आजकल भारतीयों में बार-बार स्नैकिंग की आदत बढ़ गई है, जिससे स्वास्थ्य और उम्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। यह मेटाबॉलिज्म को बाधित करता है, इंसुलिन ...और पढ़ें

बार-बार खाने से मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र प्रभावित होता है
बार-बार स्नैकिंग इंसुलिन असंतुलन, चर्बी जमा होने का कारण बनती है
यह आदत समय से पहले बुढ़ापा और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाती है
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम नाश्ते, दोपहर और रात के खाने के बीच भी अक्सर कुछ न कुछ खाते रहते हैं। पैकेट बंद चिप्स हों या बिस्किट, भारतीयों में स्नैकिंग का चलन तेजी से बढ़ा है।
ज्यादातर भारतीय दिन में कम से कम दो बार स्नैक्स खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मामूली लगने वाली यह आदत आपकी सेहत और उम्र पर भारी पड़ रही है? आइए डॉ. मोहित शर्मा (सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें कैसे।
मेटाबॉलिज्म के लिए रोलरकोस्टर है बार-बार खाना
अक्सर लोग मानते हैं कि थोड़ा-थोड़ा खाने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। जब हम बार-बार खाते हैं, खासकर चिप्स और बिस्किट, तो हमारे शरीर को मेटाबॉलिक रेस्ट यानी पाचन तंत्र को आराम नहीं मिल पाता। इसके कारण शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे-
इंसुलिन का असंतुलन- आप चाहे छोटा-सा बिस्कुट ही क्यों न खाएं, हर बार शरीर में इंसुलिन का रिस्पॉन्स ट्रिगर होता है।
फैट स्टोरेज- बार-बार खाने से शरीर को फैट बर्न करने का समय नहीं मिलता, जिससे चर्बी जमा होने लगती है। यही कारण है कि ज्यादा स्नैकिंग करने वालों में पॉट बेली यानी पेट के पास चर्बी जमा होने की समस्या ज्यादा देखी जाती है।
पाचन समस्याएं- पाचन तंत्र को आराम न मिलने के कारण एसिडिटी, ब्लोटिंग और मेटाबॉलिक फटीग जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
-1771396402342.jpg)
(AI Generated Image)
हम इतना ज्यादा क्यों खा लेते हैं?
ज्यादा खाने से होने वाले नुकसानों के बारे में लगभग हर कोई जानता है, लेकिन फिर भी हम बार-बार खाने से खुद को रोक क्यों नहीं पाते? कई बार तो हमें भूख भी नहीं लगी होती, लेकिन हम फिर भी खा लेते हैं। इसके पीछे क्या वजह है?
तनाव और बोरियत- कई लोग तनाव या बोरियत मिटाने के लिए खाते हैं। इसे स्ट्रेस ईटिंग कहा जाता है, जिसमें अक्सर लोग हाई-कैलोरी और अनहेल्दी फैट वाली चीजें चुनते हैं।
प्रोटीन की कमी- भारतीय खाने में अक्सर फाइबर और प्रोटीन की मात्रा कम होती है। जब खाने में जरूरी पोषक तत्व नहीं होते, तो पेट जल्दी खाली महसूस होता है और बार-बार खाने की इच्छा होती है।
आसान उपलब्धता- फूड डिलीवरी ऐप्स और बाजार में मिलने वाले सस्ते, पैकेट बंद स्नैक्स ने इस आदत को बढ़ावा दिया है।
सेहत पर गंभीर प्रभाव और समय से पहले बुढ़ापा
लगातार स्नैकिंग न केवल वजन बढ़ाती है, बल्कि यह हमारे शरीर को भीतर से भी नुकसान पहुंचाती है-
समस्या प्रभाव
बीमारियों का खतरा इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियां
जीन पर असर बार-बार खाने से शरीर के लॉन्गेविटी जींस ब्लॉक हो जाते हैं, जो डीएनए की मरम्मत और सूजन कम करने का काम करते हैं।
उम्र बढ़ना यह शरीर की ऑटोफैगी यानी सेल्स की सफाई की प्रक्रिया को रोकता है, जिससे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
कैसे बदलें यह आदत?
अपनी मेटाबॉलिक सेहत को वापस पटरी पर लाने के लिए कुछ आसान बदलाव किए जा सकते हैं, जैसे-हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट- अपने खाने में प्रोटीन और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं, ताकि आपको लंबे समय तक भूख न लगे।
फास्टिंग- रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच 12 से 14 घंटे का अंतर रखने की कोशिश करें। इससे शरीर को फैट बर्न करने और रिकवरी का समय मिलता है।
जागरुकता- खाने से पहले खुद से पूछें कि क्या आपको वाकई भूख लगी है या आप सिर्फ तनाव या बोरियत के कारण खा रहे हैं।