फिशिंग गैंग पर बड़ा एक्शन, FBI ने तोड़ा 'W3LL' नेटवर्क; हैक किया था हजारों लोगों का अकाउंट

 फिशिंग गैंग पर बड़ा एक्शन, FBI ने तोड़ा 'W3LL' नेटवर्क; हैक किया था हजारों लोगों का अकाउंट


एफबीआई और इंडोनेशियाई पुलिस ने मिलकर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क 'W3LL' का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क फिशिंग के जरिए लोगों के अकाउंट ह ...और पढ़ें





 एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसे अमेरिका की जांच एजेंसी FBI (फेडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन) और इंडोनेशिया की पुलिस ने मिलकर तोड़ा है। यह नेटवर्क फिशिंग के जरिए लोगों के अकाउंट हैक करता था और करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम देता था।


इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र 'W3LL' नाम का एक खास टूल था, जिसकी मदद से अपराधी नकली लॉगिन पेज बनाकर लोगों से उनके यूजरनेम और पासवर्ड हासिल कर लेते थे। एफबीआई के अधिकारियों ने बताया कि यह सिर्फ साधारण फिशिंग नहीं, बल्कि एक पूरा साइबर क्राइम प्लेटफॉर्म था, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर में किया जा रहा था।
वेबसाइट जब्त, आरोपी हिरासत में

इस कार्रवाई के दौरान 'W3LL' से जुड़ी वेबसाइट को जब्त कर लिया गया और उस पर एफबीआई का नोटिस लगा दिया गया। इंडोनेशिया की पुलिस की मदद से इस टूल के मुख्य डेवलपर को हिरासत में लिया गया है, जिसे 'G.L.' के नाम से पहचाना गया है। इसके साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण डोमेन भी जब्त किए गए हैं, जिससे इसके कामकाज पर बड़ा असर पड़ा है।

यह टूल 'W3LL स्टोर' नाम के एक ऑनलाइन मार्केटप्लेस के जरिए बेचा जाता था। इसके जरिए हजारों लोगों के अकाउंट हैक किए गए। FBI के अनुसार, 2023 तक इस प्लेटफॉर्म पर 25000 से ज्यादा हैक किए गए अकाउंट मौजूद थे। वहीं 2023 और 2024 के बीच करीब 17000 और लोगों को निशाना बनाया गया। कुल मिलाकर, इस नेटवर्क के जरिए लगभग 20 मिलियन डॉलर की ठगी की गई या कोशिश की गई।

कैसे काम करता था नेटवर्क?

इस टूल को अपराधियों को करीब 500 डॉलर में बेचा जाता था। इसमें रेफरल के लिए 10 प्रतिशत कमीशन और अन्य साझेदारों के लिए मुनाफे का हिस्सा तय किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि इस टूल का डेवलपर खुद भी हैक किए गए अकाउंट्स को इकट्ठा कर बेचता था, जिससे इसका दायरा और बढ़ गया।


एफबीआई ने इस नेटवर्क को खत्म कर दिया है, लेकिन साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यूरोप की साइबर सुरक्षा कंपनी सेकोइया ने बताया कि 'स्नीकी 2एफए' जैसे अन्य टूल भी मौजूद हैं, जो इसी तरह काम करते हैं। ये टूल टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए चलाए जाते हैं और नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को आसानी से धोखा देते हैं।

Share this

Related Posts

Previous
Next Post »