होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! ट्रंप ने शेयर किया नया नक्शा, छिड़ा विवाद

 होर्मुज बना 'Strait Of Trump'! ट्रंप ने शेयर किया नया नक्शा, छिड़ा विवाद


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का नाम बदलकर 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कर दिया, जिससे अमेरिका-ईरान विवाद और गहरा गया है। ...और पढ़ें






अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' के नाम से नया नक्शा साझा किया।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य पूर्व में चल रहे ईरान अमेरिका युद्ध के बीच गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की एक तस्वीर शेयर की। इसमें, उन्होंने एक छोटा लेकिन बहुत ही असरदार बदलाव किया था। उन्होंने, इस तस्वीर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर स्ट्रेट ऑफ ट्रंप (Strait Of Trump) कर दिया है।
परमाणु हथियार भूल जाओ : ट्रंप

इसके साथ ही ट्रंप ने बुधवार को ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को शानदार रणनीति बताते हुए कहा कि, तेहरान को हार माननी ही पड़ेगी। जब तक कि वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ देता, तब तक कोई समझौता नहीं हो सकता है। मालूम हो कि, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी कर इस समुद्री रास्ते को और भी खतरनाक बना दिया है।

हमारी सेनी सबसे शक्तिशाली, जारी रहेगी नाकाबंदी

ट्रंप ने आगे कहा कि, "नाकाबंदी से उनको पता चला कि हमारी नौसेना कितनी शक्तिशाली है। मैं आपको बता सकता हूं, कोई भी हमारे साथ खिलवाड़ नहीं कर सकता है। हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, जिसका अधिकांश हिस्सा, मैंने अपने पहले कार्यकाल में बनाया और तब से हम इसे लगातार विकसित कर रहे हैं। यह दुनिया में कहीं भी सबसे शक्तिशाली है, कोई भी इसके आसपास भी नहीं है।"

कई रिपोर्टों में कहा गया है कि, नाकाबंदी से ईरान को भारी दिक्कत होने लगी है। वहीं, Axios की रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, यूएस के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बातचीत पर बने गतिरोध को तोड़ने के लिए ईरान पर 'छोटे लेकिन ताकतवर' हमले की एक योजना तैयार की है।


CENTCOM अपने हमलों में ईरान की बुनियादी संरचनाओं को निशाना बना सकता है। इन हमलों का मकसद बातचीत शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव बनाना है। ट्रंप का कहना है कि 'ब्लॉकेड, बॉम्बिंग से ज्यादा कारगर है और वह काइनेटिक एक्शन की मंजूरी दे सकते हैं। बता दें कि, इस घेराबंदी की वजह से ईरान के जहाजों का आवागमन नहीं हो पा रहा है।

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