प्रफुल हिंगे ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ अपने पहले ही ओवर में तीन विकेट लेकर सुर्खियां हासिल की। प्रफुल हिंगे ने अपनी जिंदगी के बारे में खुलकर बताया ...और पढ़ें

प्रफुल हिंगे का सपना भारतीय जर्सी पहनने का है
शेखर झा, जागरण नई दिल्ली। राजस्थान रॉयल्स के विरुद्ध पहले ही ओवर में तीन विकेट लेकर सनराइजर्स हैदराबाद के युवा तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे ने इतिहास रच दिया। उनकी शानदार गेंदबाजी की बदौलत टीम ने दमदार जीत दर्ज की। बता दें कि हिंगे ने वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरैल और हुआन डी प्रीटोरियस को अपना शिकार बनाया। ये तीनों बल्लेबाज खाता नहीं खोल सके थे।
सनराइजर्स हैदराबाद अगला मुकाबला 25 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के विरुद्ध खेलने उतरेगी। इस मुकाबले को जियो हॉटस्टार और स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देख सकते हैं। जियोस्टार प्रेस रूम में प्रफुल्ल हिंगे ने अपने संघर्ष भरे शुरुआती सफर और परिवार के योगदान पर खुलकर बात की।
पिता-दीदी बने मिसाल
प्रफुल्ल ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई छोड़ी नहीं है। थोड़ी-थोड़ी कर के पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने क्रिकेटर बनने का पूरा श्रेय अपने पिता और बड़ी बहन को दिया। उन्होंने कहा कि पिता हर सुबह समय पर ऑफिस जाने के लिए निकल जाते थे, जबकि बहन देर रात तक मेहनत से पढ़ाई करती थी।
परिवार के इन सदस्यों की लगन देखकर उन्हें भी जीवन में कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि वह हमेशा ऐसा काम करना चाहते थे, जिससे उन्हें भी खुशी मिले और परिवार को भी गर्व महसूस हो।
कुछ कर दिखाने को बेताब
प्रफुल्ल ने कहा कि कई बार पिता की ट्रेन छूट जाती थी तो उनका ऑफिस जाना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन इसके बावजूद वह हर काम समय पर करने की कोशिश करते थे। वहीं, उनकी बहन देर रात तक जागकर पढ़ाई करती थी। जब वह सुबह उठते थे और दोनों को मेहनत करते देखते थे तो उनके मन में भी कुछ कर दिखाने का जज्बा पैदा होता था।
पिता को बताई दिल की बात
इसी वजह से उन्होंने सुबह जल्दी उठकर ट्रेनिंग शुरू की। प्रफुल्ल ने आगे कहा कि शुरुआती दिनों में उन्हें क्रिकेट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह सिर्फ टेनिस बॉल से खेलते थे और जहां मौका मिलता, मैच खेलने चले जाते थे। जब उन्होंने पिता को क्रिकेट खेलने की इच्छा बताई तो पिता उन्हें ट्रायल दिलाने ले गए।
हालांकि, पहली बार यह कहकर लौटा दिया गया कि अभी उनकी उम्र कम है और अगले साल आने को कहा गया। जब वह 13 साल के हुए तो दोबारा ट्रायल देने पहुंचे। कुछ महीनों तक अभ्यास करने के बाद पिता ने सोचा कि कैंप खत्म होते ही शायद वह खेल छोड़ देंगे, लेकिन प्रफुल्ल की जिद अलग थी।
भारतीय जर्सी पहनने का सपना
उन्होंने साफ कहा कि उन्हें कुछ बड़ा करना है। उस समय उन्हें सिर्फ इतना पता था कि भारत के लिए खेलना है। घरेलू क्रिकेट की ज्यादा जानकारी नहीं थी, बस मन में ब्लू जर्सी पहनने का सपना था।
बाद में धीरे-धीरे उन्हें क्रिकेट की पूरी प्रक्रिया समझ आई और उसी हिसाब से उन्होंने मेहनत शुरू की। प्रफुल्ल ने बताया कि 2016 में उन्होंने अंडर-16, अंडर-19 और अन्य आयु वर्ग के मुकाबलों में हिस्सा लिया।