पब्लिसिटी के लिए ये सब मत करिए', CJI सूर्यकांत ने किस मामले में लगाई याचिकाकर्ता को फटकार?

 पब्लिसिटी के लिए ये सब मत करिए', CJI सूर्यकांत ने किस मामले में लगाई याचिकाकर्ता को फटकार?



सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने न्यायिक सुधारों की मांग वाली एक याचिका खारिज कर दी। उन्होंने इसे 'प्रचार के लिए' दाखिल बताया और कहा कि ऐसे मामलों म ...और पढ़ें






याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि हर अदालत हर केस को एक साल के अंदर फैसला सुना दे। (फोटो सोर्स- पीटीआई)


CJI सूर्यकांत ने न्यायिक सुधार याचिका को खारिज किया।


याचिका को 'प्रचार के लिए' दाखिल बताया गया।


सुधार सुझावों को पत्र द्वारा भेजने की सलाह दी।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने एक याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इस याचिका में न्यायिक सुधारों के लिए एक कमिटी बनाने, हर केस को 12 महीने में निपटाने और कुछ खास तरह के मामलों की जांच जैसी मांगें की गई थीं।


सीजेआई ने इसे साफ-साफ 'पब्लिसिटी-सीकिंग' यानी प्रचार के लिए दाखिल की गई याचिका बताया और कहा कि ऐसे मामलों में अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाना चाहिए। उन्होंने याचिकाकर्ता से सख्त लहजे में कहा, "हम यहां किसी को 'न्यायिक सुधार' के नाम पर नहीं आने देंगे। अगर सुधार की बात है तो पहले लिखित में डालिए... जो भी है, लिखकर भेजिए। फिर मैं देखूंगा कि वो संभव है या नहीं। हम सब यहां हैं, हम खुद करेंगे।"


'चिट्ठी भेजिए, याचिका की क्या जरूरत'

चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि अगर देश में बदलाव चाहिए तो ऐसी याचिकाएं दाखिल करने की जरूरत नहीं है। बस एक चिट्ठी लिखिए और मुझे भेज दीजिए। उन्होंने जोर देकर कहा, "देश में बदलाव लाना है? ऐसी याचिका फाइल करने की जरूरत नहीं... बस चिट्ठी लिखकर भेज दीजिए।"


उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि लोग कैमरों के सामने बोलने के लिए ही ऐसी याचिकाएं दाखिल करते हैं। सीजेआई सूर्यकांत बोले, "कैमरामैन के सामने बोलने के लिए ऐसी याचिकाएं मत फाइल कीजिए।"

कोर्ट ने आदेश में साफ लिखा कि याचिका में कई असंबंधित मुद्दों को गलत तरीके से जोड़ा गया था। अगर याचिकाकर्ता चाहें तो प्रशासनिक पहलुओं पर सुधार के सुझाव पत्र के जरिए सीधे चीफ जस्टिस को भेज सकते हैं। कोर्ट ने कहा, "ऐसे किसी भी सुझाव का हमेशा स्वागत है।"

एक साल में हर केस निपटाने की मांग पर तीखा जवाब

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि हर अदालत हर केस को एक साल के अंदर फैसला सुना दे। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने तंज कसा और पूछा, "आप कह रहे हैं कि हर कोर्ट एक साल में फैसला करे? ऐसी कितनी कोर्ट्स चाहिए आपको?"

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