समझौता कर लिया', राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला तो रविशंकर प्रसाद बोले- मैं याद दिलाना चाहता हूं...
लोकसभा में राहुल गांधी और रविशंकर प्रसाद के बीच तीखी बहस हुई। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर 'समझौता' करने का आरोप लगाया, जिस पर रविशंकर प्रसाद न ...और पढ़ें

संसद में राहुल गांधी और रविशंकर प्रसाद।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर 'समझौता' करने का आरोप लगाया।
रविशंकर प्रसाद ने कहा, प्रधानमंत्री कभी समझौता नहीं कर सकते।
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान तीखी नोंकझोंक हुई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दूसरे के तीसरे दिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझौता कर लिया है, इस पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री कभी समझौता नहीं कर सकते।
दरअसल, संसद में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, "यहां चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया और स्पीकर की भूमिका के बारे में है। कई बार मेरा नाम लिया गया और मेरे बारे में अजीब बातें की गईं। यह सदन भारत के लोगों की अभिव्यक्ति है। यह किसी पार्टी नहीं बल्कि पूरे देश को रिप्रजेंट करता है। हर जब भी मैं बोलने को उठता हूं तो मुझे बोलने से रोक दिया जाता है। पिछली बार मैंने पीएम के समझौतों को लेकर एक सवाल उठाया था।"
रविशंकर प्रसाद ने किया पलटवार
इस पर भाजपा सांसद ने पलटवार करते हुए कहा, "मैं विपक्ष के नेता को याद दिलाना चाहूंगा कि भारत के प्रधानमंत्री से कभी समझौता नहीं किया जा सकता।" लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर बोलते हुए रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर हमला करने के लिए संसद में भगवा पार्टी द्वारा विरोध के तौर पर रखे गए नियमों का हवाला दिया और कहा कि जब यूपीए सत्ता में थी तब विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को बोलने नहीं दिया गया था।
'अपने शब्दों को ध्यान से रखें'
उन्होंने कहा कि जब यूपीए 1 के दौरान लोकसभा में 'सवाल के लिए केस' लाया गया था तो विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी को उस समय के स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने बोलने नहीं दिया था और विरोध के तौर पर भाजपा ने वॉकआउट कर दिया था और स्पीकर के जोर देने के बाद भी वे वापस नहीं आए क्योंकि वे सदन के व्यवहार से सहमत नहीं थे।
इससे पहले, रविशंकर प्रसाद ने पार्लियामेंट्री प्रोसीजर का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को अपने शब्दों को ध्यान से रखना चाहिए, खासकर नेशनल सिक्योरिटी के मुद्दों पर।