पिता चाहते थे बेटा बने पुलिस वाला, लड़के ने चुना क्रिकेटर बनने का रास्ता; बैन होने के बाद भी बना शहर की पहचान

  पिता चाहते थे बेटा बने पुलिस वाला, लड़के ने चुना क्रिकेटर बनने का रास्ता; बैन होने के बाद भी बना शहर की पहचान


प्रिंस यादव ने अपने पिता की पुलिसकर्मी बनने की इच्छा के विपरीत क्रिकेटर बनने का सपना पूरा किया। नजफगढ़ के इस खिलाड़ी ने आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स क ...और पढ़ें




आईपीएल में धमाल मचा रहे हैं प्रिंस यादव


पिता चाहते थे पुलिसकर्मी बने, प्रिंस ने क्रिकेट चुना


उम्र संबंधी प्रतिबंध के बाद भी IPL में वापसी


लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए खेलते हुए किया प्रभावित


स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। आईपीएल ने भारत के कई खिलाड़ियों की किस्मत बदली है। इस लीग में चमकने के बाद उनके लिए टीम इंडिया के दरवाजे खुले हैं। कई खिलाड़ी इस लीग में खेलकर सेलेक्टर्स की नजरों में आ जाते हैं और ऐसा ही एक नाम है प्रिंस यादव जो इस सीजन लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ खेल रहे हैं। लेकिन प्रिंस के लिए यहां तक का सफर आसान नहीं रहा क्योंकि उनके पिता उन्हें पुलिस वाला बनाना चाहते थे।


नजफगढ़ स्थित रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के एएसआई राम निवास यादव अपने सबसे छोटे बेटे प्रिंस के भविष्य को लेकर चिंता में थे क्योंकि प्रिंस तो सिर्फ टेनिस बॉल टूर्नामेंट खेलने में ही लगे रहे थे। राम निवास ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए बताया कि उन्हें चिंता होती थी लेकिन प्रिंस ने उनसे साफ कह दिया था, "पापा आप मेरी चिंता करना छोड़ दीजिए। मैं अपने से कुछ कर लूंगा।"

कभी नहीं की थी गेंदबाजी

प्रिंस ने अपनी बात को पूरा किया और आज आईपीएल में अपनी यॉर्कर गेंदों से कमाल कर रहे हैं। राम निवास ने कहा, "हर पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित होता है और मैं भी था। 18 साल की उम्र तक उसने कभी लेदर बॉल से गेंदबाजी नहीं की थी। मैंने उसे जबरदस्ती दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की परीक्षा देने के लिए कहा और वह शारीरिक परीक्षा में पास भी हो गया, लेकिन लिखित परीक्षा की तैयारी उसने अच्छे से नहीं की क्योंकि उसका ध्यान कहीं और था।"
बेटे की जिद को किया पूरा

राम निवास जानते थे कि उनका बेटा क्रिकेटर बनना चाहते था और इस जिद के सामने वह हार गए आखिर में उन्होंने अपने बेटे का साथ दिया। उन्होंने कहा, "बेटे की जिद थी और हमें उसे पूरा करना था। एक एएसआई की सैलरी में कितना ही हो पाता है, लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने उसे अपने दम पर आगे बढ़ने दिया।

बेटे के नाम से जाना जाता है शहर

अब नजफगढ़ के दरियापुर स्थित खेड़ा डाबर गांव में उनके घर पर लोगों की भीड़ लगती है जो प्रिंस की आईपीएल में सफलता का जश्न मनाने आते हैं। उनके पिता ने बताया, "ईशान किशन के आउट होने के बाद हमारे कई पड़ोसी आए और बोले कि उसने इस देहात का नाम रोशन कर दिया। पहले लोग हमारे इलाके को इसलिए जानते थे क्योंकि पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल यहां चौधरी ब्रह्मप्रकाश आयुर्वेदिक संस्थान के उद्घाटन पर आई थीं। अब यह क्रिकेट के लिए मशहूर हो गया है।"


प्रिंस के पिता ने बताया कि उसे यहां तक पहुंचाने में उनके कोच अमित वशिष्ठ और भारत के लिए अंडर-19 विश्व कप जीतने वाले तेज गेंदबाज प्रदीप सांगवान ने अहम भूमिका निभाई। अमित ने उसे टेनिस बॉल से खेलते हुए देखा और अपनी एकेडमी में बुला लिया वहीं प्रदीप ने उसकी फिटनेस पर काम किया।

लगा था बैन

हालांकि, प्रिंस के करियर में ऐसा भी समय आया जब उन पर बैन लगा था। ये बैन उम्र संबंधी गड़बड़ियों के कारण लगा था और इस दौरान दिल्ली के कई क्रिकेटरों पर कार्रवाई हुई थी। ये कोविड के दौर की बात है और उनके पिता काफी परेशान हो गए थे। उन्होंने कहा, "मैं बहुत घबराया हुआ था और समझ नहीं पा रहा था कि वह इस दो साल के प्रतिबंध को कैसे संभालेगा। लेकिन उसने मुझे शांत रहने को कहा, घर पर जिम के उपकरण मंगवाए और रोज ट्रेनिंग करता रहा।"


प्रिंस ने सब संभाल लिया और आज वह लखनऊ के लिए आईपीएल खेलते हुए कमाल कर रहे हैं।

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