नियुक्तियों और प्रमोशन में नियमों की अनदेखी का आरोप, कुछ कर्मियों को डॉक्टरों जैसी सैलरी

 नियुक्तियों और प्रमोशन में नियमों की अनदेखी का आरोप, कुछ कर्मियों को डॉक्टरों जैसी सैलरी



रिम्स रांची में बीते कई वर्षों की पदोन्नतियों और नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि पूर्व निदेशकों ने सेवा नियमों की अनदेखी कर मनमाने निर्ण ...और पढ़ें






राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान। फाइल फोटो


रिम्स में कई वर्षों की पदोन्नतियों और नियुक्तियों पर सवाल.


पूर्व निदेशकों पर सेवा नियमों की अनदेखी के आरोप लगे.


स्वास्थ्य विभाग से मामले की पारदर्शी जांच की मांग.


जागरण संवाददता, रांची। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में बीते कई वर्षों के दौरान हुई पदोन्नतियों और नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। प्रोन्नति ऐसी की गई है जिसके बाद जूनियर डॉक्टर सीनियर बन गए, जिसमें सबसे अधिक सर्जरी विभाग, गायनी विभाग, मेडिसिन विभाग आदि शामिल हैं।


रिम्स के कई चिकित्सकों व कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि अलग-अलग कार्यकाल में निदेशकों द्वारा सेवा नियमों की अनदेखी करते हुए मनमाने निर्णय लिए गए, जिससे योग्य चिकित्सकों का मनोबल प्रभावित हुआ है। इन समस्याओं को लेकर डॉक्टरों ने अपने-अपने विभागाध्यक्ष को पक्षपात को लेकर लिखित शिकायत की है।

नियमों के खिलाफ प्रमोशन

शिकायतों के अनुसार, वर्ष 2017 में तत्कालीन निदेशक के कार्यकाल के दौरान रिम्स एवं रिम्स से संबद्ध संस्थानों के चिकित्सकों को एक साथ बड़े पैमाने पर पदोन्नति दी गई, जिसे रिम्स सेवा विनियम 2014 तथा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के विपरीत बताया जा रहा है।


आरोप है कि कुछ पदोन्नतियां निर्धारित समय से पहले और आवश्यक शैक्षणिक मानकों से इतर की गई। वर्ष 2018 में भी बिना नियमित विज्ञापन प्रक्रिया के कुछ नियुक्तियां किए जाने की बात सामने आई है।
कर्मचारियों को डॉक्टरों के बराबर सैलरी

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कुछ गैर-चिकित्सा पृष्ठभूमि के कर्मियों को भी चिकित्सकों के समकक्ष वेतनमान दिए गए, जिस पर आपत्ति जताई गई है। 2019 से 2021 के बीच कोरोना काल के दौरान संस्थान में शैक्षणिक व प्रशासनिक प्रगति ठप रहने का भी आरोप है।


वर्ष 2022 में आंतरिक समितियों द्वारा प्रकाशनों (पब्लिकेशन) की जांच के बाद भी 2023 में साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई अभ्यर्थियों की पदोन्नति रोक दी गई, जबकि कुछ को सीधे पदस्थापना दिए जाने का दावा किया गया है।

निर्देशों का नहीं हुआ पालन

शिकायतकर्ताओं ने यह भी कहा है कि शासी निकाय द्वारा नियमों के अनुरूप पदोन्नति का निर्देश दिए जाने के बाद भी उसका पालन नहीं हुआ। वर्तमान निदेशक पर भी पूर्ववर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और लंबित पदोन्नतियां समय पर नहीं देने के आरोप लगाए गए हैं।


हालांकि, इन आरोपों पर संस्थान प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक सामने नहीं आई है। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग से पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है।

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