झारखंड के जलाशयों में अब 'महाझींगा' की लहर, 9 जलाशयों में पालन शुरू; किसानों की आय होगी दोगुनी

 झारखंड के जलाशयों में अब 'महाझींगा' की लहर, 9 जलाशयों में पालन शुरू; किसानों की आय होगी दोगुनी



झारखंड मत्स्य विभाग महाझींगा पालन को बढ़ावा दे रहा है। पहले तीन जलाशयों में सफल पायलट प्रोजेक्ट के बाद, अब नौ जलाशयों में इसका विस्तार किया गया है। ...और पढ़ें




एआई जेनरेटेड तस्वीर


महाझींगा पालन का 3 से 9 जलाशयों में सफल विस्तार।


आदिवासी किसानों की आय में महत्वपूर्ण वृद्धि हो रही है।


आईसीएआर-सीआईएफआरआई के तकनीकी सहयोग से यह परियोजना।


रांची। मत्स्य विभाग की ओर से झारखंड में महाझींगा पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। विभाग की ओर से पहले तीन जलाशयों में महाझींगा पालन का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया। इस वर्ष कुल नौ जलाशयों में इसका पालन किया जा रहा है।


मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि अभी तक सभी किसान जलाशय में मछली पालन करते थे, लेकिन अब छोटे जलाशयों में मछली के साथ महाझींगा का भी पालन कर पाएंगे। महाझींगा पालन से किसान अपने जीवन में सुधार ला सकते है।
पहले तीन जलाशयों में होता था पालन

पहले झारखंड के घाघरा जलाशय (हजारीबाग), केलाघाघ जलाशय (सिमडेगा) और मसरिया जलाशय (गुमला) में महाझींगा पालन किया जा रहा था, जिसका उत्साहवर्धक परिणाम मिला है। किसानों के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए सभी डीएफओ ने विभाग से अन्य छोटे जलाशयों में महाझींगा पालन करने की बात कही थी।


उसके बाद राज्य के छह जलाशय बचरा (लातेहार), करंजी और नौरंगा जलाशय (रांची), नंदनी (लोहरदगा), धनसिंह जलाशय (गुमला) तथा बांकीबेरा जलाशय (दुमका) में भी महाझींगा पालन का कार्य शुरू किया गया है।
मुफ्त दिया जा रहा बीज और चारा

मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि यह प्रोजेक्ट भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय अंतर्देशीय मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (आइसीएआर-सीआइएफआरआइ) (बैरकपुर) कोलकता के तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है।इसके लिए विभाग की ओर से 1.2 करोड़ रुपये की राशि तीन साल के लिए दी गई है।


महाझींगा छिछले पानी और झाड़ वाली जगहों पर रहना पसंद करते हैं। इसके अलावा पथरीली जमीन की वजह से इनकी ग्रोथ भी अच्छी होती है। मार्च में बीज का पालन शुरू होता है और सितंबर-अक्टूबर में इसकी हार्वेस्टिंग होती है।


अभी तक 90 ग्राम से 400 ग्राम तक का झींगा का उत्पादन हुआ है। बाजार में इसकी कीमत आठ सौ से एक हजार रुपये प्रतिकिलो है, जो स्थानीय स्तर पर बिक जाती है। इससे आदिवासी किसानों की आय बढ़ रही है, क्योंकि सभी इसका पालन आदिवासी बाहुल क्षेत्र में हो रहा है। अभी तक नौ जलाशयों में करीब 23 लाख बीज डाले गए हैं।

पोषक तत्वों से भरपूर होता है महाझींगा

महाझींगा को पोषक तत्वों का पावरहाउस माना जाता है। इसमें प्रोटीन, कम कैलोरी और कई आवश्यक खनिजों से भरपूर होता है। जिसमें ओमेगा-3, विटामिन बी12, सेलेनियम, आयोडीन, फास्फोरस और जिंक, अमीनो एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं।

बंगाल और ओडिशा से आता है बीज

इसे विशेष रूप से हृदय स्वास्थ्य, मांसपेशियों के निर्माण और मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। आईसीएआर- सीआईएफआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके दास ने बताया कि झारखंड में 90 प्रतिशत छोटे जलाशय हैं जहां पर महाझींगा के उत्पादन की भरपूर संभावना है।


इसका बीज बंगाल के पूर्वी मेदिनापुर और ओडिशा के बालेश्वर से मंगाया जाता है। एक बीज के कीमत करीब 1.5 से दो रुपये होती है। जिसमें 90 प्रतिशत बीज जीवित हैं।

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