सहारा रेगिस्तान में उठा महा तूफान, 1500 किलोमीटर लंबी धूल की दीवार ने बढ़ाई चिंता

 सहारा रेगिस्तान में उठा महा तूफान, 1500 किलोमीटर लंबी धूल की दीवार ने बढ़ाई चिंता


उत्तरी अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में 'हबूब' नामक 1500 किलोमीटर चौड़ा भीषण धूल का तूफान उठा है, जो अंतरिक्ष से भी दिखाई दे रहा है। ...और पढ़ें





सहारा रेगिस्तान में 1500 किलोमीटर लंबा विशाल धूल का तूफान(फोटो: रॉयटर्स)


सहारा में 1500 किमी चौड़ा 'हबूब' धूल तूफान उठा


यह तूफान उत्तरी अफ्रीका से यूरोप तक फैल रहा है


वायु गुणवत्ता, स्वास्थ्य और सौर ऊर्जा को प्रभावित करता है


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान में एक भयंकर धूल का तूफान उठा है, जो 1500 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। यह विशाल दीवार जैसा धूल का तूफान अंतरिक्ष से भी साफ दिखाई दे रहा है।


मौसम वैज्ञानिकों ने इसे हबूब नाम दिया है। यह शब्द अरबी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ है विस्फोटक हवा या तेज हवा होता है। मजबूत हवाओं के कारण रेगिस्तान की सतह से लाखों टन रेत और खनिज कण ऊपर उठ रहे हैं और वायुमंडल में फैल रहे हैं।
हालिया सैटेलाइट तस्वीरों में देखा गया है कि सहारा की धूल पूरे उत्तरी अफ्रीका के साथ-साथ दूर-दूर तक पहुंच रही है। यह तूफान न केवल रेगिस्तानी इलाकों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इससे वायुमंडल अंधकारमय हो गया है और दृश्यता बेहद कम हो गई है।

धूल तूफान का दायरा और प्रभाव

यह 1500 किलोमीटर चौड़ा धूल तूफान कई देशों से भी बड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, तूफान की मुख्य दीवार रेगिस्तान के आसपास रहती है, लेकिन सबसे महीन धूल के कण हजारों किलोमीटर दूर तक जा सकते हैं। हाल के हफ्तों में सहारा की धूल स्पेन, फ्रांस, ब्रिटेन तक पहुंच गई थी जो अटलांटिक महासागर के ऊपर भी फैल गई।


कुछ मामलों में यह धूल बारिश के साथ मिलकर खूनी बारिश का रूप ले लेती है, जिसमें बारिश का पानी लाल-भूरा रंग का हो जाता है। इससे वातावरण में धूल के कणों की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे सांस की बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है।

क्या है इसका मतलब?

ये धूल तूफान सिर्फ एक नाटकीय मौसमी घटना नहीं हैं। वैज्ञानिक इन्हें इसलिए ट्रैक करते हैं क्योंकि ये एयर क्वालिटी, मौसम में बदलाव, बादल निर्माण और वैश्विक जलवायु पैटर्न को प्रभावित करते हैं। नासा के हालिया अध्ययन में पाया गया है कि भारी सहारा धूल सौर ऊर्जा पैनलों पर पहुंचने वाली धूप को काफी हद तक कम कर देती है, जिससे सोलर पावर प्रभावित होता है।


इसके अलावा, धूल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को भी पोषण देती है। अटलांटिक में यह धूल पोषक तत्व प्रदान करती है, जो प्लैंकटन के विकास में मदद करती है। लेकिन मानवीय दृष्टि से यह बच्चों, बुजुर्गों और श्वास रोगियों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।

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