दुनिया के शीर्ष रक्षा वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें और लापता होने की घटनाएँ अमेरिका और चीन में चिंता बढ़ा रही हैं। ये वैज्ञानिक AI, हाइपरसोनिक हथियार ...और पढ़ें

अमेरिका-चीन के वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौतें और गायब होने की घटनाएं, बढ़ी चिंता (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)
दुनिया के कई शीर्ष रक्षा वैज्ञानिकों के साथ हो रही रहस्यमयी घटनाओं ने अमेरिका और चीन में चिंता बढ़ा दी है। कुछ वैज्ञानिकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो रही है, तो कुछ अचानक लापता हो रहे हैं। ये सभी वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक हथियार, परमाणु तकनीक और अंतरिक्ष रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे थे।
इन घटनाओं के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। अमेरिका में ऐसे कम से कम 11 मामलों की जांच हो रही है, जिनमें वैज्ञानिकों के गायब होने या संदिग्ध हालात सामने आए हैं।
अमेरिकी नेता एरिक बर्लिसन ने इसे संभावित 'विदेशी ऑपरेशन' बताया है। वहीं डोनल्ड ट्रंप ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि उम्मीद है यह सिर्फ संयोग हो। मामले की जांच एफबीआई कर रही है।
चीन में भी सामने आए कई मामले
चीन में भी इसी तरह के कम से कम नौ मामलों की खबरें सामने आई हैं, जहां वैज्ञानिकों की मौत हो गई। इनकी उम्र 26 से 68 साल के बीच थी और अधिकतर मामलों में कारण दुर्घटना, बीमारी या अस्पष्ट बताया गया है। सबसे चर्चित मामला 38 वर्षीय प्रोफेसर फेंग यांगहे का है, जिनकी जुलाई 2023 में बीजिंग में कार दुर्घटना में मौत हो गई। वे ताइवान से जुड़े सैन्य सिमुलेशन मॉडल पर काम कर रहे थे।
रिपोर्ट के अनुसार, रात करीब 2.35 बजे मीटिंग से लौटते समय उनका एक्सीडेंट हुआ। सरकारी बयान में उनकी मौत को 'कर्तव्य निभाते हुए बलिदान' बताया गया, जिस पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं।
कई और वैज्ञानिकों की संदिग्ध मौत
इसके अलावा कई अन्य वैज्ञानिकों की भी हाल के वर्षों में मौत हुई है। इनमें माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ चेन शूमिंग, केमिस्ट झोउ गुआंगयुआन, स्पेस एक्सपर्ट झांग शियाओक्सिन और हाइपरसोनिक विशेषज्ञ फांग डाइनिंग शामिल हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामले हाइपरसोनिक तकनीक, सैन्य एआई और एडवांस हथियारों से जुड़े हैं, जो रणनीतिक रूप से बेहद अहम क्षेत्र हैं। हालांकि कुछ मामलों को सामान्य दुर्घटना भी माना जा रहा है।
क्या है साजिश या सिर्फ संयोग?
फिलहाल इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि अमेरिका, चीन, रूस या किसी अन्य देश द्वारा वैज्ञानिकों को निशाना बनाकर कोई संगठित अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि इतिहास में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। ईरान के परमाणु वैज्ञानिकों को भी पहले निशाना बनाया गया था, जिसे इजरायल से जोड़ा गया था।