क्रूड ऑयल की किल्लत, क्या रूसी तेल भारत को झटके से बचाने के लिए काफी होगा?

 क्रूड ऑयल की किल्लत, क्या रूसी तेल भारत को झटके से बचाने के लिए काफी होगा?



अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की सलाह दी है, जबकि मिडिल ईस्ट में जंग से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। ...और पढ़ें








डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल की ईरान के साथ चल रही जंग के बाद मिडिल ईस्ट में कोहराम मचा हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस बीच यूएस ने भारत को रूस से तेल खरीदने की बात कही है।


एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक टेम्परेरी बचाव का रास्ता है और मार्केट में उछाल से हुए आर्थिक झटके पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। अमेरिका की भारत को यह छूट 5 मार्च से 4 अप्रैल तक लागू रहेगी।

भारतीय रिफाइनर को रूस से ऐसे कार्गो लेने की इजाजत है जो नए बैन लगने से पहले ही लोड हो चुके थे और रास्ते थे। इससे भारत के रूस से तेल इंपोर्ट पर लगी 25% टैरिफ पेनल्टी से जुड़ी पाबंदियों में ढील मिलेगी।

आंकड़े दूसरी कहानी बयां कर रहे

पहली नजर में यह कदम भारत के लिए राहत की बात लगती है। लेकिन आंकड़े इससे भी कठोर कहानी बयां करते हैं। इकोनॉमिस्ट का कहना है कि छूट के तहत जो रूसी कार्गो फंसे हुए हैं वे भारत की बड़ी एनर्जी जरूरत का बस एक छोटा सा हिस्सा हैं।


रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिफाइनर कंपनियों ने 10 मिलियन बैरल से ज्यादा रूसी क्रूड ऑयल खरीदा है। लगभग 15 मिलियन बैरल भारत के समुद्री इलाके में हैं और 7 मिलियन बैरल सिंगापुर के पास हैं, जबकि भूमध्य सागर और स्वेज नहर से गुजरने वाले टैंकर भी भारतीय बंदरगाहों की ओर जा रहे हैं।


अगर यह सप्लाई भी पूरी हो जाती है तो भी यह भारत की भरपाई नहीं कर सकती। एनालिस्ट्स का कहना है, "जो क्रूड ऑयल उपलब्ध है वह भारत की क्रूड ऑयल की मांग का लगभग चार दिन के बराबर है। यहह मददगार तो है, लेकिन गेम चेंजर नहीं है।"

भारत में कितने क्रूड ऑयल का होता है इस्तेमाल?

भारत हर दिन लगभग 5 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल इस्तेमाल करता है, जिसका मतलब है कि फंसे हुए कार्गो का तेल उतनी ही तेजी से गायब हो सकता है जितनी तेजी से वह आता है। इस बीच, असली झटका वैश्विक बाजार में दिख रहा है।


पिछले हफ्ते तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग में लंबे समय तक रुकावट की आशंका थी। सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमत कुछ समय के लिए 119.46 डॉलर प्रति डॉलर तक पहुंच गई। यह 2022 की शुरुआत के बाद से सबसे बड़ी उछाल थी।

85 प्रतिशत क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है भारत

भारत अपना लगभग 85% क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है, उसके लिए खतरा सप्लाई तक पहुंच से कम और इकॉनमी में कीमतों के झटके से ज्यादा है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी क्रूड ऑयल को भारत ने जमकर खरीदा और एक समय तो यह भारत के इम्पोर्ट का लगभग 35% सप्लाई करता था।


फरवरी में रूस ने भारत के हर दिन के 5 मिलियन बैरल के इम्पोर्ट का लगभग 20% सप्लाई किया, जबकि दिसंबर 2025 के ऑफिशियल डेटा के मुताबिक यह हिस्सा 25% के करीब था। इसका मतलब है कि यह छूट एक लॉजिस्टिक रुकावट को दूर करती है, लेकिन भारत को एक बड़े तूफान से बचाने में ज्यादा मदद नहीं करती।


रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च से पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमतों में हर 10% की बढ़ोतरी से महंगाई लगभग 30 बेसिस पॉइंट्स बढ़ सकती है और जीडीपी ग्रोथ में लगभग 15 बेसिस पॉइंट्स की कमी आ सकती है।

भारत को मिल सकती है कुछ दिनों की राहत

एक हफ्ते में तेल की कीमत पहले ही 20% से ज्यादा बढ़ गई है। इसलिए, व्यापक आर्थिक प्रभाव फंसे हुए बैरल से मिलने वाली टेम्पररी राहत को कम कर सकता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो इस छूट से भारत को कुछ दिनों की राहत मिल सकती है।

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