सबसे पहले कहां मनाया गया नया साल, क्यों सभी देश एकसाथ सेलिब्रेट नहीं कर पाते ये पल? समझें टाइम जोन का 'रहस्य'

 सबसे पहले कहां मनाया गया नया साल, क्यों सभी देश एकसाथ सेलिब्रेट नहीं कर पाते ये पल? समझें टाइम जोन का 'रहस्य'



दुनिया में सबसे पहले नए साल का जश्न प्रशांत महासागर के किरिमाती द्वीप पर मनाया जाता है, जिसे क्रिसमस आइलैंड भी कहते हैं। यह UTC+14 टाइम जोन में आता है ...और पढ़ें



पृथ्वी 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है, यानी हर 15 डिग्री देशांतर पर एक घंटे का फर्क पड़ता है।



किरिमाती द्वीप पर सबसे पहले नए साल का आगमन होता है


यह UTC+14 टाइम जोन में स्थित है


पृथ्वी के घूमने और टाइम जोन से समय में अंतर आता है


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया में नए साल का जश्न शुरू होने से पहले ही हर किसी के मन में एक ही सवाल घूमता है कि आखिर सबसे पहले 2026 का स्वागत कहां होता है?

जवाब है, प्रशांत महासागर के एक छोटे से द्वीप किरिमाती में दुनिया में सबसे पहले नए साल की आमद होती है। यानी जब यहां पटाखों की गूंज और खुशियां गूंजती हैं, तो बाकी दुनिया को नए साल का इंतजार होता है। यह जगह इतनी अनोखी है कि यहां नया साल बाकी दुनिया से घंटों पहले आ जाता है।


किरिमाती को क्रिसमस आइलैंड भी कहते हैं। यह द्वीप हवाई के दक्षिण और ऑस्ट्रेलिया के उत्तर-पूर्व में स्थित है, जहां कोरल रीफ्स की वजह से फैला हुआ इलाका लगभग 4,000 किलोमीटर तक पूर्व से पश्चिम फैला है। यहां की आबादी ज्यादा नहीं है।





किरिबाती 1979 में ब्रिटेन से आजाद हुआ था और आज यहां करीब 1 लाख 16 हजार लोग रहते हैं। यह देश कई द्वीपों से मिलकर बना है, जो प्रशांत महासागर में बिखरे पड़े हैं। दिलचस्प बात यह है कि किरिमाती हवाई के लगभग ठीक दक्षिण में है, लेकिन फिर भी यहां नया साल एक पूरे दिन पहले मनाया जाता है।


इसकी वजह टाइम जोन का फर्क है । दुनिया को समय के हिसाब से बांटा गया है और किरिमाती UTC+14 टाइम जोन में आता है, जो दुनिया का सबसे आगे वाला टाइम जोन है। जब यहां आधी रात होती है, तो बाकी जगहों पर अभी पुराना साल ही चल रहा होता है।

क्या टाइम जोन का 'रहस्य'?

नए साल का जश्न अलग-अलग देशों में अलग समय पर क्यों मनाया जाता है? इसका सीधा जवाब पृथ्वी की घूमने की रफ्तार और लंबाई-चौड़ाई की लाइनें है। पृथ्वी 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है, यानी हर 15 डिग्री देशांतर पर एक घंटे का फर्क पड़ता है। और हर एक डिग्री देशांतर पर समय में चार मिनट का अंतर आता है, क्योंकि पूरे 360 डिग्री को 1,440 मिनट (24 घंटे) में बांटा जाता है।







यह सिस्टम इंटरनेशनल डेट लाइन से जुड़ा है, जो प्रशांत महासागर से गुजरती है। इस लाइन के पूर्व में समय आगे होता है, जबकि पश्चिम में पीछे। नतीजा यह कि कुछ देश नए साल में पहले कदम रखते हैं, जबकि दूसरे घंटों बाद। मिसाल के तौर पर, किरिमाती में जब 2026 शुरू होता है, तो न्यूयॉर्क में अभी 31 दिसंबर की सुबह होती है।

दुनिया भर में नए साल का अंतर

उदाहरण देखें तो किरिबाती के बाद समोआ और टोंगा जैसे देश नए साल में एंटर करते हैं, जो UTC+13 में हैं। फिर न्यूजीलैंड आता है, जहां ऑकलैंड में जश्न शुरू होता है। ऑस्ट्रेलिया में सिडनी का फेमस आतिशबाजी शो इसके बाद आता है, जब यहां आधी रात होती है।


एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में नया साल इसके कुछ घंटे बाद मनाया जाता है। भारत में जब नया साल आता है, तो किरिमाती में पहले ही दोपहर हो चुकी होती है।

यूरोप और अमेरिका तो और पीछे हैं। लंदन में जब घड़ी आधी रात बजाती है, तो किरिबाती में अगला दिन शुरू हो चुका होता है। आखिर में अमेरिकन समोआ या हवाई जैसे इलाके नए साल का स्वागत करते हैं, जहां समय UTC-11 तक जाता है।

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