ईरान अपनी मांगों से एक इंच भी पीछे नहीं हटा', बोले न्यायपालिका प्रमुख एजेई

 ईरान अपनी मांगों से एक इंच भी पीछे नहीं हटा', बोले न्यायपालिका प्रमुख एजेई



ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी एजेई ने कहा कि देश अपनी मूल मांगों से पीछे नहीं हटा है। उन्होंने हालिया बाहरी हमलों के खिलाफ राष्ट्र की ...और पढ़ें






ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलामहुसैन मोहसेनी एजेई ने कहा है कि देश अपनी मूल मांगों से एक इंच भी पीछे नहीं हटा है और हालिया बाहरी हमलों के खिलाफ पूरा राष्ट्र एकजुट होकर खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि ईरान न कभी पीछे हटा है और न हटेगा।


ईरानी सरकारी मीडिया आईएसएनए के अनुसार, एजेई ने संघर्ष के दौरान अभूतपूर्व राष्ट्रीय एकता का दावा करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों ने एकजुट होकर हमलावरों का सामना किया। उनके मुताबिक, “पूरा ईरान एक साझा मोर्चे में बदल गया, जिसने लड़ाई लड़ी और देश की रक्षा की। ऐसा उदाहरण हमारे इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है।''
'तेहरान अपने रुख पर अडिग'

उन्होंने इस एकजुटता को ईश्वरीय कृपा से जोड़ते हुए कहा कि ईश्वर की मदद और शक्ति से देश ने वैश्विक ताकतों का मुकाबला किया। एजेई ने यह भी कहा कि युद्ध शुरू करने वाले पक्ष अब कूटनीतिक रास्ता तलाश रहे हैं, जबकि तेहरान अपने रुख पर अडिग है।

एजेई ने स्पष्ट किया कि संघर्ष और शांति से जुड़े सभी निर्णय सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली हुसैनी खामेनेई के अधिकार क्षेत्र में ही लिए जा रहे हैं और देश उन्हीं के निर्धारित ढांचे के तहत आगे बढ़ रहा है।

ईरानी राजदूत बोले, अमेरिकी-इजरायली हमले हमें झुकाने में नाकाम

रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली ने दावा किया है कि हालिया संघर्ष में अमेरिका और इजरायल अपने किसी भी सैन्य लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए और उनके हमले “पूरी तरह विफल'' रहे।


उन्होंने कहा कि ट्रंप युद्ध के दौरान जो हासिल नहीं कर पाए, वह अब बातचीत में भी हासिल नहीं कर पाएंगे। बातचीत का मतलब बराबरी और 'विन-विन' आधार पर समझौता होना चाहिए।

अल जजीरा के अनुसार, रूसी अखबार वेदोमोस्ती को दिए साक्षात्कार में जलाली ने कहा कि वा¨शगटन को कूटनीतिक मोर्चे पर भी कोई अतिरिक्त सफलता नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने दावा किया था कि कुछ ही दिनों में पूरे ईरान पर कब्जा कर लेंगे और शासन परिवर्तन कर देंगे। सवाल है कि वे किस लक्ष्य में सफल हुए? किसी में भी नहीं।''

जलाली के मुताबिक, संघर्ष के दौरान अमेरिका की मांगें भी बदलती रहीं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में “शासन परिवर्तन'' की बात करने वाला अमेरिका अंतत: केवल होर्मुज स्ट्रेट को खोलने तक सिमट गया। यह भी विफल रहा।

ईरानी राजदूत ने नौसैनिक नाकेबंदी को भी खारिज करते हुए कहा कि तेहरान की दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने ऐसे कदमों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि युद्ध ने ईरान की एकजुटता को कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया है।

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