‘ठोको नीति’ से था डर... सामना हुआ तो योगी बाबा की यूपी पुलिस के व्यवहार के कायल हुए जीएसटी चोरी मामले में पकड़े गए लोग
UP Police : उत्तर प्रदेश पुलिस की 'ठोको नीति' के बावजूद, जीएसटी चोरी मामले में पकड़े गए धनबाद के निरसा निवासी लोगों ने पुलिस के मानवीय व्यवहार की सराह ...और पढ़ें

जीएसटी चोरी मामले में पकड़े गए लोग और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
जीएसटी धोखाधड़ी में फंसे धनबाद के लोगों ने यूपी पुलिस की सराहना की।
यूपी पुलिस ने पूछताछ के दौरान दोस्ताना व्यवहार किया, नहीं प्रताड़ित किया।
रिहाई के बाद पुलिस ने घर वापसी के लिए किराए की पेशकश की।
संजय सिंह, निरसा (धनबाद)। GST Fraud:उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार (CM Yogi Adityanath) की पुलिस अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ठोकी नीति के लिए देशभर में चर्चित है। हालांकि सख्ती के साथ-साथ पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने आता रहता है। झारखंड के धनबाद जिले के निरसा प्रखंड के तीन लोग यूपी पुलिस (UP Police) के व्यवहार की सराहना करते नहीं थक रहे हैं।
दरअसल, इन दिनों देशभर में शेल कंपनियों के जरिए जीएसटी चोरी (GST) के मामले सामने आ रहे हैं। ठग गिरोह गरीब लोगों के आधार नंबर का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी कंपनियां खोल लेते हैं और बड़े पैमाने पर कर चोरी करते हैं। असली आधारधारक को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब वे जांच के दौरान आरोपी के रूप में पकड़े जाते हैं।
सेल टैक्स विभाग की शिकायत पर हुई गिरफ्तारी
हाल ही में उत्तर प्रदेश के औरैया कोतवाली क्षेत्र (AURAIYA Police)में फर्जी जीएसटी से जुड़ी शिकायत सेल टैक्स विभाग ने दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस धनबाद के निरसा पहुंची और अनिल शर्मा, प्रदीप शर्मा, गणेश बाउरी, उमेश मालाकार, बबलू रजक, अंजीत शर्मा, वापी केवड़ा, कन्हाई साव और मोहम्मद इलियास अंसारी को पूछताछ के लिए 26 जनवरी को औरैया ले गई। इनके नाम पर फर्जी शेल कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की गई थी।
उमेश मालाकार, प्रदीप शर्मा और गणेश बाउरी ने बताया कि पांच दिनों तक उनसे पूछताछ की गई, लेकिन पुलिस का व्यवहार दोस्ताना और सहयोगपूर्ण रहा। उन्हें न्यायाधीश के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया। इस दौरान खाने-पीने, रहने और सोने की पूरी व्यवस्था पुलिस की ओर से की गई तथा किसी प्रकार की प्रताड़ना नहीं की गई।
वापसी को किराया देने लगी पुलिस
उन्होंने कहा कि 31 जनवरी की शाम पुलिस ने उन्हें यह कहकर छोड़ दिया कि वे अपने घर जा सकते हैं। इतना ही नहीं, पुलिसकर्मियों ने यह भी पूछा कि घर लौटने के लिए किराए की जरूरत तो नहीं। हालांकि उनके परिजन वहां पहुंच चुके थे। उन्होंने कहा कि पुलिस का ऐसा मानवीय व्यवहार उन्होंने पहली बार देखा।
पीड़ितों ने आम लोगों से की अपील
पीड़ितों ने आम लोगों से अपील की है कि वे कभी भी अपना आधार कार्ड या पैन कार्ड किसी को न दें और न ही किसी कागज पर बिना समझे हस्ताक्षर करें। उनका आरोप है कि मेढ़ा निवासी श्याम सुंदर पासवान ने धोखाधड़ी कर उनके नाम से फर्जी कंपनियां बनाई। उन्होंने कहा कि ऐसे गिरोह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे।