युद्ध के बाद घायल ईरान घातक बनकर उभरा, ट्रंप के दावों पर सवाल; होर्मुज पर बवाल

 युद्ध के बाद घायल ईरान घातक बनकर उभरा, ट्रंप के दावों पर सवाल; होर्मुज पर बवाल



अमेरिका के युद्धविराम के दावों के बावजूद, पश्चिम एशिया में ईरान की रणनीतिक स्थिति मजबूत हुई है। भारी क्षति झेलने के बाद भी ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य ...और पढ़ें



ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत की


ट्रंप के जीत के दावों पर उठे गंभीर सवाल


वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ी चिंता और तनाव


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम को अपनी बड़ी जीत बताए जाने के बावजूद पश्चिम एशिया में नई रणनीतिक वास्तविकता उभरती दिख रही है। लगभग छह सप्ताह तक चले युद्ध के बाद विश्लेषकों का कहना है कि ईरान भारी क्षति झेलने के बावजूद क्षेत्रीय शक्ति के रूप में कायम है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ पहले से अधिक मजबूत हुई है।


वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बार-बार बयान बदलते रहे, यू-टर्न लेते रहे और कई मौकों पर अनिर्णय के शिकार भी दिखे। यहां तक कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युअल मैक्रों को भी आगे आकर ट्रंप को टोकना पड़ा। वहीं, ईरान अपनी एक सधी हुई रणनीति पर कायम रहा।
ईरान ने होर्मुज पर अपनी पकड़ मजबूत की

विशेषज्ञों के अनुसार, विश्व के लगभग पांचवें हिस्से के तेल और गैस परिवहन वाले होर्मुज मार्ग पर ईरान अब व्यावहारिक रूप से निर्णायक भूमिका निभा रहा है। प्रतिबंधों के चलते युद्ध से पहले तक गुपचुप तरीके से तेल टैंकरों को इस जलमार्ग से निकालनेवाले ईरान ने टोल वसूलने का एलान कर दिया है। वह इस जलमार्ग का अघोषित चौकीदार बन गया है। अब वो तय कर रहा है कि कौन सा जहाज जाएगा और कौन नहीं।


इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों और खाड़ी देशों में चिंता बढ़ गई है। मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ फवाज जेरजेस ने कहा कि युद्ध से न तो ईरान में सत्ता परिवर्तन हुआ, न उसका परमाणु कार्यक्रम समाप्त हुआ और न ही उसके क्षेत्रीय सहयोगी नेटवर्क कमजोर पड़े।

ट्रंप की भयानक रणनीतिक चूक

अमेरिकी और इजरायली हमलों से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा, लेकिन ईरान की मिसाइल, ड्रोन और क्षेत्रीय प्रभाव क्षमता बनी रही। इस युद्ध को ट्रंप की भयानक रणनीतिक चूक के तौर पर याद रखा जाएगा। जेरजेस ने कहा कि अमेरिका-इजरायल को इस युद्ध से कुछ भी हासिल नहीं हुआ।


अमेरिकी राष्ट्रपति ने न तो इस युद्ध को शुरू करने से पहले कांग्रेस की सहमति ली और न जनता को साफ बता पाए कि युद्ध क्यों जरूरी है। उनका दावा कि ईरान अमेरिका पर हमला करनेवाला था, किसी के गले नहीं उतरा।

ईरान होर्मुज में ज्यादा मजबूत

विश्लेषकों का कहना है कि लेबनान, इराक और लाल सागर क्षेत्र में हिजबुल्ला, शिया मिलिशिया और हाउती समूहों के जरिए ईरान का प्रभाव अब भी सक्रिय है। खाड़ी देशों ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज पर किसी भी स्थायी समझौते में नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षा उनकी अनिवार्य शर्त होगी।


एमिरेट्स पालिसी सेंटर की अध्यक्ष इबतिसाम अल-क़ेतबी का कहना है कि यदि ईरान के साथ समझौता बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन, परमाणु कार्यक्रम, प्राक्सी नेटवर्क और होर्मुज के संचालन नियमों तक नहीं पहुंचता, तो यह भविष्य में अधिक जटिल संघर्ष का आधार बनेगा।


उन्होंने चेताया कि जहाजों से सुरक्षित मार्ग के बदले शुल्क लेने की ईरानी योजना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर डाल सकती है।सऊदी विश्लेषक अली शिहाबी ने कहा कि खाड़ी देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य किसी भी स्थिति में ईरानी नियंत्रण में नहीं छोड़ा जा सकता।


उनके अनुसार यदि जलमार्ग प्रभावी रूप से तेहरान के हाथ में रहा तो यह ट्रंप के लिए राजनीतिक पराजय मानी जाएगी और ऊर्जा कीमतों का असर अमेरिकी घरेलू राजनीति तक पहुंचेगा।

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