ईंधन लेकर भारत आ रहे दो और जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे, सुरक्षा देने के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात

 ईंधन लेकर भारत आ रहे दो और जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे, सुरक्षा देने के लिए नौसेना के युद्धपोत तैनात



मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, भारत के दो और व्यापारिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे हैं। भारतीय नौसेना इन जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैय ...और पढ़ें




दो और भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरे।


भारतीय नौसेना जहाजों की सुरक्षा के लिए तैयार खड़ी है।


ईरान ने 26 जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के बाद से मिडिल ईस्ट में भारी तनाव है। इसके चलते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया। हालांकि ईरान ने कुछ देशों के जहाजों को निकलने की अनुमति दी है। इस बीच भारत के दो और जहाज होर्मुज से गुजर रहे हैं।


न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पाद ले जा रहे दो और व्यापारिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे हैं। उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना के युद्धपोत तैयार स्थिति में हैं। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही और जहाजों के भी उनके पीछे आने की उम्मीद है।


एलपीजी लेकर आ रहे पांच जहाज

शिप ट्रैकर वेबसाइटों के अनुसार भारतीय झंडे वाले पांच एलपीजी कैरियल भारत आ रहे हैं। ये जहाज दुबई-रास अल खैमाह के उत्तर में होर्मुज स्ट्रेट के ठीक दक्षिण-पश्चिम में लंगर डाले खड़े हैं। ये जहाज एक साथ जमा हो रहे हैं, ताकि वे होर्मुज से बाहर निकल सकें। इन जहाजों पर 1.7 लाख टन से ज्यादा एलपीजी लदी हुई है।


शुक्रवार (27 मार्च, 2026) को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे तीन जहाजों को वापस भेज दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह रास्ता उन जहाजों के लिए बंद है जो उनके दुश्मनों से जुड़े बंदरगाहों से आ-जा रहे हैं।

ईरान ने 26 जहाजों को गुजरने की दी मंजूरी

गार्ड्स ने सेपाह न्यूज वेबसाइट पर कहा, "आज सुबह अमेरिका के भ्रष्ट राष्ट्रपति के इस झूठे दावे के बाद कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है, अलग-अलग देशों के तीन कंटेनर जहाजों को... IRGC नौसेना की चेतावनी के बाद वापस भेज दिया गया।"


हाल ही में ईरान ने कुल 26 जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की मंजूरी दी है। ये जहाज देश के तट के पास स्थित लारक द्वीप के चारों ओर बने एक रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से ज्यादातर जहाजों का मालिकाना हक यूनान और चीन के पास था, जबकि कुछ जहाज भारत, पाकिस्तान और सीरिया के भी थे।

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