झारखंड में अब घर-घर होगी स्कूल से छूटे बच्चों की तलाश, दोबारा नामांकन का लक्ष्य

 झारखंड में अब घर-घर होगी स्कूल से छूटे बच्चों की तलाश, दोबारा नामांकन का लक्ष्य


झारखंड सरकार ने 'स्कूल रुआर 2026' अभियान शुरू किया है, जिसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। ...और पढ़ें





आदिल हसन, रांची। राज्य में एक भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे, इस लक्ष्य के साथ झारखंड सरकार ने स्कूल रुआर 2026 अभियान शुरू कर दिया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने सभी जिलों को सख्त निर्देश जारी करते हुए अभियान को मिशन मोड में चलाने को कहा है।


अभियान का मुख्य केंद्र छूटे हुए और पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उनका दोबारा नामांकन कराने तथा विद्यालयों में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए शैक्षणिक सत्र में किसी भी बच्चे का नाम ड्रॉपबॉक्स में न जाए, इसके लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

प्राथमिक विद्यालय में अनिवार्य रूप से नामांकन कराया जाए

विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि आंगनबाड़ी केंद्रों से छह वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों का नजदीकी प्राथमिक विद्यालय में अनिवार्य रूप से नामांकन कराया जाए। साथ ही विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा पढ़ाई से जोड़ा जाए और पिछले वर्ष ड्रॉपबॉक्स में दर्ज बच्चों को भी चिन्हित कर स्कूल से जोड़ा जाए।


जिन स्कूलों में बच्चे कम वहां ज्यादा जोर

इसके साथ ही नव-नामांकित बच्चों की उपस्थिति की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया है। जिन विद्यालयों में उपस्थिति दर 30 से 40 प्रतिशत के बीच है, वहां विशेष अभियान चलाकर स्थिति में सुधार लाने को कहा गया है। बीआरपी, सीआरपी और शिक्षकों को इस कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी दी गई है।

70 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य, डेटा अपडेट करना जरूरी

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक विद्यालय में औसत उपस्थिति कम से कम 70 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही छात्रों के आंकड़ों को संबंधित पोर्टल पर नियमित और पूर्ण रूप से अद्यतन करना अनिवार्य किया गया है।


अभियान की निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष दल का गठन किया जाएगा, जिसमें संबंधित अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को अभियान के क्रियान्वयन और अनुश्रवण की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है।


सरकार ने सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अभियान को गंभीरता से लागू करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे और अभियान के सभी लक्ष्य समय पर पूरे किए जा सकें।

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