ईरान का बड़ा फैसला, होर्मुज से जरूरी सामान ले जाने वाले जहाजों के लिए खोला रास्ता

ईरान का बड़ा फैसला, होर्मुज से जरूरी सामान ले जाने वाले जहाजों के लिए खोला रास्ता

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और आपूर्ति संकट के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को आवश्यक वस्तुओं, जैसे खाद्यान्न और मानवीय सहायता, ले जाने वाले जहाजों ...और पढ़ें





ईरान ने जरूरी सामान वाले जहाजों के लिए खोला रास्ता (फाइल फोटो)


ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य आवश्यक जहाजों हेतु खोला।


मानवीय सहायता, खाद्यान्न ले जाने वाले जहाजों को अनुमति।


वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट कम करने की उम्मीद।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और सैन्य तनाव के बीच ईरान ने एक बड़ा मानवीय निर्णय लिया है। ईरान सरकार ने होर्मुज जलडमरूमध्य से आवश्यक और मानवीय सहायता सामग्री ले जाने वाले जहाजों को अपने बंदरगाहों तक आने की अनुमति दे दी है।


यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पूरा क्षेत्र भीषण संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला की भारी किल्लत से जूझ रहा है। ईरानी कृषि उप मंत्री हूमन फाथी द्वारा पो‌र्ट्स एंड मैरीटाइम आर्गनाइजेशन (पीएमओ) को लिखे पत्र के अनुसार, सरकार और सशस्त्र बलों ने विशेष रूप से खाद्यान्न और पशुधन ले जाने वाले जहाजों को मार्ग देने पर सहमति जताई है।
कितने नाविक फंसे?

युद्ध की विभीषिका और वैश्विक संकट उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा तेहरान पर किए गए हमलों, जिसमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु हो गई थी, के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण कर लिया था। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, जहां पहले यहां से प्रतिदिन 130 जहाज गुजरते थे, वहीं अब दो हजार जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक फंसे हुए हैं।


इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। आसमान छूती कीमतें और हाहाकार होर्मुज के संकट ने पूरी दुनिया की जेब पर प्रहार किया है। कच्चे तेल की कीमतें 107 डालर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे परिवहन और रसद लागत में भारी उछाल आया है।


यूरोप और अमेरिका पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है। जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें दिन में 22 बार तक बदल रही हैं, जबकि फ्रांस के 16 प्रतिशत फ्यूल स्टेशनों पर किल्लत के कारण हाहाकार मचा है।

अर्थशास्त्री की चेतावनी

अर्थशास्त्री पाल क्रुगमैन ने चेतावनी दी है कि इस संकट का सबसे बुरा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्हें भोजन और रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए अत्यधिक कीमतें चुकानी होंगी। ईरान का यह नया कदम भले ही केवल आवश्यक वस्तुओं के लिए हो, लेकिन इसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त होने से बचाने की एक छोटी सी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।

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