रिम्स में नियुक्तियों पर भारी विवाद: सीनियर रेजिडेंट चयन में नियमों की अनदेखी का आरोप, परिणाम पर लगी रोक

 रिम्स में नियुक्तियों पर भारी विवाद: सीनियर रेजिडेंट चयन में नियमों की अनदेखी का आरोप, परिणाम पर लगी रोक


रांची के रिम्स में सीनियर रेजिडेंट चयन प्रक्रिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों ने संस्थान के 20% टॉपर अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने के नियम क ...और पढ़ें




रिम्स में नियुक्तियों पर भारी विवाद


सीनियर रेजिडेंट चयन में 20% टॉपर नियम उल्लंघन का आरोप।


बाहरी अभ्यर्थियों को प्राथमिकता, रिम्स के टॉपरों को दरकिनार।


विवाद के बाद रिम्स ने अंतिम परिणाम प्रकाशन रोका।

संवाददाता, रांची। राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में सीनियर रेजिडेंट (एसआर) चयन प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। छात्रों ने संस्थान के निर्धारित 20 प्रतिशत टॉपर अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने के नियम के उल्लंघन का आरोप लगाया है।


संस्थान के आदेश के अनुसार सत्र 2022-25 के एमडी-एमएस (पीजी) परीक्षा में विभागवार शीर्ष 20 प्रतिशत विद्यार्थियों को सीनियर रेजिडेंट के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान है।

हालांकि छात्रों का कहना है कि हाल ही में हुए साक्षात्कार के बाद इस नियम की अनदेखी कर बाहरी अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जबकि रिम्स के टॉपर छात्रों को दरकिनार कर दिया गया।
चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी

छात्रों ने विशेष रूप से फिजियोलॉजी, क्रिटिकल केयर और एनेस्थीसिया विभाग में अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि आंतरिक स्तर पर मिली जानकारी से चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और नियमों के उल्लंघन के संकेत मिले हैं।
विवाद बढ़ने के बाद रिम्स प्रबंधन ने फिलहाल अंतिम परिणाम के प्रकाशन पर रोक लगा दी है। हालांकि संस्थान की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन बढ़ते विरोध को देखते हुए जांच की संभावना जताई जा रही है।


चयन को लेकर भी पक्षपात का आरोप

इसी बीच संस्थान में मनोचिकित्सा विभाग में सहायक प्राध्यापक के चयन को लेकर भी पक्षपात के आरोप सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार 13 फरवरी 2026 को आयोजित साक्षात्कार में कांके स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान से दो विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया था। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में शामिल विशेषज्ञों का एक अभ्यर्थी के परिवार से निकट संबंध था, जिसके बावजूद उन्हें चयनित कर लिया गया।

चार अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार में भाग लिया

छात्राें के अनुसार चार अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार में भाग लिया, जिसमें एक अभ्यर्थी के चयन को लेकर पक्षपात और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए जा रहे हैं। दोनों मामलों ने संस्थान की चयन प्रक्रिया और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


अब अभ्यर्थियों की नजरें जांच और अंतिम परिणाम पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए गए, तो चयन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर बदलाव और जवाबदेही तय होने की संभावना है।

Share this

Related Posts

Previous
Next Post »