कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक, घरेलू गैस के लिए E-KYC अनिवार्य; महंगाई बढ़ने की आशंका

 कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक, घरेलू गैस के लिए E-KYC अनिवार्य; महंगाई बढ़ने की आशंका



पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण केंद्र सरकार ने Commercial Gas Cylinders (19 और 47 किलो) की आपूर्ति पर रोक लगा दी है, जिससे दुमका सहित अन्य शहरों में ह ...और पढ़ें




सिलेंडर ले जाता युवक। फोटो पीटीआई


युद्ध के कारण व्यावसायिक गैस सिलिंडर आपूर्ति पर अगले आदेश तक रोक।


होटल, रेस्तरां जैसे व्यवसायों की परेशानी बढ़ेगी, महंगाई संभव।


घरेलू गैस के लिए ई-केवाईसी, ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य हुई।


राजीव, दुमका। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का असर अब वैश्विक उर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। युद्ध की वजह से सरकार ने व्यवसायिक स्तर पर इस्तेमाल होने वाले 19 किलो और 47 किलो के गैस सिलिंडर की आपूर्ति बंद रखने का आदेश बाटलिंग प्लांटों को दिया है।


संभव है कि सरकार के इस आदेश के बाद होटल, रेस्तंरा, मिठाई की दुकान समेत इस तरह के अन्य कारोबारियों की परेशानी बढ़ेगी और महंगाई भी तेज होगी।

दुमका में दुर्गापुर, बांका, जमशेदपुर और बोकारो बाटलिंग प्लांट से 19 किलो की व्यवसायिक गैस सिलिंडर की आपूर्ति होती है, लेकिन सरकार के आदेश के बाद अब यह आपूर्ति बाधित हो गई है।

ऐसे में यहां प्रतिमाह 1500 व्यवसायिक गैस सिलिंडर का उपयोग करने वाले कारोबारियों के अलावा कुछ आवासीय विद्यालयों को संचालित करने के लिए ईंधन की वैकल्पिक व्यवस्था बहाल करने की दरकार पड़ेगी। दुमका में 19 किलो के व्यवसायिक गैस सिलिंडर की कीमत फिलहाल 2036 रुपये है।

रसोई गैस को लेकर उपभोक्ता परेशान

इधर, रसोई गैस की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोत्तरी के बाद अब घरेलू गैस उपभोक्ताओं को रसोई गैस के लिए निबंधन का मियाद भी 15 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
दुमका में पहले जो रसोई गैस 910.50 रुपये में उपलब्ध थी, अब वह बढ़कर 970.50 रुपये हो गई है।उपभोक्ताओं को अब गैस सिलिंडर हासिल करने के लिए अनिवार्य रूप से Online Resistration कराने की बाध्यता का भी हर हाल में पालन करना होगा।


वहीं, सरकार ने यह भी आदेश दिया है कि सरकार विद्यालयों में मध्याह्न भोजन पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला रसोई गैस सिलिंडर की निर्बाध आपूर्ति होगी।

इसमें किसी भी स्तर पर अड़चन नहीं आएगी। दुमका में फिलहाल 500 रसोई गैस सिलिंडर की खपत प्रतिमाह मध्याह्न भोजन बनाने में हो रही है।
जिले में प्रतिमाह चाहिए 40 हजार रसोई गैस सिलिंडर

दुमका जिले में तकरीबन 80 हजार रसोई गैस उपभोक्ता हैं जिन्हें प्रति माह 40 हजार सिलिंडर की जरूरत होती है। इसकी आपूर्ति के लिए जिले में भर में विभिन्न गैस कंपनियों की 26 एजेंसियां संचालित है।

ई-केवाइसी और ऑनलाइन बुकिंग कराने पर ही मिलेगा रसोई गैस

सरकार ने गैस कंपनियों का यह सख्त निर्देश दिया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को रसोई गैस किल्लत का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए आपूर्ति चेन को पारदर्शी तरीके से प्रभावी बनाया जाए।


सरकार का स्पष्ट मानना है कि सही ढंग से वाजिब गैस उपभोक्ताओं को सिलिंडर आपूर्ति होने पर उपभोक्ताओं को कम से कम परेशानी होगी या फिर कोई परेशानी ही नहीं होगा।

