झारखंड में लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश, अस्पतालों को किया अलर्ट
झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने भीषण गर्मी और लू के मद्देनजर सभी जिलों को सतर्क करते हुए बचाव के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ...और पढ़ें
-1777084476658_v.webp)
राज्य ब्यूरो, रांची। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी व लू को देखते हुए सभी जिलों को सतर्क किया है। साथ ही इससे बचाव को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
गर्मी में आग लगने की घटनाएं भी अधिक होती हैं। ऐसी घटना से बचाव के लिए अस्पतालों में फायर एवं इलेक्ट्रिसिटी ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान, झारखंड शशि प्रकाश झा ने इसे लेकर सभी सिविल सर्जनों, मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों आदि को दो-अलग पत्र भेजे हैं।
अभियान निदेशक ने कहा है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्राप्त चेतावनी के अनुसार झारखंड में अत्यधिक गर्मी और लू चलने की संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में राज्य में लू से बचाव के लिए प्रभावी कार्य योजना तैयार करने तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों एवं संवेदनशील आबादी की पहचान कर विशेष सुरक्षा उपाय किए जाने की तत्काल आवश्यकता है।
लू से प्रभावित लोगों का हो अच्छा उपचार
उन्होंने लू से प्रभावित लोगों के उपचार की पूरी तैयारी करने तथा मौसम विभाग द्वारा समय-समय पर जारी चेतावनियों पर गंभीरता से ध्यान देने को कहा है।
अभियान निदेशक ने हीट स्ट्रोक प्रबंधन के लिए जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सदर अस्पतालों में आवश्यक दवाइयां, फ्लूड्स, ओआरएस पैकेट्स एवं कुलिंग ट्रीटमेंट सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है।
साथ ही हीट वेब केस मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए सभी चिकित्सकों, नर्सों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण देने को कहा है। सभी 108 एंबुलेंस में हीट वेब आपात स्थिति में कोल्ड बैंक, आइस क्यूब, टॉवेल एवं हाइड्रोशन सपोर्ट से सुसज्जित किए जाएं।
सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी हीटवेब से प्रभावित व्यक्तियों की प्रारंभिक पहचान एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था संस्था स्तर पर सुनिश्चित करें।
गर्भवती महिलाओं की हो विशेष निगरानी
गर्भवती महिलाओं, हृदय रोगियों, मधुमेह रोगियों, उच्च रक्तचाप से ग्रस्त मरीजों एवं कुपोषित बच्चों की विशेष निगरानी की जाए, क्योंकि वे हीट स्ट्रोक के प्रति अधिक संवेदनशील होते है।
सभी शहरी एवं ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में हीट हेल्थ डेस्क स्थापित की जाएं, जहां से आम आदमी लू से बचाव और उपचार संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकें।
लू से प्रभावित व्यक्तियों की नियमित चिकित्सीय जांच एवं फॉलोअप किया जाए, ताकि दोबारा लू के दुष्प्रभाव से बचाव हो सके।
उन्होंने सभी सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू करने तथा हीट वेब के दौरान आने वाले मरीजों का डाटा संकलित करने को कहा है।
यह भी कहा है कि जिले में ओआरएस वितरण केंद्रों की स्थापना की जाए, जहां आम नागरिकों को निशुल्क ओआरएस एवं हाइड्रेशन पैक उपलब्ध कराया जा सके।
गंभीर रूप से प्रभावित मरीजों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी, पोषण सहायता एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श संबंधित कार्ययोजना बनायी जाय।