माउंट एवरेस्ट को भी लोगों ने नहीं छोड़ा, दूर तक दिखा कूड़े का अंबार; सोशल मीडिया पर फूटा लोगों का गुस्सा
माउंट एवरेस्ट पर कचरे का अंबार दिखने से सोशल मीडिया पर लोगों ने नाराजगी जताई है। पर्वतारोहियों द्वारा छोड़े गए कचरे की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसस ...और पढ़ें

माउंट एवरेस्ट पर दिखा कूड़े का अंबार। (फोटो- स्क्रीनग्रैब)
चीन और नेपाल की सीमा पर स्थित माउंट एवरेस्ट अपनी प्रकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से 8,849 मीटर के करीब है। एवरेस्ट पर चढ़ना दुनियाभर के साहसिक यात्रियों का सपना माना जाता है।
हर साल सैकड़ों की संख्या में पर्वतारोही इसकी चोटी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. हालांकि, इससे जुड़ा एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा छेड़ दी है।
दरअसल, माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालों की भीढ़ की एक बड़ी कीमत इस चोटी को चुकानी पड़ रही है। वहां पर पहुंचने वाले लगो बड़ी मात्रा में कचरा वहां छोड़ रहे है, जो बेहद नाजुक पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ हैरान करने वाला वीडियो
इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि माउंट एवरेस्ट बर्फ के बीच कचरे से ढका नजर आ रहा है। इस वीडियो ने लोगो के दिलों को तोड़ दिया है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि प्लास्टिक की पॉलीथीन, पुराने कपड़े, खाली ऑक्सीजन के सिलेंडर और फटे हुए टेंट बर्फ पर फैले नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि ये वीडियो साल 2024 का है, लेकिन हालात आज भी वैसे ही नाजुक बने हुए हैं। तस्वीरें साफ बता रही हैं कि इंसानी लापरवाही ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी को भी नहीं छोड़ा।
लोगों से की गई ये खास अपील
Everest Today नाम के एक एक्स अकाउंट से शेयर किए गए इस वीडियो के साथ लिखा गया कि कैंप-4 पर जमा हो रहा कचरा बेहद दुखद है। जहां इंसान ऑक्सीजन के सहारे जिंदा रहा है, वहीं पहाड़ खुद हमारे कचरे के नीचे दम तोड़ता नजर आ रहा है। पोस्ट में बताया गया है कि ऊंची चोटियों की दौड़ में हम उस पहाड़ के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूलते जा रहे हैं, जो हमारे सपनों को ढो रहा है।
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि सागरमाथा की रक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। प्रकृति के लिए आने वाली पीढ़ियों के लिए और उन मूल्यों के लिए जिनकी हम बात करते हैं। साथ ही इस पोस्ट के माध्यम से सख्त नियमों, साफ सुथरी चढ़ाई और ठोस कचरा प्रबंधन की मांग की गई।