ग्राहकों को राहत! Jio, Airtel और Vi जल्द पेश कर सकते हैं सस्ते रिचार्ज प्लान्स

 ग्राहकों को राहत! Jio, Airtel और Vi जल्द पेश कर सकते हैं सस्ते रिचार्ज प्लान्स


टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया टेलीकॉम ऑपरेटर्स के लिए नए नियम प्रपोज किए हैं। इसके तहत कंपनियों को सिर्फ वॉयस कॉल और SMS सर्विसेज पर फोकस्ड सस्त ...और पढ़ें





Jio, Airtel और Jio द्वारा सस्ते प्लान्स लाए जा सकते हैं।


टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने नए नियमों का प्रस्ताव रखा है, जिनके तहत टेलीकॉम ऑपरेटर्स को ऐसे ज्यादा किफायती मोबाइल प्लान पेश करने होंगे जो सिर्फ वॉयस कॉल और SMS सर्विसेज पर फोकस्ड हों। ये प्रपोजल 'टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन, 2026' में प्रस्तावित संशोधन का हिस्सा है। इसका मकसद कीमतों में पारदर्शिता लाना और कस्टमर्स को प्लान चुनने में ज्यादा लचीलापन देना है।


रिपोर्ट्स के मुताबिक, रेगुलेटर ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि, वैसे ऑपरेटर्स से पहले सिर्फ वॉइस और SMS वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर (STV) पेश करने को कहा गया था, लेकिन बाजार में उपलब्ध ऑप्शन्स अभी भी लिमिटेड हैं और डेटा बेनिफिट्स शामिल न होने के बावजूद अक्सर उनकी कीमतें बहुत ज्यादा होती हैं। TRAI ने कथित तौर पर पाया कि मौजूदा उपायों से अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं, जिसके कारण अब और भी सख्त गाइडलाइंस की जरूरत महसूस हुई है।

नए ड्राफ्ट के तहत, Vi, Jio और Airtel जैसी टेलीकॉम कंपनियों को हर उस वैलिडिटी पीरियड के लिए एक डेडिकेटेड 'सिर्फ वॉयस और SMS' प्लान पेश करना पड़ सकता है, जो अभी डेटा वाले बंडल पैक में उपलब्ध है। इसका मतलब है कि ग्राहकों को जल्द ही ऐसे ही ऑप्शन मिल सकेंगे और उन्हें उन इंटरनेट सर्विसेज के लिए पैसे देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा जिनकी उन्हें शायद जरूरत ही न हो।

TRAI का मानना है कि इस कदम से फेयर प्राइसिंग सुनिश्चित किया जा सकेगा। X (पहले Twitter) पर PIB India ने लिखा, 'रेगुलेटर का मानना है कि इस मुद्दे को एड्रेस करना जरूरी है। इसके लिए ये अनिवार्य किया जा रहा है कि वॉयस, SMS और डेटा वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर के तहत दी जाने वाली हर यूनिक वैलिडिटी पीरियड के लिए, सर्विस प्रोवाइर को एक ऐसा ही स्पेशल टैरिफ वाउचर भी पेश करना होगा जो सिर्फ वॉयस और SMS के लिए हो। ऐसे स्पेशल टैरिफ वाउचर की कीमत में, टैरिफ के अनुपात में ही काफी हद तक कमी की जाएगी।'


इसके अलावा, रेगुलेटर ने इन ड्राफ्ट रूल्स पर सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) से फीडबैक मांगे हैं; ये कंसल्टेशन प्रोसेस 28 अप्रैल तक चलेगी।

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