'चाय पीने और चर्चा में रहने के लिए जाते हैं राजभवन', JMM का बाबूलाल मरांडी पर तीखा हमला
झामुमो ने बाबूलाल मरांडी पर निशाना साधा, आरोप लगाया कि वे सिर्फ चाय पीने और चर्चा में रहने के लिए राजभवन जाते हैं। केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने कह ...और पढ़ें

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को निशाने पर लिया। केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा कि सिर्फ चाय पीने, डोमिसाइल के पुराने किस्से दोहराने और चर्चा में बने रहने के लिए मरांडी रोज-रोज गवर्नर हाउस का चक्कर लगाते हैं।
उन्होंने दावा किया कि सच्चाई यह है कि दिल्ली में भी पार्टी के वरिष्ठ नेता इनसे दूरी बनाने लगे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता यहां तक कह रहे हैं कि इनका पूछा छूटे तो वे मंदिर जाकर 101 नारियल फोड़ेंगे। बाबूलाल मरांडी ने अब ठान लिया है कि वे 2029 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए शगुन के 11 सीट लाकर ही मानेंगे।
भाजपा के लिए पांच सीटें जीतना भी मुश्किल
उन्होंने आगे कहा अगर यही सिलसिला चलता रहा तो अगली बार भाजपा के लिए पांच सीटें जीतना भी मुश्किल हो जाएंगी। मरांडी को रोज गवर्नर हाउस में चाय पीने, पुराने डोमिसाइल के किस्से दोहराने से लेकर छोटे-बड़े अधिकारियों को धमकी देने से फुर्सत नहीं हैं। ऐसे में वे अपनी पार्टी और जनता के असली मुद्दों पर क्या ध्यान देंगे?
मरांडी को सबसे पहले अपना एजेंडा बताना चाहिए और जनता को स्पष्ट करना चाहिए कि वे आखिर चाहते क्या हैं? भाजपा के आम कार्यकर्ता भी अब उनसे परेशान हो चुके हैं। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि वे कब पार्टी का पीछा छोड़ेंगे।
2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा को 24 सीटें मिली थीं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा बाबूलाल मरांडी को चेहरा बनाकर थोपने के बाद 2024 में यह घटकर 21 रह गईं। पिछले पांच वर्षों में वे एक भी उपचुनाव नहीं जीत पाए हैं, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा सीधे प्रधानमंत्री बनने की है।
उन्होंने दावा किया कि सच्चाई यह है कि दिल्ली में भी पार्टी के वरिष्ठ नेता इनसे दूरी बनाने लगे हैं। भाजपा के कार्यकर्ता यहां तक कह रहे हैं कि इनका पूछा छूटे तो वे मंदिर जाकर 101 नारियल फोड़ेंगे। बाबूलाल मरांडी ने अब ठान लिया है कि वे 2029 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए शगुन के 11 सीट लाकर ही मानेंगे।
भाजपा के लिए पांच सीटें जीतना भी मुश्किल
उन्होंने आगे कहा अगर यही सिलसिला चलता रहा तो अगली बार भाजपा के लिए पांच सीटें जीतना भी मुश्किल हो जाएंगी। मरांडी को रोज गवर्नर हाउस में चाय पीने, पुराने डोमिसाइल के किस्से दोहराने से लेकर छोटे-बड़े अधिकारियों को धमकी देने से फुर्सत नहीं हैं। ऐसे में वे अपनी पार्टी और जनता के असली मुद्दों पर क्या ध्यान देंगे?
मरांडी को सबसे पहले अपना एजेंडा बताना चाहिए और जनता को स्पष्ट करना चाहिए कि वे आखिर चाहते क्या हैं? भाजपा के आम कार्यकर्ता भी अब उनसे परेशान हो चुके हैं। कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा आम है कि वे कब पार्टी का पीछा छोड़ेंगे।
2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड में भाजपा को 24 सीटें मिली थीं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व द्वारा बाबूलाल मरांडी को चेहरा बनाकर थोपने के बाद 2024 में यह घटकर 21 रह गईं। पिछले पांच वर्षों में वे एक भी उपचुनाव नहीं जीत पाए हैं, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा सीधे प्रधानमंत्री बनने की है।