गुमला शिक्षा विभाग में करोड़ों की बंदरबांट: बिना काम के जारी कर दिया पैसा, बच्चों को नहीं मिला यूनिफॉर्म
गुमला शिक्षा विभाग में वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में करोड़ों रुपये के भुगतान में गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका है। अधिकारियों की कमी के कारण बिन ...और पढ़ें
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गुमला शिक्षा विभाग में करोड़ों की बंदरबांट
बिना कार्य पूर्ण हुए करोड़ों रुपये का भुगतान।
अधिकारियों की कमी से जांच में बाधा।
ड्रेस-पौधरोपण के नाम पर लाखों का खर्च।
संतोष कुमार, गुमला। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के अंतिम सप्ताह में शिक्षा विभाग, गुमला में करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितता और गड़बड़ी की आशंका गहराने लगी है। इसका मूल कारण अधिकारियों की कमी के साथ-साथ विलंब से भुगतान करना है।
ऐसे में आपाधापी का माहौल बना हुआ है। बिना कार्य पूर्ण किए तथा क्रय और वितरण की उचित जांच के बिना ही स्कूलों को लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
एक लाख से ज्यादा पौधा लगाने का दावा
जानकारी के अनुसार, इको क्लब के अंतर्गत कुछ माह पूर्व ही वन विभाग द्वारा सभी सरकारी स्कूलों को बड़ी संख्या में निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराए गए थे और स्कूलों ने एक लाख से अधिक पौधे लगाने का दावा किया था। इसके बावजूद झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला द्वारा फिर से पौधरोपण, कीट एवं पर्यावरण गतिविधियों के नाम पर वित्तीय वर्ष के अंत में 70 लाख रुपये से अधिक राशि का आवंटन कर दिया गया है।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब पहले ही पौधे उपलब्ध कराए जा चुके थे, तो दोबारा इतनी बड़ी राशि खर्च करने की आवश्यकता क्या है। चर्चा है कि कई सप्लायर स्कूलों में सिर्फ बिल वाउचर बांट रहे हैं और वास्तविक कार्य नगण्य है।
बच्चों को ड्रेस-जूता वितरित किए बिना लगाया भुगतान का बिल
शिक्षा विभाग के कार्यालय में सप्लायरों का फौज भाग दौड़ में है। क्लास 1 और 2 के 10 हजार से अधिक बच्चों या उनके अभिभावकों के बैंक खाते शिक्षा विभाग अब तक खोज नहीं पाया है, फिर भी ड्रेस क्रय के लिए स्कूल समितियों को 60 लाख रुपये से अधिक राशि जारी कर दी गई है। आरोप है कि कई विद्यालयों ने बच्चों को ड्रेस, जूता, मोजा और स्वेटर वितरित किए बिना ही भुगतान के लिए बिल लगा दिए हैं, जबकि ऐसे बच्चों का सत्यापन अब तक नहीं हुआ है।
जांच और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल
इसके अलावा उच्च विद्यालयों के स्कूल ग्रांट के लिए 50 लाख रुपये से अधिक, प्रबंधन समिति प्रशिक्षण के लिए 30 लाख रुपये से अधिक, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और आईसीटी व्यवस्था सहित अन्य मदों में भी भारी राशि जारी की जा रही है।
नियम के अनुसार कार्य पूर्ण होने और जांच के बाद ही भुगतान होना चाहिए, लेकिन शिक्षा अधिकारियों की भारी कमी के कारण बिना सत्यापन के भुगतान शुरू हो गया है। जिले के 12 प्रखंडों के लिए मात्र दो शिक्षा अधिकारियों की तैनाती होने से जांच और पारदर्शिता की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस संबंध में पूछने पर एडीपीओ ज्योति ने बताया कि अधिकारियों की कमी और एसएनए स्पर्ष जैसे व्यवस्था आने से परेशानी बढ़ी है। तकनीकी कारणों से कार्य प्रभावित हुआ है।