टेंडर प्रक्रिया में फंसी बालू घाटों की नीलामी, सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान

 टेंडर प्रक्रिया में फंसी बालू घाटों की नीलामी, सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान



रांची में प्रतिदिन 20 हजार टन बालू की खपत होती है, जबकि पूरे झारखंड में यह आंकड़ा 2.5-3 लाख टन है। आठ महीनों से टेंडर प्रक्रिया अटकी होने के कारण राज् ...और पढ़ें





टेंडर प्रक्रिया में फंसी बालू घाटों की नीलामी


रांची में प्रतिदिन 20 हजार टन बालू की भारी खपत।


बालू घाटों के टेंडर से सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान।


298 घाटों की नीलामी पूर्ण, पर्यावरणीय स्वीकृति लंबित।


राज्य ब्यूरो, रांची। राजधानी रांची में प्रतिदिन 500 हाइवा बालू की अनुमानित खपत होती है। 40 टन प्रति हाइवा के हिसाब से देखें तो प्रतिदिन लगभग 20 हजार टन बालू की खपत रांची में ही हो रही है। प्रदेश के सभी जिलों को मिलाकर देखें तो आंकड़ा प्रतिदिन ढाई से तीन लाख टन से कहीं अधिक है।


इतने बालू का उठाव प्रतिदिन हो रहा है। इतनी अधिक खपत होने के बावजूद राज्य सरकार को राजस्व के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा है। यह स्थिति लगभग आठ महीनों से है।
444 घाटों में से 298 घाटों पर ऑक्शन

झारखंड में बालू घाटों को झारखंड राज्य खनिज विकास निगम से वापस लेने के बाद कहीं भी टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। इस कारण से बालू घाटों के संचालन की जिम्मेदारी एजेंसियों को नहीं दी गई है। खान निदेशालय ने बालू खनन को लेकर निर्धारित मानकों के अनुरूप टेंडर कराने को लेकर उपायुक्तों को निर्देश दे दिए हैं।

अंतिम सूचना तक राज्य के कुल 444 घाटों में से 298 घाटों पर ऑक्शन की कार्रवाई पूर्ण कर ली गई है और 146 घाटों के लिए यह प्रक्रिया अभी चल ही रही है। अब जिन घाटों के लिए कार्रवाई पूरी कर ली गई है, वहां पर्यावरणीय स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक कार्यों को पूर्ण कराने की जिम्मेदारी उपायुक्तों की है। जिलों में उपायुक्त के स्तर से पूरी प्रक्रिया अटकी हुई है, जिस कारण से बालू घाटों का टेंडर पूरा नहीं हो सका है।


कैटेगरी एक पर ग्राम सभा का अधिकार

झारखंड में पेसा (पंचायत एक्सटेंशन टू शिड्यूल एरिया) नियमावली के तहत पांच हेक्टेयर से कम के बालू घाटों (कैटेगरी-1) पर ग्रामसभा का पूर्ण नियंत्रण होता है। इन घाटों से ग्रामीण स्थानीय उपयोग के लिए ग्राम पंचायत की देखरेख में बालू उठाव कर सकते हैं, जिस पर कोई रॉयल्टी या टैक्स नहीं लगेगा। इन घाटों से बालू का उपयोग केवल घरेलू, सामुदायिक, या सरकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है। इस पर किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगता है।

किस जिले में कितने घाटों के लिए चल रही नीलामी प्रक्रिया
जिलाघाटों की संख्यादेवघर 32
सरायकेला खरसावां 05
पलामू 18
सिमडेगा 13
गढ़वा 18
चाईबासा 07
कोडरमा 33
गिरिडीह 07
लोहरदगा 13
कुल 146


टेंडर अवार्ड होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए संबंधित जिलों को निर्देश दिए गए हैं। जैसे ही जिलों में आगे की प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी, बालू का उठाव शुरू हो सकेगा।- राहुल कुमार सिन्हा, खान निदेशक, झारखंड।

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