चीन का 'पीस प्लान' और पाकिस्तान की 'अमेरिका वाली रणनीति', ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट में 'नया खेल'

 चीन का 'पीस प्लान' और पाकिस्तान की 'अमेरिका वाली रणनीति', ईरान युद्ध के बीच मिडिल ईस्ट में 'नया खेल'


मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच चीन ने शांति पहल तेज की है, जबकि पाकिस्तान अमेरिका से नजदीकियां बढ़ा रहा है। इससे चीन असहज है, जो पाकिस्तान को अपना करीबी म ...और पढ़ें





ईरान मुद्दे पर चीन की चाल पाकिस्तान की अमेरिकी प्लानिंग को लग सकता है झटका (फाइल फोटो)


चीन ने मिडिल ईस्ट में शांति के लिए पांच सूत्रीय योजना पेश की।


पाकिस्तान अमेरिका से रिश्ते मजबूत कर चीन को असहज कर रहा है।


चीन-पाकिस्तान-अमेरिका के बीच संतुलन बनाना बड़ी कूटनीतिक चुनौती।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन ने शांति की पहल तेज कर दी है। वहीं पाकिस्तान की अमेरिका से बढ़ती नजदीकियों ने नई कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इस पूरी स्थिति में चीन, पाकिस्तान और अमेरिका के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।


चीन अब खुद को एक वैश्विक शांति स्थापित करने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध और अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव को रोकने के लिए उसने नई पहल शुरू की है। इसी बीच पाकिस्तान भी पश्चिम एशिया से जुड़े देशों के साथ अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार हाल ही में बीजिंग पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात चीन के विदेश मंत्री वांग यी से हुई। इसी दौरान चीन ने खाड़ी और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए पांच सूत्रीय योजना पेश की।


चीन की यह पहल ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है। इससे बीजिंग को असहजता महसूस हो रही है, क्योंकि पाकिस्तान को वह अपना सबसे करीबी सहयोगी मानता है।
चीन-पाकिस्तान-अमेरिका के बीच बढ़ती खींचतान

चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मजबूत आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक संबंध रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ भी अपने रिश्ते सुधारने की कोशिश की है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर की अमेरिकी यात्रा और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाकात ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अब दोनों देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।


विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच पाकिस्तान की यह नीति उसके लिए चुनौती बन सकती है। उसे यह तय करना होगा कि वह किस हद तक दोनों देशों के साथ संबंध बनाए रख सकता है।

दक्षिण एशिया में बदलते समीकरण

चीन को यह भी चिंता है कि अमेरिका, पाकिस्तान के साथ बढ़ते सहयोग के जरिए उसके प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। खासकर रक्षा और खुफिया सहयोग के मामलों में यह तनाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अफगानिस्तान-पाकिस्तान तनाव और बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं में आ रही रुकावटें भी चीन के लिए चिंता का कारण हैं। वहीं बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में बदलते राजनीतिक हालात भी बीजिंग के लिए नई चुनौती बन रहे हैं।


चीन के लिए अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान भविष्य में अमेरिका और चीन के बीच संतुलन बनाए रखेगा या किसी एक पक्ष की ओर झुक जाएगा। यही स्थिति आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।

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