स्टडी में पाया गया कि अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स पुरुषों में सबफर्टिलिटी का कारण बन सकते हैं। ...और पढ़ें

खान-पान से प्रजनन क्षमता पर प्रभाव (Picture Courtesy: Freepik)
पुरुषों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से सबफर्टिलिटी का खतरा बढ़ा
महिलाओं में भ्रूण के शुरुआती विकास पर नकारात्मक प्रभाव
नीदरलैंड के शोध में आधुनिक खान-पान और फर्टिलिटी का संबंध
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स, जैसे- पैकेट बंद स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और रेडी-टू-ईट मील हमारी थाली का अहम हिस्सा बन चुके हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वाद का यह चस्का केवल मोटापे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुरुषों की फर्टिलिटी को भी सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है? जी हां, हाल ही में हुए एक शोध ने इस विषय पर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आइए जानें क्या कहती है यह स्टडी।
शोध के आंकड़े क्या कहते हैं?
नीदरलैंड की रिसर्चर डॉ. रोमी गैलार्ड के नेतृत्व में एक स्टडी की गई, जिसमें आधुनिक खान-पान और फर्टिलिटी के बीच के संबंधों को गहराई से परखा गया। यह शोध साल 2017 से 2021 के बीच किया गया। इस अध्ययन की खास बात यह थी कि इसमें 831 महिलाओं और 651 पुरुषों को शामिल किया गया, ताकि यह समझा जा सके कि गर्भधारण से पहले माता-पिता की डाइट का आने वाले बच्चे और फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है।
अध्ययन में पाया गया कि औसतन महिलाओं के कुल खान-पान में 22 प्रतिशत हिस्सा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का था, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादा यानी 25 प्रतिशत पाया गया।
पुरुषों के लिए बढ़ता जोखिम
इस रिसर्च के सबसे चिंताजनक परिणाम पुरुषों से जुड़े हुए थे। आंकड़ों से पता चला कि जो पुरुष ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खा रहे थे, उनमें सबफर्टिलिटी का जोखिम काफी बढ़ा हुआ पाया गया। सबफर्टिलिटी का मतलब है कि पुरुष की फर्टिलिटी सामान्य से कम हो जाती है, जिसके कारण पार्टनर को गर्भधारण करने में सामान्य से काफी ज्यादा समय लगता है। यानी खराब खान-पान सीधे तौर पर पुरुषों के पिता बनने की
महिलाओं और भ्रूण के विकास पर प्रभाव
हालांकि, अध्ययन में यह देखा गया कि महिलाओं के अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से गर्भधारण की संभावना पर कोई सीधा नकारात्मक असर नहीं पड़ा, लेकिन इसका प्रभाव होने वाले बच्चे के शुरुआती विकास पर जरूर दिखा। शोध के अनुसार, जो महिलाएं इस तरह का खाना ज्यादा मात्रा में खा रही थीं, उनके भ्रूण का शुरुआती विकास प्रभावित हुआ। खासतौर से योल्क सैक का आकार सामान्य से छोटा पाया गया। बता दें कि योल्क सैक भ्रूण के विकास के लिए बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह शुरुआती चरणों में उसे पोषण देता है।