'पहले जनगणना, फिर परिसीमन', सोनिया गांधी ने केंद्र पर किया पलटवार; महिलाओं को लेकर की ये मांग

 'पहले जनगणना, फिर परिसीमन', सोनिया गांधी ने केंद्र पर किया पलटवार; महिलाओं को लेकर की ये मांग



सोनिया गांधी ने केंद्र के परिसीमन प्रस्ताव पर पलटवार करते हुए जनगणना को पहले पूरा करने की मांग की है। उन्होंने महिलाओं के लिए ओबीसी उप-कोटा की भी मांग ...और पढ़ें





डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित परिसीमन को लेकर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि देश में परिसीमन से पहले जनगणना होनी चाहिए और यह राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के लिए ओबीसी उप कोटा की भी मांग की, और इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 2023 में 'नारी वंदन अधिनियम' पारित होने के समय भी यह मांग उठाई थी।

छोटे राज्यों का न हो नुकसान

वहीं, एक मीडिया लेख में सोनिया गांधी ने कहा, "ऐसा लगता है कि परिसीमन के लिए कोई फॉर्मूला सुझाया जा रहा है। जबकि, पहले की तरह किसी भी परिसीमन से पहले जनगणना का काम पूरा होना चाहिए। लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने वाले किसी भी परिसीमन को सिर्फ राजनीतिक रूप से नहीं बल्कि, इसकी जगह निष्पक्ष होना चाहिए। जिन राज्यों ने परिवार नियोजन में अग्रणी भूमिका निभाई है, और जो छोटे राज्य हैं, उन्हें किसी भी तरह से नुकसान नहीं होना चाहिए।
असली मुद्दा परिसीमन है

उन्होंने आगे कहा, यहां मुद्दा महिलाओं के लिए आरक्षण का नहीं है; यह बात तो पहले ही तय हो चुकी है। असली मुद्दा परिसीमन है, जो अनौपचारिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर बेहद खतरनाक है और संविधान पर ही एक हमला है। इसलिए सरकार को परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण संशोधनों को जल्दबाजी में पारित नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय निकायों और पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पांच साल तक चली चर्चाओं के बाद ही लागू हो पाया था।

सरकार पर छवि चमकाने का लगाया आरोप

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार 29 अप्रैल के बाद एक सर्वदलीय बैठक बुला सकती है, और जुलाई में होने वाले संसद के मानसून सत्र में इसे उठाया जा सकता है। उन्होंने मोदी सरकार पर मुश्किल समय में अपनी छवि चमकाने का आरोप लगाया, और इस पूरी प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक बताया। इस बीच, कांग्रेस ने सोमवार को अपने सभी लोकसभा सांसदों के लिए एक व्हिप जारी किया, जिसमें उन्हें संसद के विशेष सत्र के दौरान सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।

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