इराक में फ्रांस के दूतावास का काला इतिहास, यहूदी परिवार के घर पर कब्जे का आरोप; 200 करोड़ का मुकदमा दर्ज

 इराक में फ्रांस के दूतावास का काला इतिहास, यहूदी परिवार के घर पर कब्जे का आरोप; 200 करोड़ का मुकदमा दर्ज


इराक की राजधानी बगदाद में फ्रांस के दूतावास के तौर पर इस्तेमाल हो रही एक हवेली को लेकर यहूदी परिवार ने फ्रांस पर 22 मिलियन डॉलर का मुकदमा किया है। परि ...और पढ़ें






1965 में फ्रांस ने इसे किराए पर लिया और दूतावास बना लिया। (फोटो सोर्स- X)


फ्रांस पर यहूदी परिवार ने 22 मिलियन डॉलर का मुकदमा किया।


बगदाद में दूतावास वाली हवेली पर कब्जे का आरोप है।


परिवार का दावा, फ्रांस ने यहूदी-विरोधी नीतियों का फायदा उठाया।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इराक की राजधानी बगदाद में एक शानदार हवेली अब फ्रांस के दूतावास के तौर पर इस्तेमाल हो रही है। इस हवेली में कभी एक यहूदी परिवार रहता था। लेकिन दशकों से किराया न चुकाने के आरोप में यह परिवार फ्रांस पर 22 मिलियन डॉलर का मुकदमा कर रहा है।


परिवार का कहना है कि फ्रांस ने इराकी सरकार की यहूदी-विरोधी नीतियों से फायदा उठाया और अपना कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया। यह केस सोमवार को पेरिस की अदालत में सुनवाई होनी है। यह कहानी 60 साल पुरानी है। 1935 में एज्रा और खेदौरी लावी नाम के दो भाइयों ने तिगरिस नदी के किनारे यह घर बनवाया था।


'खून-पसीने से बनाया था घर'

1965 में फ्रांस ने इसे किराए पर लिया और दूतावास बना लिया। लेकिन परिवार का आरोप है कि फ्रांस ने इराकी सरकार से सस्ता सौदा करके उनके साथ धोखा किया। दावा है कि ये यहूदियों की संपत्ति छीनने वाले कानूनों के तहत हुई थी।


मेयर लावी एज्रा के बेटे हैं और 86 साल के हैं। वह बताते हैं कि उनके पिता ने घर बचाने के लिए फ्रांस को किराए पर दिया था। मेयर कहते हैं, "मेरे पिता बहुत दुखी थे। यह उनका घर था, जिसे उन्होंने खून-पसीने से बनाया था और छीन लिया गया था।"


परिवार के वकील का कहना हैं कि फ्रांस का विदेशी देश की यहूदी-विरोधी नियमों को मानना असंवैधानिक है और अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशनों का उल्लंघन करता है। फ्रांस का बचाव है कि सारी जिम्मेदारी इराक की है, लेकिन इससे वह खुद उन भेदभावपूर्ण कानूनों पर निर्भर दिख रहा है।

यहूदियों का पलायन

1941 से 1951 के बीच करीब 1,30,000 यहूदी इराक छोड़कर भागे या निकाले गए। ये लोग 2,600 साल पहले से वहां रह रहे थे। लावी परिवार उन 9,00,000 यहूदियों में से एक था जो 1948 में इजराइल बनने के बाद अरब और मुस्लिम देशों से निकाले गए।


परिवार के वकील इस केस को होलोकॉस्ट पीड़ितों के दावों से जोड़ते हैं, जहां फ्रांस ने नाजी काल में चुराई गई संपत्ति लौटाई है। "फ्रांस ने इराक की एंटीसेमिटिक नीतियों का साथ देकर गलत किया," वकील जीन-पियरे मिग्नार्ड और इमरान घेरमी कहते हैं। फ्रांस कहता है कि नुकसान इराकी फैसलों से हुआ है।


फ्रांस कहता है कि 1950 के दशक से इराक के यहूदियों की संपत्ति छीनने वाले कानूनों की वजह से उन्हें इराकी अथॉरिटी से डील करनी पड़ी। वे परिवार से और सबूत मांग रहे हैं। परिवार की नई पीढ़ियां, जैसे फिलिप खज्जम (एज्रा के पोते, 66 साल), घर की कहानियां सुनकर बड़ी हुईं।

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