ऐसे में सरकार ने कंपनियों को अब सभी उपभोक्ताओं के ई-केवाइसी अपडेट के साथ ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से ही गैस आपूर्ति का आदेश दिया है। इस व्यवस्था के तहत ऑनलाइन बुकिंग के बाद उपभोक्ता के निबंधित मोबाइल नंबर पर डिलिवरी आथेंटिकेशन कोड प्रेषित होगा।


उपभोक्ता जब इस कोड को वेंडर को दिखाएंगी तभी उन्हें सिलिंडर आपूर्ति हो सकेगा। बगैर कोड दिखाए उपभोक्ता को गैस सिलिंडर की आपूर्ति नहीं की जाएगी।

वहीं, दोबारा गैस सिलिंडर हासिल करने के लिए अब उपभोक्ता को 15 दिनों के बजाए 25 दिनों में निबंधन कराना होगा।
भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय का संशोधित आदेश

केंद्रीय सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत पेट्रोलियम उत्पाद उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति का रख-रखाव आदेश, 1999 जारी किया था, ताकि पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति को नियंत्रित किया जा सके और जनता तथा अर्थव्यवस्था के हितों की रक्षा की जा सके।


इस आदेश की धारा 3 के अनुसार यदि सार्वजनिक हित में आवश्यक हो तो केंद्र सरकार तेल रिफाइनरी कंपनियों को किसी उत्पाद के उत्पादन स्तर को बनाए रखने या बढ़ाने का निर्देश दे सकती है।

धारा 5 के अनुसार, केंद्र सरकार किसी भी तेल विपणन कंपनी को यह निर्देश दे सकती है कि वह अपने स्टाक से किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद को भारत के किसी भी स्थान पर अन्य कंपनियों के डिपो या प्रतिष्ठानों को आपूर्ति करे।


चूंकि एलपीजी घरों में खाना बनाने के लिए उपयोग होने वाला एक आवश्यक ईंधन है और इसकी निरंतर आपूर्ति सार्वजनिक हित में आवश्यक है।
रसोई गैस को प्राथमिकता

देश में उपयोग होने वाले घरेलू एलपीजी का 99 प्रतिशत से अधिक तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों द्वारा आपूर्ति किया जाता है जिसमें आइओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल शामिल है।

युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकार के स्तर से पर्याप्त घरेलू एलपीजी उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
तेल रिफाइनरी कंपनियों को निर्देश

वहीं, देश में कार्यरत सभी घरेलू और सेज तेल रिफाइनरी कंपनियां तथा पेट्रो केमिकल कॉम्प्लेक्स यह सुनिश्चित करेंगे कि सी-थ्री और सी-थ्री स्ट्रीम जैसे प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपाइलीन, ब्यूटीन का पूरा उत्पादन के लिए उपयोग किया जाए और इसे केवल तीनों सार्वजनिक कंपनियों को ही उपलब्ध कराया जाए।


रिफाइनरी कंपनियां इन स्ट्रीम्स को पेट्रो केमिकल उत्पाद या अन्य डाउन स्ट्रीम उत्पाद बनाने के लिए उपयोग या डायवर्ट नहीं करेंगी।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां यह सुनिश्चित करेंगी कि इस एलपीजी की आपूर्ति केवल घरेलू केवल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किया जाए।

यह भी ताकीद किया है कि यदि इस आदेश का उल्लंघन होता है तो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और पेट्रोलियम उत्पाद आदेश 1999 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

यह आदेश पांच मार्च 2026 के पिछले आदेश को निरस्त कर और तत्काल प्रभाव से लागू होगा और अगले आदेश आने तक प्रभावी रहेगा।


केंद्र सरकार के स्तर से जारी किए गए नए आदेश का अनुपालन हो, इसके लिए दूरभाष पर उपभोक्ताओं को जानकारी दी जा रही है। उन्हें यह बताया जा रहा कि अगर उनका KYC नहीं हुआ तो वह संबंधित गैस एजेंसी के कार्यालय में अपने निबंधित मोबाइल नंबर, कंज्यूमर नंबर और आधार नंबर की जानकारी देकर तुरंत केवाइसी करा लें, ताकि गैस आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। सभी डिलीवरी ब्वॉय को भी निर्देश दिया गया है कि जिन ग्राहकों का ई- केवाइसी लंबित है, उन्हें सिलेंडर की डिलीवरी नहीं दें। - मनोज सिंघानियां, प्रोपराइटर, अंचित गैस एजेंसी, दुमका

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