदत आंखों पर एक्स्ट्रा दबाव डालती है। यही कारण है कि सुबह उठने पर आंखों में भयंकर थकान और दर्द होता है।

एलर्जी का असर

कई बार हमारे बिस्तर, तकिए या कंबल में धूल और प्रदूषण के बारीक कण मौजूद होते हैं, जो रात भर हमारी आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। इस एलर्जी के कारण सुबह आंखों में कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
आंखों में रेडनेस
तेज खुजली मचना
दर्द होना
आंखों से पानी आना या सूजन महसूस होना
आंखों में इन्फेक्शन

अगर सुबह आपकी आंखें चिपचिपी हो रही हैं और दर्द के साथ सूजन भी है, तो यह कंजक्टिवाइटिस या ब्लेफेराइटिस जैसे इन्फेक्शन का स्पष्ट संकेत हो सकता है। अगर ये लक्षण कई दिनों तक बने रहें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से अपनी जांच करवानी चाहिए।

गलत चश्मे का इस्तेमाल या कमजोर नजर

अगर आपकी आंखों की रोशनी कमजोर है और आप या तो चश्मा नहीं पहनते या फिर गलत पावर का चश्मा इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आंखों की मांसपेशियों पर लगातार तनाव बना रहता है। यह बढ़ा हुआ तनाव भी सुबह के समय आंखों में दर्द का एक बड़ा कारण बनता है।




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बचाव के लिए रखें इन बातों का ध्यान

डॉ. भसीन सलाह देते हैं कि अगर यह दर्द कभी-कभार होता है, तो यह चिंता का विषय नहीं है, लेकिन अगर रोज सुबह आंखें खोलने में तकलीफ होती है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। इससे बचने के लिए आप कुछ आसान तरीके अपना सकते हैं:
नींद पूरी करें: आंखों को आराम देने के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है।
स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से पहले गैजेट्स से दूरी बना लें।
सफाई का ध्यान रखें: अपनी आंखों को साफ रखें और साफ बिस्तर का इस्तेमाल करें।
आर्टिफिशियल टीयर्स: जरूरत महसूस होने पर आंखों की नमी बरकरार रखने के लिए 'आर्टिफिशियल टीयर्स' का इस्तेमाल करें।