यूपी कैसे बन रहा है देश की डिफेंस कैपिटल? लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस बनने की कहानी

 यूपी कैसे बन रहा है देश की डिफेंस कैपिटल? लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस बनने की कहानी


उत्तर प्रदेश देश की डिफेंस कैपिटल बनने की राह पर है, जिसमें लखनऊ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का केंद्र बन रहा है। 2018 में शुरू हुई इस परियोजना के तहत ल ...और पढ़ें






लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की कहानी। फाइल फोटो


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश भारत की डिफेंस कैपिटल बनने की राह पर है। यूपी डिफेंस कॉरिडोर का हिस्सा है। वहीं, अब सूबे की राजधानी लखनऊ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के लिए जानी जाएगी।

लखनऊ में 200 एकड़ की जमीन पर फैली ब्रह्मोस एयरोस्पेस क्रूज मिसाइल का काम तेजी से फल फूल रहा है। मगर, क्या आप जानते हैं ब्रह्मोस बनाने के लिए लखनऊ को ही क्यों चुना गया है?
2018 में हुई शुरुआत

इस नींव साल 2018 में ही रखी गई थी, जब यूपी सरकार ने लखनऊ और कानपुर के बीच 200 एकड़ जमीन देने की पेशकश की थी। लखनऊ से पहले हैदराबाद, तिरुवनंतपुरम, पिलानी और नागपुर में ब्रह्मोस की यूनिट चल रही थी। मगर, नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों से लॉन्च करने के लिए ब्रह्मोस मिसाइल की मांग लगातार आसमान छूने लगी, जिनकी पूर्ति के लिए DRDO और रूसी कंपनी मशीनोस्ट्रोयेनिया ने लखनऊ में ब्रह्मोस की यूनिट स्थापित करने का फैसला किया।



क्यों पड़ी जरूरत?

घरेलू मांग के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ब्रह्मोस की मांग बढ़ रही है। फिलीपींस समेत इंडोनेशिया, वियतनाम, मलेशिया, अर्जेंटीना, मिस्त्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने ब्रह्मोस मिसाइल के ऑर्डर दिए हैं। 2025 तक ब्रह्मोस एयरोस्पेस को अगले 5 साल में 800 से ज्यादा मिसाइलें बनाने का ऑर्डर मिला है।


लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस

लखनऊ में 380 करोड़ रुपये की लागत से बना ब्रह्मोस एयरोस्पेस एडवांस सुविधाओं से लेस है। ब्रह्मोस फैमिली के सभी वेरिएंट यहां से तैयार किए जाएंगे। इनमें 290 किलोमीटर से लेकर 600 किलोमीटर तक की रेंज के मिसाइल शामिल हैं। 11 मई 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस यूनिट का उद्घाटन किया था। लखनऊ में स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस में एक बड़ा हॉल, बूस्टर उत्पादन ब्लॉक, वारहेड मिलान और क्लीनरूम के सामान जैसी कई सुविधाएं मौजूद हैं।

नदियों के नाम पर पड़ा नाम

भारतीय सेना के तीनों विंगो में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) का नाम भारत और रूस के नदियों के नाम को मिलाकर रखा गया है। भारत की ब्रह्मपुत्र (Brahmaputra River) और रूस की मोस्क्वा नदी (Moskva River) के नाम को मिलाकर इस मिसाइल का नाम रखा गया है। ब्रह्मोस भारत के DRDO और रूस के NPOM की एक संयुक्त यूनिट है।

ब्रह्मोस की खासियतब्रह्मोस ध्वनि की गति से लगभग तीन गुणा तेज रफ्तार से 290 से 400 किलोमीटर तक मारक क्षमता रखती है।
इसे जमीन, हवा, और समुद्र से लांच किया जा सकता है।
फायर एंड फारगेट सिद्धांत पर काम करती है।
दुश्मन के रडार से बचकर सटीक निशाना लगाने में इसका कोई मुकाबला नहीं है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस की कंपनी एनपीओएम की यह संयुक्त परियोजना है। इसमें भारत की 50.5 प्रतिशत और रूस की 49.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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