ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में भारत की ओर से शामिल हुईं नामग्या खंपा कौन हैं? आइए जानते हैं

 ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में भारत की ओर से शामिल हुईं नामग्या खंपा कौन हैं? आइए जानते हैं



ट्रंप के गाजा 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की कार्यवाहक प्रमुख नामग्या खंपा ने किया। खंपा क ...और पढ़ें





भारत का प्रतिनिधित्व नामग्या खंपा ने किया


2000 बैच की अनुभवी आईएफएस अधिकारी हैं खंपा


चीन, संयुक्त राष्ट्र, केन्या में दो दशक का अनुभव


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के गाजा ' बोर्ड ऑफ पीस ' में भारत ने ऑब्जर्वर देश के तौर पर भाग लिया। भारत का प्रतिनिधित्व वाशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास की कार्यवाहक प्रमुख नामग्या खंपा ने किया। आइए जानते हैं कौन हैं नामग्या सी खम्पा, जो अमेरिका में भारतीय दूतावास के उपराजदूत के तौर पर तैनात हैं।

कौन हैं नामग्या खंपा?

दरअसल, ट्रंप के गाजा 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली मीटिंग की पहली बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली नामग्या सी खम्पा 2000 बैच की अनुभवी आईएफएस अधिकारी हैं। नामग्या खम्पा वर्तमान में राजदूत की अनुपस्थिति में अमेरिका में भारतीय मिशन का नेतृत्व कर रही हैं।

नामग्या सी खम्पा का अनुभव

आईएफएस अधिकारी नामग्या खम्पा को चीन, संयुक्त राष्ट्र और केन्या जैसे महत्वपूर्ण मोर्चों पर दो दशकों से अधिक का राजनयिक अनुभव है। खम्पा ने चीन में भारत के राजनयिक मिशन में दो बार अपनी सेवाएं दीं, पहली बार 2002 से 2006 तक और फिर 2013 से 2016 तक। इसके अलावा खम्पा ने 2009 से 2013 तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में भी काम किया है।

कहां कहां दे चुकी हैं सेवाएं?

2009 से 2013 तक न्यूयॉर्क में सेवा के दौरान आईएफएस अधिकारी नामग्या खम्पा को 2011 से 2013 तक संयुक्त राष्ट्र की प्रशासनिक और बजटीय मामलों पर सलाहकार समिति (ACABQ) के सदस्य के रूप में चुना गया था। इसके बाद उन्होंने नेपाल के काठमांडू में मिशन की उप प्रमुख के रूप में भी कार्य किया।


आईएफएस अधिकारी नामग्या खम्पा ने केन्या में भारत की उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया है। केन्या में खम्पा के पास भारत-केन्या द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्र में व्यापार और विकास को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी थी। इस दौरान, उन्हें सोमालिया गणराज्य में भारत की राजदूत के रूप में भी मान्यता प्राप्त थी।


जहां वे भारत-केन्या द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्र में व्यापार और विकास को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार थीं। इस दौरान, उन्हें सोमालिया गणराज्य में भारत की राजदूत के रूप में भी मान्यता प्राप्त थी।

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