पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर एक 'ड्राफ्ट' पोस्ट साझा करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किरकिरी हो रही है। ...और पढ़ें
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी (फोटो-रॉयटर्स)
शहबाज शरीफ ने 'ड्राफ्ट' पोस्ट साझा कर किरकिरी कराई।
पोस्ट में पश्चिम एशिया शांति प्रयासों का उल्लेख था।
सोशल मीडिया टीम की लापरवाही से कूटनीतिक चूक हुई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक बार फिर इंटरनेट मीडिया पर अपनी एक बड़ी चूक के कारण चर्चा का केंद्र बन गए हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव कम करने तथा अमेरिका-इजरायल और ईरान में सीजफायर की कोशिशों के बीच श्रेय लेने की जल्दबाजी में उन्होंने अपने आधिकारिक 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक ऐसी पोस्ट साझा कर दी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी किरकिरी करा दी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की किरकिरी
दरअसल, प्रधानमंत्री कार्यालय से एक कच्चा संदेश (ड्राफ्ट मैसेज) सीधे सार्वजनिक कर दिया गया, जिसे बाद में आनन-फानन में एडिट किया गया, लेकिन तब तक स्क्रीनशॉट बहु-प्रसारित हो चुके थे।
ड्राफ्ट मैसेज से खुली लापरवाही की पोल मामला तब शुरू हुआ जब शहबाज शरीफ के हैंडल से एक पोस्ट साझा की गई, जिसकी शुरुआत में ही बड़े अक्षरों में लिखा था, 'ड्राफ्ट - पाकिस्तान्स पीएम मैसेज ऑन एक्स'।
इस एक शब्द 'ड्राफ्ट' ने यह साफ कर दिया कि इंटरनेट मीडिया टीम ने बिना जांचे-परखे सीधे संदेश कॉपी-पेस्ट कर दिया था। इस पोस्ट में पश्चिम एशिया के युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान की कथित कूटनीतिक कोशिशों का बखान किया गया था।
मूल पोस्ट में लिखा था, 'ड्राफ्ट - पाकिस्तान के पीएम का एक्स पर संदेश: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीतिक प्रयास मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। मैं राष्ट्रपति ट्रंप से अनुरोध करता हूं कि समय सीमा दो सप्ताह के लिए बढ़ा दें। पाकिस्तान ईरानी भाइयों से भी अनुरोध करता है कि वे सद्भावना के तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दें।'
संपादन के बाद भी नहीं थमी फजीहत जैसे ही इस गलती का अहसास हुआ, पोस्ट को तुरंत एडिट कर 'ड्राफ्ट' शब्द हटा दिया गया। हालांकि, 'एक्स' के एडिट हिस्ट्री फीचर ने शहबाज शरीफ की इस चूक को हमेशा के लिए रिकार्ड में दर्ज कर लिया।
इंटरनेट मीडिया पर लोग इसे पाकिस्तान की 'बचकाना कूटनीति' करार दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर, जहां डोनाल्ड ट्रंप जैसे वैश्विक नेता और ईरान का जिक्र हो, ऐसी लापरवाही पाकिस्तान की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाती है।
यह पूरी कवायद अमेरिका द्वारा बमबारी रोकने और ईरान के '10-सूत्रीय प्रस्ताव' पर विचार करने की खबरों के बीच खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में पेश करने की कोशिश मानी जा रही है। लेकिन इस तकनीकी चूक ने कूटनीतिक गंभीरता के बजाय प्रधानमंत्री की इंटरनेट मीडिया टीम की अपरिपक्वता को जगजाहिर कर दिया है।
फिलहाल, इस्लामाबाद के गलियारों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतने संवेदनशील संदेश की जांच क्यों नहीं की गई।