सावधान! Anthropic ने जारी की लिस्ट, क्या आपकी नौकरी पर भी है AI का खतरा?
AI की वजह से नौकरी जाने की चिंता इस वक्त काफी बड़ी है। इसी बीच Anthropic ने एक नया सिस्टम बनाया है जो ये स्टडी करता है कि अलग-अलग नौकरियां आर्टिफिशियल ...और पढ़ें

Anthropic ने AI के इंपैक्ट को मेजर करने के लिए नई स्टडी की है। Photo- AI.
टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले सालों में ऑफिस की नौकरियों को बदल सकता है, लेकिन उस असर को जल्दी मापना इकोनॉमिस्ट के लिए एक चुनौती रहा है। Anthropic ने कन्फर्म किया है कि वे अभी इन संभावित बदलावों को लेबर मार्केट में दिखने से पहले ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। फर्म ने कहा कि उन्होंने एक नया सिस्टम बनाया है जो ये स्टडी करता है कि अलग-अलग नौकरियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा किए जा सकने वाले कामों पर कितनी निर्भर करती हैं। इसके अलावा, कंपनी ने कहा उनको उम्मीद है कि जॉब डिस्क्रिप्शन और AI टूल्स के असल दुनिया में इस्तेमाल, दोनों को एनालाइज करके वह डिसरप्शन का जल्दी सिग्नल दे पाएगी।
Anthropic में इकोनॉमिस्ट मैक्सिम मैसेनकॉफ़ और पीटर मैकक्रॉरी के एक नए रिसर्च पेपर के मुताबिक, ये सिस्टम एक इंडेक्स की तरह काम करता है जो मेजर करता है कि बड़े लैंग्वेज मॉडल द्वारा अलग-अलग काम ऑटोमेशन के कितने संपर्क में हैं। इंडेक्स उन कामों को करीब से देखता है जिनसे कोई नौकरी बनती है। अगर उन कामों का एक बड़ा हिस्सा AI द्वारा हैंडल किया जा सकता है और पहले से ही AI टूल्स का इस्तेमाल करके किया जा रहा है, तो उस काम को ऑटोमेशन के ज्यादा संपर्क में माना जाता है।
कंपनी के एनालिसिस से पता चलता है कि कुछ टेक्नोलॉजी-फोकस्ड रोल्स को सबसे ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोग्रामर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले कामों में से हैं, क्योंकि AI सिस्टम उनके आम कामों में से लगभग तीन-चौथाई काम कर सकते हैं। प्रोग्रामर के अलावा, कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव, डेटा एंट्री वर्कर और मेडिकल रिकॉर्ड स्पेशलिस्ट भी एक्सपोजर लिस्ट में ऊपर दिखते हैं।
साथ ही, कई काम अभी भी कम असुरक्षित हैं। जो नौकरियां ज्यादातर फिजिकल काम और इंसानी मौजूदगी पर निर्भर करती हैं, वे ऑटोमेशन से ज्यादा सुरक्षित दिखती हैं। इनमें कुक, लाइफगार्ड और डिशवॉशर जैसे रोल शामिल हैं।
हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से नौकरियों के जाने की चिंता बढ़ रही है, लेकिन स्टडी इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं दिखाती है कि AI की वजह से होने वाली दिक्कत शुरू हो गई है। स्टडी बताती है कि ChatGPT के आने के बाद से AI-एक्सपोज्ड और AI-रेजिस्टेंट नौकरियों के बीच बेरोजगारी का अंतर थोड़ा बदला है।
हालांकि, डेटा हायरिंग ट्रेंड में एक छोटे से बदलाव की ओर इशारा करता है। रिसर्चर्स ने ये भी देखा कि युवा वर्कर्स, खासकर 22 से 25 साल के लोगों की भर्ती धीमी हो रही है। उनके मुताबिक, ये ट्रेंड आमतौर पर उन कामों में देखा जाता है जहां AI टूल्स का इस्तेमाल उनकी जगह भरने के लिए किया जा सकता है।