500 रुपये की शर्त और फंस गए कर्नाटक के गृह मंत्री... कोर्ट ने दिया FIR दर्ज करने का आदेश
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर के खिलाफ बेंगलुरु कोर्ट ने कबड्डी मैच में 500 रुपये की कथित शर्त लगाने के मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। ...और पढ़ें
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कर्नाटक के होम मिनिस्टर के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश (फाइल फोटो)
कर्नाटक के गृह मंत्री जी. परमेश्वर मुश्किल में घिर गए हैं। बेंगलुरु की एक अदालत ने उनके खिलाफ कबड्डी मैच के दौरान 500 रुपये की कथित शर्त लगाने के मामले में केस दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह विवाद तुमकुरु में आयोजित राज्य स्तरीय प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान उनके एक बयान से जुड़ा है। बताया गया कि परमेश्वर ने जिला उपायुक्त शुभा कल्याण के साथ 500 रुपये की दोस्ताना शर्त लगाई थी कि विजयपुरा की टीम मैच जीतेगी। हालांकि मैच में दक्षिण कन्नड़ की टीम ने विजयपुरा को 36-26 से हराकर जीत दर्ज की। बाद में विजेता टीम को पुरस्कार देते समय मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस शर्त का जिक्र भी किया।
शिकायत के बाद कोर्ट का आदेश
इस मामले में एचआर नागभूषण नाम के व्यक्ति ने निजी शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि सार्वजनिक रूप से शर्त लगाना, चाहे मजाक में ही क्यों न हो, कानून के खिलाफ है और खासकर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसा नहीं करना चाहिए।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु की 42वीं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने पुलिस को FIR दर्ज करने और मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। इस अदालत की अध्यक्षता न्यायाधीश केएन शिवकुमार कर रहे हैं। गौरतलब है कि पुलिस विभाग गृह विभाग के अधीन आता है, जिसकी जिम्मेदारी खुद गृह मंत्री के पास होती है।
यह विवाद तुमकुरु में आयोजित राज्य स्तरीय प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान उनके एक बयान से जुड़ा है। बताया गया कि परमेश्वर ने जिला उपायुक्त शुभा कल्याण के साथ 500 रुपये की दोस्ताना शर्त लगाई थी कि विजयपुरा की टीम मैच जीतेगी। हालांकि मैच में दक्षिण कन्नड़ की टीम ने विजयपुरा को 36-26 से हराकर जीत दर्ज की। बाद में विजेता टीम को पुरस्कार देते समय मंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस शर्त का जिक्र भी किया।
शिकायत के बाद कोर्ट का आदेश
इस मामले में एचआर नागभूषण नाम के व्यक्ति ने निजी शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि सार्वजनिक रूप से शर्त लगाना, चाहे मजाक में ही क्यों न हो, कानून के खिलाफ है और खासकर संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसा नहीं करना चाहिए।
शिकायत पर सुनवाई करते हुए बेंगलुरु की 42वीं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने पुलिस को FIR दर्ज करने और मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। इस अदालत की अध्यक्षता न्यायाधीश केएन शिवकुमार कर रहे हैं। गौरतलब है कि पुलिस विभाग गृह विभाग के अधीन आता है, जिसकी जिम्मेदारी खुद गृह मंत्री के पास होती है।