भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने टी-20 विश्व कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भारत को महत्वपूर्ण जीत दिलाई। उनकी सटीक लाइन-लेंथ और नियंत्रित गें ...और पढ़ें

अहमदाबाद। भारतीय टीम के तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को बड़े मैचों का धुरंधर गेंदबाज माना जाता है। जब भी टीम को कठिन परिस्थितियों में विकेट या कसी हुई गेंदबाजी की जरूरत पड़ती है वह अपनी सटीक लाइन-लेंथ के दम पर टीम को सफलता दिलाते हैं। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में गुरुवार को खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में भी उन्होंने एक बार फिर अपनी शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन करते हुए भारत को महत्वपूर्ण जीत दिलाई।
उनकी नियंत्रित और प्रभावी गेंदबाजी की बदौलत भारतीय टीम न सिर्फ मैच जीतने में सफल रही, बल्कि टी-20 विश्व कप के फाइनल में भी जगह बनाने में कामयाब हुई। भले ही प्लेयर ऑफ द मैच 86 रन बनाने वाले संजू सैमसन को दिया गया लेकिन उन्होंने भी माना कि उस मैच के असली प्लेयर आफ द मैच बुमराह ही थे। भारत को अब रविवार को नरेन्द्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के विरुद्ध फाइनल खेलना है। अगर भारतीय टीम लगातार दो टी-20 विश्व कप जीतने वाली टीम और अपने घर में यह खिताब जीतने वाली पहली टीम बनती है तो उसमें धुरंधर बुमराह का बहुत बड़ा योगदान होगा।
बुमराह क्यों हैं खास
इंग्लैंड के विरुद्ध वानखेड़े में खेले गए सेमीफाइनल में एक समय ऐसा लग रहा था कि मैच भारतीय टीम के हाथ से फिसल जाएगा। इंग्लैंड के बल्लेबाज तेजी से रन बना रहे थे और भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ता जा रहा था। ऐसे कठिन समय में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपने सबसे भरोसेमंद हथियार जसप्रीत बुमराह को गेंद थमाई। कप्तान को भरोसा था कि बुमराह अपने अनुभव और सटीक गेंदबाजी से मैच का रुख बदल सकते हैं और उन्होंने इस भरोसे को पूरी तरह सही साबित किया।
मैच के 16वें ओवर में बुमराह दूसरा स्पेल फेंकने आए। इससे पहले वरुण चक्रवर्ती का ओवर महंगा साबित हुआ था, जिससे इंग्लैंड के बल्लेबाजों का आत्मविश्वास बढ़ गया था। ऐसे में बुमराह ने बेहद संयम के साथ गेंदबाजी की। उन्होंने अपने ओवर की शुरुआती दो गेंदों पर दो रन दिए, जिससे बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने का मौका नहीं मिला। तीसरी गेंद पर चौका जरूर लगा, लेकिन इसके बाद उन्होंने तुरंत लय पकड़ ली। चौथी गेंद पर कोई रन नहीं दिया और आखिरी दो गेंदों पर केवल दो सिंगल दिए। इस तरह उन्होंने पूरे ओवर में सिर्फ आठ रन खर्च किए और रनगति पर लगाम लगा दी।
18वें ओवर में बुमराह ने दिए 6 रन
18वें ओवर में कप्तान ने एक बार फिर बुमराह पर भरोसा जताया। उस समय इंग्लैंड का स्कोर 200 रन के पार पहुंच चुका था और बल्लेबाज तेजी से रन बनाने की कोशिश कर रहे थे। बुमराह ने इस ओवर में भी कसी हुई गेंदबाजी की और बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। उन्होंने पहली गेंद पर कोई रन नहीं दिया, जबकि दूसरी और तीसरी गेंद पर एक-एक रन ही बने। चौथी गेंद पर दो रन दिए और अंतिम दो गेंदों पर भी सिर्फ एक-एक रन ही बनने दिया। इस तरह उनके इस ओवर में केवल छह रन बने और कोई चौका या छक्का नहीं लगा। बुमराह की इस शानदार गेंदबाजी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया।
बुमराह ने चटकाए कुल 10 विकेट
बुमराह भारतीय टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों हैं और मौजूदा टी-20 विश्व कप में भी उनका प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। वह इस टूर्नामेंट में भारत के लिए दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं, वह भी तब जब विपक्षी टीम के बल्लेबाज उन्हें संभलकर खेलते और उन्हें विकेट नहीं देना चाहते।
बुमराह ने अब तक सात मैचों में 24 ओवर गेंदबाजी करते हुए 6.62 की शानदार इकोनॉमी से कुल 10 विकेट हासिल किए हैं। उनसे आगे केवल वरुण चक्रवर्ती हैं, जिन्होंने आठ मैचों में 8.85 की इकोनामी के साथ 13 विकेट लिए हैं। अगर भारतीय टीम टी-20 विश्व कप में पहली बार न्यूजीलैंड को हराती है तो उसका सबसे बड़ा कारण बूम बूम बुमराह ही होंगे।