अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल, इस्लामाबाद की कोशिशें पड़ रहीं ठंडी

 अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल, इस्लामाबाद की कोशिशें पड़ रहीं ठंडी



अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ईरान को इस्लामाबाद की कोशिशों पर भरोसा नहीं रहा और अमेरिका से कोई ठोस जवाब नहीं ...और पढ़ें





ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान युद्धविराम बढ़ाया।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क (एसएनएन) का दावा है कि इस्लामाबाद की कोशिशें ठंडी पड़ रही हैं और वे अमेरिका से कोई ठोस जवाब दिलाने में नाकाम रहे हैं। ईरानी पक्ष को अब पाकिस्तानी नेतृत्व के जरिए चल रहे वार्ता पर भरोसा नहीं हो रहा है।


एसएनएन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एक कूटनीतिक गतिरोध में फंस गई है, जिससे कोई नतीजा नहीं निकल रहा। एसएनएन के एक विशेषज्ञ ने बताया कि तय योजना के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर तेहरान आए थे।

उन्होंने ईरान का संदेश लिया और उसे अमेरिका तक पहुंचाना था। विशेषज्ञ का कहना है कि मुनीर ने संदेश तो दे दिया होगा, लेकिन उच्चस्तरीय चर्चाओं के बाद भी अभी तक अमेरिका की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला कि उन्हें यह प्रस्ताव मंजूर है या नहीं।
ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ाया

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर जवाब आता भी है, तो मुनीर वापस इस्लामाबाद जाकर बैठ जाएंगे और अमेरिका इसे पूरी तरह ठुकरा देगा। इस कड़वाहट से साफ है कि शांति प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई है। भले ही ईरान पाकिस्तान पर शक कर रहा हो, लेकिन इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को अचानक आगे बढ़ा दिया है।
बुधवार देर रात ट्रंप ने घोषणा की कि उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुरोध पर यह फैसला लिया है। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि उनके पास ज्यादा समय नहीं है और वे बमबारी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, बाद में अपनी पोस्ट में उन्होंने ईरान सरकार को बिखरा हुआ बताया और पाकिस्तान की बात मानकर सैन्य कार्रवाई टाल दी।

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