चीन में सैन्य विद्रोह की आहट? भ्रष्टाचार के बहाने सेना पर शिकंजा, बड़े अधिकारियों को हटाया
चीन में वार्षिक बैठकों के दौरान कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अनुपस्थित रहे, क्योंकि चीन में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चल रहा है, इस कार्रवाई से सेना के वफाद ...और पढ़ें

चीन में भ्रष्टाचार के बहाने सेना पर शिकंजा(फाइल फोटो)
शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान सेना तक पहुंचा
जनरल झांग यौशिया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी जांच के घेरे में
कार्रवाई से PLA के मनोबल और वफादारी पर सवाल
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन की वार्षिक बैठक बीजिंग में चल रही हैं। जिसमें हजारों सरकारी अधिकारी इकट्ठा हुए, लेकिन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के कई सैन्य अधिकारी इन बैठकों में नदारद थे। इनमें सबसे बड़ा नाम जनरल झांग यौशिया का है, जो जनवरी के अंत से गंभीर अनुशासन और कानून उल्लंघन के संदेह में जांच के घेरे में हैं।
यह घटना चिनफिंग के लंबे शासनकाल की भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है, जिसकी पहुंच अब सेना के टॉप जनरल तक पहुंच चुका है। जिसमें कई बड़े अधिकारी फंस भी चुके हैं जिनपर कर्रवाई तेज कर दी गई है।
चिनफिंग का अभूतपूर्व तूफान जारी
2012 में सत्ता संभालते ही शी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कर्रवाई शुरू की थी। यह अभियान उच्च पद पर बैठे लोगों और निचले स्तर के अधिकारियों को निशाना बनाता रहा। अब यह अभियान पीएलए के नेतृत्व में तेजी से फैल रहा है।
ताइवान के नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ चिएह चुंग के मुताबिक, इस बार शी का जाल और बड़ा हो गया है। इसमें सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) के सदस्यों के अलावा ऑपरेशनल कमांडर, पॉलिटिकल कमिश्नर और पांच थिएटर कमांड के अधिकारी शामिल हैं।
भ्रष्टाचार सेना की सबसे बड़ी कैंसर
चीन की आधिकारिक मिलिट्री न्यूजपेपर ने पिछले महीने लिखा कि भ्रष्टाचार लड़ाकू क्षमता को खोखला करने वाला सबसे बड़ा कैंसर है। जितना गहराई से खतरे हटाएंगे, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई उतनी ही सफल होगी।
दो सत्रों के दौरान जारी पीएलए की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार विरोध को राजनीतिक सुधार और वफादारी सुनिश्चित करने के बराबर महत्व दिया गया। यह सब 2027 में पीएलए की 100वीं वर्षगांठ से पहले हो रहा है, जब सेना अपनी आधुनिकीकरण यात्रा का जायजा लेगी।
जनरल झांग और लियू की गिरफ्तारी से हलचल
जनरल झांग यौशिया, जो सीएमसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष थे और शी के करीबी माने जाते थे, अब जांच के दायरे में हैं। उनके साथ जनरल लियू झेनली भी गिरफ्त में आ चुके है। अमेरिकी थिंक टैंक सीएसआईएस के अनुसार, 2022 से अब तक करीब 100 वरिष्ठ अधिकारी में 36 जनरल और लेफ्टिनेंट जनरल शामिल हैं।
जापान के पूर्व राजनयिक कुनीहिको मियाके ने कहा कि सीएमसी के सात सदस्यों में से अब सिर्फ शी के अलावा एक और बचे हैं। यह जापान या अमेरिका में चीफ ऑफ स्टाफ के गायब होने जितना बड़ा संकट है।
दक्षिण कोरिया के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल इन-बम चुन का कहना है कि ये बदलाव सेना की आंतरिक सेहत पर सवाल उठाते हैं। भ्रष्टाचार हो या राजनीतिक वफादारी बार-बार नेतृत्व बदलाव से मनोबल और विश्वास प्रभावित होता है।
ताइवान पर क्या असर?
ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इन घटनाओं पर नजर रखे हुए हैं। चीन ताइवान को शांतिपूर्ण या बलपूर्वक अपने साथ जोड़ने की बात कहता रहा है। 2027 तक पीएलए के ताइवान पर हमला करने की क्षमता होने का अनुमान है।
क्राइसिस ग्रुप के विलियम यांग कहते हैं कि हालिया गवर्नमेंट वर्क रिपोर्ट से लगता है कि बीजिंग क्रॉस-स्ट्रेट गतिशीलता में आत्मविश्वास महसूस कर रहा है और हर किमत पर अपने साथ शामिल करने की तैयारी तेज कर दिया है।
फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व बदलाव से ताइवान के आसपास पीएलए की गतिविधियां प्रभावित नहीं हुईं। दिसंबर 2025 में जस्टिस मिशन 2025 अभ्यास और 2026 में जॉइंट पैट्रोल जारी हैं।
ताइपे के विशेषज्ञ अलेक्जेंडर ह्वांग ने बताया कि ट्रेनिंग और अभ्यास व्यवस्था में बड़ा व्यवधान नहीं दिखता। यह शी की सेना पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश है, लेकिन इससे चीन की सैन्य तैयारियों पर सवाल भी उठ रहे हैं।