रीपोलिंग की कोई सिफारिश नहीं...', बंगाल और तमिलनाडु को लेकर EC का दावा; टूट गया 'पैटर्न'
चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में कोई पुनर्मतदान नहीं हुआ, जो पिछले चुनावों की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव ...और पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनावों में एक भी रीपोल की सिफारिश नहीं की गई। यह पिछले चुनावों के मुकाबले बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि खासकर बंगाल में पहले अक्सर हिंसा और गड़बड़ियों के चलते कई बूथों पर दोबारा मतदान कराया जाता था।
गुरुवार को बंगाल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। SIR के कारण राज्य की मतदाता सूची में लगभग 83 लाख मतदाताओं को हटाए जाने के बाद, बंगाल में पहले चरण में लगभग 92.9 प्रतिशत मतदान हुआ।
गुरुवार को बंगाल के सभी मतदान केंद्रों पर त्रिस्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू की गई, ताकि राज्य में पिछले चुनावों से जुड़ी चुनावी अनियमितताओं पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।
रिकॉर्ड मतदान ने बदली तस्वीर
रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में करीब 92.9% मतदान हुआ। तमिलनाडु में भी ऐतिहासिक स्तर पर भारी मतदान हुआ। निर्वाचन आयोग का मानना है कि ज्यादा मतदान और बेहतर प्रबंधन ने चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया।
सख्त निगरानी से रोकी गई गड़बड़ियां
इस बार चुनाव में गड़बड़ियों को रोकने के लिए तीन-स्तरीय जांच प्रणाली लागू की गई।पोलिंग स्टेशन के 200 मीटर दायरे में कड़ी निगरानी
प्रवेश द्वार पर पहचान जांच
मतदान कक्ष के अंदर अंतिम सत्यापन
इसके अलावा, धारा 163 (पूर्व में धारा 144 जैसी व्यवस्था) लागू कर भीड़ और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण रखा गया।
पहले क्या होता था?
पिछले चुनावों में बंगाल में “बूथ कैप्चरिंग”, “फर्जी वोटिंग” और हिंसा जैसी शिकायतों के कारण कई बार पुनर्मतदान कराना पड़ता था। लेकिन इस बार ऐसी कोई बड़ी स्थिति सामने नहीं आई। निर्वाचन आयोग ने इसे “सिस्टम में सुधार और सख्त निगरानी का परिणाम” बताया है। साथ ही यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इसी मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सकता है।